दो धड़कनें, एक वादा - 1 priyanshi bhuva द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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दो धड़कनें, एक वादा - 1

एक भाई का प्यार... एक लड़की का समर्पण... और एक ऐसा राज़, जो तीन जिंदगियों को बदलने वाला था।

Preview-आखिरी खत

रात के 2 बजकर 17 मिनट हो चुके थे।

पूरा घर अंधेरे में डूबा था।

लेकिन कमरे के कोने में रखी एक छोटी-सी मेज पर अब भी एक दीपक जल रहा था।

उस दीपक के सामने प्रियांक बैठा था।

उसकी आँखें लाल थीं।

हाथ में एक पुराना खत था...

और सामने दीवार पर लगी एक तस्वीर।

तस्वीर में एक मुस्कुराता हुआ चेहरा था।

हार्दिक।

प्रियांक का बड़ा भाई।

उसने काँपते हाथों से खत खोला।

कागज पर सिर्फ चार लाइनें लिखी थीं—

“प्रियांक,

अगर तू ये खत पढ़ रहा है, तो समझ लेना मैं तुझसे बहुत दूर जा चुका हूँ।

लेकिन जाने से पहले मुझे तुझसे एक वादा चाहिए...

यज्ञी का हाथ कभी मत छोड़ना।”

प्रियांक की आँखों से आँसू गिरकर खत पर जा गिरे।

उसने तस्वीर की तरफ देखा।

“भैया... आपने मुझे ये वादा क्यों दिया?”

कमरे में कोई जवाब नहीं था।

सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।

तभी पीछे से एक लड़की की आवाज आई—

“क्योंकि वो जानते थे... तुम्हारे बिना मैं भी अधूरी हूँ।”

प्रियांक ने पीछे मुड़कर देखा।

दरवाजे पर यज्ञी खड़ी थी।

उसकी आँखों में भी आँसू थे।

हाथ में वही लाल दुपट्टा था, जो हार्दिक ने उसकी शादी के दिन उसे दिया था।

यज्ञी धीरे-धीरे उसके पास आई।

उसने खत को देखा।

फिर हार्दिक की तस्वीर की तरफ देखकर बोली—

“उन्होंने हमें मिलाया था... और जाते-जाते हमें एक-दूसरे की जिम्मेदारी दे गए।”

प्रियांक ने आँखें बंद कर लीं।

उस रात उसे पहली बार समझ आया—

कुछ लोग हमारी जिंदगी में सिर्फ प्यार देने नहीं आते।

वे हमारी पूरी जिंदगी बदलने आते हैं।

और हार्दिक...

उनमें से एक था।

लेकिन सवाल यह था—

आखिर हार्दिक की मौत हुई कैसे?

यज्ञी उसके लिए इतनी खास क्यों थी?

और सबसे बड़ा सवाल...

क्या प्रियांक और यज्ञी का प्यार उस राज़ को झेल पाएगा, जिसकी वजह से कभी उनके दोनों परिवार बर्बाद हो गए थे?

कहानी कुछ साल पीछे जाती है..

1 – दो भाई

शहर के एक पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा घर था।

दो कमरे, एक छोटी-सी रसोई, सामने छोटा-सा आँगन और आँगन के बीचों-बीच लगा एक पुराना नीम का पेड़।

घर छोटा था, लेकिन उस घर में रहने वाले दो भाइयों की दुनिया बहुत बड़ी थी।

हार्दिक और प्रियांक।

दोनों भाई एक-दूसरे के बिना अधूरे थे।

माता-पिता को गुजरे कई साल हो चुके थे।

जब उनके माता-पिता की मौत हुई थी, तब प्रियांक बहुत छोटा था।

उसे अपनी माँ का चेहरा तक ठीक से याद नहीं था।

लेकिन हार्दिक को सब याद था।

माँ की आवाज...

पिता की डाँट...

घर में साथ बैठकर खाना...

और वह आखिरी रात...

जिसके बारे में हार्दिक ने कभी प्रियांक को कुछ नहीं बताया।

शायद इसी वजह से उसने अपने छोटे भाई को कभी माँ-बाप की कमी महसूस नहीं होने दी।

वह उसका भाई भी था...

पिता भी...

माँ भी...

