गैंगस्टर अर्जुन - 2 Sonu Rj द्वारा रोमांचक कहानियाँ में हिंदी पीडीएफ

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गैंगस्टर अर्जुन - 2

दिन अर्जुन और विक्रम एक पुराने गोदाम में गए। वहाँ वे कुछ सामान और उपकरण देखने पहुँचे थे ताकि अपने लोगों की सुरक्षा बढ़ा सकें।
गोदाम का मालिक उन्हें अलग-अलग चीज़ें दिखाने लगा।
विक्रम ने कहा, "हालात देखकर लगता है कि हमें हर समय तैयार रहना पड़ेगा।"
अर्जुन ने जवाब दिया, "सही कहा। दुश्मन कब क्या करे, पता नहीं।"
कुछ देर बाद दोनों गोदाम के पीछे बने परीक्षण क्षेत्र में गए। वहाँ उन्होंने सामान की जाँच की और देखा कि सब कुछ ठीक से काम कर रहा है या नहीं।
जाँच के दौरान विक्रम हँसकर बोला,
"पाँच साल पहले भी हम इसी तरह तैयारी किया करते थे।"
अर्जुन मुस्कुराया।
"हाँ, लेकिन तब हम ज़्यादा लापरवाह थे।"
करीब एक घंटे तक दोनों ने सारी चीज़ें ध्यान से देखीं और उनकी स्थिति की जाँच की।
सब कुछ ठीक मिलने पर वे वापस गोदाम के अंदर आए।
गोदाम का मालिक बोला,
"अगर आगे भी कुछ चाहिए हो तो बता देना।"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"ज़रूर।"
फिर अर्जुन और विक्रम कार में बैठे और आराम से अपने इलाके की तरफ लौट गए।
रास्ते में दोनों शहर में हुए बदलावों और पुराने दिनों की बातें करते रहे।
उन्हें नहीं पता था कि आने वाले दिनों में उनके लिए और भी बड़ी चुनौतियाँ इंतज़ार कर रही थीं।                                                                                                                      उसी शाम समीर अपनी गर्लफ्रेंड पूजा के साथ एक कैफ़े के बाहर बैठा था। कई दिनों से चल रहे तनाव के बीच वह थोड़ा समय उसके साथ बिताना चाहता था।
दोनों बातें कर रहे थे कि तभी सड़क के दूसरी तरफ कुछ संदिग्ध लोग दिखाई दिए।
समीर ने उन्हें ध्यान से देखा।
"ये लोग यहाँ क्या कर रहे हैं?" उसने धीरे से कहा।
पूजा कुछ समझ पाती, उससे पहले उन लोगों ने उनकी तरफ बढ़ना शुरू कर दिया।
समीर को तुरंत एहसास हो गया कि वे दुश्मन गैंग के आदमी हैं।
उसने तुरंत अर्जुन को फोन लगाया।
"अर्जुन! मैं सेंट्रल मार्केट के पास हूँ। दुश्मन गैंग के लोग यहाँ आ गए हैं!"
अर्जुन ने बिना समय गंवाए जवाब दिया,
"वहीं रहो। मैं और विक्रम अभी पहुँच रहे हैं।"
कुछ मिनट बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। दुश्मन गैंग के लोग समीर को घेरने की कोशिश करने लगे।
समीर ने पूजा को पीछे रहने को कहा।
तभी अर्जुन और विक्रम अपनी कार से वहाँ पहुँच गए।
अर्जुन कार से उतरते ही बोला,
"समीर, सब ठीक है?"
