पापा के मुंह से "हां बेटा मजबूरी थी" सुनते ही आयशा का दिल टूट गया।
वो भागकर हॉस्पिटल के कॉरिडोर में आ गई। पीछे अव्यांश खड़ा था। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि दर्द था।
"आयशा, सुनो तो..."
"मत आओ मेरे पास! तुमने सुना ना तुम्हारे पापा ने क्या कहा? मेरे पापा ने तुम्हारी कंपनी को धोखा दिया! अब तो तुम भी मुझे धोखेबाज कहोगे!"
अव्यांश ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया। "मैं किसी के कहने पर प्यार नहीं करता, अपने दिल से करता हूँ। मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे पापा ने क्या किया।"
तभी अव्यांश के पापा, राजवीर राठौर वहां आ गए।
"अव्यांश, चलो यहाँ से। इस लड़की के परिवार ने हमें बर्बाद किया था। 10 साल पहले इसी के बाप ने हमारे होटल के नक्शे चोरी करके दूसरी कंपनी को बेच दिए थे। मैं इसे अपनी बहू कभी नहीं बनाऊंगा।"
आयशा रोने लगी, "अंकल प्लीज, मेरे पापा ने ऐसा जानबूझकर नहीं किया होगा। वो बहुत ईमानदार हैं।"
राजवीर हंस पड़े, "ईमानदार? तुम्हारी माँ की कैंसर की दवाइयों के लिए पैसों की जरूरत थी, इसलिए तुम्हारे बाप ने मेरी दोस्ती का फायदा उठाया।"
आयशा सन्न रह गई। उसे याद आया, उसकी माँ को 10 साल पहले कैंसर हुआ था।
अव्यांश ने पापा का हाथ पकड़ा, "पापा बस कीजिए। उसकी माँ बीमार थी, इसलिए मजबूरी में किया। इसमें आयशा की क्या गलती?"
"गलती है! खून का असर होता है। बाप चोर तो बेटी भी..."
"पापा!" अव्यांश चिल्लाया। पहली बार उसने अपने पापा पर आवाज उठाई थी। "खबरदार जो आयशा के बारे में एक शब्द भी कहा तो।"
राजवीर गुस्से में वहाँ से चले गए। जाते जाते बोल गए, "अगर तू इस लड़की से मिला, तो मेरी जायदाद में से एक रुपया नहीं मिलेगा।"
अव्यांश ने आयशा की तरफ देखा। आयशा जमीन पर बैठी रो रही थी।
"आयशा, तुम्हारे पापा का ऑपरेशन हो गया है, वो खतरे से बाहर हैं। तुम चिंता मत करो।"
"क्यों कर रहे हो तुम मेरी मदद? तुम्हारे पापा तो मुझसे नफरत करते हैं।"
"क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, आयशा। पहली बार जब तुम्हें लाइब्रेरी में किताब पढ़ते देखा था, तभी से।"
आयशा ने आंसू पोंछे, "पर ये प्यार मुमकिन नहीं है, अव्यांश।"
"कौन रोकेगा?"
