श्री कृष्ण का चमत्कार Anamika द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री कृष्ण का चमत्कार

एक बार की बात है। एक  गाँव में 1 वृद्ध आदमी रहता था वो दिल का बहुत साफ था। वो कभी भी किसी से नहीं लड़ता था। उसका नाम राम था।   वो बिल्कुल अपने नाम जैसा ही था शांत धैर्यवान मीठे स्वर के साथ सबसे बात करने वाला।  वह बालपन से ही श्री कृष्ण की भक्ति करता था। वह एक सच्चा भक्त था जो कभी किसी से बैर नहीं रखता था। वह केवल श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहता था। सबसे बड़ी बात तो यह थीं कि वो बहुत अच्छी बांसुरी भी बजा लेता था जिसे सुनकर सभी मन्त्र-मुग्ध हो जाते थे । कुछ तो बात थी उनमें जिससे वह सबका दिल जीत लेते थे। लेकिन वो कहते हैं न अक्सर अच्छे लोगों के साथ ही बुरा होता है। उनके  साथ भी वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था।आखिरकार राम को उसका परिवार छोड़ कर चला गया। उसके परिवार में उसके दो बेटे-बहु रहते थे। राम की पत्नी की मृत्यु तो तभी हो गई थी जब उसने अपने छोटे बेटे को जन्म दिया। उस समय राम ने अपने दोनों बच्चों को प्यार से पाल पोस कर बड़ा किया और उनकी धूम-धाम से शादी भी करवाई लेकिन अफसोस की बात तो ये है कि जब उस पिता यानि राम को उनकी सबसे जदा जरूरत थी तभी वो लोग उस बेचारे वृद्ध राम को छोड़ कर चले जाते है। वो बेचारा दुख का हारा कहा जाता वो राम ,कुछ न सुझा तो चल दिया अपने प्रभु श्री कृष्ण के द्वार । वो श्री कृष्ण के मंदिर जाता है और कहता है, हे मेरे प्रभु मुझसे ऐसी कौन सी भूल हो गई थी कि आपने मुझसे मेरा हँसता खेलता परिवार छीन लिया मुझे बताइए कि अब मैं क्या करूं माधव। श्री कृष्ण सब सुन रहे थे और मंद - मंद  मुस्का  रहे थे। अब वो तो सर्व ज्ञाता है उनसे भला कौन सी बात आज तक छुपी है। कुछ समय बाद राम अपनी बासुरी निकलता है और मंदिर के दरवाजे पर बैठ कर बांसुरी बजाने लगता है लेकिन आज उसकी बांसुरी की धुन थोड़ी अलग थी आज उसकी बांसुरी की धुन में परिवार से बिछड़ने का दुख था। अचानक वह बासुरी बजाना बंद कर रोने लगता है और श्री कृष्ण की मूर्ति के पास जाकर बैठ जाता है। श्री कृष्ण से अब अपने भक्त का दुख देखा नहीं जाता वो अपना वेश बदलकर एक  बड़े अमीर आदमी का वेश धारण कर लेते हैं और राम के बेटों के पास जाकार कहते हैं कि अरे बच्चों तुम्हारे पिता कहा हैं। राम के बेटे यह सुनकर उन्हें अंदर बुलाते है और कहते हैं कि आइए श्रीमान बताइए कुछ काम था क्या ? वो कहते है हा था तो लेकिन तुम्हारे पिता जी से था। तुम्हारे पिता जी बहुत अच्छे आदमी है वह सबकी मदद करते है भगवान उन्हें हमेशा खुश रखें यह सारी बाते श्री कृष्ण केवल इसलिए बोल रहे थे ताकि वो उन्हें उनकी गलती का एहसास दिला सके कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है अपने पिता यानि राम से दूर होकर । श्री कृष्ण कहते हैं कि तुम्हें पता है तुम्हारे पिता जैसा कोई है ही नहीं इसलिए तो हम सभी मिलकर उन्हें सम्मानित करना चाहते है।वो उनसे कहते है कि तुम्हें पता है आज कल के तो बच्चे अपने माता पिता को कुछ समझते ही नहीं है लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि  तुम दोनों बेटे ऐसे नहीं हो और होंगे भी कैसे इतना अच्छा पिता जो मिला है तुम्हें जिसने तुम्हारी माँ के गुज्जर जाने के बाद तुम्हें माँ की कमी कभी महसूस नहीं होने दी। यह सारी बाते सुनकर राम के बेटों को अपनी गलती का अहसास होता हैं और वो अपने पिता जी के पास जाते हैं और कहते है कि हमे माफ कर दीजिये हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई । यह सब देखकर राम अपनी आँखों पर भरोसा नहीं कर पता और अपने दोनों बेटों को गले से लगा लेता है और कहता है। हे श्री कृष्ण तुम अपरम पारी हो तुमने मेरे दोनों बेटे मुझे लौटा दिए तुम्हारा कोटि कोटि धन्यवाद। ये घटना राम के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थीं। अब उसकी आँखो में आंशू तो थे लेकिन केवल और केवल खुशी के।              

संदेस:  अगर भक्ति सच्ची और पवित्र हो तो भगवान आपकी सदैव मदद करते हैं।

 :- अनामिका