माफिया की दीवानगी - सीजन 2 - 15 InkImagination द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 - 15

**माफिया की दीवानगी - सीजन 2**

**(ऑथर नोट: हेलो मेरे प्यारे रीडर्स! 😍😍 पार्ट 14 में मां का राज और Zara का कनेक्शन खुला—अब पार्ट 15 में वो तूफान आएगा जो सब कुछ हिला देगा। Rehaan का गुस्सा, Aira का डर और बच्चे की सेफ्टी—सब कुछ दांव पर है। कमेंट में बताना मत भूलना—क्या लग रहा है, Rehaan अब क्या करेगा? लाइक, शेयर और फॉलो जरूर करें। हैप्पी रीडिंग! 📖❤️)**

**भाग 15: वो रात जो सब कुछ बदल देगी**

पहाड़ों में रात बहुत ठंडी थी।  
हवा में बर्फ की हल्की-हल्की बूंदें थीं।  
घर के अंदर चिमनी की आग अब सिर्फ लाल चिंगारियां बची थीं।  
Aira बिस्तर पर लेटी थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।  
उसने Rehaan की तरफ देखा—वो अभी भी बालकनी में खड़ा था, फोन हाथ में, आंखें अंधेरे जंगल में टिकी हुईं।  

Aira उठी और उसके पास गई।  
"Rehaan... तुम कब से ऐसे खड़े हो?"  

Rehaan ने बिना मुड़े कहा,  
"जबसे वो मैसेज आया।  
रघुवीर सिंह... वो मेरी मां को मारने वाला।  
और अब वो हमारे बच्चे को।"  

Aira ने उसकी कमर से हाथ डाला।  
"तो अब क्या? हम यहां छुपे रहेंगे?"  

Rehaan ने पलटा और Aira को अपनी बाहों में खींच लिया।  
"नहीं।  
अब छुपना नहीं।  
अब लड़ना है।"  

Aira ने उसकी आंखों में देखा।  
"तुम अकेले नहीं जाओगे।  
मैं तुम्हारे साथ हूं।"  

Rehaan ने उसके माथे पर चुंबन दिया।  
"तुम मेरे साथ हो... यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।  
लेकिन तुम और बच्चा... तुम दोनों सुरक्षित रहोगे।  
मैंने Kabir के पुराने दोस्तों को बुलाया है।  
कल सुबह हम शहर लौटेंगे।  
रघुवीर सिंह को ढूंढेंगे।  
और... खत्म करेंगे।"  

Aira ने उसके सीने पर सिर रखा।  
"मुझे डर लग रहा है... लेकिन तुम पर भरोसा है।"  

Rehaan ने उसे और कसकर पकड़ा।  
"मुझे भी डर लग रहा है।  
पहली बार... मैं किसी चीज से इतना डर रहा हूं।  
क्योंकि अब मेरे पास खोने को बहुत कुछ है।  
तुम... और हमारा बच्चा।"  

Aira ने उसके गाल पर हाथ फेरा।  
"तो फिर... आज रात... सिर्फ हम।  
कोई योजना नहीं। कोई दुश्मन नहीं।  
बस तू और मैं।"  

Rehaan ने मुस्कुराकर उसे बिस्तर की तरफ ले जाया।  
दोनों लेट गए।  
Rehaan ने Aira को अपनी बाहों में लिया।  
धीरे से उसके पेट पर हाथ रखा।  
"ये छोटा सा दिल... कितनी तेज धड़क रहा है।"  

Aira ने हल्के से हंसी।  
"वो तुम्हें सुन रहा है।  
पापा की आवाज पहचान रहा है।"  

Rehaan ने पेट पर कान लगाया।  
"हैलो छोटे... पापा यहां है।  
तुम्हें कोई छू भी नहीं सकता।  
मैं वादा करता हूं।"  

Aira ने उसके बालों में उंगलियां फिराईं।  
"Rehaan... तुम्हें पता है, मैं कभी नहीं सोचा था कि मैं किसी से इतना प्यार कर लूंगी।  
तुम्हारी वो ठंडी आंखें... आज सिर्फ प्यार से भरी हैं।"  