और सबसे अच्छा दोस्त भी।

सुबह प्रियांक के उठने से पहले हार्दिक नाश्ता तैयार कर देता।

“उठ जा प्रियांक, कॉलेज के लिए देर हो जाएगी।”

अंदर से आवाज आती—

“बस पाँच मिनट और भैया।”

हार्दिक हँसता।

“तेरे ये पाँच मिनट रोज आधा घंटा होते हैं।”

वह कमरे में जाता और तकिया खींच देता।

“उठ!”

प्रियांक चिढ़कर कहता—

“भैया! सोने भी नहीं देते।”

हार्दिक हँसते हुए कहता—

“पढ़ने भी नहीं देते, सोने भी नहीं देते... मैं करूँ तो करूँ क्या?”

प्रियांक मुस्कुराता।

“शादी कर लो।”

हार्दिक कुछ पल उसे देखता।

फिर हँस देता।

“पहले तुझे आदमी बना लूँ, फिर अपनी सोचूँगा।”

प्रियांक मुस्कुराकर बोला—

“फिर मेरी शादी कौन करवाएगा?”

हार्दिक ने कहा—

“मैं।”

“और आपकी?”

हार्दिक कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

“मेरी शादी की चिंता छोड़। पहले तू अपनी जिंदगी बना।”

प्रियांक ने उसे गौर से देखा।

“भैया, आपने अपनी जिंदगी के बारे में कभी सोचा ही नहीं।”

हार्दिक मुस्कुराया।

“सोचा है।”

“क्या?”

हार्दिक ने उसके सिर पर हाथ रखा।

“तेरी जिंदगी।”

प्रियांक हँस पड़ा।

“मैं कोई जिंदगी हूँ?”

हार्दिक ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

“मेरे लिए है।”

प्रियांक ने उस बात को मजाक समझ लिया।

लेकिन हार्दिक मजाक नहीं कर रहा था।

उसकी पूरी जिंदगी...

बस प्रियांक थी।

 2 – एक लड़की

कॉलेज की लाइब्रेरी में एक दिन प्रियांक एक किताब लेने गया।

उसने जैसे ही किताब उठाई, उसी समय किसी लड़की ने भी उसे पकड़ लिया।

प्रियांक ने सामने देखा।

एक लड़की खड़ी थी।

बाल खुले थे।

चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी।

और आँखों में अजीब-सा आत्मविश्वास।

प्रियांक ने कहा—

“मैं पहले आया था।”

लड़की ने कहा—

“लेकिन किताब मैंने पहले पकड़ ली।”

“तो?”

“तो किताब मेरी।”

प्रियांक ने उसे देखा।

“आप हमेशा इतनी जिद्दी रहती हैं?”

लड़की मुस्कुराई।

“सही चीज के लिए जिद करना गलत नहीं होता।”

“और अगर मैं ये किताब नहीं छोड़ूँ?”

“तो मैं भी नहीं छोड़ूँगी।”

दोनों कुछ सेकंड तक किताब पकड़े खड़े रहे।

फिर लाइब्रेरियन ने दूर से आवाज लगाई—

“किताब पढ़नी है या खींचातानी करनी है?”

दोनों ने एक साथ किताब छोड़ दी।

लड़की हँस पड़ी।

प्रियांक भी मुस्कुरा दिया।

वह लड़की किताब लेकर चली गई।

प्रियांक कुछ देर तक उसे जाते हुए देखता रहा।

तभी पीछे से उसका दोस्त आया।

“क्या हुआ?”

प्रियांक ने कहा—

“कुछ नहीं।”

दोस्त हँस पड़ा।

“पहली नजर में पसंद आ गई?”

प्रियांक ने तुरंत कहा—

“बकवास मत कर।”

दोस्त बोला—

“नाम तो पूछ लेता।”

प्रियांक ने पीछे मुड़कर देखा।

लड़की जा चुकी थी।

उसे उसका नाम नहीं पता था।

लेकिन अगले दिन वही लड़की कॉलेज के गेट पर खड़ी थी।

उसने प्रियांक को देखते ही पूछा—

“कल वाली किताब चाहिए?”

प्रियांक मुस्कुराया।

“आपको मेरा नाम पता है?”

लड़की ने कहा—

“हाँ।”

“कैसे?”

