स्नोसिटी :
रात का वक़्त :
शिवाया अपनी कार में बैठी बड़बड़ाए जा रही थी !
“आज तो इस लड़की को छोड़ूँगी नहीं मैं। समझ क्या के क्या रखा है इसने ख़ुद को… जब वो मन में आए वो करेगी…”**
बड़बड़ाते हुए उसने स्टीयरिंग जैसे ही घुमाया, उसकी आँखें बड़ी हो गईं ! और उसने जल्दी से ब्रेक लगा दिया ! और अपनी आँखें बंद कर लीं।
“सब ठीक हो भगवान… सब ठीक हो, प्लीज़…” वो बड़बड़ाए जा रही थी।
वो आखे बंद करके बैठी थी ! जब बहुत देर बाद उसकी कार की विंडो पर किसी ने नॉक किया।
शिवाया ने झट से अपनी आँखें खोलीं ! और सामने देखा !
उससे कुछ ही दूरी पर एक बाइक खड़ी थी… जो गिरी हुई थी। पर वहाँ कोई था नहीं।
शिवाया ने अपनी बढ़ती धड़कनों को क़ाबू में किया ! और लंबी, गहरी साँस छोड़ी ! और ख़ुद को शांत किया।
कुछ देर पहले हुआ ये था कि ! शिवाया ने जैसे ही अपनी कार को गली में घुमाया ! अचानक से ही एक बाइक उसके सामने आ गई।
जिससे उसने हड़बड़ाकर ब्रेक मार तो दिया था ! लेकिन फिर भी उसकी कार ने बाइक को हल्का सा टक्कर मार ही दिया था।
और अब उसके सामने बाइक गिरी पड़ी थी। तभी उसकी कार की विंडो पर फिर से नॉक हुआ।
शिवाया ने एक गहरी सांस छोड़ी ! “धारुवी की बच्ची, तेरे चक्कर में क्या-क्या करना पड़ रहा है… छोड़ूँगी नहीं तुझे मैं…”
उसने कार का शीशा नीचे किया ! और सामने खड़े उस शख़्स की ओर देखा, जो उसकी कार पर झुका हुआ था।
वो हैंडसम सा लड़का था ! जिसको शिवाया एक पल के लिए देखते रह गई। सामने लगी स्ट्रीट लाइट की रोशनी में लड़के के चेहरे पर पड़ रही थी !
बिखरे बाल जो पलको को ढक रहे थे ! , काली गहरी आँखें, तीखी नाक, तराशा हुआ माथा, उभरी हुई ऐडम, कानों में बालियाँ… ब्लैक हुडी, ब्लैक जीन्स… हुडी के ऊपर जैकेट।
पर एक चीज़ पर जैसे ही शिवाया का ध्यान गया ! वो कूदकर जल्दी से कार से उतर गई।
लड़के के ग्लव्स लाल हो गए थे। यानी उसे वहाँ पर चोट लगी थी।
शिवाया भागते हुए लड़के के पास आई ! और सिर झुकाते हुए बोली “I am sorry… I am really sorry… प्लीज़ मुझे आपका हाथ देखने दीजिए ! आपको चोट लगी है !
लड़के ने एक पल को शिवाया को ऊपर से नीचे तक देखा।
ये देखकर शिवाय सिहर उठी उसकी नज़रों के ” ठंडेपन” को महसूस करके। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा ! और वो अपने-आप दो क़दम पीछे हट गई।
जाने क्यों… अब उसे इस लड़के से डर लग रहा था।
एक अजीब सा “ थंडापन” उसे महसूस हो रहा था।
शिवाया का दिमाग़ तेज़ी से भाग रहा था ! और उसके मन में उल-जुलूल ख़याल आ रहे थे !
“कहीं ये कोई ट्रैप तो नहीं है? लड़कियों को उठाने का?
क्या ये कोई ह्यूमन ट्रैफिकिंग करने वाला होगा? क्या ये कोई गुंडा है? कहीं मैं ग़लत जगह तो नहीं फँस गई ना?
अब मेरा क्या होगा?”
शिवाया का दिमाग यूँ ही ये चीज़ें नहीं सोच रहा था…
आए दिन अख़बार और टीवी में आजकल एक ही न्यूज़ दिखाया जा रहा था ! शहर से लोग ग़ायब हो रहे हैं।
लोगों को रात को घरों से निकलने को मना किया गया था।
पुलिस भी इन्वेस्टिगेशन कर रही थी ! पर कोई फ़ायदा नहीं… उन्हें अब तक कोई सुराग नहीं मिला था।
पर लोगों ने पुलिस की चेतावनी को इग्नोर कर दिया था ! क्योंकि उनका मानना था ! कि ये सब बस अफ़वाह है !
