रात और दिन...
दोनों का इस कमरे में कोई अस्तित्व नहीं था।
छोटे से, जर्जर अपार्टमेंट के एक कमरे की हर दीवार किसी पागल इंसान के दिमाग की तरह दिखाई दे रही थी।
दीवारों पर सैकड़ों तस्वीरें टंगी थीं।
कहीं वर्षों पुराने मर्डर केस...
कहीं पहचान से परे विकृत लाशें...
कहीं खून से सने अजीब प्रतीक...
कहीं इंसानों जैसी आकृतियाँ, जिनके चेहरे धुंधले थे, मानो कैमरा भी उन्हें ठीक से कैद न कर पाया हो।
हर तस्वीर एक लाल मार्कर की मोटी रेखा से दूसरी तस्वीर से जुड़ी हुई थी।
कुछ जगहों पर तारीखें लिखी थीं...
कुछ जगहों पर प्रश्नचिह्न...
और सबसे बीच में एक तस्वीर लगी थी।
एक काले धातु की पुरानी बैंगल।
उसके नीचे लाल अक्षरों में केवल दो शब्द लिखे थे—
"DON'T TOUCH."
कमरे में फैली खामोशी को अचानक मोबाइल के अलार्म ने तोड़ दिया।
ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग...
बिस्तर पर सोया एक दुबला-पतला युवक करवट बदल गया।
उसके बिखरे हुए काले बाल चेहरे पर आ गिरे।
आंखों के नीचे पड़े गहरे काले घेरे साफ बता रहे थे कि उसने कई रातों से ठीक से नींद नहीं ली थी।
उसने बिना आंखें खोले मोबाइल उठाया।
तीन बार स्क्रीन पर उंगली फिसली...
चौथी बार जाकर अलार्म बंद हुआ।
"...सुबह हो गई?"
उसने उनींदी आवाज़ में बड़बड़ाया।
कुछ सेकंड तक वह छत को घूरता रहा, फिर बिना किसी उत्साह के बिस्तर से नीचे उतरा।
न ब्रश...
न नाश्ता...
न चाय...
वह सीधे कंप्यूटर के सामने जाकर बैठ गया।
बीप!
कंप्यूटर ऑन हुआ।
स्क्रीन पर एक गेम खुला।
अगले ही पल उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड और माउस पर ऐसी रफ्तार से चलने लगीं कि उन्हें देख पाना मुश्किल था।
उसके चेहरे पर पहली बार हल्की-सी जान लौटी।
उसकी आंखों में चमक आ गई।
मानो अभी तक जो इंसान कमरे में था...
वह असली Aiden Cross नहीं था।
असली Aiden तो अब जागा था।
घंटों बीत गए।
स्क्रीन पर जीत का संदेश चमका।
VICTORY
Aiden हल्का-सा मुस्कुराया।
"कम से कम... यहां तो हारता नहीं हूँ।"
उसी समय उसकी नजर मेज के कोने पर रखे सफेद प्लास्टिक के डिब्बे पर पड़ी।
उसने उसे उठाकर खोला।
खाली।
एक भी गोली नहीं बची थी।
उसका चेहरा तुरंत गंभीर हो गया।
"...आज ही खत्म होनी थी?"
उसने गहरी सांस ली।
कुछ पल तक वह उस खाली डिब्बे को घूरता रहा।
फिर जल्दी से जैकेट उठाई और अपार्टमेंट से बाहर निकल गया।
बाहर की हवा ठंडी थी।
सड़क पर सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा भीड़ थी।
लोग एक ही दिशा में भागे जा रहे थे।
कई पुलिस की गाड़ियाँ सड़क पर खड़ी थीं।
लाल और नीली लाइटें लगातार चमक रही थीं।
Aiden के कदम अनायास रुक गए।
उसकी सांसें अचानक तेज हो गईं।
उसने भीड़ की दिशा में देखा।
एक अपार्टमेंट बिल्डिंग को पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा था।
पीले रंग की क्राइम-सीन टेप हवा में फड़फड़ा रही थी।
लोग आपस में धीमी आवाज़ में बातें कर रहे थे।
"सुना है कॉलेज की लड़की थी..."
"कह रहे हैं रात में मरी है..."
"लेकिन चीख किसी ने नहीं सुनी..."
