एक घर… जो गहरे अंधेरे में डूबा था।
चारों तरफ़ एक भयावह सन्नाटा पसरा हुआ था।
सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक… उस सन्नाटे को चीर रही थी।
घर के एक कोने में एक ग्यारह साल की बच्ची दुबकी बैठी थी।
उसने अपने मुँह पर हाथ रख लिया था।
चेहरे से पसीना टपक रहा था और साँसें तेज़ होती जा रही थीं।
तभी सन्नाटे को चीरते हुए वो बच्ची चीख पड़ी "माँ!"
वो एकटक सामने देख रही थी !
सामने का मंजर इतना भयानक था कि उसकी रगों में खून जम गया !
एक आदमी ने एक औरत का गला दबोच रखा था।
वो आदमी धीरे से पीछे मुड़ा…
उसकी नज़रें सीधे बच्ची से टकराईं।
और अगले ही पल उसने औरत को ज़मीन पर पटक दिया।
" धड़ाम" !
लड़की की आँखें फैल गईं !
“Mom…"
तभी वो इंसान बिजली की तेजी उसकी ओर लपका और देखते ही देखते उसके सामने खड़ा हो गया।
उसके मुँह से ताज़ा खून टपक रहा था।
और उसकी आँखें लाल थीं। उसके होंठों पर एक वहशी मुस्कुराहट थी।
लड़की के हाथ-पाँव सुन्न पड़ गए।
वो हिल तक नहीं पा रही थी।
आदमी ने धीरे-धीरे अपना मुँह खोला…उसके साइड के दाँत लंबे और नुकीले… हो गए !
वो जैसे ही उसकी ओर झपटा !
लड़की ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और तभी उसको एक तेज़ झटका लगा।
" धड़ाम" ..!
और ध्रुविका बिस्तर से नीचे गिर गई।
“आआआ…”उसकी आँखें दर्द से कसकर बंद हो गईं ! पर उसका चेहरा पसीने से पूरी तरह भीग चुका था।
साँसें गहरी थीं ! वो हाँफ रही थी।
पता नहीं ये सपना कब उसका पीछा छोड़ेगा… !
ध्रुविका ने अपना सिर पकड़ लिया और धीरे-धीरे उठकर बैठ गई !
-------------------
ध्रुविका एक ताबूत के सामने खड़ी थी।
जैसे ही उसने देखा कि उसके अंदर एक इंसान लेटा है ! उसके होश उड़ गए ।
हड़बड़ाहट में वो पीछे हटने लगी।
पीछे हटते-हटते वो किसी चीज़ से टकराई और उसके हाथ में कट लग गया।
अगले ही पल वो सीधा ताबूत में जा गिरी।
उसकी घायल उँगली सीधे उस इंसान के होंठों से जा लगी।
ध्रुविका घबरा गई ! और उठने की कोशिश करने लगी।
तभी उसे अंदर मिट्टी से एक अजीब-सी गंध आई…
जैसे उसमें खून सूखा हुआ खून मिला हो।
“इसका मतलब… ये एक वैम्पायर है… ओह नो!"
ध्रुविका ने खुद से बड़बड़ाई !
“तुझे पहले ही सोचना चाहिए था… कोई भी इंसान ऐसे ताबूत में क्यों सोएगा ?”
वो खुद से बातें कर ही रही थी कि अचानक उसे एक हलचल महसूस हुई !
जैसे वो इंसान हिला हो।
ध्रुविका की आँखें बड़ी हो गईं।
उसने एक घुट भरा और चेहरा उठाकर देखा।
अचानक… उस इंसान ने अपनी आँखें खोल दीं।
वे आँखें… पूरी तरह लाल थीं ! खून जैसी लाल।
और सुंदर भी !
कुछ पल तक ध्रुविका बस उन आँखों में देखती रह गई…!
