आधी रात का यात्री। kiran द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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आधी रात का यात्री।

आधी रात का यात्री

बरसात की एक ठंडी रात थी। घड़ी में ठीक बारह बज रहे थे। छोटे से गाँव भैरवपुर का रेलवे स्टेशन लगभग सुनसान था। स्टेशन मास्टर रमेश अपनी ड्यूटी पूरी करने ही वाला था कि तभी एक पुरानी ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी। हैरानी की बात यह थी कि उस ट्रेन का उस स्टेशन पर रुकने का कोई समय नहीं था।

ट्रेन से केवल एक बूढ़ा आदमी उतरा। उसके हाथ में पुराना चमड़े का बैग था और चेहरे पर अजीब सी मुस्कान। उसने रमेश से पूछा, "बेटा, यहाँ से पुराने शिव मंदिर का रास्ता किधर है?"

रमेश ने रास्ता बता दिया, लेकिन उसके मन में सवाल उठने लगे। इतनी रात को कोई उस वीरान मंदिर में क्यों जाएगा?

जिज्ञासा के कारण रमेश भी चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा। मंदिर के पास पहुँचते ही बूढ़ा आदमी अचानक रुक गया। उसने बैग खोला और उसमें से एक छोटी-सी लकड़ी की पेटी निकाली। जैसे ही उसने पेटी मंदिर की सीढ़ियों पर रखी, तेज हवा चलने लगी और आसमान में बिजली चमक उठी।

रमेश डर गया। तभी बूढ़ा आदमी बोला, "डर मत। मैं अपना वादा निभाने आया हूँ।"

इतना कहकर उसने पेटी खोली। उसके अंदर एक पुरानी चाँदी की घंटी थी। उसने घंटी मंदिर में चढ़ा दी। अचानक मंदिर के अंदर लगी घंटियाँ अपने आप बजने लगीं। पूरा वातावरण रहस्यमय हो गया।

रमेश ने हिम्मत करके पूछा, "आप कौन हैं?"

बूढ़ा मुस्कुराया और बोला, "पचास साल पहले मैंने भगवान से वादा किया था कि अगर मेरा बेटा युद्ध से सही-सलामत लौट आया, तो मैं यह घंटी यहाँ चढ़ाऊँगा। लेकिन हालात ऐसे बने कि मैं कभी लौट नहीं पाया। आज मैंने अपना वादा पूरा कर दिया।"

इतना कहकर वह धीरे-धीरे मंदिर की सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा। तभी एक और बिजली चमकी, और अगले ही पल वह कहीं दिखाई नहीं दिया।

रमेश घबरा गया। उसने चारों ओर खोजा, लेकिन बूढ़े का कोई निशान नहीं मिला। केवल उसका पुराना बैग वहीं पड़ा था।

अगली सुबह गाँव के बुज़ुर्गों ने बैग देखा। उसके अंदर एक धुंधली काली-सफेद तस्वीर थी। तस्वीर देखकर सबकी आँखें फैल गईं। वह उसी बूढ़े की तस्वीर थी, लेकिन तस्वीर के नीचे लिखा था—

"शहीद सैनिक गोविंद शर्मा – निधन: 1976"

रमेश के हाथ काँपने लगे। जिस व्यक्ति से वह रात भर बात करता रहा, वह तो पचास साल पहले ही इस दुनिया को छोड़ चुका था।

उस दिन के बाद गाँव के लोगों ने मंदिर की घंटी को चमत्कारी मानना शुरू कर दिया। कहते हैं, जो भी सच्चे मन से वहाँ प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। लेकिन आज भी बरसात की कुछ रातों में, ठीक बारह बजे, उसी स्टेशन पर एक पुरानी ट्रेन कुछ मिनटों के लिए रुकती है। लोग कहते हैं कि कभी-कभी एक सफेद कपड़ों में बूढ़ा यात्री उतरता दिखाई देता है, फिर मंदिर की दिशा में चलता है और सुबह होने से पहले रहस्यमय तरीके से गायब हो जाता है।

आज तक कोई नहीं जान पाया कि वह वास्तव में आत्मा थी, भगवान का दूत था, या फिर अपने अधूरे वादे को निभाने लौटा एक सच्चा इंसान। या फ़िर कोई कहानी थीं आप बताओ आपको क्या लगता हैं।।