गोल रोटी Priyanka Gupta द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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गोल रोटी




"प्रिया, हाँ माँ..." कमरे में बैठी प्रिया ने किचन से आ रही आवाज़ की तरफ मुँह करके कहा।


"यहाँ आ जा," ये आवाज़ उसकी माँ, सरिता की थी। प्रिया उठी और किचन की तरफ दौड़ पड़ी। माँ के हाथ में बेलन देखते ही, प्रिया को पिछली बार की डाँट याद आ गई।


"तू गोल रोटी क्यों नहीं बनाती? इतने दिन से सीख रही है, पर तुझसे बनती ही नहीं है," उसकी माँ ने उसे डाँटते हुए कहा था।


प्रिया ने अपनी माँ की तरफ देखकर रोनी जैसी सूरत बना ली।


उसे ऐसे देख मां मुस्कुराकर बोली, "बेटा, तुझे सिखाने के लिए ही इतना कहती हूँ। चल, आजा," कहते हुए माँ ने उसकी तरफ चकला-बेलन बढ़ा दिया, और खुद जाकर गैस के पास बैठ गईं।


प्रिया ने बेमन से चकला-बेलन उठाया, और रोटी बेलने की कोशिश करने लगी। माँ ने तिरछी नज़र से उसे देखा। उन्हें ऐसे देख प्रिया थोड़ा सकपका गई और उसने रोटी को गोल करने की पूरी कोशिश की, पर जब उससे नहीं हुआ, तो उसने धीरे से चोर नजरों से अपनी माँ की तरफ देखा... जो की उसे ही देख रही थीं।


"जैसे मैंने बताया है, वैसे बेलो," माँ ने थोड़ी तेज़ आवाज़ में कहा।


प्रिया ने धीरे से सिर हिलाया, और फिर से कोशिश करने लगी। लेकिन, माँ जैसी गोल रोटी बनाना तो उसके बस में ही नहीं था।


"फिर से कोशिश करो," माँ ने अब थोड़ा सा नर्मी से कहा।


तभी, प्रिया की तंद्रा टूटी । सामने उसका पति नीरज उसे पुकार रहा था।


"क्या हुआ प्रिया? क्या सोच रही हो? " कुछ नहीं नीरज, बस सोच रही हूँ कि माँ ने मुझे रोटी बनाना सिखाने के लिए कितनी मेहनत की है।


" अच्छा ! और ये सब तुम क्यों सोच रही हो ?" नीरज ने कहा


" वो इसलिए क्योंकि आज जब मैं रक्षा को रोटी बनाना सिखा रही थी... तब मुझे एहसास हुआ कि एक मां के लिए ये सब कितना कठिन होता है । ये कहते हुए प्रिया की आँखों के सामने उसकी माँ की तस्वीर तैर गई।


उसे ऐसा लगा जैसे माँ मुस्कुराकर अभी भी कह रही थीं, "तूने मुझसे मेहनत तो बहुत करवाई, पर फिर भी तुझे गोल रोटी बनानी नहीं आई।" उनकी बात सोच , प्रिया मन ही मन हंस पड़ी।


वह बोली, "पता नहीं क्यों नीरज?, लेकिन अभी भी मुझसे कभी-कभी रोटियाँ गोल नहीं बनतीं... और जब भी मुझसे रोटी टेढ़ी मेढ़ी हो जाती है , तो मुझे मां की मीठी सी डाँट याद आ जाती है। लेकिन उसी पल याद आती है उनकी वो बात... जो वो हमेशा कहती थीं ।


"कोई बात नहीं, धीरे-धीरे सीख जाओगी.... कोशिश करने से सब आता है ।" कहते हुए उसकी आंखो में नमी उतर आई


प्रिया ने नम आँखों से आसमान की तरफ देखकर कहा, "माँ, आप कैसे इतनी प्यारी रोटियाँ बना लेती थी ? मुझसे तो नहीं होता ।"


" हम्म्म... कोशिश करने से सब होता है ।" कहते हुए नीरज उसकी तरफ देख मुस्कुरा उठा , तो प्रिया के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई । 



समाप्त



#प्रियंका गुप्ता 



डियर दोस्तों, 

मात्रुभारती पर ये मेरी पहली रचना है । उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी । अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं ।

धन्यवाद