"अभी तक तो है," समीर ने जवाब दिया।
दुश्मन गैंग का एक आदमी आगे आया।
"हम सिर्फ एक संदेश देने आए हैं। यह शहर अब तुम्हारा नहीं रहा।"
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
"संदेश मिल गया। अब तुम लोग यहाँ से जाओ।"
लेकिन सामने वाले पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
दोनों तरफ बहस शुरू हो गई। माहौल और गर्म हो गया।
कुछ देर तक धक्का-मुक्की और हाथापाई होती रही। आसपास के लोग डरकर दूर हट गए।
आखिर पुलिस सायरन की आवाज़ सुनाई दी।
दुश्मन गैंग के लोग तुरंत अपनी गाड़ियों में बैठे और वहाँ से निकल गए।
जाने से पहले उनके लीडर के आदमी ने अर्जुन से कहा,
"अगली बार सिर्फ चेतावनी नहीं होगी।"
अर्जुन चुपचाप उसे जाता हुआ देखता रहा।
विक्रम बोला,
"लगता है बड़ा तूफ़ान आने वाला है।"
अर्जुन ने गंभीर आवाज़ में कहा,
"और इस बार हम तैयार रहेंगे।".                                                                                                                           अगले दिन अर्जुन, समीर और विक्रम अपने पुराने दोस्त अमन को लेने जेल के बाहर पहुँचे। अमन कई साल बाद रिहा हो रहा था और पहले गैंग का भरोसेमंद सदस्य रह चुका था।
जेल का दरवाज़ा खुला और अमन बाहर आया।
"अर्जुन! तू सच में वापस आ गया!" अमन ने मुस्कुराते हुए कहा।
चारों ने एक-दूसरे का स्वागत किया और फिर अमन के घर चले गए।
घर पहुँचकर कुछ देर पुरानी बातें हुईं। उसके बाद अर्जुन ने पूछा,
"अमन, अंदर रहते हुए दुश्मन गैंग के बारे में कुछ पता चला?"
अमन का चेहरा गंभीर हो गया।
"हाँ, और जो पता चला वो अच्छा नहीं है।"
कमरे में सब चुप हो गए।
अमन ने कहा,
"हम जिन लोगों को अलग-अलग गैंग समझ रहे हैं, वे असल में एक ही बड़े संगठन का हिस्सा हैं।"
"मतलब?" समीर ने पूछा।
अमन ने समझाया,
"उनका एक बड़ा बॉस है, लेकिन वह सामने नहीं आता। अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।"
विक्रम ध्यान से सुन रहा था।
अमन आगे बोला,
"एक टीम बिज़नेस और इलाकों पर कब्ज़ा करती है।"
"दूसरी टीम जानकारी इकट्ठा करती है और लोगों पर नज़र रखती है।"
"तीसरी टीम लड़ाई और दबाव बनाने का काम करती है।"
अर्जुन समझ गया कि दुश्मन इतने संगठित क्यों हैं।
अमन ने आखिरी बात कही,
"और मैंने जेल में सुना था कि उनका कोई आदमी शहर के पुराने इलाकों में भी सक्रिय है।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
अर्जुन खिड़की की तरफ देखने लगा।
"तो अब हमें सिर्फ दुश्मन गैंग नहीं, उनके पूरे नेटवर्क का सामना करना होगा।"
समीर ने मुट्ठी भींच ली।
"जो भी हो, इस बार हम पीछे नहीं हटेंगे।"
चारों दोस्तों ने तय किया कि अब वे दुश्मन संगठन के बारे में और जानकारी जुटाएँगे।                                                   अगले दिन अर्जुन और विक्रम एक गैंग के लोगों से मिलने शहर के बाहरी इलाके के एक बड़े गोदाम में पहुँचे। उनका मकसद एक डील पर बात करना था।
गोदाम के अंदर कई लोग मौजूद थे। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही।
सामने वाले गैंग का एक आदमी बोला,
"अगर तुम्हें हमारे साथ काम करना है, तो कुछ नियम मानने होंगे।"
अर्जुन ने जवाब दिया,
"हम बराबरी की बात करने आए हैं, किसी के नीचे काम करने नहीं।"
यह सुनते ही माहौल गर्म हो गया।
सामने वाले लोग नाराज़ हो गए।
विक्रम ने महसूस किया कि मामला बिगड़ रहा है।
कुछ देर में बहस तेज़ हो गई। दोनों तरफ के लोग खड़े हो गए।
"तुम लोग यहाँ आकर हमें शर्तें नहीं बता सकते!" सामने वाले आदमी ने कहा।
अर्जुन भी पीछे हटने वालों में नहीं था।
"और तुम हमें आदेश नहीं दे सकते।"
अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
गोदाम में अफरा-तफरी मच गई।
अर्जुन ने विक्रम से कहा,
"चलो, यहाँ से निकलते हैं!"
