शहर की रङ्गीन रोशनियाँ - 2 H.k Bhardwaj द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहर की रङ्गीन रोशनियाँ - 2

💘शहर की रंगीन रोशनियाँ💘  भाग – 02  

  (अनकही आँखों की कहानी) 

✍️ Written by H. K. Bharadwaj

__________________________________________________________________________________________समय नदी की धारा की तरह बहता रहा।

त्रिवेणी सहाय इंटर कॉलेज में किशोर और मधु की पढ़ाई आगे बढ़ती रही। 

      परंतु उनके बीच आज तक एक भी शब्द का आदान-प्रदान नहीं हुआ था।

फिर भी न जाने क्यों दोनों एक-दूसरे के लिए पूरी तरह अपरिचित भी नहीं थे। 

      कभी-कभी जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे बन जाते हैं जिनका कोई नाम नहीं होता।

▪️न वे मित्रता कहलाते हैं।

▪️न प्रेम।

▪️न परिचय।

फिर भी वे हृदय के किसी कोने में स्थायी निवास बना लेते हैं।             अब कॉलेज का प्रत्येक दिन किशोर के लिए एक प्रतीक्षा बन गया था।

सुबह वह जल्दी घर से निकलता।बस की खिड़की से बाहर खेतों और सड़कों को देखता हुआ आसफपुर पहुँचता।

लेकिन उसका मन कॉलेज की इमारत में नहीं, किसी और की एक झलक में अटका रहता।

वह जानता था।

—मधु तीसरे पीरियड के बाद अपनी सहेलियों आभा और मिथलेश के साथ खाली पीरिएड में विद्यालय के  फील्ड में बनी फूलों की क्यारियों में जाती है।

उसे यह भी पता था कि प्रार्थना सभा में वह किस कतार में खड़ी होती है।

और यह भी कि छुट्टी के समय वह किस रास्ते से मुख्य द्वार तक जाती है।

यह सब उसने बिना किसी प्रयास के याद कर लिया था।                    क्योंकि मन जिन बातों को प्रेम से देखता है, उन्हें याद रखने के लिए उसे किसी अभ्यास की आवश्यकता नहीं पड़ती।

उधर मधु भी अब उस शांत युवक को पहचानने लगी थी।वह अक्सर अपनी सहेलियों से पूछती।

—"वह लड़का कौन है जो हमेशा अकेला रहता है ?"

आभा कंधे उचकाकर कहती।

—" पता नहीं। शायद बहुत शर्मीला है।"

मधु मुस्करा देती।

उसके मन में भी एक हल्की जिज्ञासा जन्म लेने लगी थी।लेकिन वह जिज्ञासा कभी शब्द नहीं बन पाई।

एक दिन कॉलेज में 26,27,28 फरबरी का वार्षिकोत्सव था।                  पूरा परिसर रंग-बिरंगी सजावट से जगमगा रहा था।मंच पर कार्यक्रम चल रहे थे।

विद्यार्थियों की भीड़ उमड़ रही थी।

उस दिन किशोर दूर एक पेड़ के नीचे खड़ा था।

अचानक उसकी नज़र मधु पर पड़ी।

मधु भीड़ से कुछ दूर खड़ी कार्यक्रम देख रही थी।

तभी न जाने कैसे दोनों की नज़रें मिलीं।

इस बार कुछ क्षण नहीं...बल्कि कई सेकंड तक।

दोनों ने नज़रें नहीं हटाईं।

समय जैसे ठहर गया।

आसपास शोर था।

तालियाँ थीं।

घोषणाएँ थीं।

लेकिन उन दोनों के लिए उस क्षण संसार में केवल दो जोड़ी आँखें थीं।

किशोर के भीतर जैसे कोई दीपक जल उठा।

और शायद मधु के मन में भी कोई हल्की सी लहर उठी।                   लेकिन अगले ही पल वह अपनी सहेलियों के साथ आगे बढ़ गई।

और वह क्षण स्मृति बन गया।

कॉलेज का अंतिम वर्ष आरम्भ हो चुका था।

परीक्षाएँ निकट थीं।

अब सब विद्यार्थी अपने भविष्य की योजनाओं में व्यस्त थे।कोई नौकरी की तैयारी कर रहा था।

कोई उच्च शिक्षा की।

कोई विवाह के सपने देख रहा था।

लेकिन किशोर का भविष्य जैसे किसी धुँध में छिपा हुआ था।         उसे केवल इतना मालूम था कि उसकी कॉलेज की दुनिया अब समाप्त होने वाली है।

और उसके साथ ही वह चेहरा भी उससे दूर हो जाएगा जिसे उसने वर्षों तक बिना कुछ कहे चाहा था।

आख़िर वह दिन भी आ गया।

अंतिम परीक्षा समाप्त हुई।

विद्यार्थी एक-दूसरे से विदा ले रहे थे।

कहीं हँसी थी।

कहीं आँसू थे।

कहीं भविष्य के वादे।

कहीं पुनः मिलने की आशाएँ।

लेकिन किशोर चुप था। 

          कॉलेज के मुख्य द्वार के पास खड़ा वह दूर जाते विद्यार्थियों को देख रहा था।

तभी उसने मधु को देखा।

वह अपनी सहेलियों के साथ बाहर आ रही थी।किशोर का हृदय तेजी से धड़कने लगा।

शायद आज...शायद आज वह उससे बात कर ले।

कम से कम उसका नाम तो पूछ ले।

लेकिन उसके कदम आगे नहीं बढ़े।

वर्षों की झिझक उस एक क्षण में भी नहीं टूटी।

उसी समय मधु की नज़र उस पर पड़ी।

वह कुछ पल के लिए रुक गई।

दोनों की आँखें फिर मिलीं कुछ कहनें को किन्तु दोनों अपनी अपनी जगह स्थिर और मौन खडे रहें।

शायद यह अंतिम बार था उनका।

न कोई मुस्कान।

न कोई संकेत।

न कोई शब्द।

बस एक लंबी, गहरी और मौन दृष्टि।

मानो दोनों अपनी-अपनी आँखों में कुछ लिख रहे हों।

और फिर...मधु मुड़ गई।

धीरे-धीरे भीड़ में विलीन हो गई।

किशोर उसे तब तक देखता रहा जब तक वह उसकी दृष्टि से ओझल नहीं हो गई।

उस दिन आसफपुर की सड़कें वैसी ही थीं।

कॉलेज वैसा ही था।

पेड़ पौधें क्यारियाँ सब कुछ वैसे ही थे।

लेकिन किशोर के भीतर कुछ हमेशा के लिए बदल चुका था।               उसे पहली बार महसूस हुआ।

—कुछ कहानियाँ शुरू तो होती हैं,पर कभी पूरी नहीं होतीं।और शायद इसी अधूरेपन में उनकी सबसे बड़ी सुंदरता छिपी होती है।

क्रमशः...Next part Coming Soon

👉प्रिय पाठक मित्रों, 

▪️अगले और अंतिम भाग में मधु की शादी, 

▪️किशोर का विवाह कँवलसरिता से, और उसके मन का द्वंद्व, । 

▪️पत्नी को अपने एकतरफ़ा प्रेम की सच्चाई बताना, 

▪️और वर्षों बाद भी मधु की स्मृतियों में जीते रहने का अत्यंत मार्मिक और भावनात्मक समापन लिखूँगा।

Written by H K Bharadwaj