“तुम्हारे दोस्त ने बता दिया था।”

प्रियांक हँस पड़ा।

“और आपका नाम?”

लड़की ने मुस्कुराकर कहा—

“यज्ञी।”

प्रियांक ने पहली बार उसका नाम सुना।

यज्ञी।

एक छोटा-सा नाम...

लेकिन आने वाले समय में यही नाम उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बनने वाला था।

 3 – दोस्ती से प्यार तक

यज्ञी और प्रियांक की दोस्ती धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

पहले सिर्फ कॉलेज की बातें होती थीं।

फिर पढ़ाई की।

फिर दोस्तों की।

फिर घर की।

और पता ही नहीं चला कि कब उनकी बातें जिंदगी तक पहुँच गईं।

एक रात दोनों फोन पर बात कर रहे थे।

घड़ी में बारह बज चुके थे।

यज्ञी ने पूछा—

“तुम्हारे भैया सो गए?”

“हाँ।”

“तुम्हें डाँटते नहीं?”

प्रियांक हँस पड़ा।

“बहुत डाँटते हैं।”

“फिर भी तुम उनसे इतना प्यार करते हो?”

प्रियांक कुछ देर चुप रहा।

फिर बोला—

“क्योंकि उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया है।”

“जैसे?”

प्रियांक की आवाज धीमी हो गई।

“मेरे माता-पिता के जाने के बाद मैं बहुत छोटा था।”

यज्ञी चुप हो गई।

प्रियांक आगे बोला—

“उस समय मुझे कुछ समझ नहीं आता था। लेकिन भैया ने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया।”

“उन्होंने तुम्हारे लिए क्या किया?”

“अपनी पढ़ाई छोड़ दी।”

यज्ञी चौंक गई।

“सच?”

“हाँ।”

“उन्होंने शादी नहीं की?”

“नहीं।”

“क्यों?”

प्रियांक की आवाज और धीमी हो गई।

“उन्होंने कहा था कि पहले मुझे अपने पैरों पर खड़ा करेंगे।”

यज्ञी की आँखें नम हो गईं।

उसने धीरे से कहा—

“तुम बहुत भाग्यशाली हो।”

प्रियांक मुस्कुराया।

“हाँ।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर प्रियांक ने पूछा—

“और तुम?”

“मैं?”

“तुम्हारे परिवार में कौन सबसे ज्यादा करीब है?”

यज्ञी मुस्कुराई।

“पापा।”

“तुम उनसे बहुत प्यार करती हो?”

“बहुत।”

प्रियांक ने कहा—

“अच्छा है।”

फिर दोनों चुप हो गए।

फोन कट नहीं हुआ।

बस दोनों एक-दूसरे की खामोशी सुनते रहे।

यज्ञी ने पहली बार महसूस किया—

उसे प्रियांक की आवाज अच्छी लगने लगी थी।

उसकी चिंता अच्छी लगती थी।

उसकी हँसी अच्छी लगती थी।

और सबसे ज्यादा...

उसे प्रियांक का अपने भाई के लिए प्यार अच्छा लगता था।

क्योंकि जिस इंसान के दिल में अपने परिवार के लिए इतना प्यार हो...

वह प्यार को कभी धोखा नहीं देगा।

शायद यहीं से...

यज्ञी के दिल में प्रियांक के लिए प्यार ने जन्म लिया।

और प्रियांक को अभी तक पता भी नहीं था...

कि उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी शुरू हो चुकी थी।

 4 – पहली बार घर में

एक दिन प्रियांक ने यज्ञी से कहा—

“आज मेरे घर चलोगी?”

यज्ञी अचानक चुप हो गई।

“तुम्हारे घर?”

“हाँ।”

“तुम्हारे भैया से मिलना पड़ेगा?”

प्रियांक हँस पड़ा।

“हाँ, और डरने की जरूरत नहीं है।”

“अगर उन्हें मैं पसंद नहीं आई तो?”

“तो वापस भेज दूँगा।”

यज्ञी ने उसे घूरकर देखा।

“बहुत मजाक आता है ना?”

