हुक्म और हसरत -27 Diksha mis kahani द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हुक्म और हसरत -27

💗💗💗 हुक्म और हसरत 💗💗💗

एपिसोड 27 
#Arsia

"अब आगे…”


«"अगर सिया को बचाना है... तो अकेले पुराने मंदिर तक आइए।"»

अर्जुन की आँखें फोन की स्क्रीन पर टिकी थीं।

उसके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी।

बस एक अजीब-सी शांति थी...

वही शांति जो उसके अंदर तूफ़ान आने से पहले उतरती थी। 😠

विवेक ने बेचैनी से पूछा—

"क्या लिखा है?"

अर्जुन ने फोन उसकी तरफ़ बढ़ा दिया।

विवेक ने मैसेज पढ़ा और तुरंत बोला—

"ये साफ़ तौर पर जाल है।"

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"मुझे पता है।"

"फिर आप वहाँ अकेले जाने की सोच भी कैसे सकते हैं?"

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसकी नज़र सिया पर गई।

सिया बिस्तर पर बैठी थी।

उसके चेहरे पर डर साफ़ दिखाई दे रहा था।

"आप वहाँ नहीं जाएँगे..." सिया ने धीमी आवाज़ में कहा।

अर्जुन उसके पास गया।

"आप चिंता मत कीजिए।"

सिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"नहीं। इस बार मेरी बात मानिए।"

अर्जुन कुछ पल उसे देखता रहा।

सिया की आँखों में आँसू थे।

"मुझे नहीं पता वो कौन है... लेकिन मुझे डर लग रहा है।" 🥺

अर्जुन ने धीरे से उसकी उँगलियाँ अपने हाथ में लीं।

"आपको डरने की ज़रूरत नहीं है।"

"लेकिन—"

"क्योंकि मैं वापस आऊँगा।"

सिया ने उसकी आँखों में देखा।

"वादा?"

अर्जुन ने सिर हिलाया।

"वादा।" ❤️

फिर उसने विवेक की तरफ़ देखा।

उसकी आवाज़ तुरंत बदल गई।

"मेरी बात ध्यान से सुनो।"

विवेक समझ गया।

अर्जुन अकेला नहीं जाने वाला था।

बस सामने वाले को ऐसा लगना चाहिए था।

---

कुछ मिनट बाद...

अर्जुन अकेले कार लेकर महल से निकल गया।

दूर से यश उसकी गाड़ी का पीछा कर रहा था।

दूसरी तरफ़ वीर महल के सारे कैमरा और कम्युनिकेशन लाइन्स मॉनिटर कर रहा था।

राज ने सिक्योरिटी टीम को अलग-अलग लोकेशन्स पर तैनात कर दिया था।

विवेक ने धीरे से कहा—

"अब देखते हैं... शिकारी कौन है और शिकार कौन।"

---


पुराना मंदिर शहर से काफी दूर था।

चारों तरफ़ घना अँधेरा।

टूटी हुई सीढ़ियाँ...

पुरानी दीवारें...

और हवा में पेड़ों की सरसराहट।

अर्जुन ने कार रोकी।

वो बाहर निकला।

उसकी नज़र पूरे इलाके पर घूमी।

"मैं आ गया।"

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।

फिर मंदिर के अंदर से आवाज़ आई—

"मुझे पता था... आप आएँगे।"

अर्जुन धीरे-धीरे अंदर बढ़ा।

मंदिर के बीच में एक आदमी खड़ा था।

चेहरा कपड़े से ढका हुआ।

कलाई पर वही निशान।

अर्जुन की आँखें उस निशान पर टिक गईं।

"तो तुम हो..."

आदमी हल्का-सा हँसा।

"आपको बहुत जल्दी पहचान हो गई।"

अर्जुन की आवाज़ ठंडी थी।

"तुम्हें लगा सिया को नुकसान पहुँचाकर तुम मुझसे बच जाओगे?"

आदमी ने जवाब नहीं दिया।

अचानक पीछे से आवाज़ आई—

"अर्जुन!"

अर्जुन तुरंत पलटा।

वहाँ कोई नहीं था।

उसे समझते देर नहीं लगी।

आवाज़ रिकॉर्ड की गई थी।

"सिया यहाँ नहीं है।"

अर्जुन ने कहा।

आदमी चुप रहा।

अर्जुन एक कदम आगे बढ़ा।

"और तुम भी अकेले नहीं हो।"

अचानक मंदिर के दोनों तरफ़ से दो लोग बाहर आए।

अर्जुन ने उन्हें देखते ही अपनी मुट्ठियाँ कस लीं।

एक वही सिक्योरिटी गार्ड था...

जिसकी कलाई पर काली घड़ी थी।

दूसरा...

आकाश। 😈

अर्जुन की आँखें आकाश पर टिक गईं।

"तो आखिरकार..."

आकाश पीछे हट गया।

"मैंने कुछ नहीं किया!"

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"तुम्हें बोलने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हारे सारे जवाब मेरे पास हैं।"

तभी सामने खड़े आदमी ने अपना चेहरा ढकने वाला कपड़ा हटा दिया।

अर्जुन की आँखें फैल गईं।

राघव सिंह।

वही आदमी...

