Musafir Cafe — Book review Shreyash R.M द्वारा पुस्तक समीक्षाएं में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

Musafir Cafe — Book review

Musafir Cafe दिव्य प्रकाश दुबे द्वारा लिखा गया हिंदी उपन्यास है। यह एक contemporary love story है, लेकिन सिर्फ प्रेम कहानी तक सीमित नहीं रहती। चन्दर और सुधा इसके मुख्य पात्र हैं, और उनके बीच की मुलाकात, बातचीत, रिश्ते और जिंदगी को लेकर उनके अलग-अलग नजरिए कहानी को आगे बढ़ाते हैं। कहानी में प्रेम के साथ-साथ शादी, आज़ादी, रिश्तों और जिंदगी में लिए जाने वाले फैसलों को भी जगह मिलती है। मैं कहानी के बारे में इससे ज्यादा नहीं लिखना चाहता, क्योंकि इस किताब को बिना किसी spoiler के पढ़ना ज्यादा अच्छा अनुभव है।

इस किताब में मुझे सबसे ज्यादा पसंद इसकी बातें और observations लगीं। कई जगह ऐसा लगा कि लेखक किसी बहुत साधारण सी बात को इतनी खूबसूरती से कह देता है कि वह पढ़ने के बाद भी दिमाग में घूमती रहती है। किताब पढ़ते हुए मैंने कई lines underline कीं। उनमें से कुछ मेरी पसंदीदा हैं:

- “जब भी कंफ्यूजन हो कि ये काम करना चाहिए या नहीं करना चाहिए या फिर कोई बात बोलनी चाहिए या नहीं बोलनी चाहिए तो बस, बिना ज्यादा कुछ सोचे वो काम कर के देख लेना चाहिए। वो बात बोल के देख लेनी चाहिए। लाइफ बहुत आसान हो जाती है।”

- “जो सुन के अच्छा लगता है वो अच्छा होता है और जो सुन के अच्छा न लगे वो अच्छा होकर भी अच्छा नहीं होता।”

- "मालूम है हमारी जेनेरेशन की सबसे बड़ी ट्रेजिडी क्या है?" 
"क्या?"
"हमारे पास एक-दूसरे की यादें बहुत कम हैं। जब बंदा चला जाता है तो हमें पहली बार याद आता है कि हम तमाम यादें बना सकते थे लेकिन बना नहीं पाए। हम मरने के बाद जाने वाले की वो यादें याद करते हैं जो हमने अभी बनाई नहीं होती।"

- “पूरी जिंदगी पता नहीं क्या कमाने की फिक्र में हम समझ ही नहीं पाते कि बचाना क्या है और बेचना क्या।”

- “शॉपिंग करवाना मतलब उतना टाइम देना, उससे कम और उससे ज्यादा कोई किसी को कुछ दे भी कहाँ सकता है!”

- “सबकुछ समझने के लिए थोड़े होता है। लाइफ के कुछ चैप्टर बिना समझे ऐसे ही छोड़ देने चाहिए।”

- “जिंदगी की सबसे अच्छी और खराब बात यही है कि ये हमेशा नहीं रहने वाली।”

- “रोते हुए हम अपने सबसे करीब होते हैं और हँसते हुए दूसरों के।”

- “जब रात में अच्छी नींद आना बंद हो जाए तब मान लेना चाहिए कि आगे जिंदगी में ऐसा मोड़ आने वाला है जिसके बाद सबकुछ बदल जाएगा।”

- “हम सब लोग बस अपनी बोरियत मिटाने के लिए जिंदा हैं। जिस दिन बोरियत मिटाते- मिटाते हम थक जाते हैं उस दिन हम मर जाते हैं। लाइफ की सबसे अच्छी चीज यही है कि हम सभी एक-न-एक दिन थक जाते हैं।”

- “जिनको कभी-कभी गुस्सा आता है उनको जब गुस्सा आता है तो वो कंट्रोल नहीं कर पाते। इसलिए थोड़ा-थोड़ा गुस्सा करते रहना चाहिए, रिश्तों और जिंदगी चलाते रहने के लिए अच्छा रहता है।”

- “नयी जिंदगी हमेशा नयी उम्मीद लेकर आती है, नयी बातों की, नयी दुनिया की, नयी गलतियों की। जिसने भी कहा था कि दुनिया उम्मीद पर टिकी है उसे जरूर अपने बच्चे की शक्ल देखकर ये ख्याल आया होगा”

- “असल में कल क्या होगा ये सोचना हमेशा ही फिजूल होता है... सोचकर कुछ हासिल होता नहीं। बहुत ज्यादा सोच-समझ कर, देख परखकर बाजार से सामान तो खरीदा जा सकता है लेकिन जिंदगी को नहीं जिया जा सकता।”

- “किसी को समझना हो तो उसकी शेल्फ में लगी किताबों को देख लेना चाहिए, किसी की आत्मा समझनी हो तो उन किताबों में लगी अंडरलाइन को पढ़ना चाहिए।”

- “हमें केवल यादें याद नहीं आतीं बल्कि सबसे ज्यादा वो यादें याद आती हैं जो हम बना सकते थे।”

- "जिनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता वो फैसले जल्दी ले लिया करते हैं। जिस दिन हमको ये समझ में आता है कि यहाँ हममें से किसी के भी पास जिंदगी के अलावा खोने को कुछ नहीं है, उस दिन हम अपनी जिंदगी का पहला कदम अपनी ओर चलते हैं। बाहर चलते- चलते हम करीब-करीब भूल ही चुके होते हैं कि हमारे अंदर भी एक दुनिया है।"

- “कई चोटें इसलिए निशान छोड़कर जाती हैं ताकि हम अपनी सब गलतियाँ भूल न जाएँ। गलतियाँ सुधारनी जरूर चाहिए लेकिन मिटानी नहीं चाहिए। गलतियाँ वो पगडंडियाँ होती हैं जो बताती रहती हैं कि हमने शुरू कहाँ से किया था।"

- “दुनिया में देने लायक अगर कुछ है तो वो है ‘एक दिन सब ठीक हो जाएगा’ की उम्मीद। ये दुनिया शायद आज तक चल ही शायद इसलिए रही है क्यूँकि लोग अभी भी जाने-अनजाने एक दिन सब ठीक हो जाएगा की उम्मीद दे देते हैं।”

इन lines की वजह से मेरे लिए Musafir Cafe सिर्फ एक love story नहीं रही। दिव्य प्रकाश दुबे ने बहुत साधारण भाषा और बातचीत के अंदाज में रिश्तों और जिंदगी की कुछ ऐसी बातें लिखी हैं, जिनसे कहीं न कहीं खुद को जोड़ना आसान लगता है।

मुझे लेखक का सबसे अच्छा काम यही लगा कि उन्होंने बहुत बड़ी-बड़ी philosophical बातें करने के बजाय उन्हें रोजमर्रा की बातचीत और छोटी-छोटी situations में रखा है। कहानी भी अपने तरीके से engaging है और इसके characters को लेकर अपनी राय बनाना और फिर उसे बदलते देखना इस किताब का एक हिस्सा है।

अगर आपको Hindi में simple लेकिन meaningful writing, relationships और life पर लिखी बातें पसंद हैं, तो मैं Musafir Cafe जरूर recommend करूँगा। और मेरी सलाह यही होगी कि इसे पढ़ने से पहले इसकी कहानी के बारे में ज्यादा मत जानिए। बस किताब उठाइए और चन्दर और सुधा की इस यात्रा के साथ चल पड़िए।