Aiden के चेहरे का रंग उड़ गया।
उसने बिना किसी को बताए भीड़ से दूर रास्ता बदल लिया।
वह सामने वाली इमारत की आड़ में जाकर खड़ा हो गया।
वहां से पूरा क्राइम सीन साफ दिखाई दे रहा था।
उसकी निगाहें बेचैनी से हर चीज़ को देखने लगीं।
तभी बिल्डिंग के अंदर से एक लंबा, मजबूत कद का युवक बाहर निकला।
काले बाल...
साफ-सुथरी पुलिस यूनिफॉर्म...
तीखी भूरी आंखें...
उसके चेहरे पर अनुभव झलक रहा था, लेकिन थकान भी साफ दिखाई दे रही थी।
उसकी नेमप्लेट पर लिखा था—
Ethan Carter
शहर की क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट का सबसे युवा अधिकारी।
Ethan के हाथ में एक पारदर्शी एविडेंस बैग था।
उस बैग के अंदर रखी चीज़ को देखते ही Aiden की पुतलियाँ सिकुड़ गईं।
"...नहीं..."
उसके होंठों से अनजाने में निकला।
बैग के अंदर वही पुरानी काली धातु की बैंगल रखी थी।
उस पर सूखा हुआ खून जमा था।
पूरी सतह पर किसी अनजानी भाषा में शब्द उकेरे गए थे।
Aiden की उंगलियाँ कांपने लगीं।
"ये... यहां कैसे पहुँची...?"
दूसरी तरफ Ethan अपने साथी अधिकारी से बोला,
"इसे तुरंत फॉरेंसिक लैब भेजो।"
"जी, सर।"
"एक भी फिंगरप्रिंट मिस नहीं होना चाहिए।"
"यस, सर।"
Aiden का गला सूख गया।
उसने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं।
उसके चेहरे पर पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था।
ऐसा डर...
जो किसी हत्या को देखकर नहीं...
बल्कि उस बैंगल को देखकर पैदा हुआ था।
कुछ सेकंड तक वह वहीं खड़ा रहा।
फिर अचानक मुड़ा और तेज़ कदमों से वापस चल दिया।
वह दवाई लेने आया था...
लेकिन अब उसे दवाई तक याद नहीं थी।
उसके दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा था—
"अगर वो बैंगल फिर से मिल गई है... तो इसका मतलब..."
उसने वाक्य पूरा नहीं किया।
उसकी चाल धीरे-धीरे दौड़ में बदल गई।
उसी समय...
क्राइम सीन के बाहर खड़ा Ethan Carter आखिरी बार अपार्टमेंट की ओर मुड़ा।
"Emily Ross..."
उसने धीमी आवाज़ में मरी हुई लड़की का नाम दोहराया।
"तुम्हारे साथ आखिर हुआ क्या था...?"
उसे अंदाजा भी नहीं था...
कि यह केस उसके करियर का सबसे कठिन केस नहीं बनने वाला था।
बल्कि...
यह वह दरवाज़ा था...
जो उसकी पूरी दुनिया बदलने वाला था.
रात के साढ़े नौ बजे...
Westbridge City Forensic Center
पूरी इमारत असामान्य रूप से शांत थी।
सफेद रोशनी से जगमगाते पोस्ट मार्टम रूम के बीचों-बीच स्टील की मेज पर Emily Ross की बेजान लाश रखी थी।
कमरे में मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर गंभीरता थी।
फॉरेंसिक विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ, Dr. Samuel Hayes, अपने दस्ताने ठीक करते हुए धीमे कदमों से शव के पास पहुंचे।
उनके सामने खड़े थे—
Detective Ethan Carter.
Ethan ने पूरे दिन दर्जनों हत्या के मामले देखे थे।
लेकिन न जाने क्यों...
इस केस में कदम रखते ही उसके मन में एक अजीब बेचैनी पैदा हो गई थी।
Dr. Hayes ने धीरे से चादर हटाई।
Emily का चेहरा बिल्कुल शांत था...
मानो वह सिर्फ सो रही हो।
अगर कोई उसके शरीर को देखता, तो शायद कभी विश्वास ही न करता कि उसकी हत्या हुई है।
क्योंकि...
उसके शरीर पर एक भी खरोंच नहीं थी।
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