प्रियांक हँसने लगा।

शाम को दोनों घर पहुँचे।

प्रियांक ने दरवाजा खटखटाया।

कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला।

सामने हार्दिक था।

उसने पहले प्रियांक को देखा।

फिर यज्ञी को।

फिर मुस्कुराकर बोला—

“तो तुम यज्ञी हो?”

यज्ञी ने धीरे से कहा—

“जी।”

हार्दिक ने रास्ता छोड़ते हुए कहा—

“अंदर आओ।”

यज्ञी अंदर आई।

उसके मन में हल्का डर था।

लेकिन हार्दिक ने उसे सहज महसूस करवाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

कुछ देर बाद हार्दिक ने मजाक में कहा—

“प्रियांक तुम्हें बहुत परेशान तो नहीं करता?”

यज्ञी हँस पड़ी।

“बहुत।”

प्रियांक बोला—

“अरे!”

हार्दिक ने कहा—

“अच्छा है। अब मेरी शिकायत करने के लिए मेरे पास कोई और भी है।”

तीनों हँस पड़े।

शाम को यज्ञी ने रसोई में जाकर चाय बनाई।

हार्दिक ने चाय का कप लिया।

एक घूँट पिया।

फिर बोला—

“बहुत अच्छी है।”

यज्ञी मुस्कुराई।

हार्दिक ने कहा—

“तुम प्रियांक की दोस्त हो?”

यज्ञी ने सिर हिलाया।

हार्दिक मुस्कुराया।

“अब मेरी बहन भी हो।”

यज्ञी कुछ पल उसे देखती रही।

फिर उसकी आँखें नम हो गईं।

उसने धीरे से कहा—

“भैया।”

हार्दिक की आँखों में भी हल्की चमक आ गई।

शायद उस दिन...

उसने यज्ञी को अपने परिवार में जगह दे दी थी।

 5 – तीन लोगों का परिवार

उस दिन के बाद यज्ञी अक्सर उस घर आने लगी।

कभी पढ़ाई के बहाने।

कभी प्रियांक से मिलने।

और कभी सिर्फ हार्दिक के हाथ की चाय पीने।

धीरे-धीरे वह उस घर का हिस्सा बन गई।

प्रियांक और यज्ञी की छोटी-छोटी लड़ाइयाँ होतीं।

और हार्दिक हमेशा यज्ञी की तरफ होता।

एक दिन यज्ञी ने शिकायत की—

“भैया, ये मुझे परेशान करता है।”

हार्दिक ने तुरंत कहा—

“प्रियांक, माफी माँग।”

प्रियांक हैरान रह गया।

“लेकिन मैंने कुछ किया ही नहीं!”

यज्ञी हँसने लगी।

हार्दिक ने कहा—

“मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी बहन रो रही है।”

प्रियांक ने कहा—

“आप दोनों मिल गए हो मेरे खिलाफ।”

हार्दिक और यज्ञी दोनों हँस पड़े।

उस छोटे-से घर में कई साल बाद इतनी हँसी गूँजी थी।

एक रात तीनों छत पर बैठे थे।

आसमान में चाँद था।

हल्की हवा चल रही थी।

यज्ञी ने अचानक कहा—

“भैया?”

“हाँ?”

“आप हमेशा हमारे साथ रहना।”

हार्दिक मुस्कुराया।

“वादा।”

यज्ञी ने हाथ आगे बढ़ाया।

“पक्का?”

हार्दिक ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“पक्का।”

प्रियांक दोनों को देख रहा था।

उसे बहुत अच्छा लग रहा था।

उसे क्या पता था...

यह वादा एक दिन उसकी पूरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक वादा बन जाएगा।

 6 – इकरार

एक शाम कॉलेज से लौटते समय बारिश शुरू हो गई।

प्रियांक और यज्ञी एक दुकान के छज्जे के नीचे खड़े हो गए।

दोनों चुप थे।

बारिश लगातार हो रही थी।

कुछ देर बाद प्रियांक ने कहा—

“यज्ञी।”

“हम्म?”

“मुझे तुमसे कुछ कहना है।”

यज्ञी ने उसकी तरफ देखा।

“बोलो।”

प्रियांक कुछ सेकंड चुप रहा।

“मुझे नहीं पता प्यार कैसे करते हैं।”

यज्ञी मुस्कुराई।

“तो?”

