वोह राज(एक भावनात्मक हिंदी कहानी)लेखक: विजय शर्मा ऐरीमोहित और रीना की शादी को लगभग आठ साल हो चुके थे। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। शहर के एक छोटे से घर में उनका संसार बसा हुआ था। बाहर से देखने पर लगता था कि उनसे ज्यादा खुश शायद ही कोई होगा। लेकिन हर इंसान के दिल में कुछ ऐसे राज होते हैं जिन्हें वह दुनिया से ही नहीं, कभी-कभी अपने सबसे प्रिय व्यक्ति से भी छुपाकर रखता है।मोहित और रीना के जीवन में भी कुछ ऐसे ही राज थे।एक शाम बारिश हो रही थी। रीना खिड़की के पास खड़ी बूंदों को देख रही थी। तभी मोहित ऑफिस से घर लौटा।"आज बहुत देर कर दी?" रीना ने पूछा।"ऑफिस में काम ज्यादा था।" मोहित ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।रीना ने उसकी आंखों में देखा। उसे लगा जैसे मोहित कुछ छुपा रहा है।"सब ठीक है ना?" उसने पूछा।"हाँ, बिल्कुल।"लेकिन यह सच नहीं था।मोहित के दिल में एक ऐसा राज था जो उसे हर दिन अंदर ही अंदर खा रहा था।उधर रीना भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं थी। उसके दिल में भी एक ऐसा सच था जिसे उसने कभी मोहित को नहीं बताया था।उस रात दोनों एक ही बिस्तर पर सोए, लेकिन दोनों की आँखों से नींद गायब थी।अगली सुबह मोहित ऑफिस के लिए निकल गया। रास्ते में वह एक पुराने मोहल्ले में रुका। वहाँ एक छोटा सा घर था।उसने दरवाजा खटखटाया।एक बुजुर्ग महिला ने दरवाजा खोला।"आ गए बेटा?" महिला ने प्यार से कहा।"जी माँ।"वह महिला मोहित की असली माँ थी।मोहित ने रीना को हमेशा बताया था कि उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन सच्चाई यह थी कि उसकी माँ जीवित थी।सालों पहले परिवार में एक बड़ी लड़ाई हुई थी। मोहित घर छोड़कर चला गया था और उसने दुनिया को यही बताया कि उसके माता-पिता नहीं रहे।उसे डर था कि अगर रीना को सच्चाई पता चली तो वह उससे नाराज होगी।उधर रीना भी एक राज अपने दिल में दबाए बैठी थी।उस दिन मोहित के जाने के बाद उसने अलमारी से एक पुराना डिब्बा निकाला।डिब्बे में कुछ तस्वीरें और एक पत्र रखा था।तस्वीरों में रीना एक छोटे बच्चे के साथ दिखाई दे रही थी।उसकी आँखों में आँसू आ गए।वह बच्चा उसका बेटा था।शादी से पहले रीना एक लड़के से प्यार करती थी। दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उस लड़के की मृत्यु हो गई।उस समय रीना गर्भवती थी।परिवार वालों ने समाज के डर से बच्चे को एक अनाथालय में दे दिया।बाद में उसकी शादी मोहित से हो गई।यह बात उसने कभी मोहित को नहीं बताई।हर महीने वह चुपके से उस बच्चे की पढ़ाई का खर्च भेजती थी।समय बीतता गया।एक दिन मोहित की माँ अचानक बीमार हो गईं।डॉक्टर ने कहा कि उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाना होगा।मोहित परेशान हो गया।उसने कई जगह पैसे जुटाने की कोशिश की।लेकिन पर्याप्त रकम नहीं मिली।आखिर उसने फैसला किया कि अब वह रीना को सब सच बता देगा।उस शाम वह घर पहुँचा।"रीना, मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है।"रीना ने उसकी गंभीर आवाज सुनी तो घबरा गई।"क्या हुआ?"मोहित कुछ देर चुप रहा।फिर बोला,"मैंने तुमसे बहुत बड़ा झूठ बोला था।"रीना का दिल धड़कने लगा।"