Rehaan ने उसके होंठों पर धीरे से चुंबन दिया।  
"क्योंकि तूने मेरी आंखों में प्यार भर दिया।  
तूने मुझे इंसान बना दिया।"  

उस रात दोनों एक-दूसरे में खो गए।  
हर चुंबन में वो सारे वादे थे—कि चाहे दुनिया कितनी भी दुश्मनी करे, वो कभी अलग नहीं होंगे।  
Rehaan ने Aira की गर्दन पर, कंधे पर, पेट पर बार-बार चुंबन दिए।  
"तुम मेरी जान हो।  
हमारा बच्चा... हमारी दुनिया है।  
और मैं इसे कभी नहीं छोडूंगा।"  

Aira ने रोते हुए कहा,  
"और मैं तुम्हें।  
हम तीनों... हमेशा साथ रहेंगे।"  

**सुबह**  
Rehaan ने कार तैयार की।  
Aira ने बैग पैक किया।  
दोनों घर से निकले।  

रास्ते में Rehaan ने कहा,  
"पहले हम डॉक्टर रमेश से मिलेंगे।  
उन्होंने कहा था—मां ने एक आखिरी चिट्ठी छुपाई थी।  
शायद उसमें रघुवीर सिंह का पता हो।"  

Aira ने सिर हिलाया।  
"और फिर?"  

Rehaan ने गहरी सांस ली।  
"फिर... मैं रघुवीर सिंह को ढूंढूंगा।  
उसे खत्म करूंगा।  
इस बार... कोई पीछे नहीं छूटेगा।"  

**शहर पहुंचकर**  
डॉक्टर रमेश के घर।  
बूढ़े डॉक्टर ने दरवाजा खोला।  
उनकी आंखें नम थीं।  
"रेन... तू आ गया।"  

Rehaan ने कहा,  
"मां की वो आखिरी चिट्ठी... वो कहां है?"  

डॉक्टर ने एक पुराना लिफाफा निकाला।  
"ये तेरी मां ने मुझे दिया था।  
कहा था—अगर कभी तुझे खतरा हो... तो ये दे देना।"  

Rehaan ने लिफाफा खोला।  
अंदर एक छोटा-सा पेपर था।  

मां की लिखावट:  
*"रेन बेटा,  
रघुवीर सिंह अब भी जिंदा है।  
वो एक पुराने किले में छुपा है—उत्तराखंड की पहाड़ियों में।  
किला नाम है—‘काला किला’।  
वहां वो अपनी आखिरी साजिश रच रहा है।  
बेटा... उसे रोकना।  
क्योंकि वो तेरा बच्चा भी छीनना चाहता है।  
मां की आखिरी दुआ तेरे साथ है।  
जीतना।  
मां।"*  

Rehaan ने चिट्ठी बंद की।  
उसकी आंखें जल रही थीं।  
"काला किला... अब मैं आ रहा हूं, रघुवीर सिंह।"  

Aira ने उसका हाथ थामा।  
"हम साथ में।"  

Rehaan ने उसे गले लगाया।  
"हां... हम साथ में।  
लेकिन इस बार... ये आखिरी लड़ाई होगी।"  

तभी Rehaan का फोन बजा।  
एक मैसेज।  

*"काला किला इंतजार कर रहा है।  
आ जा... अपना बच्चा ले जा।  
रघुवीर सिंह"*  

Rehaan ने Aira की तरफ देखा।  
"अब... समय आ गया है।"  




आगे क्या होगा?  
काला किला... रघुवीर सिंह का अड्डा?  
Rehaan और Aira वहां पहुंचेंगे?  
या बच्चे पर खतरा पहले ही मंडरा रहा है?  

अगला पार्ट... इतना डरावना और दिल धड़काने वाला होगा कि आप रात भर सो नहीं पाओगे।  

Thankyou 🥰🥰

(फ्रेंड्स, ये पार्ट कैसा लगा? Rehaan का फैसला और मां का आखिरी संदेश कैसा लगा? कमेंट में बताओ—क्या लगता है, काला किला में क्या होगा? अगला पार्ट बहुत जल्दी आएगा। लाइक, शेयर और फॉलो जरूर करें! ❤️)