अब विधि, शादी के लिए मना करें तो
कैसे करें उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था...
अंश की बात भी अभी, ऐसे अचानक
नहीं कर सकती थी, लेकिन अंश के बारे
मे बताना भी जरूरी था।
ऐसे बहुत सारे सवाल उसके दिमाग में
चल रहे थे। ऐसे में उसे अब अंश से बात करनी थी और ये सब बाते अंश को
बतानी थी।
विधि अपने रूम मे गयी और अंश को कॉल कर के, सब बात बता दी और अंश को पापा से मिलकर बात करने के लिए कहा...लेकिन अंश ने अभी एक्साम है
तो कुछ दिन शादी की बात को टालने के लिए कहा।
लेकिन विधि नही मानी तो, अंश ने
मिल कर बात करने के लिए कहा।
विधि को समझ नही आरहा था पापा से बात करें तो कैसे, ऐसे चुप भी नही रह सकती थी। रात भर उसे नींद नही आयी कब सुबह होगी और कब अंश से मिल
कर बात करती हु यही सोचते हुए रात निकल गयी।
दूसरे दिन अंश से मिलते ही उसने अंश
को घर चलने के लिए कहा।
विधि : चलो अंश..!! घर चलके, हम
पापा को सब कुछ बता देते हैं...पापा
को ऐसे धोके मे नही रख सकती और
उन लोगो को भी जवाब देना है तो हमारे बारे में पापा को बताना जरूरी है।।
अंश : नही विधि..!! ऐसे अचानक से
अभी मै घर नहीं आ सकता।
एक्साम तक तुम पापा से कह दो कुछ
दिन रुक जाये उसके बाद मै भी अपने
डैड से बात कर लुगा और तुम्हारे घर
भी तुम्हारे पापा से मिलने आ जाऊगा
तब तक तुम संभाल लो... एक्साम का बहाना बना कर टाल दो और एक्साम
के बाद जवाब दूगी कह दो।
कोई कुछ नही कहेगा और तुम्हारी पढ़ाई
मे भी रुकावट नही होगी।
विधि : लेकिन अंश..!! घर मे सभी इस शादी के लिए राजी है सभी को वो लड़का पसन्द है अब सिर्फ मेरी ही हा करने की देरी है तुम अब सिर्फ मिल लो मै पापा
को सब बता देती हु।
अंश : अगर नही माने और गुस्से में
तुम्हारी कॉलेज भी बंद कर दी तो क्या करोगी..??
विधि : नहीं मालूम..!! लेकिन मुझे उस लड़के से शादी नहीं करनी, मै तुम्हारे
सिवा किसी ओर के बारे मे सोच भी
नही सकती।
शादी करुगी तो सिर्फ तुमसे या करुगी
ही नहीं ये कह कर विधि अंश को लिपट गयी... अंश ने भी विधि को अपनी बाहों
में भर लिया।।
अंश : हा..!! मैं भी कहा तुम्हें किसी
और से शादी करने दूंगा...बस कुछ दिन रुक जाओ, पहले मै अपने घर मे बात
कर लू फिर तुम्हारे घर आऊगा।।
विधि : अगर तुम्हारे के घरवाले नही माने तो.. तो फिर नही आओगे पापा से बात करने।।
अंश : नहीं..!! ऐसा नही है, वो माने या
ना माने..लेकिन बताना जरूरी है।
अगर मानते है तो ठीक नही तो फिर
हमें अपनी मर्जी से ही...
विधि : हम्म्..