“लेकिन जब तुम मेरे पास नहीं होती हो... तो कुछ अच्छा नहीं लगता।”

यज्ञी की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।

प्रियांक ने कहा—

“जब तुम बात नहीं करती हो तो मेरा दिन खराब हो जाता है।”

यज्ञी की आँखें नम हो गईं।

“और जब तुम मेरे पास होती हो... तो लगता है सब ठीक है।”

प्रियांक ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

“क्या यही प्यार है?”

यज्ञी ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में आँसू थे।

लेकिन चेहरे पर मुस्कान थी।

उसने प्रियांक का हाथ कसकर पकड़ लिया।

“हाँ।”

बारिश तेज हो गई।

लेकिन दोनों वहीं खड़े रहे।

उस दिन दोनों ने अपने प्यार को स्वीकार कर लिया।

7 – पहला राज़

कुछ समय तक सब कुछ बहुत अच्छा चलता रहा।

लेकिन एक दिन प्रियांक को पुराने सामान में एक पुराना लिफाफा मिला।

लिफाफे पर उसके पिता का नाम लिखा था।

उसने उसे खोला।

अंदर एक छोटा-सा पत्र था।

उसमें लिखा था—

“हार्दिक को उस रात के बारे में कभी मत बताना।”

प्रियांक का दिल अचानक तेज धड़कने लगा।

उसने पत्र दोबारा पढ़ा।

फिर तारीख देखी।

14 जुलाई।

वही तारीख...

जिस दिन उसके माता-पिता की मौत हुई थी।

उसने तुरंत हार्दिक से पूछा—

“भैया... चौदह जुलाई को क्या हुआ था?”

हार्दिक के हाथ में पकड़ा कप अचानक रुक गया।

उसने प्रियांक की तरफ देखा।

“तुझे ये तारीख कहाँ से मिली?”

“पुराने सामान में एक खत मिला।”

हार्दिक कुछ देर तक चुप रहा।

प्रियांक ने कहा—

“भैया, मुझसे कुछ मत छुपाइए।”

हार्दिक ने नजरें झुका लीं।

“कुछ बातें जितनी पुरानी होती हैं... उतनी ही खतरनाक होती हैं।”

“मुझे सच चाहिए।”

हार्दिक ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में पहली बार डर था।

“अगर तूने सच जान लिया... तो शायद तू मुझे पहले जैसा नहीं देख पाएगा।”

प्रियांक की आवाज काँप गई।

“आपने ऐसा क्या किया है?”

हार्दिक ने कुछ नहीं कहा।

फिर बहुत धीमी आवाज में बोला—

“तेरे माता-पिता की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं थी।”

प्रियांक जैसे वहीं जम गया।

“तो फिर क्या हुआ था?”

हार्दिक चुप रहा।

“किसने उन्हें मारा?”

हार्दिक ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस इतना कहा—

“अभी नहीं।”

और वह कमरे से बाहर चला गया।

प्रियांक वहीं खड़ा रह गया।

उसके मन में हजार सवाल थे।

और उसे पहली बार महसूस हुआ...

उसका पूरा अतीत एक झूठ के पीछे छिपा हुआ था।

8 – यज्ञी का परिवार

उधर यज्ञी को भी कुछ अजीब महसूस होने लगा था।

जब भी वह प्रियांक के परिवार की बात करती, उसके पिता का चेहरा बदल जाता।

एक रात उसने सीधे पूछ लिया—

“पापा, क्या आप प्रियांक के परिवार को पहले से जानते हैं?”

विराज अचानक चुप हो गए।

“तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो?”

“क्योंकि जब भी मैं प्रियांक का नाम लेती हूँ, आप परेशान हो जाते हैं।”

विराज ने बात बदलने की कोशिश की।

लेकिन यज्ञी ने उनका हाथ पकड़ लिया।

“पापा, मुझे सच बताइए।”

विराज की आँखों में आँसू आ गए।

यज्ञी घबरा गई।

“क्या हुआ?”

विराज ने धीरे से कहा—

“मैंने किसी को नहीं मारा।”

यज्ञी की आँखें फैल गईं।

“मैंने तो ऐसा कुछ पूछा भी नहीं...”

विराज चुप रहे।

यज्ञी समझ गई।

“उस रात...”

