रूह की धुन और जमी बर्फ पर घुलती रात sukhvinder Singh Rai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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रूह की धुन और जमी बर्फ पर घुलती रात

बोनफायर की शोख लपटें हल्की सी चटकन के साथ ऊपर उठ रही थीं और उनकी गर्माहट उन दोनों के ठिठुरते जिस्मों को राहत दे रही थी। चारों तरफ पसरे उस बर्फ़ीले सन्नाटे के बीच, आग के इर्द-गिर्द का यह छोटा सा दायरा अब दुनिया से बिल्कुल अलग एक महफूज कोना बन चुका था। जारा ने अपनी हथेलियों को आग के करीब करके ठंड से सुन्न पड़ी उंगलियों को सहलाया, और फिर अपनी गहरी, कजरारी आँखें उठाकर सामने बैठे ईशान को देखा।

​रात के उस दर्दनाक संगीत का पर्दा अब हट चुका था, और उसकी जगह एक ऐसा सन्नाटा ले रहा था जिसमें दो अजनबी अपनी-अपनी रूह के दरवाजे एक-दूसरे के लिए खोल रहे थे।

​बातचीत का सिलसिला जब आगे बढ़ा, तो जारा ने बहुत ही सहजता से अपने बारे में थोड़ा बहुत बताना शुरू किया। उसने अपनी आवाज में एक हल्की सी मिठास और थोड़ा सा अपनापन घोलते हुए कहा—

"मैं एक बहुत ही छोटे और शांत शहर से ताल्लुक रखती हूँ ईशान... जहाँ जिंदगी बहुत आहिस्ता और सुकून से चलती है। बस, कुदरत के करीब रहने का शौक और फोटोग्राफी के प्रति पागलपन मुझे इन वीरान और बर्फीले पहाड़ों के बीच खींच लाया।"

​ईशान ने बड़े गौर से उसकी बात सुनी, और उसके चेहरे पर एक बहुत ही अपनापन भरा अहसास तैर गया। उसने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए जारा को अपने बारे में बताया—

"और मैं... मैं मुंबई जैसे विशाल और चकाचौंध से भरे महानगर से आया हूँ जारा। वहाँ की रातें कभी सोती नहीं हैं, बड़ी-बड़ी इमारतें, गाड़ियों का अंतहीन शोर और लोगों की वो भीड़, जहाँ हर कोई बस अपनी मंजिल की तरफ दौड़े जा रहा है। एक कामयाब वायलिन वादक होने के नाते मेरे पास सब कुछ था—नाम, शोहरत, दौलत और लोगों की तालियाँ। पर सच कहूँ तो, उस शोहरत के समंदर में तैरते हुए भी मैं अंदर से पूरी तरह तन्हा और खाली था। भीड़ के बीच अकेलेपन का जो जहर मैंने वहाँ पिया है, उसे बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।"

​जारा ने पलकें झपकाए बिना उसकी बात सुनी। ईशान की उन बातों में और उसकी झुकी हुई पलकों में एक गहरा दर्द साफ़ झलकता था। कुछ देर तक वे दोनों अपने करियर, अपने अतीत और वर्तमान के छोटे-छोटे पहलुओं पर खुलकर बातें करते रहे। उस बर्फीली ठंड के बीच उनके बीच की दूरियां और अजनबीपन धीरे-धीरे पिघल रहा था।

​तभी जारा ने अपनी पलकें उठाईं, उसकी आँखों में एक बालसुलभ जिद और मासूमियत तैर गई। उसने अपनी फरमाइश रखते हुए बड़े ही प्यार से पूछा—

​"अच्छा ईशान... एक बात कहूँ? तुम जो रात को, ठीक रात के तीन बजे वो वायलिन बजा रहे थे... वो बहुत ही प्यारा, रोमांटिक और इमोशनल संगीत था। क्या तुम मुझे वो संगीत दोबारा सुना सकते हो? प्लीज?"

​ईशान थोड़ा सा चौंक गया। उसने मुस्कुराते हुए पूछा, "तुम्हें सचमुच मेरा वो संगीत इतना ज्यादा पसंद आया?"

​जारा ने पूरी संजीदगी और दृढ़ता से सिर हिलाया, "हाँ, सच में! मुझे इतना ज्यादा पसंद आया कि मैं शब्दों में बता नहीं सकती। ऐसा लगा जैसे वो धुन सीधे मेरी रूह में उतर गई हो। प्लीज... क्या तुम मेरे लिए अभी, इसी वक्त वो संगीत दोबारा नहीं बजा सकते?"

​ईशान ने जारा के चेहरे पर छाई उस मासूम सी जिद और उम्मीद को देखा, तो उसका दिल पिघल गया। उसने बिना कुछ कहे अपने पास रखे उस पुराने महोगनी लकड़ी के वायलिन को उठाया। उसने अपनी उंगलियों के पोरों से उसके तारों को सँवारा, अपनी आँखें बंद कीं, और वायलिन की लकड़ी को अपने कंधे से लगा लिया।

​जैसे ही उसने अपना बो तारों पर चलाया, हवा में एक बेहद सुरीली, रूह को छू लेने वाली और दर्दभरी रोमांटिक धुन बिखर गई।

​वह संगीत इतना जादुई और गहरा था कि आसपास का सारा सन्नाटा जैसे थम गया। जारा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस धुन की एक-एक लहर को अपनी मन की गहराइयों में धीरे-धीरे महसूस करने लगी। उसके दिल की हर एक धड़कन उस संगीत के साथ ताल मिलाने लगी, और वह पूरी तरह उस अनकहे अहसास के समंदर में डूबती चली गई।