"तुम्हारी दुनिया और मेरी दुनिया में बहुत फर्क है। तुम होटल के मालिक के बेटे, मैं टीचर की बेटी।"
अव्यांश ने उसके आंसू पोंछे, "फर्क तो सिर्फ दिलों में होता है, और हमारा दिल एक ही बात कह रहा है।"
उस रात आयशा घर नहीं गई। वो हॉस्पिटल में ही पापा के पास रही। सुबह पापा को होश आया।
"आयशा, बेटा मुझे माफ कर दे। मैंने राजवीर को धोखा दिया था। तेरी माँ की कीमोथेरेपी के लिए 10 लाख चाहिए थे। मेरे पास कुछ नहीं था। राजवीर ने मुझे ऑफिस में कैश रखा दिखाया, मैंने चोरी नहीं की, पर मैंने नक्शे की फोटो खींचकर दूसरी कंपनी को 10 लाख में बेच दी। उस दिन से मैं खुद को माफ नहीं कर पाया।"
आयशा ने पापा के आंसू पोंछे, "पापा, आपने ये माँ के लिए किया, आप गलत नहीं हो।"
"नहीं बेटा, गलत तो गलत होता है।"
दूसरे दिन आयशा यूनिवर्सिटी गई। सब उसे ही देख रहे थे। सोनिया ने पूरी यूनिवर्सिटी में फैला दिया था कि आयशा ने अव्यांश को पैसों के लिए फंसाया है।
आयशा कैंटीन में अकेली बैठी थी, तभी सोनिया अपनी गैंग के साथ आई।
"अरे देखो, 5 लाख वाली गर्लफ्रेंड आई है। कितने में सौदा किया अव्यांश के साथ?"
आयशा कुछ नहीं बोली।
"बोलती क्यों नहीं? तेरे बाप ने तो 10 साल पहले भी यही किया था, अब तू भी वही कर रही है।"
तभी पीछे से एक आवाज आई, "सोनिया, अपनी जुबान बंद रख।"
अव्यांश था। उसने सोनिया का हाथ पकड़कर पीछे धकेला, "आयशा के बारे में एक शब्द भी बोला तो तुम्हारे पापा को तुम्हारी सारी करतूतें बता दूंगा। क्लब में क्या करती हो, सब पता है मुझे।"
सोनिया डरकर भाग गई।
अव्यांश आयशा के सामने बैठा, "तुमने बताया क्यों नहीं कोई तुम्हें परेशान कर रहा है?"
"मैं नहीं चाहती तुम्हारी वजह से मेरी और बदनामी हो।"
"बदनामी? तुम मेरी हो आयशा, और लखनऊ में किसी की हिम्मत नहीं जो मेरी चीज को हाथ भी लगाए।"
उसने आयशा का हाथ सबके सामने पकड़ लिया और कैंटीन से बाहर ले गया।
"चलो मेरे साथ।"
"कहाँ?"
"मेरी दुनिया में।"
वो उसे अपनी Thar में बैठाकर अपने होटल ले गया। सबसे टॉप फ्लोर पर ले गया, जहाँ से पूरा लखनऊ दिखता था।
"देखो आयशा, ये सब मेरा है। पर ये सब फीका है तुम्हारे बिना। मैं अपने पापा की जायदाद छोड़ने को तैयार हूँ, पर तुम्हें नहीं।"
आयशा की आँखों में आंसू आ गए, "पर मैं तुम्हें गरीब नहीं देख सकती।"
"तुम्हारे साथ रहकर मैं सबसे अमीर रहूंगा।"
तभी आयशा का फोन बजा। हॉस्पिटल से कॉल था, "मैडम, आपके पापा फिर से बेहोश हो गए हैं, जल्दी आइए।"
दोनों भागकर हॉस्पिटल गए। डॉक्टर ने कहा, "इनके दिल में फिर से प्रॉब्लम है, इन्हें स्ट्रेस मत दीजिए।"
पापा ने आयशा का हाथ पकड़ा, "बेटा, उस राजवीर के बेटे से दूर रह। वो लोग हमें बर्बाद कर देंगे। मैंने एक बार गलती की, मैं नहीं चाहता मेरी बेटी उसकी सजा भुगते।"
आयशा ने पापा को गले लगा लिया।
बाहर अव्यांश खड़ा सुन रहा था।
रात को अव्यांश अपने पापा के पास गया, "पापा, मुझे आयशा के पापा से मिलना है।"
"क्यों?"
"मैं उनका कर्ज उतारना चाहता हूँ।"
अव्यांश सीधा आयशा के पापा के वार्ड में गया। आयशा वहाँ नहीं थी, चाय लेने गई थी।
"अंकल, मैं अव्यांश हूँ।"
"मैं जानता हूँ तुम कौन हो। यहाँ क्यों आए हो?"
