अधूरी उड़ान - 2 piyu bhuva द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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अधूरी उड़ान - 2

सीया फिरसे एक बार दुखी हो गयी, पर वो घर में क्लेश नही कॄीसी भी बात पर इसा नही चाहती थी। इसलिए वो hostel चली गयी।

हॉस्टल में जाने के बाद भी कोरोना वायरस की बीमारी का खतरा तो था ही पर वो अपने सपनों के साथ जीने लगी।

कोरोना वायरस ने उसके मन को कुछ ऐसा हुआ था। की उसका पढ़ाई में से रस उडने लगा था। फिर भी वो पढ़ाई करती थी। पर वो सिर्फ सब कुछ सहती थी।

उसने जैसे तैसे करके 12वीं की पढ़ाई तक सब पूरा कर लीया अब बारी थी college में भी नई लाइन चुनने की।

सीया के पापा का transfer दुसरी जगह हो गया था। इसलिए वो उसकी मम्मी, भाई सब अलग रहने चले गये ये बात भी सीया की चाची को पसंद नही आयी।

सीया की चाची की सब जगह चलती थी। बस वो सीया के पापा से डरती थी।

जब वो बिहार जाने वाले थे। तभी भी उन्होंने सीया की मम्मी को ताना मार दीया था।

 हाँ आओ आओ अब तक साथ रहे लेकिन अब सबको पंछी की तरह की आजाद जिंदगी मे रहना है। बडे हो इसलिए मनमानी चलती है हमारी तो कोई कुछ नही सुनता।

 ये सब सुनकर भी सीया की मम्मी ने कुछ नही बोला।
वो लोग बिहार में खुशी से रहने लगे। सिया भी बहुत खुश थी कि अब उसे हॉस्टल में नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन सिया के पापा चाहते थे कि सिया कंप्यूटर की लाइन में आगे बढ़े। सिया अपने पापा की बात टालना नहीं चाहती थी। इसलिए उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई कंप्यूटर के कोर्स से की।सिया को कंप्यूटर के किसी भी कोर्स में रुचि नहीं थी। वह चाहती थी कि वह जर्नलिज्म (पत्रकारिता) की पढ़ाई करके फिर एक राइटर (लेखक) बनेगी, लेकिन वह किसी से भी कुछ कह नहीं पाती थी।सिया को उसमें कुछ भी समझ में नहीं आता था। इसलिए दो साल तक वह पढ़ाई में सिर्फ रट्टा मारती रही। सिया फिर भी सब कुछ समझने की कोशिश करती रहती थी।कॉलेज के तीसरे साल में सिया को लगा कि उसे राइटर बनने के लिए सिर्फ पढ़ाई करने की ज़रूरत नहीं पड़ती, बल्कि उसे लिखना आना चाहिए। सिया को सब कुछ आता था, लेकिन उसे किस तरीके से लिखा जाता है, वह यह सीखने लगी। उसने अपने घर में किसी को भी नहीं बताया था कि वह यह सब भी सीख रही है। वह अपने सपनों को एक उड़ान देना चाहती थी, जो उड़ान अधूरी रह गई थी। वह अपने कॉलेज के तीसरे साल में भी अच्छे से सब पढ़ाई करने लगी, क्योंकि अब उसे पता चल गया था कि यह पढ़ाई करते हुए भी उसका राइटर बनने का सपना पूरा हो सकता है।
सिया पहले यह समझना चाहती थी कि वह जो लिख रही है, वह लोगों को समझ आता है या नहीं। इसलिए वह यह भी जानना चाहती थी कि वह जो लिख रही है, उसे लोग पसंद करते हैं या नहीं। इसके लिए उसने 'मातृभारती' (Matrubharti) ऐप को चुना; क्योंकि उसने लिखना भी उसी से सीखा था। 

अब सिया की कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। उसने अपने कॉलेज के आखिरी साल में यह सीखा था कि अपने सपने हर तरह से पूरे किए जा सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने का जुनून होना चाहिए। सिया अब अपने साथ-साथ अपने पापा का सपना भी पूरा करना चाहती थी। उसने अपने पापा का सपना पूरा करने के लिए कंप्यूटर में मास्टर्स करने का सोचा। सिया के पापा इस बात से बहुत खुश हुए और साथ में सिया भी बहुत खुश थी; क्योंकि उसने जो अपनी कहानी मातृभारती ऐप पर डाली थी, उसे लोगों ने बहुत पसंद किया था। 

कुछ दिनों बाद सिया अपने माता-पिता के साथ एक शादी में गई। वहाँ उसके रिश्तेदारों में से किसी ने सिया से कहा, "सिया, अब आगे क्या करने वाली हो, शादी?" यह कहकर वे लोग हँसने लगे। तब सिया ने कहा, "नहीं, अभी तो मैं मास्टर्स करूँगी, अपनी आगे की पढ़ाई।" 

तब एक आदमी ने बोला, "अब आगे पढ़ाई करके कुछ नहीं मिलेगा, इस कंप्यूटर की लाइन में कुछ नहीं रखा है। अब शादी कर लो। पापा के पैसे फीस में मत बिगाड़ो।" ऐसा कहकर वे वापस हँसने लगे। सिया को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा, पर उसके पापा दुखी हो गए। सिया ने अपने पापा को समझाया कि लोगों की बातों पर ऐसे ध्यान नहीं दिया जाता। पर अब सिया ने ठान लिया था कि अब वह ऐसा कुछ करेगी कि सब लोग देखते रह जाएँगे। 

अब आगे सिया ने क्या किया होगा?