विराज ने सिर झुका लिया।

“हाँ।”

यज्ञी की आवाज काँप गई।

“आप प्रियांक के माता-पिता को जानते थे?”

“हाँ।”

“क्या हुआ था?”

विराज ने आँखें बंद कर लीं।

“उन्हें एक बड़े राज़ का पता चला था।”

“कैसा राज़?”

“ऐसा राज़... जिसके कारण कुछ लोग उन्हें रास्ते से हटाना चाहते थे।”

“और आप?”

विराज की आवाज टूट गई।

“मैं वहाँ था।”

“फिर आपने उन्हें बचाया क्यों नहीं?”

विराज की आँखों से आँसू निकल आए।

“मैं डर गया था।”

यज्ञी पीछे हट गई।

“आपके डर की कीमत किसने चुकाई?”

विराज के पास कोई जवाब नहीं था।

यज्ञी की आँखों में आँसू थे।

उस रात उसे पहली बार महसूस हुआ कि उसके अपने परिवार का अतीत...

उसके प्यार के रास्ते में खड़ा था।

9 – प्यार की पहली परीक्षा

यज्ञी ने अगले दिन प्रियांक से मिलने का फैसला किया।

लेकिन वह उसे देखते ही कुछ नहीं बोल पाई।

प्रियांक ने पूछा—

“क्या हुआ?”

यज्ञी की आँखों से आँसू निकल आए।

“मुझे तुमसे दूर जाना होगा।”

प्रियांक चौंक गया।

“क्या?”

“मैं तुम्हारे परिवार के सामने कैसे खड़ी हो सकती हूँ?”

“तुमने क्या किया है?”

“मैंने नहीं... मेरे परिवार ने।”

“तुम्हारी कोई गलती नहीं है।”

“लेकिन मेरे पिता...”

“तुम्हारे पिता तुम नहीं हो।”

यज्ञी रोते हुए बोली—

“लेकिन हर बार जब तुम मुझे देखोगे, तुम्हें अपने माता-पिता याद आएँगे।”

प्रियांक ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“जब मैं तुम्हें देखता हूँ... मुझे तुम दिखाई देती हो।”

यज्ञी चुप हो गई।

प्रियांक ने कहा—

“मैं तुम्हें किसी के किए की सजा नहीं दूँगा।”

यज्ञी ने धीरे से कहा—

“लेकिन मैं खुद को माफ नहीं कर पा रही।”

और वह वहाँ से चली गई।

प्रियांक उसे जाते हुए देखता रहा।

उस दिन पहली बार उसे लगा...

सच्चा प्यार मिलना मुश्किल नहीं होता।

उसे बचाकर रखना मुश्किल होता है।

10 – हार्दिक का फैसला

प्रियांक घर लौटा।

हार्दिक ने उसके चेहरे को देखा।

“क्या हुआ?”

प्रियांक चुप रहा।

फिर बोला—

“यज्ञी मुझे छोड़कर चली गई।”

हार्दिक कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर बोला—

“उसे जाने मत देना।”

“लेकिन भैया...”

“इस बार अपने भाई की नहीं... अपने दिल की सुन।”

“अगर वह वापस नहीं आई तो?”

हार्दिक मुस्कुराया।

“तो उसे वापस लाने की कोशिश करना।”

प्रियांक ने पहली बार महसूस किया—

उसका भाई सिर्फ उसके लिए नहीं...

उसके प्यार के लिए भी खड़ा था।

वह उसी रात यज्ञी के घर पहुँचा।

यज्ञी बाहर आई।

“तुम यहाँ?”

प्रियांक ने कहा—

“मैं तुम्हें लेने आया हूँ।”

यज्ञी की आँखें भर आईं।

“कहाँ?”

प्रियांक ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“अपने घर।”

“लेकिन तुम्हारे परिवार को...”

प्रियांक मुस्कुराया।

“तुम्हें सबसे पहले मेरे भैया ने स्वीकार किया था।”

यज्ञी रोते हुए उसके गले लग गई।

दूर खिड़की से विराज यह सब देख रहे थे।

उनकी आँखों में भी आँसू थे।

शायद उन्हें पहली बार समझ आया...

कुछ गलतियाँ इतनी बड़ी होती हैं कि उनकी माफी समय से नहीं...

