सौतेली माँ का साया (भाग 2) Nisha Choudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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सौतेली माँ का साया (भाग 2)

समाज के ताने और नई परीक्षा
लेखक: निशा चौधरी

अस्पताल से घर आने के बाद रोहन और सुनीता का रिश्ता पूरी तरह बदल चुका था। जिस घर में पहले सन्नाटा और नफरत की दीवार थी, अब वहाँ हँसी और प्यार की चहक गूँजने लगी थी। रोहन अब हर छोटी-बड़ी बात सुनीता से शेयर करता, उसके बनाए खाने की तारीफ करता और शाम को स्कूल से लौटते ही 'माँ' कहकर पूरे घर में ढूंढता।
सुनीता के लिए रोहन का एक बार 'माँ' कहना उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी दौलत बन गया था। राकेश जब शहर से वापस लौटे, तो अपने घर की यह बदली हुई तस्वीर देखकर उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्हें लगा कि उनका परिवार अब पूरा हो गया है।
लेकिन खुशियों के इस छोटे से आशियाने को ज़माने की नज़र लगते देर नहीं लगी।
रविवार का दिन था। राकेश के कुछ रिश्तेदार और पड़ोस की वही चाची घर मिलने आए। चाय-नाश्ते के दौरान सब बातें कर रहे थे, तभी रोहन दौड़ता हुआ आया और सुनीता की गोद में सिर रखकर बैठ गया।
यह देखकर चाची का चेहरा बिगड़ गया। उन्होंने चाय का कप मेज पर रखा और तंज कसते हुए बोलीं, "वाह सुनीता! इतनी जल्दी बच्चे को अपनी तरफ कर लिया? लेकिन राकेश, थोड़ा संभलकर रहना। सौतेली माँ चाहे कितना भी दुलार दिखा ले, कभी न कभी अपनी असलियत दिखा ही देती है। अब देखना, जब इसका अपना बच्चा होगा, तब इस रोहन को पूछना भी छोड़ देगी।"
चाची की यह बात रोहन के कानों में किसी गर्म पिघले हुए सीसे की तरह पड़ी। रोहन का शरीर सहम गया। उसके मन के पुराने डर ने एक बार फिर सिर उठाना शुरू कर दिया—'क्या सच में जब माँ का अपना बच्चा होगा, तो वो मुझे भूल जाएँगी?'
रोहन चुपचाप सुनीता की गोद से उठा और अपने कमरे में चला गया। सुनीता ने रिश्तेदारों के सामने खुद को सँभाला, लेकिन उसका दिल अंदर से टूट गया था। उसे समझ आ गया कि समाज आसानी से एक सौतेली माँ को 'सगी माँ' का दर्जा नहीं देने देगा।
उस रात रोहन ने खाना नहीं खाया और पेट दर्द का बहाना बनाकर सो गया। सुनीता समझ गई थी कि दिन की बातों ने रोहन के मन में फिर से शक का बीज बो दिया है।
सुनीता रोहन के कमरे में गई और उसके पास बैठ गई। उसने प्यार से रोहन के बालों में उंगलियाँ फेरीं, लेकिन रोहन ने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया।
"रोहन बेटा," सुनीता की आवाज थरथरा रही थी, "तुम सोचते हो न कि अगर मेरा अपना बच्चा आया तो मैं तुमसे प्यार नहीं करूंगी?"
रोहन खामोश रहा, लेकिन उसकी आँखों से आँसू बहकर तकिए में समाने लगे।
सुनीता ने रोहन का हाथ अपने सर पर रखा और भरे हुए गले से कहा, "आज मैं तुमसे एक वादा करती हूँ रोहन... ईश्वर ने मुझे माँ बनने का पहला सुख तुम्हारी वजह से दिया है। तुम ही मेरे पहले बच्चे हो। इस दुनिया में कोई ऐसा रिश्ता नहीं आएगा जो मुझे तुमसे दूर कर सके। अगर मुझे कभी चुनना पड़ा, तो मैं हमेशा अपने रोहन को चुनूँगी।"
सुनीता की आँखों में सच्चाई और बेइंतहा प्यार देखकर रोहन की सारी झिझक बह गई। उसने सुनीता को कसकर गले लगा लिया।
अगले दिन रोहन के स्कूल में एनुअल स्पोर्ट्स डे था। रोहन ने रेस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। रेस शुरू हुई, रोहन सबसे आगे भाग रहा था, लेकिन फिनिशिंग लाइन से ठीक पहले उसका पैर मुड़ गया और वह जोर से ज़मीन पर गिर पड़ा।
घुटने से खून निकलने लगा। दर्शकों में बैठे सभी लोग चुप हो गए। रोहन दर्द से रोने लगा और उठने की हिम्मत हार गया। तभी स्टेडियम में एक ज़ोरदार आवाज़ गूँजी—
"उठो रोहन! तुम हार नहीं सकते! मेरी तरफ देखो और दौड़ो!"
रोहन ने सिर उठाकर देखा। सुनीता स्टैंड्स से कूदकर बाउंड्री के पास आ खड़ी हुई थी और चिल्ला-चिल्लाकर रोहन का हौसला बढ़ा रही थी। उसके चेहरे पर वही तड़प थी, जो उस तूफानी रात को अस्पताल ले जाते वक्त थी।
सुनीता की आवाज़ सुनते ही रोहन के अंदर जैसे बिजली की सी दौड़ गई। उसने अपनी तकलीफ को भूलकर पूरी ताकत जुटाई, खड़ा हुआ और लंगड़ाते हुए दौड़ पड़ा। और अगले ही पल... रोहन ने फिनिशिंग रिबन को सबसे पहले पार कर लिया!
पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। रोहन को गोल्ड मेडल मिला।
जब स्टेज पर रोहन को ट्रॉफी दी जा रही थी, तो माइक पर रोहन से पूछा गया, "आप अपनी इस जीत का क्रेडिट किसे देना चाहेंगे?"
रोहन ने माइक हाथ में लिया, भीड़ में खड़ी सुनीता की तरफ इशारा किया और सीना चौड़ा करके बोला, "मेरी माँ को! जिन्होंने मुझे गिरकर संभालना और जीतना सिखाया।"
स्टेडियम में बैठी वही चाची और रिश्तेदार रोहन के ये शब्द सुनकर शर्म से पानी-पानी हो रहे थे। सुनीता की आँखों से खुशी के आँसू बह रहे थे। उसने साबित कर दिया था कि माँ का रिश्ता कोख से नहीं, कर्म और निस्वार्थ प्रेम से बनता है।
(क्या समाज की कड़वाहट यहीं खत्म हो जाएगी? या आगे चलकर जब राकेश और सुनीता के जीवन में नया मोड़ आएगा, तब इस रिश्ते की फिर से कोई नई परीक्षा होगी? जानिए अगले भाग में...)
प्यारे पाठकों!
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