"अंकल, 10 साल पहले आपने जो 10 लाख लिए थे, मैं आपको 20 लाख लौटाना चाहता हूँ। ब्याज के साथ। और आपसे माफी भी मांगना चाहता हूँ, मेरे पापा ने आपको जो कहा।"
आयशा के पापा हैरान रह गए, "तुम... तुम 20 लाख क्यों दोगे?"
"क्योंकि मैं आपकी बेटी से प्यार करता हूँ। और मैं चाहता हूँ हमारा रिश्ता कर्ज से नहीं, प्यार से शुरू हो।"
तभी आयशा दरवाजे पर आ गई। उसने सब सुन लिया था।
उसकी आँखों में आंसू थे।
अव्यांश ने पीछे मुड़कर देखा, "आयशा..."
आयशा भागकर आई और पहली बार उसने अव्यांश को खुद से गले लगाया।
"तुम पागल हो क्या? 20 लाख..."
"तुम्हारे लिए सब कुछ।"
पर कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई। दूसरे दिन राजवीर राठौर ने एक चाल चली। उन्होंने आयशा के पापा को स्कूल से निकलवा दिया। प्रिंसिपल को फोन करके कहा कि एक चोर के हाथ में बच्चों का भविष्य नहीं दे सकते।
आयशा के पापा घर आए तो उनका चेहरा उतरा हुआ था।
"क्या हुआ पापा?"
"मुझे स्कूल से निकाल दिया, बेटा। राजवीर ने..."
आयशा का खून खौल गया। वो सीधा अव्यांश के घर गई। पहली बार वो इतनी बड़ी कोठी में गई थी।
"तुम्हारे पापा ने मेरे पापा को नौकरी से निकलवाया! यही है तुम्हारा प्यार?"
अव्यांश हैरान था, "क्या? मुझे नहीं पता था। मैं अभी पापा से बात करता हूँ।"
"नहीं, मुझे तुम्हारी भीख नहीं चाहिए।"
वो रोते हुए वहाँ से जाने लगी, तभी अव्यांश ने उसे दीवार से लगा दिया।
"भीख नहीं, हक है तुम्हारा। और सुनो, आज से तुम्हारे पापा कहीं नौकरी नहीं करेंगे। वो मेरे नए स्कूल में प्रिंसिपल बनेंगे। मैं लखनऊ में गरीब बच्चों के लिए एक नया स्कूल खोल रहा हूँ, और उसके प्रिंसिपल तुम्हारे पापा होंगे।"
आयशा हैरान रह गई।
"तुमने... स्कूल..."
"हाँ, तुम्हारे पापा के नाम पर। 'आयशा पब्लिक स्कूल'।"
आयशा फूट-फूटकर रो पड़ी। इस बार खुशी के आंसू थे।
अव्यांश ने उसके माथे को चूमा, "अब तो मानोगी मेरी गर्लफ्रेंड बनना?"
आयशा शर्माते हुए बोली, "सोचना पड़ेगा।"
"सोच लो, पर जवाब हां ही होना चाहिए, वरना मैं तुम्हें किडनैप कर लूंगा।"
दोनों हंस पड़े।
पर दूर खिड़की से राजवीर और सोनिया ये सब देख रहे थे। सोनिया ने कहा, "अंकल, अगर ये शादी हो गई तो आपकी बेइज्जती हो जाएगी।"
राजवीर ने कहा, "शादी तो कभी नहीं होगी। मैं ऐसा खेलूंगा कि आयशा खुद अव्यांश को छोड़ देगी।"
आगे क्या होगा? क्या राजवीर अपनी चाल में कामयाब होगा? क्या आयशा और अव्यांश का प्यार टूट जाएगा?
जानने के लिए इंतजार कीजिए Part 3 का।
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