दौड़ में भागना है या अपनी दौड़ खुद बनानी है? rakshita pal द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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दौड़ में भागना है या अपनी दौड़ खुद बनानी है?

************"सुरक्षित रास्ता आसान लगता है, पर वही सबसे लंबी दौड़ है।"

" हम पैसे के लिए काम करते हैं, अमीर सोच पैसे से काम करवाती है।"


Rich Dad Poor Dad — दौड़ में भागना है या अपनी दौड़ खुद बनानी है?

👩 Review By: rakshita pal

मेरे घर में हमेशा एक ही बात सिखाई गई - अच्छे से पढ़ो, अच्छी नौकरी लो, और सुरक्षित जीवन जियो। मेरे पिता यही कहते थे कि यही गरीब पिता की सोच नहीं, बल्कि एक सुरक्षित सोच है। ऐसा सुरक्षित रास्ता जो तुम्हरी जीवन को आसान करेंगे ओर बेहतर जी पाओगे मेरी भी ऐसी ही सोच थी जब तक मेने एक पुस्तक नहीं पड़ा था फिर मुझे समझ आया कि पैसे कमाने से ज्यादा पैसे को जानना जरूरी है   उस किताब में दो पिताओं की बात थी - एक जो नौकरी को सुरक्षा मानता था और दूसरा जो बिजनेस और निवेश को स्वतंत्रता मानता था। तब मुझे समझ आया कि हम सब एक दौड़ में भाग रहे हैं। जो एक समय आने पर ही खत्म होगी उससे पहले हम चाहते हैं फिर भी नहीं छोड़ा सकते हैं यदि हम छोड़ दे तो जीवन की दोड में पीछे हो जायेगा।  हम सब सुबह उठते हैं, काम करते हैं, सैलरी आती है, खर्च हो जाती है, और फिर अगले महीने का इंतजार। इस किताब में इसे ही 'रैट रेस' कहा गया था - चूहे की दौड़। हम भागते रहते हैं पर पहुंचते कहीं नहीं। इसलिए भागना छोड़ कर एक ऐसा रास्ता बनाये की दूरी कम कर मजिलं जल्दी पाया जाये जिस दोड में भागीदारी लेने से अच्छा इस दोड अपने लिए लोगों को काम पर लगा कर हम एक जगह बेठे आराम से भी देख सकते हैं  
दौड़ में भागने के बजाय, दौड़ के नियमों को समझो।
मतलब दोड का हिस्सा नहीं मालिक बनो। 

उस किताब से मैंने 3 बातें सीखीं जो मेरे काम आईं:

1. अपने लिए काम करना सीखो: हम दूसरों के लिए नौकरी करते हैं, पर अपने सपनों के लिए कितना समय देते हैं? मैंने लिखना शुरू किया। Matrubharti पर मेरी कहानियाँ जैसे 'काल गढ़ की तारा' और 'साहित्य का सर्कस' ही मेरे लिए छोटी-छोटी संपत्ति हैं। ये मेरे सोते हुए भी मेरे लिए काम करेंगी।

2. पैसे को काम पर लगाओ: गरीब और मध्यम वर्ग पैसे के लिए काम करते हैं, अमीर लोग पैसे से अपने लिए काम करवाते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि करोड़ों लगाओ, मतलब है कि जो भी कमाओ उसका एक हिस्सा ऐसी जगह लगाओ जो कल आपको वापस दे। मेरे लिए वो है किताबें और लिखने का समय है या कोई जगह खरीदो या अपना बिजनेस सूरू करो नहीं तो कम्पनी या फंड में निवेश करो जिस से कुछ समय में ज्यादा भायदा  हो। 

3. डर और लालच से बाहर आओ: हम नौकरी इस डर से नहीं छोड़ते कि पैसा खत्म हो जाएगा, और लालच में ज्यादा खर्च करते हैं। अगर इस डर को समझ लिया तो दौड़ धीमी हो जाती है। बल्कि हमे पैसे का सतूंलन बनना आना चाहिए। ये डर खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है

