Ghost hunters - 22 Rishav raj द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

Ghost hunters - 22



अंधेरा अब सिर्फ बाहर नहीं था वो हर साँस के साथ भीतर उतर रहा था।हवा भारी थी, जमीन ठंडी और आसमान जैसे इस जगह को छोड़ चुका था।सबकी नजरें अब उसी पर टिकी थीं अजनबी तांत्रिक पर जो अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, बिना किसी जल्दबाज़ी के, जैसे उसे पता हो कि अब कोई उसे रोक नहीं सकता।

आरव ने अपने कंधे के घाव को दबाया और खुद को संभाला।कबीर उसके पास आकर खड़ा हो गया, चेहरे पर दर्द था लेकिन आँखों में गुस्सा।मीरा भी धीरे-धीरे उठी, उसकी उंगलियाँ अब भी काँप रही थीं, लेकिन उसकी नजरें स्थिर थीं।

तांत्रिक ने एक गहरी साँस ली और अपने शिष्यों को पीछे हटने का इशारा किया।

तांत्रिक- अब ये साधारण बाधा नहीं है ये साधक है और ये लड़ाई आखिरी होगी।

अजनबी तांत्रिक हल्का मुस्कुराया

अजनबी तांत्रिक- आखिर समझ ही गए तुम लेकिन देर हो चुकी है।

उसने अपने दोनों हाथ फैलाए।चारों तरफ की काली धुंध उसके आसपास घूमने लगी।पेड़, जमीन, हवा सब उसकी ओर खिंचते नजर आ रहे थे।

अजनबी तांत्रिक- सालों की साधना है ये आत्माएँ, पीड़ा, भय सबको बाँधा है मैंने और आज तुम सब उसका हिस्सा बनोगे।

अचानक जमीन में दरारें फैलने लगीं।उन दरारों से धुएं के साथ कई धुंधली आकृतियाँ बाहर निकलने लगीं।एक नहीं दो नहीं दर्जनों निशा रो पड़ी।

निशा- ये इतनी सारी

कबीर ने दाँत भींचे

कबीर- ये अकेला नहीं था ये पूरी फौज बना रहा था

आरव ने तुरंत फैसला लिया।

आरव- अगर इसे अभी नहीं रोका तो ये यहाँ नहीं रुकेगा।

तांत्रिक ने सिर हिलाया

तांत्रिक- इसे हराने का एक ही तरीका है इसके स्रोत को तोड़ना।

मीरा ने पूछा

मीरा- स्रोत मतलब?

तांत्रिक की नजर उसके हाथ की हड्डी पर गई।

तांत्रिक- वही जिससे ये सब नियंत्रित हो रहा है।

अजनबी तांत्रिक ने हड्डी को और कस लिया, जैसे उसने उनकी बात सुन ली हो।

अजनबी तांत्रिक- इसे छू भी नहीं पाओगे।

अगले ही पलसभी आकृतियाँ एक साथ आगे बढ़ीं हमला।
आरव चिल्लाया

आरव- फैल जाओ!

सब अलग-अलग दिशाओं में बंट गए।एक आकृति कबीर की ओर झपटी।उसने लोहे की छड़ से उसे रोका, लेकिन इस बार वो एक नहीं थी।दूसरी पीछे से आई और उसने कबीर को गिरा दिया मीरा ने गंगाजल फेंका, जिससे कुछ आकृतियाँ पीछे हट गईं, लेकिन बाकी और उग्र हो गईं आरव सीधे अजनबी तांत्रिक की ओर दौड़ा।

आरव- इसे खत्म करना होगा!

लेकिन बीच में तीन आकृतियाँ आ गईं।उन्होंने उसे रोक लिया।आरव ने पूरी ताकत से एक को धक्का दिया, दूसरी से बचा, लेकिन तीसरी ने उसे पकड़ लिया।

उसकी सांस रुकने लगी उसी समय तांत्रिक आगे बढ़ा उसकी आँखें अब बंद थीं और उसका स्वर पहले से कहीं ज्यादा गूंजदार।

तांत्रिक- ॐ कालभैरवाय नमः…

उसने जमीन पर हाथ रखा और अचानक मंडल फिर से प्रकट हुआ लेकिन इस बार छोटा नहीं पूरा क्षेत्र उसकी रोशनी में आ गया सभी आकृतियाँ एक पल के लिए रुक गईं अजनबी तांत्रिक चौंका।

अजनबी तांत्रिक- ये असंभव है

तांत्रिक ने आँखें खोलीं।

तांत्रिक- ये मेरा क्षेत्र है यहाँ नियम मेरे हैं

उसने जोर से मंत्र बोला

तांत्रिक- फट्!

