घोर अमावस्या की वह काली रात, जहां आसमान चीख रहा था और बादलों की गर्जना से पूरी धरती कांप रही थी।
वही नगरों से मिलो दूर, एक भयानक, डरावने और वीरान वन में, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था. जहां दरख्तों की खौफनाक परछाइयां किसी भूतिया साये की तरह नाच रही थी।
ठीक! उसी काली रात के उसे खौफनाक पल में, जब तूफानी हवाएं चीखती हुई गरज रही थी और बिजली की कड़क से आसमान भी लाल पड़ गया था. इस वन की एक सदियों पुरानी रहस्यमी योगिनी ने एक विशालकाय तप से एक अमानवीय बालक को जन्म दिया।
वह कोई साधारण बालक नहीं था। उसके जन्म लेते ही चारों तरफ ऐसा गाढ़ा अंधियारा छा गया, जैसे खुद मौत ने इस दुनिया में कदम रख लिया हो।
उस महाप्रलय शैतान के जन्म लेते ही बिजलियां ऐसी कड़की, बादल ऐसे बरसे मानो की अब धरती का अंत निकट है।
लेकिन यह धरती का अंत होने का समय नहीं, बल्कि उस महाप्रलय और शैतानी ताकत की तबाही का आगाज का समय था।
उस महा- शैतानी ताकत का नाम था- "अंधकार"
उसकी योगिनी मां ने जब उस शैतानी बालक को देखा- तो उसकी अपनी रूह भी कांप उठी। वह मंजर इतना खौफनाक और भयानक था, की कोई आम इंसान देख ले तो पागल हो जाए।
जैसे- जैसे वह बड़ा होने लगा, उसके भीतर की शैतानी रूह ने पूरी दुनिया को अपनी आगोश में लेना शुरू कर दिया। उसकी एक झलक ही काफी थी, इंसानों की रूह कंपा देने के लिए।
उस योगिनी की महा- माया और काले तूफानों के बीच वह बालक किसी सामान्य शिशु की तरह धीरे- धीरे बड़ा नहीं! हुआ, बल्कि बिजली की एक कड़क के साथ ही वह पलक झपकते ही एक महा विशाल, खौफनाक और अमानवीय में आकर में बदल गया।
उसके जन्म लेते ही मानो इस धरती पर कयामत उतर आई थी।
वह शैतान, जिसके आगे सब नतमस्तक थे"
वह ऐसा महा- शैतान था, जिसके आगे ना कोई देवता टिक सका, ना कोई बड़ा से बड़ा योगी, ना तपस्वी,ना
राज- महाराजा और योद्धा उसके नाम से थर- थर कांपते थे।उसकी मां ने उसे सामान्य खून- मांस से नहीं, बल्कि ब्राह्मंड की सबसे भीषण और डरावनी ताकतों से सींचा था।
उसे वरदान था, कि उसके शरीर से अनगिनत शैतानी सिर बाहर निकलेंगे जो दूर- दूर तक तबाही मचाएंगे।
अब उस महा- शैतान का ठिकाना सिर्फ श्मशान, खंडहर और घोर अंधकार बन चुका था। वह रोशनी की हर किरण को लील जाता था।
जब वह चलता था, तो उसके शरीर के भीतर से चीखते हुए भयानक शैतान बाहर निकलकर पूरी बस्ती और वनों को नेस्तनाबूद कर देते थे।
उसकी कोई सीमा नहीं थी; वह जिस ओर भी बड़ा, बस मौत और राख का समंदर छोड़ता चला गया।इस दुनिया में उससे बड़ा और खूंखार शैतान कभी पैदा ही नहीं हुआ था।
उसकी तबाही के आगे कोई चुनौती देने वाला बचा ही नहीं था! वह किसी से युद्ध करने नही, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने निकला था।
बड़े-बड़े अभिमानी रिषि- मुनि, खुद को सबसे शक्तिशाली समझने वाले तांत्रिक और सदियों से राज करने वाले चक्रवर्ती सम्राट- सब उसके एक ही वार में मिट्टी में मिल गए।
वह जिस भी राज्य की तरफ कदम बढ़ाता, वहां इंसानों की बस्तियां नहीं, सिर्फ जलती हुई चिताएं और खामोश श्मशान नजर आते थे। उसके रास्ते में आते ही चमकते हुए महल अंधेरे तहखानों में बदल जाते थे। राजपाट देखते ही देखते राख बन जाते थे।
जब भी आसमान में अचानक गहरी काली घटाएं घिरती, बिना मौसम भयंकर बिजली कड़कती, नदियां अपनी मर्यादा तोड़कर सैलाब बनकर उफनतीं और आसमान के पक्षी भी डरकर दम तोड़ देते। तो पूरी दुनिया समझ जाती थी कि अब किसी की खैर नहीं है।
अब अंधकार आ गया है! अंधेरे का काल, महा- शैतान. अंधकार!
उसके गुजरने के बाद पीछे सिर्फ एक ही नाम गूंजता था- अंधियारा, सन्नाटा और सिर्फ" अंधकार"
(जब सोता था महा शैतान)
जब वह महा शैतान सदियों की गहरी नींद में सो जाता था। तब जाकर इस धरती पर कुछ समय के लिए चैन की सांस ली जाती थी।
बस्तियां फिर से बसने लगती थी, राजा- महाराजा नए महल खड़े कर लेते थे और लोगों को लगता था कि शायद अब कयामत टल गई।
लेकिन! वह चैन सिर्फ एक धोखा था"
क्योंकि" अंधकार" कोई नाम नहीं, बल्कि हजारों सिरों वाला वह महा शैतान था। जिसके दिल में किसी के लिए प्यार नहीं था। सिर्फ अपनी योगिनी मां के सिवाय।
जो उसकी मां कहती, वह वही करता था। इतनी तबाही मचाने के बाद उसे बस एक लंबी नींद की जरूरत होती थी।
(नींद का टूटना और महा प्रलय का आगाज")
जब वह सदियों की लंबी नींद के बाद उठने में देर करता, तो उसकी महायोगिनी मां खुद उसे जगाने आती थी। वही अमावस्या की काली रात, वही डरावनी बिजलियां, वही भयानक तूफान और काल- भैरवी की शक्तियों के बीच। वह अपनी मां के तंत्र- मंत्र और शैतानी आहट से जाग उठता था।
तंत्र- मंत्र कि उस तेज गूज के साथ ही" अंधकार" की वे बंद आंखें अचानक लाल अंगारे की तरह दहक उठीं।
हजारों सिरों वाले उस महा- राक्षस ने जब अपनी नींद टूटने का अहसास किया, तो उसकी हर एक जीभ पर प्रलय की हुंकार नाच उठी।
अगले भाग में देखिए: योगिनी मां की उन ग्यारह प्रलयकारी अंधकारिनियों का खौफनाक प्राकट्य और उनकी विनाशलीला।
यह महा गाथा आपको कैसी लगी, कमेंट करके जरूर बताएं और अगले भाग के लिए हमारे साथ बने रहे!
लेखिका कहानियों की लहर