1–2 लोग ही तो ग़ायब हुए “होंगे पुलिस वाले और मीडिया तो यूँ ही कोहराम मचा रही है ! और उन लोगों में से एक शिवाया भी थी।
शिवाया ने एक घूँट भरा ! और अपने दिमाग़ के घोड़े दौड़ाते हुए सोचा ! “एक काम करती हूँ… जल्दी से जाकर कार में बैठती हूँ ! फिर यहाँ से भागूँगी… तो सीधा घर पर जाकर ही रुकूँगी। हाँ, टैंक भी फुल है… हे भगवान, बस इस बार बचा लो। कल 2 किलो लड्डू चढ़ाऊँगी पक्का…” सोचते हुए वो धीरे-धीरे पीछे हट रही थी।
उसने अपने हाथों से कसकर अपनी जैकेट पकड़ी हुई थी।
उसका पूरा शरीर हल्का काँप रहा था, चेहरा लाल हो गया था और साँसें हल्की तेज़।
वहीं वो लड़का मूर्ति-सा स्थिर खड़ा ! अब भी एकटक शिवाया को घूर रहा था।
लड़के के जबड़े भींचे हुए थे ! पर आँखें बिल्कुल स्थिर।
उसकी मुट्ठियाँ भी कसी हुई थीं।
तभी लड़के ने अपना सिर झटका ; जैसे किसी ख़याल को खुद से परे धकेल रहा हो। उसने अपनी आँखें बंद कीं और फिर खोलीं।
अब उसकी आँखें हल्की लाल हो गई थीं। जबड़ा और भींच गया था ! और चेहरा एकदम कठोर हो गया था।
लड़के ने दोबारा धीरे-धीरे पीछे हटते हुए शिवाया को देखा…
और फिर उसके काँपते पैरों को।
उसने एक गहरी साँस छोड़ी और अपनी भारी आवाज़ में कहा “ “अगर ज़िंदा रहना चाहती हो… तो निकलो यहाँ से। जाओ।”
लड़के की कठोर आवाज़ वहाँ उस सन्नाटे में गूँज गई।
शिवाया की आँखें एक पल के लिए बंद पड़ गईं ! और वो जहाँ थी वहीं जड़ हो गई।
इतनी सी आवाज़ सुनकर ही उसका दिल दहल गया था।
शिवाया को सामने खड़े इस हैंडसम लड़के की आवाज़ इतनी खतरनाक लग रही थी ! कि उसने कल्पना कर ली “शैतान की आवाज़ भी ऐसी ही होती होगी…”
“आआआ…” शिवाया ने खुद का सिर झटका ! वो बिना सिर-पैर की बातें सोच रही थी।
और अगले ही पल उसके दिमाग़ की बत्ती जली। उसने हैरानी से लड़के की ओर देखा ! उस लड़के ने उसे यहाँ से भागने को कहा” मतलब वो कोई बुरा आदमी नहीं है।
पर उसने कहा कि “ ज़िंदा रहना चाहती हो ! मतलब यहाँ ख़तरा था।
उसने नज़रें उठाकर दोबारा लड़के की ओर देखा !
उसे कुछ पूछने ही वाली थी कि…
लड़के ने उसे घूरते हुए दोबारा सख़्ती से, अपनी कठोर आवाज़ में कहा “
“जाओ!”
ये सुनते ही शिवाया की बची-खुची हिम्मत भी जवाब दे गई।
और अगले ही पल वो सर पर पाँव रखकर वहाँ से भागी।
उस सारे कोहराम में उसके दिमाग़ से ध्रुविका निकल गई !
उसने ध्रुविका के बारे में सोचा ही नहीं।
शिवाया ने जैसे ही कार को घुमाया और थोड़ा आगे निकली,
उसने दोबारा मुड़कर लड़के की तरफ देखा… और सामने देखते ही उसकी आँखें बड़ी हो गईं।
उस लड़के के सामने कुछ और लड़के खड़े थे ! और एक के हाथ में तो बंदूक भी थी।
शिवाया ने दोबारा पीछे मुड़कर देखा ! तो इस बार वो लड़का भी उसे ही देख रहा था। उसने एक बार पलकें झपकाईं ! और शिवाया को वहाँ से चले जाने का इशारा किया।