बल्कि अगली पीढ़ी के प्यार से मिलती है।

 11 – एक छुपा हुआ सच

कुछ दिनों बाद हार्दिक की तबीयत अचानक खराब हो गई।

प्रियांक उसे डॉक्टर के पास लेकर गया।

डॉक्टर ने कुछ टेस्ट करवाए।

हार्दिक अकेले रिपोर्ट लेने गया।

रिपोर्ट देखकर उसके हाथ काँप गए।

उसने रिपोर्ट मोड़कर जेब में रख ली।

डॉक्टर ने कहा—

“आपको अपने परिवार को बताना चाहिए।”

हार्दिक ने पूछा—

“कितना समय है?”

डॉक्टर कुछ सेकंड चुप रहा।

हार्दिक सब समझ गया।

वह बाहर आया।

आसमान की तरफ देखा।

फिर धीरे से मुस्कुराया।

“बस... प्रियांक की शादी देखनी है।”

उसने फैसला कर लिया।

वह अपनी बीमारी किसी को नहीं बताएगा।

कम से कम...

जब तक प्रियांक की शादी नहीं हो जाती।

अध्याय 12 – आखिरी वादा

शाम को हार्दिक ने यज्ञी को बुलाया।

यज्ञी उसके पास बैठी।

“भैया, आपने बुलाया?”

हार्दिक ने उसकी तरफ एक कागज बढ़ाया।

यज्ञी ने देखा।

उसकी आँखें फैल गईं।

“ये क्या है?”

हार्दिक मुस्कुराया।

“मेरी बीमारी की रिपोर्ट।”

यज्ञी की आँखों से आँसू निकल आए।

“प्रियांक को पता है?”

“नहीं।”

“आप उसे बताएँगे?”

हार्दिक ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“क्यों?”

हार्दिक बोला—

“क्योंकि उसकी जिंदगी में पहले ही बहुत दर्द है। अब मैं उसकी खुशी के बीच अपना दर्द नहीं लाना चाहता।”

यज्ञी रोते हुए बोली—

“लेकिन आप उसके भाई हैं।”

हार्दिक ने कहा—

“इसीलिए।”

कुछ पल दोनों चुप रहे।

फिर हार्दिक ने यज्ञी का हाथ पकड़ लिया।

“एक बात का वादा करोगी?”

“जी।”

“मेरे बाद प्रियांक को कभी अकेला मत छोड़ना।”

यज्ञी की आँखों से आँसू बहने लगे।

उसने हार्दिक का हाथ कसकर पकड़ लिया।

“वादा।”

हार्दिक मुस्कुराया।

उसे पता था...

अब वह अपने भाई को अकेला नहीं छोड़ रहा था।

वह उसे यज्ञी के भरोसे छोड़ रहा था।

PART 1 का अंत

उस रात घर की छत पर प्रियांक और यज्ञी साथ बैठे थे।

हार्दिक कुछ दूरी पर खड़ा दोनों को देख रहा था।

प्रियांक हँसते हुए यज्ञी से कुछ कह रहा था।

यज्ञी उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।

हार्दिक के चेहरे पर भी मुस्कान थी।

लेकिन उसकी जेब में एक मेडिकल रिपोर्ट थी।

उसने रिपोर्ट बाहर निकाली।

कुछ पल उसे देखा।

फिर मोड़कर वापस जेब में रख लिया।

उसने आसमान की तरफ देखा।

और बहुत धीमी आवाज में कहा—

“भगवान... बस एक काम बाकी है।”

उसने प्रियांक की तरफ देखा।

“अपने भाई की शादी।”

फिर यज्ञी की तरफ देखा।

“और उसे एक ऐसा परिवार देना... जिसमें उसे कभी अकेलापन महसूस न हो।”

हार्दिक की आँखों में आँसू आ गए।

लेकिन वह मुस्कुराया।

उसे नहीं पता था कि आने वाले दिनों में...

एक शादी की खुशी के पीछे मौत अपनी जगह बना चुकी थी।

और जिस घर में अभी प्यार की हँसी गूँज रही थी...

वहीं बहुत जल्द एक ऐसी चीख गूँजने वाली थी...

जिसे सुनकर तीनों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी।

PART 1 finish follow for next part