**********
ध्रुविका आज रुद्राक्ष के सामने खड़ी थी।
रुद्राक्ष ने ध्रुविका को देखा और हँसते हुए अपना सिर नीचे कर लिया। उसकी हँसी जंगल में गूँज रही थी। हँसते हुए वो रुका और झुक कर अपना चेहरा ध्रुविका के चेहरे के बराबर ले आया। अब वो दोनों ही एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे।
रुद्राक्ष ने ठंडी आवाज़ में कहा " तो तुम्हारे कहने का मतलब है कि तुम मुझे मारना चाहती हो ! क्योंकि मैं एक वैम्पायर हूँ। हाँ to तुम एक वैम्पायर हंटर बनना चाहती हो ! वास्तव में किया? तुम सच में मुझे मारना चाहती हो?”
" ध्रुविका ने अपनी नज़रें फेर लीं...।
तो रुद्राक्ष ने उसकी गरदन के पीछे अपना हाथ रक्खा ! और उसका चेहरा अपनी ओर कर दिया ! "
" लुक एट मी" ।
अब दोनों का चेहरा काफी करीब था।
ध्रुविका ने एक घुट भरा। रुद्राक्ष की नज़रें जैसे ही उसके गले पर गईं ! उसके होठों पर एक शैतानी स्माइली आ गई !!और वो उसके गर्दन के पास अपना चेहरा ले आया और एक लंबी साँस खींची।
ध्रुविका के रोंगटे खड़े हो गए ! और उसकी मुट्ठियाँ भींच गईं।
पर तभी उसके आँखों के सामने एक नज़ारा घुम गया !
एक औरत जो बुरी तरह चिल्ला रही थी ! और एक आदमी जिसने उस औरत को गर्दन से पकड़ा हुआ था। उसने घूम कर ग्यारह साल की ध्रुविका की ओर देखा जो रो रही थी। उसके होठों पर एक मुस्कान आ गई ! और उसके कोने के दाँत लंबे हो गए। और उसने अपना दांत उस औरत के गर्दन में गडा दिया ! औरत की चीख निकल गई।
ध्रुविका भी चीख पड़ी ! “दूर हटो मुझसे!” उसने रुद्राक्ष को एक धक्का दे दिया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं थी ! और वो गुस्से से रुद्राक्ष को देख रही थी ! “हाँ, मैं तुमें मारना चाहती हूँ ! क्योंकि तुम एक खून चूसने वाले पिशाच हो ! दूर रहो मुझसे!” ध्रुविका चीख पड़ी।
रुद्राक्ष ने एक पल के लिये हैरानी से ध्रुविका को देखा और फिर तेजी से चलता हुआ ! उसके पास चला गया !!और उसके हाथ को पकड़ लिया ! जिसमें उसने एक चाकू पकड़ा था ! और उसको अपने सीने पर रख दिया।
“kill me ” रुद्राक्ष ने ध्रुविका की आँखों में देखते हुए कहा।
-----------------------------------------------
नो—नो। तुम लोग ऐसा नहीं कर सकते। तुम लोग रुद्राक्ष को नहीं मार सकते। वो डिफरेंट है ! बाकी सब से डिफरेंट है। बिलीव मी ! वो इंसानों को नहीं मारता ! वो हमारी ही तरह ! इंसानों को मारने वालों से लड़ता है।
“बिलीव,” ध्रुविका ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा"...।
उसके बगल में रुद्राक्ष बेहोश पड़ा था ! और तभी वहाँ एक आवाज़ गूँजी !
“तो ये वैम्पायरों का शिकार करता है। हाँ, सबको इन्होने ही मारा है।”
“तो क्यों न आज मैं इसे मार दूँ ! और ये चिल्लर पार्टी घर जाओ ! आज मेरा किसी का शिकार करने का मन नहीं है यार ! मेरे शिकार कोई और हैं।”
ध्रुविका ने जैसे ही घूमकर आवाज़ की दिशा में देखी ! उसकी आँखें फैल गईं ! और मुट्ठियाँ भींच गईं। उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं और साँसें गहरी हो गईं।
ध्रुविका ने गुस्से से काँपते हुए कहा, “तुम…”