प्यार का जाल - 3 Ritu jaiswal द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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प्यार का जाल - 3

बीते कुछ हफ़्तों में आरव की जिंदगी पूरी तरह से करवट ले चुकी थी। जो इंसान कभी अपनी ही तन्हाई को अपना साथी मानता था और लोगों से दूरी बनाकर रहता था, अब सुबह आँख खुलते ही सबसे पहले रिया का ख्याल उसके चेहरे पर एक गहरी और मीठी मुस्कान ले आता था। रिया की चंचलता और उसकी बातें आरव के दिल में इस कदर बस चुकी थीं कि अब उसे अपनी हर खुशी रिया के बिना अधूरी लगने लगी थी। आरव ने मन ही मन यह अटूट फैसला कर लिया था कि आज की शाम वह अपने दिल का हर छुपा हुआ अहसास रिया के सामने बयान कर देगा।
उसने लखनऊ के उसी पसंदीदा कैफे में शाम को मिलने का समय तय किया, जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी। आरव ने उस दिन को बेहद खास बनाने के लिए काफी तैयारियाँ की थीं। उसने रास्ते में रिया के पसंदीदा फूलों का गुलदस्ता लिया और एक नामी ज्वेलरी शॉप से बेहद खूबसूरत और नक्काशीदार चाँदी का ब्रेसलेट खरीदा। उसकी जेब में रखा वह ब्रेसलेट का डिब्बा और सीने में तेज़ होती दिल की धड़कनें उसकी बेचैनी और खुशी दोनों को एक साथ बयां कर रही थीं।
शाम के करीब छह बजे आरव कैफे में पहुँच गया। बाहर मौसम फिर से सुहाना हो रहा था और हल्की-हल्की बारिश की बूंदें कांच की खिड़की पर गिर रही थीं। आरव कोने वाली वही मेज़ पर बैठकर बार-बार दरवाज़े की तरफ़ टकटकी लगाए देखता। उसने रिया की पसंद की कॉफ़ी का ऑर्डर पहले ही दे दिया था। हर बार जब कैफे की घंटी बजती और दरवाज़ा खुलता, आरव का दिल उम्मीद से उछल पड़ता, लेकिन हर बार कोई और अंदर आता।
देखते ही देखते घड़ी में सात बज गए, लेकिन रिया का कहीं कोई अता-पता नहीं था। आरव ने अपनी घबराहट को दबाते हुए कई बार रिया का फोन मिलाया, लेकिन हर बार दूसरी तरफ से केवल एक ही नीरस आवाज़ सुनाई देती—"आप जिस नंबर पर कॉल कर रहे हैं, वह स्विच ऑफ है।"
आरव को थोड़ी हैरानी और चिंता होने लगी। रिया हमेशा समय की पाबंद थी, और अगर उसे कभी थोड़ी देर हो भी जाती, तो वह तुरंत मैसेज करके बता देती थी। बिना बताए इस तरह गायब होना रिया की आदत नहीं थी। आरव के मन में एक अनजाना सा डर अपनी जगह बनाने लगा था। वह बार-बार अपनी घड़ी देखता और खिड़की के बाहर गिरती बारिश को निहारता।
ठीक सवा सात बजे, जब आरव कैफे से उठकर उसे ढूंढने जाने ही वाला था, उसके फोन की स्क्रीन अचानक जल उठी। आरव ने बिना एक पल गंवाए झट से फोन उठाया, यह सोचकर कि रिया का फोन या मैसेज होगा। लेकिन स्क्रीन पर कोई नाम नहीं था; वह किसी अनजान और गुप्त नंबर से आया एक टेक्स्ट मैसेज था।
आरव ने धड़कते दिल और कांपती उंगलियों से मैसेज को ओपन किया। जैसे-जैसे वह मैसेज के शब्द पढ़ता गया, उसके माथे पर ठंडे पसीने की बूंदें छलक आईं। मैसेज में लिखा था:
"आरव, जिस रिया की मासूमियत और हसीन बातों पर तुम अपना दिल हार चुके हो, उसका असली सच तुम नहीं जानते। वह तुम्हारी ज़िंदगी में किसी इत्तेफ़ाक़ या किस्मत से नहीं आई है। अपनी आँखें खोलो और होश में आओ, वरना जिस ख़तरनाक जाल में तुम हर गुज़रते दिन के साथ फँसते जा रहे हो, उससे बाहर निकलने का तुम्हें कभी कोई रास्ता नहीं मिलेगा।"
यह मैसेज पढ़ते ही आरव का पूरा शरीर सुन्न पड़ गया। उसके हाथों से फोन लगभग छूटकर नीचे गिरने ही वाला था। आँखों के सामने अँधेरा सा छाने लगा। "कौन है यह इंसान? और यह रिया के बारे में इतनी भयानक बातें क्यों लिख रहा है?" आरव ने खुद को संभालते हुए तुरंत उस अनजान नंबर पर वापस कॉल लगाया, लेकिन दूसरी तरफ से फिर वही जवाब आया कि नंबर बंद है।
आरव का दिमाग पूरी तरह चक्रा गया था। एक तरफ रिया का अचानक इस तरह गायब हो जाना और दूसरी तरफ यह खौफनाक मैसेज। उसका मासूम दिल चीख-चीखकर कह रहा था कि यह सब किसी की रंजिश या घटिया मज़ाक है, लेकिन उसके दिमाग में शक का एक ऐसा ज़हरीला बीज बोया जा चुका था, जो धीरे-धीरे पनपने लगा था। आरव भारी कदमों से कैफे से बाहर निकला। बाहर गिरती बारिश की बूंदें अब उसे कोई सुकून नहीं दे रही थीं, बल्कि उसके दिल के अंदर एक तबाही मचाने वाले तूफ़ान का आगाज़ कर रही थीं।