Oyy Mr. Vampire - 7 kusum kumari द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Oyy Mr. Vampire - 7

स्नोसिटी : 
रात का वक़्त : 

ध्रुविका ने अपने सामने खड़े लड़के को देखा ! जिसकी आँखें लाल और दाँत लम्बे हो गए थे।
उसकी आँखें बड़ी हो गईं !  उसे एक तेज़ झटका लगा। डर से उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया।

“तो क्या… क्या ये लड़का सच में एक पिशाच है?” 
ये ख़याल आते ही उसका दिमाग सुन्न पड़ गया ! और उसकी साँसें तेज़ हो गईं। वो अपनी जगह पर जम गई ! वो बस फटी आँखों से लड़के को देख रही थी।

लड़के ने एक पल को उसकी बढ़ी हुई साँसे  ! और सफ़ेद पड़े चेहरे को देखा ! और उसकी बड़ी-बड़ी आँखों पर नज़र पड़ी।
उसके होंठों पर एक टेढ़ी स्माइल आ गई। वह ध्रुविका की ओर थोड़ा झुका ! और अपना चेहरा उसकी गर्दन पर टिका दिया।

ध्रुविका सिहर उठी ! 
उसे एक ठंडापन महसूस हुआ ! जैसे किसी ने उसकी गर्दन पर बर्फ का टुकड़ा रख दिया हो।
वो और ज़्यादा सोचती, उससे पहले ही उसे गर्दन के पीछे उँगलियों का स्पर्श महसूस हुआ। उसकी आँखें घूमीं, और अगले ही पल लुढ़कते हुए वो लड़के की बाँहों में जा गिरी।

लड़के ने एक नज़र ध्रुविका को देखा और उसे अपनी बाँहों में उठा लिया। फिर तेज़ी से दरवाज़े से बाहर निकल गया।

कुछ ही सेकंड में वो ध्रुविका के उस सोफ़े के पास खड़ा था जिसमें वो सोती थी। उसने एक झटके से उसे सोफ़े पर फेंक दिया ! और आस-पास देखकर अपनी गर्दन के पीछे हाथ फेरा।

“ओह हो… क्या बात है, इसने तो मेरी हवेली पर क़ब्ज़ा कर लिया है।” 

उसने दोबारा घूरकर ध्रुविका को देखा ! वो औंधे मुँह बिस्तर पर पड़ी हुई थी।

“आआआ… ये लड़की! और वो रुद्रासिस का बच्चा!
कहा था उसको ! साले, यहाँ आने मत देना किसी को ! जब तक मैं जाग नहीं जाता। उस वक़्त तो उसने बड़े गर्व से कहा था कि ! उसके रहते यहाँ कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता!
और यहाँ देखो ! ये इतनी बड़ी लड़की पड़ी हुई है… ! और ऊपर से इसने”  कहते हुए उसकी मुट्ठियाँ भींच गईं।
ग़ुस्से से उसने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं।
उसके जबड़े भींच गए थे ! और साँसें तेज़ हो गई थीं।

कुछ देर तक वैसे ही खड़े रहने के बाद ! उसने एक नज़र पूरी कोठी पर डाली और मेन गेट की ओर बढ़ गया।
लेकिन अगले ही पल उसके क़दम रुक गए।
उसने अपना सिर झटका ! और तेज़ी से दोबारा ध्रुविका की ओर बढ़ा ! कंबल उठाकर उस पर फेंक दिया
और फिर मुड़कर तेज़ी से वहाँ से निकल गया।

और ध्रुविका औंधे मुँह पड़ी हर चीज़ से बेख़बर थी।

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उधर, शिवाया के जाते ही लड़के ने पीछे मुड़कर देखा !  और अपनी पैंट की जेब में हाथ डालकर अपनी गर्दन को एक झटका दिया। और लापरवाही से अपने एक हाथ के नाखून देखते हुए बोला “ “अब तुम लोग खुद से बाहर आओगे  या फिर मैं तुम्हें ख़ुद ढूँढूँ? हाँ?”  उसने ठंडी आवाज़ में कहा “ ..! 

