वृंदावन में यमुना किनारे मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा को बचपन से ही राधा रानी से बहुत प्रेम था। वह हर दिन सुबह उठकर यमुना में स्नान करती और फिर राधा-कृष्ण के मंदिर में फूलों की माला बनाकर ले जाती थी। उसकी बनाई हुई माला सबसे सुंदर होती थी, क्योंकि वह उसमें अपना पूरा प्रेम डाल देती थी।
मीरा बहुत गरीब थी, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। उसके पास धन नहीं था, पर भक्ति बहुत थी। एक बार वृंदावन में बहुत बड़ा उत्सव होने वाला था। दूर-दूर से लोग राधा अष्टमी के उत्सव में आ रहे थे। पूरे मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जा रहा था। पुजारी जी ने घोषणा की कि जो सबसे सुंदर माला लाएगा, उसे राधा रानी की विशेष चुनरी प्रसाद में दी जाएगी।
मीरा ने भी सोचा कि वह राधा रानी के लिए सबसे बड़ी और सुंदर माला बनाएगी। उसने कई दिनों तक पैसे बचाकर सुंदर-सुंदर फूलों के बीज खरीदे और अपने छोटे से आँगन में फूल उगाए। वह दिन-रात उनकी देखभाल करती। आखिरकार फूलों में कलियाँ आ गईं।
उत्सव से एक दिन पहले जब उसके फूल खिलने वाले थे, तभी रात में बहुत तेज तूफान और बारिश आई। सारे फूल टूटकर बिखर गए और जमीन पर गिर गए। सुबह जब मीरा ने यह देखा तो वह बहुत रोई। उसके पास अब न तो फूल थे और न ही पैसे कि वह बाजार से नए फूल खरीद सके। उसे लगा कि अब वह राधा रानी के लिए माला नहीं बना पाएगी और उसे चुनरी नहीं मिलेगी।
वह रोते-रोते यमुना किनारे बैठी थी। तभी एक बहुत ही सुंदर स्त्री उसके पास आई। उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, माथे पर बिंदी थी और उसकी आँखों में बहुत प्रेम और ममता थी। उसने मीरा से बहुत प्यार से पूछा, बेटी तुम क्यों रो रही हो?
मीरा ने रोते हुए सारी बात बताई। वह स्त्री मुस्कुराई और बोली, तुम चिंता मत करो बेटी। सच्चे मन से बनाया गया एक फूल भी हजार फूलों के बराबर होता है। भगवान भाव देखते हैं, फूल नहीं। उसने मीरा को एक छोटी सी टोकरी दी और कहा, इसमें देखो।
मीरा ने टोकरी में देखा तो उसमें ताजे और बहुत ही सुगंधित फूल भरे हुए थे, जैसे अभी-अभी तोड़े हों। उन फूलों की खुशबू पूरे वातावरण में फैल गई। मीरा बहुत खुश हुई। उसने तुरंत उन फूलों से एक बहुत ही सुंदर और बड़ी माला बनाई और दौड़कर मंदिर गई।
जब उसने वह माला राधा रानी को पहनाई, तो मंदिर के पुजारी और सभी लोग हैरान रह गए। वह माला अपने आप चमक रही थी और पूरे मंदिर में उसकी दिव्य खुशबू फैल गई थी, जो पहले कभी किसी ने नहीं सूंघी थी। पुजारी ने कहा, यह कोई साधारण माला नहीं है, यह तो स्वयं राधा रानी का चमत्कार है।
उत्सव के बाद जब मीरा यमुना किनारे उस स्त्री को धन्यवाद देने गई, तो वहाँ कोई नहीं था। तभी उसे एहसास हुआ कि वह स्त्री स्वयं राधा रानी थीं, जो उसकी मदद करने और उसकी भक्ति की लाज रखने आई थीं। उस दिन के बाद मीरा की भक्ति और भी बढ़ गई।
भगवान अपने सच्चे भक्त की परीक्षा लेते हैं, लेकिन उसका साथ कभी नहीं छोड़ते।