लेकिन विधि का मन नहीं मान रहा था।
घर में सभी शादी की ही बात करते थे
तो विधि का मन पढाई मे लग ही नहीं
रहा था उसे बस अंश का ही ख्याल आ
रहा था।।
एक दिन मौका देख कर विधि ने पापा
से अंश की बात कर ही ली।
विधि की बात सुनते ही, पापा ने विधि
को एक थप्पड़ लगाई, आवाज़ सुनते
ही मम्मी और दादी भी वही आगये
विधि के पापा ने विधि की मम्मी को
सब बाते बता दी बात सुनते ही, घर में एकदम सन्नाटा छा गया।
विधि की मम्मी और दादी ने भी विधि
को बहुत डाट लगाई, लेकिन विधि के
पापा से कोई बात न कर सका वह बहुत गुस्से मे थे।।
विधि वही खड़ी थी, वो फिर से कहने लगी...मै अगर शादी करुगी तो सिर्फ
अंश से ही, उसके अलावा किसी से
नहीं... आप एक बार उससे मिल लो
अच्छा लड़का हैं अंश।
आप सभी को अच्छा लगेगा। अच्छे
घर का है पढ़ा लिखा सब कुछ हैं और मुझेसे इतना प्यार करता है और क्या चाहिए आप लोगों को।
आप सब मेरी खुशी ही चाहते है न तो
मेरी खुशी सिर्फ अंश है।
उसकी जगह और कोई नहीं ले सकता। किसी ओर से शादी कर के मै कभी
खुश नहीं रह पाऊगी।
कहते हुए विधि ने पापा के पैर पकड़
लिए।
पापा प्लीज़ मान जाओ एक बार मिल
तो लो अंश से...अगर आपको वो पसन्द ना आये या उसकी कोई बात, तो मान जाउंगी आपकी बात... फिर आप जहा कहोगे वही शादी करुगी।
मगर एक बार मेरी भी बात आप मान लो... एक बार मिल लो अंश से।
मम्मी, दादी आप पापा को समझाओ ना एक बार मिलने के लिए कहो न अंश से।
विधि सब के सामने बच्चो की तरह रो
रही थी..गिडगिडा रही थी।
उसे ऐसे रोता देख कर दादी और मम्मी
का मन नही माना।
तब दोनों ने विधि के पापा को बहुत समझाया की, जब ये इतना कह रही है...तो एक बार मिल लो।
एक बार मिलने में क्या हर्ज है।।
बहुत मिन्नतो के बाद विधि के पापा
मान गए।
लेकिन पहले एक्साम पर ध्यान दो
उसके बाद लेकर आना उस लड़के को मिल लेंगे उसे भी, जब इतना कह रही
हो तो...कुछ तो बात होगी उसमे भी।
विधि के पापा ने कहा।
पापा की बात सुन कर विधि खुशी से
पापा के गले लग गयी।
पापा : बेटा आखिर तुम हमारी एकलौती संतान हो तुम्हारी ख़ुशी में ही हमारी ख़ुशी है मगर लड़का सही है तो हमे कोई तकलीफ नहीं।
अभी अच्छे से मन लगा कर पढ़ाई करो और बाद मे उसे लेकर आना।।
पापा की इन बातों से विधि बहुत खुश
थी। वो अपने कमरे में गयी और अंश
को कॉल कर के उसने सब बाते अंश
को बता दी।
विधि के पापा अंश से मिलने के लिए मान गए थे इस बात से विधि बहुत खुश थी।
वो अपने कमरे में गयी और अंश को कॉल कर के अंश को सब बाते बता दी।
अब विधि को बस अपनी एक्साम
खत्म होने का इंतजार था।
कब एक्साम खत्म होगी और कब अंश उसके घर मिलने आयेगा इसी
इंतजार में वह दिन भी आगया जब दोनों की एक्साम खत्म हो गयी।।
विधि ने सुबह ही जल्दी तयारी की
और पापा मम्मी से कहकर अंश से मिलने उसके रूम पर निकल गयी।
विधि जब अंश के रूम पर पहुँची तो वो अपने बेड रूम में पैकिंग कर रहा था।
विधि पहुँचते ही... अरे,, "तुमने पैकिंग
भी कर ली इतनी जल्दी"...!!
घर नहीं आओगे पापा से मिलने..??
अंश : आऊगा...!! मगर पहले घर वालों
से बात कर लू इतने दिनों से
उनसे मिला भी नहीं हु।
तुम टेंशन मत लो मै लौट कर आऊगा... तुम ये मत समझना की मै जा रहा तो
अब नहीं आऊगा।
तुम बैठो यहाँ आराम से... और विधि का हाथ पकड़ कर उसे वही बेड पर बिठा दिया।
बोलो चाय कॉफी कुछ लोगी।
विधि : नहीं कुछ...!! तुम पहले घर चलो पापा से मिलने... वहा चल कर
मै तुम्हें चाय कॉफी सब पिला दुगी। तुम बस पहले घर चलो।
कहते हुए अंश के हाथ से बैग छिन ली।
"मैं कितने दिन से इस दिन का इंतजार
कर रही थी और अब तुम कह रहे हो
पहले घर जाऊगा"....!!