मंडल की रोशनी तेज़ हो गई।कई आकृतियाँ उसी पल जलकर खत्म हो गईं।बाकी पीछे हटने लगीं आरव ने मौका देखा।उसने खुद को छुड़ाया और फिर से दौड़ा इस बार कोई बीच में नहीं आया अजनबी तांत्रिक ने उसे आते देखा और हाथ उठाया।

अजनबी तांत्रिक- रुक जाओ!

एक अदृश्य ताकत ने आरव को रोकने की कोशिश की…लेकिन इस बार वो नहीं रुका उसने दाँत भींचे और एक-एक कदम आगे बढ़ता गया 

आरव- ये यहीं खत्म होगा!

कबीर भी पीछे से उठकर उसकी ओर भागा

कबीर- अकेले नहीं!

मीरा ने भी साहस जुटाया और उनके साथ आ गई।

तीनों अब साथ थे अजनबी तांत्रिक ने गुस्से में अपनी पूरी ताकत लगा दी।हवा तेज़ हो गई, जमीन कांपने लगी लेकिन उसी पल तांत्रिक ने आखिरी मंत्र शुरू किया।

तांत्रिक- ॐ क्षौं… विनाशाय…

उसकी आवाज पूरे क्षेत्र में गूंज उठी मंडल की रोशनी सीधे अजनबी तांत्रिक पर केंद्रित हो गई वो पहली बार पीछे हटा

अजनबी तांत्रिक- नहीं…!

आरव उसके पास पहुँच चुका था उसने बिना रुके उसके हाथ को पकड़ा जिसमें हड्डी थी एक सेकंड बस एक सेकंड का संघर्ष फिर कबीर ने लोहे की छड़ से उस हड्डी पर वार किया।

हड्डि में दरार आई अजनबी तांत्रिक की चीख निकल गई मीरा ने उसी पल गंगाजल उस पर फेंका हड्डी पूरी तरह टूट गई और उसी क्षण सब कुछ बदल गया।

सभी आकृतियाँ एक साथ चीखीं और धुएं में बदलने लगीं।अंधेरा जैसे पीछे हटने लगा।हवा हल्की हो गई अजनबी तांत्रिक घुटनों पर गिर गया उसकी आँखों से डर साफ दिख रहा था।

अजनबी तांत्रिक- तुमने सब खत्म कर दिया

तांत्रिक उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

तांत्रिक- नहीं तुमने खुद किया।

उसने अंतिम मंत्र बोला।

तांत्रिक- मुक्त।

अजनबी तांत्रिक का शरीर धीरे-धीरे धुएं में बदलने लगाऔर कुछ ही पलों में वो भी गायब हो गया।

सन्नाटा पूरी तरह का सन्नाटा हवा अब सामान्य थी।पेड़ स्थिर था।जमीन शांत आरव वहीं बैठ गया, थक चुका था कबीर उसके पास आकर बैठ गया।

कबीर- खत्म?

तांत्रिक ने चारों तरफ देखा फिर धीरे से कहा

तांत्रिक- हाँ अब खत्म

मीरा ने आसमान की तरफ देखा।कई घंटों बाद उसे पहली बार सामान्य महसूस हुआ रोहित और उसका परिवार धीरे-धीरे आगे आए।

रोहित- हम बच गए?

आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा

आरव- हाँ इस बार

कुछ देर तक सब वहीं बैठे रहे बिना बोले।

फिर तांत्रिक मुड़ा।

तांत्रिक- हर चीज़ का अंत होता है लेकिन हर अंत एक सीख छोड़ जाता है अंधेरे से खेलोगे तो एक दिन वो तुम्हें ही निगलने आ जाएगा

आरव ने उसकी बात को चुपचाप सुना फिर उसने अपनी टीम की तरफ देखा अब ये सिर्फ एक केस नहीं था ये एक अनुभव था जो उन्हें हमेशा याद रहेगा धीरे-धीरे सब वहाँ से निकलने लगे सूरज उगने लगा था और पहली किरण के साथ

वो जगह  फिर से एक सामान्य जगह बन चुकी थी लेकिन जो वहाँ हुआ वो कभी सामान्य नहीं था...