दोनों पीछे के रास्ते की तरफ भागे।
सामने वाले लोग भी उनके पीछे दौड़ पड़े।
अर्जुन और विक्रम किसी तरह गोदाम से बाहर निकले और अपनी कार तक पहुँचे।
विक्रम ने तेजी से गाड़ी स्टार्ट की।
पीछे से कुछ गाड़ियाँ उनका पीछा करने लगीं।
शहर की सड़कों पर कुछ देर तक पीछा चलता रहा, लेकिन आखिरकार विक्रम ने एक तंग गली में गाड़ी घुसाकर पीछा छुड़ा लिया।
दोनों ने राहत की साँस ली।
विक्रम हँसते हुए बोला,
"डील करने गए थे, और लड़ाई करके लौटे।"
अर्जुन भी मुस्कुरा दिया।
"कम से कम अब पता चल गया कि वे हमारे दोस्त नहीं बन सकते।"
फिर दोनों अपने इलाके की तरफ लौट गए और बाकी लोगों को पूरी बात बताने का फैसला किया।                                पर बैठकर विक्रम ने अर्जुन से कहा,
"हम हमेशा बचाव करते रहे हैं। अगर अपना इलाका वापस लेना है, तो हमें खुद आगे बढ़ना होगा।"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"सही कहा। अब समय आ गया है कि हम अपना इलाका वापस लें।"
अगले दिन अर्जुन अपने कुछ लोगों के साथ शहर के एक इलाके में पहुँचा, जिस पर दुश्मन गैंग Black Cobra का कब्ज़ा था।
वहाँ उनके लोग दुकानदारों और स्थानीय लोगों को डराकर अपना दबदबा बनाए हुए थे।
अर्जुन सीधे उनके अड्डे पर पहुँचा।
Black Cobra के लोग उसे देखकर हैरान रह गए।
"अर्जुन! तू यहाँ क्या कर रहा है?" उनके एक आदमी ने पूछा।
अर्जुन ने जवाब दिया,
"अपना इलाका वापस लेने आया हूँ।"
बहस शुरू हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कुछ देर बाद Black Cobra के लोग पीछे हटने लगे। उनका कब्ज़ा कमजोर पड़ गया।
लेकिन तभी खबर फैल गई कि अर्जुन इलाके में आ गया है।
थोड़ी ही देर में दुश्मन संगठन की तीन और टीमें वहाँ पहुँच गईं।
पहली टीम इलाके पर कब्ज़ा बनाए रखने वाली थी।
दूसरी टीम निगरानी और जानकारी जुटाने वाली।
तीसरी टीम दबाव बनाने और लोगों को डराने वाली।
विक्रम ने फोन पर कहा,
"अर्जुन, और लोग आ रहे हैं!"
अर्जुन ने जवाब दिया,
"आने दो।"
इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग दुकानों के शटर बंद करने लगे।
अर्जुन और उसके साथियों ने अपने इलाके के लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचाया और दुश्मनों का सामना किया।
कई घंटों तक संघर्ष चलता रहा।
आखिरकार दुश्मन संगठन की टीमें पीछे हटने लगीं।
Black Cobra के लोग भी वहाँ से निकल गए।
शाम तक पूरे इलाके में खबर फैल चुकी थी—
अर्जुन ने अपना पहला इलाका वापस ले लिया था।
विक्रम वहाँ पहुँचा और मुस्कुराया।
"मुबारक हो, अर्जुन। यह तो बस शुरुआत है।"
अर्जुन ने पूरे इलाके की तरफ देखा।
"हाँ... अभी पूरा शहर बाकी है।"
और पहली बार पाँच साल बाद, लोगों को लगा कि शायद अर्जुन की वापसी सच में शहर का नक्शा बदल सकती है।
जारी रहेगा...