मुझे अब कुछ नही सुनना तुम पहले घर चलो और पापा से मिलो..फिर जहा जाना चाहो जा सकते हो।
विधि बस अपनी जिद् पर अड़ गयी।
वो अंश की कोई बात सुनने को तयार
ही नहीं थी।
आखिर अंश भी विधि की जिद् के आगे हार गया और विधि के साथ,
विधि के घर चलने के लिए मान गया।
अंश : "ओके बाबा"...!! चलो आरहा हु साथ मगर पहले रेडी हो जाऊ या ऐसे ही चलु.. अगर इतनी ही जल्दी है तो ऐसे ही चलता हूँ। पसन्द तो आऊगा ना इस हालत में तुम्हारे घर वालो को। अंश ने shorts और T-shirt पहनी थी।
विधि :" हा तो जाओ ना"...!! जल्दी कपड़े बादलों...मैंने कब कहा ऐसे ही चलो। मैं हु यही तुम रेडी हो जाओ
जल्दी।
विधि अंश की यह बात सुन कर खुश हो गयी और अंश को अपने साथ घर लेकर आ गयी।।
उसने पापा को पहले ही बता दिया था
की वह..अंश को घर, मिलने के लिए
लेकर आने वाली है तो पापा आज घर
पर ही थे।
जब अंश विधि के साथ घर पहुँचा
तो थोड़ा डरा डरा सा था तो विधि ने
उसे हौसला देते हुए कहा कि जैसे
मझसे बात करते हो उन लोगों से भी
ऐसे ही बात करना, वो कोई ओर नही
है।।
मेरे पापा- मम्मी बहुत अच्छे है और मुझसे इतना प्यार भी करते है...तभी तो तुमसे मिलने के लिए मान गए।।
अंश : हम्म्...
अंश के अंदर आते ही मम्मी और दादी
ने बहुत प्यार से अंश को बैठने के लिए कहा विधि के पापा और दादाजी वही
पास मे एक सोफे पर बैठे थे।
अंश भी वही दूसरे सोफे पर बैठे गया।
विधि के पापा ने, अंश को उसके बारे मे सब कुछ पूछा क्या करते हो क्या पढ़ते
हो वगेरा...कहा से हो, पिताजी क्या
करते है, घर मे कौन- कौन है सब
कुछ।।
विधि के पापा- मम्मी को और दादा- दादी को अंश का स्वभाव,उसके बातचित्
करने का तरिका अच्छा लगा।
इतने बड़े घर से होने के बावजूद भी
इतना सरल, सब मे घुल मिल जाने
वाली उसकी सादगी भी बहुत पसन्द आयी।
विधि के पापा को अंश, विधि के लिए परफेक्ट लगा।
सब ने मिल कर खाना खाया। सब अंश
से मिलकर खुश थे और विधि की पसन्द पर भी। विधि और अंश दोनों भी सबसे ज्यादा खुश थे उनके प्यार मे अब कोई रुकावट नहीं थी उनका प्यार अब एक बंधन मे बंधने वाला था।
अब बस, अंश को अपने घर वालो से
बात करनी थी...तो अंश ने सब से बिदा
ली और अपने फ्लैट की ओर चला गया।।
विधि भी अंश के साथ ही उसके फ्लैट
पर चली गई। आज अंश कुछ दिनों के
लिए उससे दूर जाने वाला था तो वो
कुछ देर अंश के साथ रहना चाहती
थी।।
विधि भी अंश के साथ ही उसके फ्लैट
पर चली गई। आज अंश कुछ दिनों के
लिए उससे दूर जाने वाला था तो वो
कुछ देर अंश के साथ रहना चाहती
थी।।
आज विधि को वो सब कुछ मिल गया
था जो वो चाहती थी। आज उसमे और अंश मे कोई दूरी ना रही। उसने अपने
आप को अंश को सौप दिया।
शाम को रेलवे स्टेशन पर अंश को छोड़ कर ट्रेन का इंतजार करते दोनों बैठे थे दोनों का मन नही था एकदूसरे से अलग होने का लेकिन जाना भी जरूरी था विधि ट्रेन आने तक अंश का हाथ थामे ही उसके पास बैठी रही।
कुछ देर बाद जब ट्रेन आयी अंश अंदर जाकर बैठे गया दोनों की आँखे भीगी
थी।
दोनों ने भीगी आँखों से एक दूसरे को
बाय कहा और अंश चला गया।।
विधि अपने घर चली आयी। अंश जल्द
ही लौट कर आने वाला था।
मगर उसके बिना एक एक पल विधि
के लिए काटना मुश्किल हो रहा था।
कुछ देर मे ही अंश का कॉल आया तब जाकर विधि को कहीं चैन आया।
देर रात तक दोनों ने बाते की ....
