ईशान के कंधों पर रखा वह पुराना महोगनी वायलिन जैसे-जैसे हवा में अपनी सुरीली साँसें छोड़ रहा था, लद्दाख का वह सर्द और वीरान सन्नाटा पूरी तरह उस संगीत के रंग में रंगता जा रहा था। बो (Bow) के तारों पर फिसलने की हर एक आहट के साथ धुन गहरी और अधिक दिल को चीर देने वाली होती जा रही थी।जारा ने आंखें बंद कर ली थीं। वह उस संगीत की लहरों पर सवार होकर अपनी मन की गहराइयों में उतरती चली गई। वह धुन जितनी मीठी थी, उसके भीतर छिपे दर्द ने जारा के अतीत के दरवाजे उतनी ही बेदर्दी से खोल दिए।उसके ज़ेहन में अचानक वह खौफनाक मंजर तैरने लगा—वही पुराना और नासूर बन चुका जख्म। समीर... वही समीर, जिसके साथ उसने अपनी जिंदगी के सबसे हसीन सपने सजाए थे। उसे वह दिन साफ-साफ याद आने लगा जब उसने अपनी आँखों से देखा था कि कैसे समीर ने उसे एक पल में दरकिनार कर दिया था। किसी और लड़की की बाहों में हाथ डाले, उसके प्यार को ठुकराते हुए समीर ने बड़े हक से कहा था— "अब हमारी राहें अलग हैं जारा, भूल जाओ मुझे!"उस एक धोखे ने जारा की पूरी दुनिया को चकनाचूर कर दिया था।संगीत की सुरीली गूँज के बीच, जारा का दिल भीतर से मचल उठा। उसने मन ही मन खुद को कोसते हुए सोचा— "शायद सच्ची मोहब्बत और किसी का साथ मेरे नसीब में है ही नहीं... मेरी किस्मत में बस तन्हाई, धोखे और आँसू ही लिखे हैं।"दर्द का वह सैलाब इतना भारी था कि जारा उसे रोक नहीं पाई। उसकी बंद पलकों के किनारों से आँसू छलक पड़े। दोनों आँखों से लगातार गिरते आँसू उसके ठंडे गालों को भिगोते हुए नीचे बर्फ पर टपकने लगे। वायलिन की हर एक तान के साथ उसकी सिसकियाँ उस संगीत में दबी हुई बाहर आने लगीं।ईशान अपनी धुन में पूरी तरह मग्न था। उसने आँखें बंद करके अपनी पूरी रूह उस वायलिन में उतार दी थी। लेकिन जब धुन का असर कम हुआ और उसने अपनी उंगलियों की रफ्तार धीमी की, तो उसने महसूस किया कि आसपास कोई ऐसी खामोशी है जो संगीत से भी ज्यादा भारी है।ईशान ने अपना वायलिन बजाना बंद कर दिया, उसे धीरे से अपने कंधे से उतारा और जमीन पर रख दिया।उसने अपनी नजरें उठाकर जारा की तरफ देखा, तो वह सन्न रह गया। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। जारा अभी भी अपनी आँखें बंद किए बैठी थी, लेकिन उसके चेहरे पर आँसुओं की नदियाँ बह रही थीं। दोनों गाल पूरी तरह भीगे हुए थे, और उसका पूरा शरीर हल्के-हल्के काँप रहा था।ईशान मन ही मन बुरी तरह घबरा गया। उसने हैरान होकर सोचा— "यह रो क्यों रही है? इसकी इन खूबसूरत आँखों से आँसू ऐसे गिर रहे हैं जैसे किसी ऊँचे झरने से मोतियों की बरसात हो रही हो... मैंने तो इसे खुश करने के लिए यह धुन बजाई थी, फिर इसके दिल में यह कौन सा दर्द है जो इस तरह बाहर आ रहा है?"बिना एक पल गंवाए, ईशान अपनी जगह से उठा और तेजी से कदम बढ़ाते हुए जारा के बिल्कुल करीब आ गया। उसने झुककर बहुत ही प्यार और चिंता भरे लहजे में उसे पुकारा— "जारा... जारा, सुनो!"लेकिन जारा अपने अतीत के अंधेरे में इतनी गहरी डूबी हुई थी कि उसे ईशान की आवाज सुनाई नहीं दी।ईशान ने इस बार थोड़ा सा जोर देकर, और भी ज्यादा फिक्र के साथ उसका नाम पुकारा— "जारा!"उस तेज आवाज से जारा का ध्यान टूटा। वह बुरी तरह हड़बड़ा गई, डरकर एकदम से उसने अपनी आँखें खोलीं। जैसे ही उसने आँखें खोलीं, उसने देखा कि ईशान उसके बिल्कुल नजदीक, उसके चेहरे के पास झुका हुआ खड़ा है। उसकी गर्म साँसें और उसकी फिक्र से भरी गहरी आँखें जारा की आँखों के ठीक सामने थीं।जारा एक पल के लिए थम सी गई। वह अपनी पलकें झपकाना भूल गई और बस उस हैंडसम चेहरे को एकटक देखती ही रह गई।ईशान ने अपनी आँखें उसकी नम पलकों पर टिकाईं और बहुत ही नरमी से पूछा, "क्या हुआ जारा? तुम अचानक इस तरह क्यों रोने लगीं? ऐसी कौन सी बात है जो तुम्हें अंदर ही अंदर इतना दर्द दे रही है?"जारा ने अपने काँपते हाथों से झटपट अपने गालों पर आए आँसू पोछे, अपनी नजरें झुका लीं और थोड़ा संभलते हुए कहा, "कुछ... कुछ नहीं... बस, अचानक कुछ पुरानी बातें याद आ गई थीं।"