" डिग्री आपको नौकरी दिलाती है, फाइनेंशियल समझ आपको नौकरी से चॉइस देती है।"

"डर हमें नौकरी में रखता है, लालच हमें खर्चे में फंसाता है।"

आज मैं ये नहीं कहती कि नौकरी बुरी है। नौकरी जरूरी है। पर नौकरी के साथ-साथ अपने दिमाग को भी मालिक बनाना जरूरी है। दौड़ में सिर्फ भागना नहीं है, कभी-कभी रुक कर सोचना भी है कि क्या मैं दौड़ का मालिक बन सकती हूँ?

यही मेरी सीख है। ये किसी किताब की समरी नहीं, मेरे अपने जीवन में आया बदलाव है।
एक तरफ उनके “Poor Dad” थे, जो education, नौकरी और financial security को ज्यादा महत्व देते थे।
दूसरी तरफ “Rich Dad” थे, जो उन्हें यह समझाने की कोशिश करते थे कि सिर्फ नौकरी पर depend रहने के बजाय financial knowledge भी हासिल करनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि पैसा कैसे काम करता है।

 हमें यह देखना चाहिए कि हमारी financial decisions हमें आगे value या income create करने में मदद कर रही हैं या सिर्फ खर्च बढ़ा रही हैं। या हमे गाहाठा  हो रहा है
दूसरी सीख थी Financial Education।
हम पढ़ाई करते हैं, degree लेते हैं और नौकरी के लिए skills सीखते हैं। लेकिन पैसे को manage करना, income और expenses को समझना और financial decisions लेना भी सीखना जरूरी है।
और मेरी सबसे पसंदीदा सीख है—Rat Race।

" रैट रेस में सब भाग रहे हैं, पर किसी ने पूछा ही नहीं भागना कहाँ है???? "

***** एक विचार मुझे बहुत पसन्द
*"स्वतंत्रता मतलब करोड़पति नहीं, अपने फैसले खुद समझना है "
**"सवाल ये है कि ये दौड़ आपने चुनी है या किसी और ने आपके लिए तय की है?  दौड़ में भागने के बजाय, दौड़ के नियमों को समझो।"
मतलब यह नहीं कि मेहनत करना छोड़ दो।
बल्कि यह सोचो कि मेहनत के साथ knowledge, skills, planning और सही financial decisions को कैसे जोड़ा जा सकता है।
मुझे किताब की हर बात से 100% सहमत होना जरूरी नहीं लगा। कुछ बातें practical life में हर व्यक्ति के लिए अलग तरह से काम कर सकती हैं। लेकिन सोचने के लिए इस किताब ने मुझे बहुत कुछ दिया।
और शायद यही किसी अच्छी किताब की खूबसूरती है।
वह आपको हर बात मानने के लिए मजबूर नहीं करती।
वह आपको सवाल पूछना सिखाती है।
एक लड़की के तौर पर मुझे इसका यही हिस्सा सबसे ज्यादा useful लगा कि financial independence सिर्फ ज्यादा पैसा कमाने का नाम नहीं है। अपने पैसों और अपने decisions को समझना भी जरूरी है।
मेरे लिए Rich Dad Poor Dad की सबसे बड़ी सीख है—
मेहनत करो, लेकिन सिर्फ मेहनत पर मत रुको।
सीखो, समझो और अपने लिए बेहतर रास्ता बनाने की कोशिश करो।
क्योंकि शायद असली सवाल यह नहीं है कि हम जिंदगी की दौड़ में कितनी तेज दौड़ रहे हैं।
असली सवाल यह है—
क्या हम वही दौड़ दौड़ रहे हैं जो किसी और ने हमारे लिए तय की है, या धीरे-धीरे अपनी दिशा खुद चुनना सीख रहे हैं?

"सैलरी आना खुशी नहीं है, सैलरी का बचना सोच है।"

" मेहनती होना काफी नहीं है, मेहनत को सही दिशा देना असली कमाई है।" **