उसका चेहरा भावहीन था ! और आँखों का रंग अब लाल हो गया था। वो हल्के से अपना एक पैर ज़मीन पर थिरका रहा था। 

कुछ क्षण रुकने के बाद भी जब कोई वहाँ नहीं आया ! 
तो लड़के ने अपनी कमर पर हाथ रख लिया और एक गहरी साँस छोड़ी। चेहरा ऊपर उठाते हुए बोला “ 

“आनिध़… तुम बाहर आ रहे हो? या फिर मैं तुम्हारे पास आऊँ? रुको… मैं तुम्हारी माँ ” उसके कहते-कहते ही  एक शख़्स बिजली की तेज़ी से उसकी ओर बढ़ा। लड़के के होंठों पर एक शैतानी मुस्कान आ गई। अगले ही पल उसने झटके से उसकी ओर आते हुए उस शख़्स का हाथ पकड़ लिया।

सामने खड़े उस शख़्स ने एक पल को हैरानी से अपने हाथ को देखा !  जहाँ एक चाकू चमक रहा था ! 
फिर लड़के को देखा ! जो उसे देखकर मुस्कुरा रहा था।

“रुद्रासिस…  लड़के ने जबड़ा भींचते हुए ग़ुस्से से उसे घूरकर कहा” ..।

रुद्रासिस,” मुस्कुराया और बड़े ही प्यार से बोला “ 
“हाँ मेरी जान, आनिध… बताओ, आखिर तुमने मुझे कैसे याद किया? और तुम्हें कैसे पता चला कि मैं यहाँ हूँ?”

वो वो वो वो….उसने आँखों में शरारत लिए बोला,
“कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझे मिस कर रहे थे ! जान-ए-मन? अगर ऐसा ही था तो बताया क्यों नहीं? मैं पहले ही तुम्हें दर्शन दे देता।”

आनिध ने उसे घूरकर देखा ! और मुँह ऐसे बना लिया जैसे उसके मुँह में कोई बहुत कड़वी चीज़ आ गई हो।

तभी उनके पीछे कई लोग आकर खड़े हो गए ! जिनके हाथों में बंदूकें थीं।
रुद्रसिस ने नज़रें घुमाकर उनकी ओर देखा ! तो उसकी मुस्कान और बड़ी हो गई। उसने एक बार मुड़कर दूर जाती शिवाया की कार को देखा।

“तू यहाँ क्या कर रहा है?”
आनिध ने दाँत पीसते हुए ठंडी आवाज़ में कहा, “रुद्रसिस!”

रुद्रसिस फिर उसकी ओर मुड़ा ! और उसी शरारती लहजे में बोला  “अपनी जान से मिलने आया हूँ! आखिर तुम मेरा इंतज़ार इतनी शिद्दत से जो कर रहे थे!”
वो आँख मारते हुए बोला, “और ये भव्य स्वागत... उसकी नज़र उसके हाथ में पकडे चाकू और गया ! अगर पता होता,कि तुम ऐसे मेरा स्वागत करोगे !  तो बोलो मैं तुम्हें इतना इंतज़ार करवाता।”

आनिध ने उसे फिर घूरा और झटके से अपना हाथ छुड़ा लिया।
रुद्रसिस थोड़ा लड़खड़ाया !  लेकिन अगले ही पल संभल गया ! और आँखों में मस्ती लिए ! चेहरे पर शरारत के भाव दोबारा उसकी ओर देखा।

शिवाया के सामने जो रुद्रसिस खड़ा था ! और आनिध के सामने जो रुद्रसिस खड़ा था ! दोनों में ज़मीन–आसमान का फ़र्क था।
स्वभाव, चेहरे के भाव, आवाज़, बात करने का तरीका… यहाँ तक कि मुस्कुराने का अंदाज़ भी बिल्कुल बदल चुका था।
अगर शिवाया ने उसका ये रूप देखा होता ! तो यकीनन सदमे से बेहोश हो जाती।

आनिध ने गुस्से और हल्की सी चिड के साथ उसे देखा और ठंडी आवाज़ मैं कहा “ “तुमने मेरा शिकार छीना। और इस शहर में आए ही क्यों?**
तुम्हारा परिवार तो सालों पहले यहाँ से जा चुका था। दोबारा लौटे क्यों हो?” अनिध चिख पडा …! 

रुद्रसिस एक लड़के को घूर रहा था ! जिसके शर्ट पर खून के हल्के दाग थे। वो बिना आनिध की ओर देखे बोला” 
“तुम लोगों को तुम्हारे बॉस ने नहीं बताया क्या? यह खिलौना हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता… 

जान-ए-मन।” उसने दोबारा आनिध को देखा, जो अपनी लाल आँखों से उसे घूर रहा था। पर रुद्रसिस को इससे ज़रा भी फ़र्क नहीं पड़ा।

वो चेहरे पर हाथ रखते हुए कुछ कहने ही वाला था कि तभी एक ठंडी, धारदार आवाज़ गूँज उठी ! 

“और तुम होते कौन हो ये सब पूछने वाले… आनिध धिमान?” 

आवाज़ सुनते वहाँ उस जगह पर सन्नाटा छा गया।
आनिध के चेहरे पर दहशत उतर आई !  उसका पूरा चेहरा सफ़ेद पड़ गया। उसकी आँखें लाल हो गयी ! और हल्के से काँपने  लगा था !  और इस बार रुद्रसिस की आँखें भी डर से फैल गई थीं।