दूसरे दिन पहुँचते ही कॉल करने के लिए कह कर विधि सो गयी।
दूसरे दिन विधि ने फोन देखा तो अंश
का मैसेज था वो घर पहुँच चुका था
एक मिस कॉल भी था, शायद नींद की
वजह से विधि सुन नही पायी थी।
अंश ने घर पहुँच कर घरवालों को विधि
के बारे मे सब बाते बता दी।
विधि की फोटो देख कर और अंश से उसकी इतनी तारीफ सुन कर घर वाले
भी इस शादी के लिए मान गए थे।
ये सब बाते अंश ने विधि को बता दी
ओर कुछ दिनों मे वो वापस आरहा है
यह भी उसने बता दिया।।
अंश आज लौट कर आने वाले था यह
बात अंश ने विधि को एक दिन पहले
ही बता दी थी।।
इसीलिए विधि ने दूसरे दिन अंश को कॉल किया मगर अंश ने कोई जवाब नहीं दिया।
मैसेज भी किये लेकिन उसका भी कोई जवाब नही आया।।
विधि बार बार कॉल करती रही मगर कोई जवाब नहीं आया।
अब तो दिन भी गुजरने लगे मगर अंश
की कोई खबर नहीं मिली ना उसका कोई मैसेज आया ना कॉल। विधि ने उसके फ्लैट मे जाकर पूछा लेकिन वहा भी
किसी को कोई खबर नहीं थी की अंश कहा है।
अंश के घर वालों को नहीं पूछ सकती
थी उनमें से किसी का ना नम्बर था ना कुछ। अब बस इंतजार के सिवा कुछ
नहीं कर सकती थी।
तो विधि उसी जगह जाकर घंटो बैठी
रहती जहा वो दोनों मिला करते थे।
उस जगह से उनकी यादें जो जुड़ी थी।
महीनों बीत गए लेकिन अंश की कोई खबर नहीं मिली तब विधि के घर वालों
ने यही सोचा की अंश अब नही आयेगा और विधि को अभय से शादी के लिए मनाने लगे लेकिन विधि को यह बात
मंजूर ही नहीं थी के अंश अब नहीं
आयेगा या वो उसे धोका दे सकता हैं।
विधि को अंश पर और अपने प्यार पर
पुरा भरोसा था। तो और कुछ दिन
इंतजार करने के लिए कह कर आगे की पढ़ाई के लिए पापा को मना लिया।।
विधि के पापा भी अंश को जानते थे उन्हें पता था अंश एक अच्छा लड़का हैं।।
वह विधि को छोड़ कर ऐसे नही जा
सकता हैं।
इसलिए, विधि के घर वाले भी विधि की
आगे की पढ़ाई के लिए मान गए।
लेकिन इस शर्त पर की बस तेरी
पढ़ाई पूरी होने तक ही इंतजार करेगे
अगर इस बीच अंश आया तो ठीक ....
नहीं तो विधि को घर वालों की सब
बाते चुपचाप माननी पड़ेगी।।
विधि की आगे की पढ़ाई को दो साल और लगने थे तो, दो साल काफी होते है किसी के इंतजार करने के लिए।।
यह दो साल भी बीत गये लेकिन अंश की कोई खबर नही आयी ना वो आया।।।
क्रमश:........