जिसे बारह साल पहले मरा हुआ घोषित किया गया था।

कुछ पल दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर राघव मुस्कुराया।

"बहुत समय लगा आपको यहाँ तक पहुँचने में।"

अर्जुन की आँखों में गुस्सा भर गया।

"तुम मर चुके थे।"

राघव हँसा।

"कागज़ों में।"

---

अर्जुन ने राघव की तरफ़ कदम बढ़ाया।

"सिया को क्यों निशाना बनाया?"

राघव के चेहरे पर मुस्कान गायब हो गई।

"क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि पुराने राज़ दफन हो चुके हैं।"

अर्जुन ने दाँत भींचे।

"मुझे पुराने राज़ से कोई फर्क नहीं पड़ता।"

उसकी आवाज़ भारी हो गई।

"तुमने सिया को नुकसान पहुँचाया। बस यही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती थी।" 😠🔥

राघव ने इशारा किया।

आकाश और गार्ड अर्जुन की तरफ़ बढ़े।

लेकिन तभी—

चारों तरफ़ से तेज़ रोशनी जल उठी। 🔦

विवेक की आवाज़ गूँजी—

"हथियार नीचे!"

मंदिर के चारों तरफ़ अर्जुन की टीम पहले से मौजूद थी।

यश ने आकाश को पकड़ लिया।

राज ने गार्ड को दबोच लिया।

वीर की आवाज़ कम्युनिकेशन पर आई—

"बॉस, पूरा इलाका सिक्योर है।"

राघव ने चारों तरफ़ देखा।

उसके चेहरे पर पहली बार घबराहट आई।

अर्जुन उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

"खेल खत्म।"

राघव ने कड़वाहट से हँसते हुए कहा—

"आपको लगता है मुझे पकड़कर सब खत्म हो जाएगा?"

अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

"मेरे लिए... हाँ।"

राघव चुप हो गया।

अर्जुन ने विवेक की तरफ़ देखा।

"इसे ले जाओ।"

विवेक और बाकी लोग राघव को लेकर बाहर जाने लगे।

आकाश को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

लेकिन जाते-जाते राघव ने पीछे मुड़कर अर्जुन को देखा।

"एक बात याद रखना..."

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"ये खेल मैंने शुरू नहीं किया था।"

अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।

राघव ने कहा—

"मैं सिर्फ़ उसका मोहरा था।"

अर्जुन कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

"जो भी था... अब उसके पास पहुँचने का रास्ता मेरे पास है।"

राघव को लेकर सब बाहर चले गए।

अर्जुन ने एक लंबी साँस ली।

उसने फोन निकाला।

स्क्रीन पर सिया का नाम था।

उसने कॉल किया।

सिया ने तुरंत फोन उठाया।

"आप ठीक हैं?"

अर्जुन की आवाज़ पहली बार थोड़ी नरम हुई।

"हाँ, राजकुमारी।"

सिया की आँखों में आँसू आ गए।

"आपने वादा निभाया..."

अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।

"मैंने कहा था ना... वापस आऊँगा।" ❤️

सिया ने कुछ नहीं कहा।

बस फोन पकड़े-पकड़े आँखें बंद कर लीं।

---

🌸 कुछ देर बाद — महल

अर्जुन वापस सिया के कमरे में पहुँचा।दरवाज़ा खुलते ही सिया की नज़र उस पर गई।वो कुछ पल उसे देखती रही।

फिर उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।

अर्जुन उसके पास आया।

"अब क्यों रो रही हैं?"

सिया ने धीमे से कहा—

"क्योंकि आप वापस आ गए।" 🥺❤️

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

उसके चेहरे पर पहली बार सुकून था।

"मैंने कहा था... मैं वापस आऊँगा।"

सिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

इस बार...

अर्जुन ने उसका हाथ नहीं छोड़ा।

कमरे के बाहर रानी माँ, रोशनी और काव्या खड़ी होकर दोनों को देख रही थीं।

रोशनी ने मुस्कुराकर धीरे से कहा—

"लगता है अब हमारी राजकुमारी ठीक हो जाएगी।" ❤️

रानी माँ ने संतोष की साँस ली।

महल में कई दिनों से छाया डर...

आज पहली बार थोड़ा कम हुआ था।

सिया सुरक्षित थी।

आकाश पकड़ा जा चुका था।

राघव का राज़ सामने आ चुका था।

और सबसे बड़ी बात...

अर्जुन और सिया के बीच खड़ी वो अनकही दूरी भी जैसे थोड़ी कम हो गई थी। 🌸

लेकिन अर्जुन के पास राघव की आख़िरी बात अब भी थी—

"मैं सिर्फ़ उसका मोहरा था..."

अर्जुन ने खिड़की के बाहर अँधेरे को देखा।

फिर उसने वो विचार अपने दिमाग से निकाल दिया।

आज के लिए... इतना ही काफी था।

कल से...

ज़िंदगी फिर सामान्य होगी। ❤️

जारी रहेगा... 💗✨
© Diksha 

प्रिय पाठकों,

यह भाग लिखने में मुझे बहुत समय, मेहनत और प्यार लगा है। यदि आपको यह अध्याय पसंद आया हो, तो कृपया इसे रेटिंग दें और अपने रिव्यू ज़रूर साझा करें।

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✨ मेरी रचनाएँ ✨

 1. अनुबंध (Anubandh) — ✅ Completed

 2. वो जो चुपके से देखा करता था — ✅ Completed

3. अनचाही मोहब्बत (Anchahi Mohabbat) — ✅ Completed

4. हुक्म और हसरत (Hukm Aur Hasarat) — ✍️ 
Running... 🌸