अभी तक आपने पढ़ा कि रितु ने किशन और उसके दोस्तों को बदले की राह पर जाने से रोक दिया और समझाया कि बीना को उसके कर्म ही सबसे बड़ी सज़ा देंगे। उसने बताया कि पंकज का प्यार कभी बीना को नहीं मिलेगा और यही उसकी असली हार है। रात का यह भावुक दृश्य पूरे परिवार ने देखा, और अगले दिन पंकज ने किशन से रितु से शादी करने की इच्छा जताई। अब इसके आगे पढ़ें-
इस समय हालात इतने ग़मगीन थे कि दुःख और दर्द हर पल परिवार के साथ जुड़े ही रहते थे। रितु के लिए पंकज के बोले उन शब्दों ने किशन के मन में एक नई उम्मीद जगा दी। उस समय अपनी भावनाओं को वह शब्द नहीं दे पा रहा था। उसकी हालत ऐसी हो रही थी कि जैसे किसी ने उसकी झोली में दुनिया की सबसे कीमती वस्तु डाल दी हो।
पंकज ने पूछा, "किशन क्या हुआ? तुम कुछ बोल क्यों नहीं रहे।"
तब किशन ज़ोर से रो पड़ा। उसे रोता सुन पंकज समझ गया कि किशन इस समय कुछ भी बोल सकने की हालत में नहीं है।
तब उसने कहा, "किशन, मैं तुम्हारे दिल का हाल समझ सकता हूँ। हम बाद में बात करेंगे, जब तुम ठीक महसूस करो, तब मुझे फ़ोन करना। बस मेरी यह ख़्वाहिश रितु को ज़रूर बता देना। मैं उसकी हाँ का इंतज़ार करूँगा।"
पंकज ने किशन से बात करने के पहले अपने मम्मी-पापा से रितु के बारे में बात करके उन दोनों को रितु के बलात्कार के विषय में बता दिया था।
अपनी मम्मी को बताते हुए उसने कहा, "मम्मी, मैंने आपसे रितु के बारे में बात की थी कि मैं उससे प्यार करता हूँ।"
"हाँ-हाँ बेटा, हम भी तो तेरे प्यार का सम्मान करते हैं। हम खुश हैं, तू रितु से विवाह कर सकता है। यह बात तो हम पहले ही कर चुके हैं। फिर आज क्यों...?"
"नहीं मम्मी, जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ, उसे सुनकर आप लोग हैरान हो जाएंगे।"
"ऐसी क्या बात है, पंकज?"
"मम्मी-पापा, उस दिन मैं अचानक शहर चला गया था।"
उसकी मम्मी ने कहा, "हाँ, तो क्या हुआ?"
"उस दिन रितु का सामूहिक बलात्कार हुआ था।"
उसकी मम्मी ने कहा, " क्या! ये तू क्या कह रहा है पंकज? कैसी है हमारी रितु?
तभी पंकज के पापा ने उसकी मम्मी शोभना की तरफ़ देखकर कहा, "हमारी रितु? यह तुम क्या कह रही हो शोभना? बलात्कार हुआ है उसका?"
"हाँ मदन, सुना मैंने, उसका बलात्कार हुआ है। इसमें उस बेचारी की क्या गलती है?"
"अरे पर वह हमारे घर की बहू कैसे...?"
"क्यों नहीं मदन? वही हमारे घर की बहू बनेगी। मैं भी एक स्त्री हूँ, उसकी और उसके परिवार की मनोदशा को अच्छी तरह समझ सकती हूँ।"
शोभना की बात सुनकर मदन एकदम शांत हो गए और उन्होंने कहा, "सॉरी शोभना, मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था।"
फिर शोभना ने पंकज से कहा, "पंकज बेटा, तू चिंता मत कर। रितु हमारी थी और हमारी ही रहेगी।"
यह शब्द सुनते ही पंकज अपनी माँ के सीने से लग गया।
वह सोच रहा था माँ भी तो एक स्त्री है, दूसरी स्त्री की तकलीफ समझती है। लेकिन वह बीना ... वह कैसी है जो किसी स्त्री के साथ ऐसा कर सकती है।
इधर किशन ने अपने माता-पिता को पंकज से हुई बात बताई तो खुशी के आंसुओं ने उनकी आंखों को भिगो दिया।
किशन अच्छा मौका देखकर अपनी बहन रितु के पास गया।
उसने रितु के पास बैठकर बड़े ही प्यार से कहा, "जीजी पंकज जीजू का फोन आया था। वह बारात लेकर आना चाहते हैं अपने पापा मम्मी के साथ। मुझसे फोन पर तुम्हारा हाथ मांग रहे थे। मैंने तुमसे पूछे बिना ही हाँ कह दिया। जीजी मैंने कोई गलती तो नहीं की ना? जीजी यदि मैं चिराग लेकर पूरी दुनिया भी घूम आऊँ तो मुझे पंकज जीजू से ज्यादा अच्छा इंसान नहीं मिल सकता। तुम तैयार हो ना, जीजी? "
रितु ने अपने भाई के माथे को चूमते हुए कहा, "जब तू पूरी दुनिया में उससे अच्छा जीजू नहीं ढूँढ सकता तो मैं तेरा दिल कैसे तोड़ सकती हूँ। "
बस फिर क्या था पंकज का इंतजार भी पूरा हो गया। ढोल नगाड़ों की आवाज ने रितु के गांव में प्रवेश कर ही लिया और बड़ों के आशीर्वाद के साथ पंकज ने रितु को अपनी धर्म पत्नी बनाकर बीना के मुँह पर ऐसा तमाचा मारा जिसका दर्द उसे आजीवन होता रहेगा।
✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक
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