कहानी काशी की... Daleep kumar द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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कहानी काशी की...

काशी का घर हमारे घर से काफी दूर सामने ऊंची पहाड़ी पर है ।काशी सुंदर नौजवान तो था ही सुना था काशी बहुत ही समझदार भी था।साथ साथ वह एक मिलनसार व्यक्ति भी था।काशी दर्जी का काम करता था। वह एक अच्छा दर्जी था। मैंने उसे उस समय देखा था जब मैं प्राथमिक स्कूल में पढ़ता था। मैं और कुछ और बालक एक बार उसके गांव गए थे।हमें स्कूल में मिलने वाले स्कॉलरशिप के फॉर्म पर सरपंच की मोहर और हस्ताक्षर चाहिए थे।सरपंच उसी गांव से थे।काशी भी सरपंच के घर आया था।उनकी कुछ पार्टी चली हुई थी।तब मैंने देखा कि काशी एक भरे पूरे शरीर का मालिक था।गोरा चेहरा,घुघराले बाल,बड़ीबड़ी मस्तीभरी आंखे।वो एक दम कामदेव का रूप लग रहा था।उसने अच्छे कपड़े पहने थे।हम धूप में चल कर आए थे।हमें प्यास भी लगी थी।मैने देखा काशी के हाथ में एक गिलास था उसमें मुझे पानी लग रहा था।एक दो ओर भी गिलास वहां रखे थे।साथ में एक दो और लोग भी थे।तब काशी ने कहा कि पानी पिओगे?तब हम में से किसी ने गिलास की तरफ हाथ बढ़ाया।तब काशी ने वो गिलास उठाया और हंसते हुए कहा क्या ठंडा पानी पिओगे।दरअसल उस गिलास में शराब था।वो लोग शराब की पार्टी कर रहे थे।मुझे यह बहुत बुरा लगा।काशी देखने सुनने में जितना अच्छा था।उसकी आदत उतनी बुरी थी।मैने बाद में सुना कि वह बाजार की एक क्लोनी में अपना दर्जी का अच्छा काम करता था। जबकि ज्यादातर  लोग उस समय गांव में ही अपनी रोजी रोटी चलाते थे।बाद में न जाने क्यों उसने उधर कालोनी में काम छोड़ दिया। ओर किसी दूसरे गांव में दर्जी का काम करने लगा। उस में वह गया था वहां के लोग निहायत ही शराबी और जुआरी थे।वहां उसने मुंहबोली बहन के घर अपना दर्जी का काम शुरू कर दिया।वहां उसका दर्जी का काम चल पड़ा।जो उसकी मुंहबोली बहन थी वो उसकी किसी रिश्ते में बहन लगती थी उस बहन की लड़की भी उसके साथ टेलर का काम सीखने लगी।एक लड़की शायद उस गांव की भी थी जो उसके पास टेलर का काम सीखने लगी थी।काशी पहले से ही शादीशुदा और बाल बच्चे बाला आदमी था।मदिरापान तो पहले करता ही था पर हद तब हो गई जब उसने उसकी उस बहन की लड़की के साथ  ही इश्क लड़ना शुरू कर दिया।यह उस गांव की संगत का ही परिणाम था। वह लड़की भी उसे मामा नहीं बल्कि मास्टरजी कह कर बुलाती थी।उसकी म कहती खाना खाने आओ तो वो लड़की कहती मास्टरजी के साथ के खाऊंगी।वो चोरी चोरी एक दूसरे के इश्क में डूबे हुए थे।एक दूसरे के बिना कोई काम नहीं करते।लेकिन कहते है नाजायज रिश्ते कभी छुपते नहीं।उनके साथ वो दूसरी लड़की को शायद सब पता था।लेकिन किसी से बताती नहीं थी।काशी अपने घर भी कभी कभी जाता था।ज्यादातर समय वहीं रहता।सब कुछ चुपचाप चलता रहा।जब एक दिन पता चल की वह लड़की मां बनने वाली है। तो गांव हड़कंप मच गया। सबको पता लगा कि मामा और भांजी में नाजायज संबंध है।इतना समझदार और सुलझा हुआ आदमी ऐसा कर सकता है किसी को विश्वास नहीं हो रहा था।काशी के घर बालों ने उसे डांटा और फटकारा।फिर कुछ दिनों बाद काशी उस लड़की को भगा ले गया।उसने अपने बीबी बच्चों तक की परवाह नहीं की। बासना में अंधे उस काशी ने अपने पहले वाले बेदाग चरित्र को पूरी तरह से दागदार कर दिया।कुछ समय वे दोनों लापता रहे।फिर बाद में पता चला कि वो किसी सेब के बगीचे में माली के रूप में काम कर रहे है।अपना अच्छा दर्जी का बाजार बाला काम छोड़ कर अपने परिवार को छोड़ कर वो एक समझदार इंसान से क्या बन गया।उसने शराब और बासन के चक्र में अपनी वो सेहत भी खो दी जो उसके चेहरे पर कार चांद लगाती थी।किसी ने बताया कि वो शराब के लिए छोटी मोटी चोरी भी करने लगा.उसका वो चेहरा वो रूप भी दो एक सालों में कुरूप हो गया।सुना है कभी कभी अपने बीबी बच्चों के पास भी आया करता था।लेकिन उसके परिवार और गांव में वो इज्ज़त और रुतबा नहीं रहा।इस तरह के काशी हमारे समाज में बहुत है जो अपने बस बसाए संसार में खुद आग लगाते है।