बात सन 1869 की है जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था शीत युद्ध का दूर था एक छोटा सा परिवार शहर में गोला बारूद से बचने के लिए अपने आप को बचते बचाते गांव में छुपने के लिए आए थे वे वही बसना टिक समझा ।दो सालों के बीच में वे लोग वहां इस तरह गुल मिल गए थे। जैसे की वे वही के रहने वाले निवासी । कुछ दिनों बाद वही एक परिवार उस गांव में निवास करने के लिए आए। उनके स्वभाव से भी प्रतिष्ठित परिवार के लग रहे थे। शायद युद्ध की वजह से वे लोग छुपने के लिए इस गांव में आए थे। और उन्हें यह जगह इतना पसंद आया कि वे यही बस गये। उनका एक छोटा बेटा था जो उनके संस्कार की वजह से बहुत ही होशियार और समझदार बन गया था। कुछ ही दिनों में दोनों परिवार एक अच्छे पड़ोसी बन गए। एक दिन शाम का समय था। सूर्य डूबने वाला था। तबि श्रवण ने कहा। की मां मैं कुछ देर बाहर घूमने जा रहा हूं। यदि तुम बाहर जा रहे हो तो शाम होने से पहले घर वापस आ जाना। ऐसे क हते हैं। ही वह गांव का नजारा देखने चला गया। सुंदर-सुंदर पेड़ पौधे बगीचे को देखकर वह बहुत ही प्रसन्न हो गया। वह गांव का नजारा देखते देखते। ममता के चला गया। जब वह पीछे मुड़कर देखा तो। उसे पीछे कुछ अजीब लगा। जैसे ही वह पीछे मुड़कर जाने लगा। उसे अचानक रास्ता याद नहीं आया। वह खो चुका था। जब मां ने घर पर देखा कि मैं घर पर नहीं हूं। तो वह मेरे लिए बहुत चिंतित थी। जब पड़ोस की आंटी ने मेरी मां को चिंतित देखा। तो आंटी ने मेरी मां से पूचा की आप इतनी चिंतित क्यों हैं। तभी श्रवण की मां ने उत्तर दिया। कही की मेरा बेटा अभी तक वापस नहीं आया है। इतनी देर हो गई अभी तक उसे वापस आना चाहिए था मगर अभी तक वह वापस नहीं आया। मुझे डर है कि उसे कुछ हो ना जाए। यदि ऐसा हुआ तो मैं खुद को कभी माफ नहीं करूंगी। आप जरा शांत हो जाइए आपका बेटा किस और गया था। वह गांव का नजारा देखना चाहता था इसलिए वह इस रास्ते से चला गया और अभी तक वापस नहीं आया है मुझे बहुत चिंता हो रही है पता नहीं वह कैसा होगा किस हालत में होगा। तुम चिंता मत करो हम अभी उसे ढूंढने चलते हैं चलो हम सभी साथ चलते हैं जल्दी चलो वह किसी मुसीबत में तो नहीं है। उधर श्रवण और मीरा को अचानक झाड़ियां में कुछ हिलता हुआ नजर आया। मीरा ने श्रवण से कहा"मुझे लगता है झाड़ियां में कुछ है तुम अभी बिल्कुल शांत रहो आवाज मत निकालना"श्रवण को पेड़ के पास बिठाकर वह खुद झाड़ियां में हो रहे हलचल को देखने के लिए चली गई। अचानक जड़ियों के अंदर से एक कुत्ता निकला और मीरा के हाथ में काट डाला और वहां से भाग गया। चोट इतना गहरा लगा था कि उसकी सहन से दूर हो गया। तभी श्रवण आकर उसकी हाथ को एक कपड़े से बांध देता है और उसकी हौसला बढ़ता है। ताकि उसकी चीखें सुनकर दूसरे जानवर न जाए। कुछ देर बाद दर्द कम होने के बाद दोनों ने डरते डरते घर की तरफ निकल पड़े। श्रवण ने मीरा से पूछा तुम इतनी रात को कहां से आ रही थी। मीरा ने बताया कि"मैं अपने सहेलियों के घर में रुकी थी। थोड़ी देर बैठी थी कि कैसे शाम हुआ पता ही नहीं चला। इसलिए मैं जल्दी-जल्दी घर जा रही थी। रास्ते में तुम दिख गए। वही दोनों बातें करते-करते घर तक पहुंच गए। मीरा ने कहा तुम्हारा घर किधर है मैं तुम्हें छोड़ दूंगी। तबी श्रवण ने कहा की। मैं तुझे तुम्हारे घर छोड़ दूंगा। तुम अभी जख्मी हो। रास्ते में और भी जंगली जानवर हो सकते हैं। इसलिए मैं तुझे छोड़ दूंगा। बताओ तुम्हारा घर किधर है। मेरा घर उधर है। क्या...मेरा भी उधर ही है। तो साथ चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक सुरक्षित पहुंच आ ऊंगा। कोई अपने घर की तरफ जाने लगे। घर पहुंचते ही वे दोनों देखते हैं कि वे दोनों एक दूसरे के पड़ोसी थे। देखा कि दोनों घर में कोई नहीं था। उन्होंने सोचा कि वे लोग हमें ढूंढने गए होंगे। उधर माता-पिता को बहुत समय से रहने के बाद भी श्रवण नहीं मिला तो वे लोग घर वापस आ गए। घर आने के बाद देखा तो श्रवण और मेरा दोनों अपने माता-पिता की इंतजार कर रहे थे। उन्होंने देखा कि मीरा के हाथों में बहुत कुन लगा था। वह उनसे पूछते हैं कि यह कैसे हुआ। तब उन दोनों ने उन्हें सारी घटना बताएं। मीरा की इलाज करने के बाद उनकी भाव बहादुरियों को देखते हुए शाबाशी देने लगे। कुछ साल ऐसे ही बीत गए श्रवण और मीरा अब बड़े हो चुके थे। दोनों की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। जैसे ही पढ़ाई पूरी हुई उसकी अगले दिन ही उसके माता-पिता श्रवण को विदेश पढ़ने के लिए भेज देते हैं। मीरा बी वीदेस जाना चाहती थी। मगर धन की अभाव के कारण वह भी वीदेश नहीं जा सकी। श्रवण श्रवण विदेश जाने से पहले मीरा से कहता है। की जैसे ही मैं विदेश से वापस आऊंगा। तक में तुमसे शादी करूंगा। मेरा भी कहती है कि मैं तुम्हारे विदेश से आने का इंतजार करूंगी। तो मैं अब चलता हूं। 3 साल बाद मिलेंगे।"अपना ख्याल रखना"तुम भी अपना ख्याल रखना। ऐसे कहते हुए। श्रवण विदेश चला गया।