# एपिसोड 1: सादगी का सायाफाजिल्का के कॉलेज की वह सुबह कुछ अलग ही थी। आसमान पर हल्की सी धुंध छाई हुई थी और सर्द हवा के झोंके जब गालों को छूते थे, तो सिहरन सी पैदा हो जाती थी। कॉलेज के लाल ईंटों वाले पुराने गलियारों में इस वक्त छात्रों की चहल-पहल थी। उसी भीड़ के बीच से तीन दोस्तों की हँसी साफ सुनाई दे रही थी।आर्यन ठीक बीच में चल रहा था—कॉलेज का वह लड़का जिसे सब उसकी किताबों और सादगी के लिए जानते थे। उसके चेहरे पर कभी कोई शिकन नहीं दिखती थी, बस एक सीधी-सच्ची मासूमियत थी जिसे देखकर कोई भी कह दे कि इस बंदे ने आज तक किसी का बुरा सोचना तो दूर, बुरा चाहा ही नहीं होगा। उसके ठीक दाएं और बाएं, साये की तरह उसके दो पक्के यार—सनी और लकी चल रहे थे। दोनों का मिजाज ऐसा था कि अगर कोई आर्यन की तरफ आँख उठाकर भी देख ले, तो वो बिना सोचे-समझे उससे भिड़ जाने का दम रखते थे। आर्यन की छोटी सी दुनिया में बस उसकी टेक्स्टबुक्स और ये दोनों यार ही शामिल थे।तभी सनी ने चलते-चलते अपना भारी हाथ प्यार से आर्यन के सिर पर दे मारा और हँसते हुए बोला, "ओए आर्यन, तू सारी उम्र इन किताबों में ही घुसा रहेगा या कभी बाहर की दुनिया भी देखेगा? जवान है भाई, थोड़ा इधर-उधर भी ध्यान दे ले!"लकी ने भी अपनी हँसी दबाते हुए तुरंत हामी भरी और आर्यन को छेड़, "सही कह रहा है सनी! लगता है बुढ़ापे तक यही हाल रहेगा इसका।"आर्यन ने कोई लंबी-चौड़ी बात नहीं की। उसने बस अपनी वही जानी-पहचानी शांत और मीठी सी मुस्कान बिखेर दी, जिसमें दुनिया भर का सुकून था। इश्क और मोहब्बत की इन बातों से उसका कभी कोई वास्ता नहीं रहा था; वो इन सबसे कोसों दूर अपनी ही धुन में रहता था।लेकिन, कॉलेज का माहौल सिर्फ दोस्तों की हँसी तक सीमित नहीं था। उसी कैंपस में एक दूसरा कोना भी था, जहाँ रिया का नाम गूँजता था। रिया—यानी कॉलेज का वह चेहरा जिसके नखरे और जिसकी अदाओं के चर्चे हर लड़के की जुबान पर थे। उसके तौर-तरीके, उसकी तैयारियाँ, सब कुछ ऐसा था कि हर कोई उसे देखता रह जाए। आर्यन और रिया दो बिल्कुल अलग दुनिया के किनारे थे। जहाँ आर्यन की सादगी ज़मीन की तरह शांत और सीधी थी, वहीं रिया के अरमान आसमान छूने वाले और चमक-दमक से भरे थे।फिर भी, कुदरत के खेल अजीब होते हैं। न जाने क्या हुआ कि उस दिन रिया की नजरें अचानक कॉलेज के बीचों-बीच खड़े उस सीधे-सादे आर्यन पर टिक गईं। उसने कुछ देर उस लड़के को गौर से देखा, जिसकी दुनिया किताबों से शुरू होकर दोस्तों पर खत्म होती थी।दोपहर का वक्त था। कैंटीन के पास अच्छी-खासी भीड़ लगी हुई थी और चाय की चुस्की के साथ गपशप चल रही थी। तभी अचानक रिया की सबसे करीबी सहेली भीड़ को चीरती हुई सीधी आर्यन के सामने आकर खड़ी हो गई और उसका रास्ता रोक दिया।"आर्यन... सुनो," सहेली ने थोड़ा रुककर कहा, "रिया तुमसे मिलना चाहती है... लाइब्रेरी के पीछे।"वहाँ खड़े सनी और लकी एकदम से चौंक गए। उनके चेहरे की हँसी पल भर में गायब हो गई और दोनों का माथा ठनक गया।लकी ने अपनी आँखें सिकोड़ते हुए फुसफुसा कर कहा, "ओए! ये रिया... अचानक हमारे सीधे-सादे आर्यन से क्या चाहती है? दाल में कुछ तो काला है!"सनी ने भी तुरंत आर्यन का कंधा पकड़कर उसे पीछे खींचते हुए चेताया, "तुझसे कह रहा हूँ भाई, उधर मत जा। इन लोगों के नखरे अलग ही होते हैं, ये हमारे मतलब की चीज़ नहीं है।"दोनों यार उसे बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे थे, क्योंकि उन्हें रिया की आँखों में छिपी वो चालाकी साफ दिख रही थी जो आर्यन के भोलेपन की पकड़ से बाहर थी। लेकिन आर्यन का दिल... वह दिल जो आज तक एक ही रफ्तार से धड़कता आया था, पहली बार किसी अनजाने और अजीब से एहसास से कांप उठा था। दोस्तों की लाख मनाही और चेतावनियों के बावजूद, आर्यन के कदम खुद-ब-खुद लाइब्रेरी के सुनसान पीछे वाले हिस्से की तरफ मुड़ गए।जब वो वहाँ पहुँचा, तो हल्की ठंडी हवा चल रही थी और उस हवा में रिया के लंबे बाल उसके चेहरे पर उड़ रहे थे। आहट पाकर रिया ने जैसे ही मुड़कर देखा, उसकी नज़रें सीधे आर्यन की आँखों में जाकर ठहर गईं। उसने चेहरे पर एक ऐसी मीठी और नशीली मुस्कान लाई, जिसे देखते ही आर्यन का दिमाग काम करना बंद कर गया। वह उस एक पल में बिना कुछ सोचे-समझे जैसे उस गहराई में उतरता चला गया।रिया धीरे-धीरे चलकर उसके और करीब आई। उसने अपनी नशीली पलकें थोड़ी झुकाईं और फुसफुसाते हुए बोली, "तुम्हारी ये सादगी... मुझे बहुत अच्छी लगती है आर्यन।"वह पल बहुत छोटा था, किसी धुंध के झोंके जैसा मासूम। लेकिन उस एक छोटे से पल ने आर्यन के भीतर हलचल मचा दी। उसे ऐसा लगा जैसे उसने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी अपने जैसे इंसान से ऐसा गहरा जुड़ाव महसूस किया हो, जो सीधे उसकी रूह में उतर गया था।