जब मेरी बेटी आई, तो लगा जिंदगी बदल गई।
पहले दिन रात एक जैसी लगती थी। रोना, दूध, फिर से रोना... मैं थक जाती थी।
पर इसी थकान के बीच उसने मुझे 3 सबसे बड़ी बातें सिखाईं।
1. सब्र करना सीखा
पहले मैं हर छोटी बात पर चिड़चिड़ी हो जाती थी। पर जब रात 3 बजे भी वो उठकर रोती थी, तो समझ आया कि प्यार में सब्र सबसे जरूरी है। वो बिना बोले मुझे सिखा गई कि इंतजार करने से भी रिश्ते गहरे होते हैं।
2. छोटे पलों में खुशी देखना
उसके छोटे-छोटे पैर, उसकी पहली हंसी, मेरा हाथ पकड़ लेना... पहले ये सब नॉर्मल लगता था। अब यही मेरी सबसे बड़ी खुशी है।
उसने सिखाया कि असली बरकत बड़ी चीजों में नहीं, इन्हीं छोटे लम्हों में होती है।
3. खुद से प्यार करना
माँ बनकर पहले मैं बस उसके बारे में सोचती थी। पर जब मैं थक कर टूट जाती थी, तो वो मुझे देखकर मुस्कुरा देती थी।
तब समझ आया कि अगर मैं खुश रहूंगी, तभी वो भी खुश रहेगी। इसलिए अब मैं भी अपने लिए थोड़ा समय निकालती हूँ।
आज जब मैं उसके पैर देखती हूँ ना, तो लगता है यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
वो मेरी बेटी नहीं, मेरी "बरकत है।
कभी-कभी रात को जब सब सो जाते हैं, मैं चुपके से उसके पास जाकर बैठ जाती हूँ। उसके सांस लेने की आवाज सुनती हूँ। उसका छोटा सा हाथ मेरे हाथ में होता है। उस वक्त लगता है दुनिया की सारी दौलत मेरे पास है।
लोग कहते हैं बेटियों को पालना मुश्किल है। पर वो नहीं जानते कि बेटी क्या होती है। बेटी घर में रौनक लाती है। बेटी माँ को माँ बनाती है। मेरी बेटी ने मुझे सिखाया कि प्यार करना क्या होता है, बिना किसी शर्त के।
पहले मैं सोचती थी कि माँ बनते ही सब कुछ अपने आप आ जाएगा। पर सच तो ये है कि बच्चा हमें हर दिन कुछ नया सिखाता है। कभी धैर्य, कभी हिम्मत, कभी हंसना। जब वो गिरती है और फिर खुद उठने की कोशिश करती है, तो मुझे भी हिम्मत आती है। जब वो छोटी सी बात पर इतना खुश हो जाती है, तो मैं भी छोटी खुशियों की कदर करने लगती हूँ।
सबसे बड़ी बात ये कि उसने मुझे खुद से मिलवाया। माँ बनने से पहले मैं बस भागती रहती थी। काम, घर, जिम्मेदारी। पर अब मुझे पता चला कि रुककर जीना भी जरूरी है।
आज जब भी मैं उदास होती हूँ, बस उसे देख लेती हूँ। उसकी एक झलक सारे गम भुला देती है। वो मेरी ताकत है, मेरी दुआ है, मेरी पहचान है।
कहते हैं औलाद माँ-बाप का आईना होती है। मेरी बेटी मेरा सबसे साफ आईना है। उसमें मुझे अपनी गलतियाँ भी दिखती हैं और मेरी अच्छाइयाँ भी। इसलिए मैं हर रोज उससे कुछ न कुछ सीखती हूँ। और सीखते-सीखते मैं भी रोज थोड़ी बेहतर बन रही हूँ।
वो सच में मेरी "बरकत" है। भगवान सबको ऐसी बरकत दे।आज जब लोग मुझसे पूछते हैं कि माँ बनकर कैसा लगता है, तो मैं बस मुस्कुरा देती हूँ। क्योंकि ये एहसास शब्दों में नहीं बताया जा सकता। ये तो सिर्फ जीकर ही समझा जा सकता है। मेरी बेटी मेरी जिंदगी है।