द परफेक्ट कपल! Santoshi 'katha' द्वारा मनोविज्ञान में हिंदी पीडीएफ

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द परफेक्ट कपल!

 

 

परफेक्ट कपल..!

 

ये टाइटल पाने के लिए दो लोगों को अपनी आधी जिन्दगी imperfect होकर गुजारनी पड़ती है एक दूसरे के साथ...

दोनों को खुद के व्यवहार , विचार, रहन-सहन और नज़रिए में बहोत सारे उतार चढ़ाव लाने पढ़ते हैं। 

एक-दूसरे को सही मायने में हर तरह से जिनमें सिर्फ गुण, और अच्छाई नहीं बल्कि खामियों और बुराइयों को भी अपनाना पड़ता है।

 

उन्हें या तो कमियों को सुधरने के लिए एक दूसरे को प्रेरित करना होता है। या फिर उसके अनुसार खुद को ढालकर जीने की आदत बना लेनी होती है।

कई बार हमें खुद को मजबूर भी करना होता है। खुद में बदलाव करने होते हैं। कुछ छोड़ना होता है, कुछ को खुद से जोड़ना होता है।

तब जाकर कहीं आप इस कैटिगरी के आसपास पहुंच पाते हो।

 

पर देखा जाए तो, परफेक्ट कपल जैसा इस दुनिया में कुछ नहीं होता। क्योंकि...

 

अपनी नजर में आप कितने भी परफेक्ट बन जाओ, लोगो की नज़र में आप में कुछ ना कुछ कमी तो निकल ही जाऐगी। तो रिश्ते में परफेक्शन ( perfection ) लाने के बजाए dadication लाओ,, गर चुन ही लिया है अपने जीवनसाथी के रूप में उन्हें, गर बंध ही गया है वो आपके रिश्ते से, तो उसे सच्चे मन और सम्मान से अपनाओ...

 

पर हां ये जरूर नहीं कि आप ही उसे अपनाओ, प्यार और सम्मान दो, उसे भी आपके साथ क़दम ताल करना होगा वरना ये रिश्ता लोगों की नजर में परफेक्ट भले दिखाई दे,, पर असलियत तो आप दोनों को पता ही होंगी। 

 

और ये भी जरूरी नहीं कि आप एक रिश्ते को परफेक्ट बनाने के चक्कर में अपना सब कुछ छोड़ दें। खुद को भुल जाए, फिर चाहे वो रिश्ता कोई भी हो...

 

खुद को खुद में जींदा रखना बहोत जरूरी है। क्योंकि निष्प्राण चीजें ज्यादा देर तक टिकती नहीं है। या तो वो सजाने के काम आती है। या फिर जलाने और दफनाने के...

 

कुल मिलाकर कहें तो लोग परफेक्ट कभी नहीं हो सकतें, जोड़ियां परफेक्ट कभी नहीं हो सकती, अरे भगवान के लिए अवतार भी कभी परफेक्ट ना दिख पाए, 

कुछ ना कुछ अधुरा, कमतर उनमें भी बना रहा।

तो हम इन्सानों से इस तरह की अपेक्षा कैसे रख सकते हैं। 

 

बस कोशिश करें जो भी रिश्ता निभा रहे उसे पुरे दिल से, सम्मान, प्यार और अपनेपन से निभाएं, बस यही परफेक्ट कपल होने की निशानी है। और एक अच्छे इन्सान होने की भी.... 

पर.... लेकिन... किन्तु.... परन्तु...

 

एक बात, आपका रिश्ता दुनिया में सबसे पहले आपसे जुड़ा है। फिर दुसरो से तो पहले खुद के साथ खुद की जोड़ी को परफेक्ट बनाओ, और पहले अपने आप से परफेक्ट कपल बन जाओ। फिर कुछ बात बनेगी यार क्योंकि उसके साथ परफेक्ट कपल बनना ज्यादा आसान है, दुसरो के मुकाबले...... क्यों....? 

 

क्या मैं सही हूं? या मैं सही हूं! 

 

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चलो आज की कथा यही समाप्त करते हैं। आप लोग इस कथा में भाग लेने आए, इसे पढ़ा, आपका धन्यवाद 🙏🏻 यह हमारे विचार है। यदि आप कुछ कहना चाहे तो कमेंट में खुल कर बताएं, आपके शब्दों का स्वागत है।

 

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