कौन सा झूठ?""मेरी माँ जिंदा हैं।"रीना स्तब्ध रह गई।मोहित ने सारी कहानी बता दी।उसकी आँखों में आँसू थे।"मुझे माफ कर दो। मैं सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।"कुछ क्षण तक कमरे में सन्नाटा रहा।फिर रीना ने उसका हाथ पकड़ लिया।"अगर तुमने गलती की है तो उसका कारण भी था। मैं तुमसे नाराज नहीं हूँ।"मोहित की आँखें भर आईं।उसे लगा जैसे वर्षों का बोझ उतर गया हो।लेकिन उसी रात रीना के मन में भी तूफान उठने लगा।वह सोच रही थी कि जब मोहित ने अपना राज बता दिया है तो क्या उसे भी सच नहीं बता देना चाहिए?पूरी रात वह करवटें बदलती रही।सुबह उसने निर्णय ले लिया।शाम को दोनों छत पर बैठे थे।सूरज डूब रहा था।रीना ने धीमे स्वर में कहा,"मोहित, अब मेरी बारी है।"मोहित ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा।"क्या मतलब?""मेरे पास भी एक राज है।"फिर उसने पूरी कहानी सुना दी।अपने पहले प्यार की कहानी।दुर्घटना की कहानी।और उस बच्चे की कहानी।मोहित सुनता रहा।उसके चेहरे के भाव बदलते रहे।कहानी समाप्त हुई तो रीना की आँखों से आँसू बहने लगे।"अगर तुम मुझे छोड़ना चाहो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूँगी।"कुछ मिनट तक मोहित चुप रहा।रीना को लगा शायद उसका संसार खत्म हो गया।लेकिन तभी मोहित ने उसका हाथ पकड़ लिया।"तुमने मुझे सच बता दिया, यही सबसे बड़ी बात है।"रीना ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा।"तुम नाराज नहीं हो?""नाराज हूँ। दुख भी हुआ है। लेकिन मैं यह भी समझता हूँ कि इंसान का अतीत मिटाया नहीं जा सकता।"रीना रो पड़ी।"मैं बहुत डरती थी।""और मैं भी।"दोनों हँस पड़े।आँसुओं के बीच वह हँसी बहुत सुंदर थी।कुछ दिनों बाद दोनों साथ में उस अनाथालय गए जहाँ रीना का बेटा रहता था।लड़का अब लगभग बारह साल का हो चुका था।उसका नाम आरव था।जब रीना ने उसे देखा तो उसकी आँखों से आँसू बह निकले।आरव ने पूछा,"आप रो क्यों रही हैं?"रीना कुछ नहीं कह पाई।मोहित आगे बढ़ा।"क्योंकि वह तुम्हें बहुत प्यार करती हैं।"धीरे-धीरे आरव को पूरी सच्चाई पता चली।वह पहले थोड़ा नाराज हुआ।लेकिन बाद में उसने अपनी माँ को माफ कर दिया।उधर मोहित भी रीना को अपनी माँ से मिलाने ले गया।बुजुर्ग महिला ने रीना को गले लगा लिया।"तुम बहुत अच्छी बहू हो बेटा।"रीना भावुक हो गई।उसे महसूस हुआ कि इतने सालों से जो परिवार अधूरा था, वह अब पूरा हो रहा है।एक वर्ष बाद।घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था।आरव छुट्टियों में उनके पास आता था।मोहित की माँ भी अब उन्हीं के साथ रहने लगी थीं।घर में हँसी, खुशियाँ और अपनापन था।एक रात सब लोग छत पर बैठे थे।तारों भरा आसमान था।आरव ने पूछा,"माँ, क्या हर इंसान के पास कोई राज होता है?"रीना मुस्कुराई।"हाँ बेटा, लगभग हर इंसान के पास।""फिर क्या उन्हें छुपाना चाहिए?"मोहित ने उत्तर दिया,"कुछ राज समय आने तक छुपे रह सकते हैं, लेकिन हमेशा नहीं।""क्यों?""क्योंकि सच देर से सही, लेकिन सामने आ ही जाता है।"उस रात मोहित और रीना बहुत देर तक तारों को देखते रहे।दोनों को एहसास हो रहा था कि राज छुपाने से इंसान अपने ही लोगों से दूर हो जाता है।सच्चाई कभी-कभी दर्द देती है, लेकिन वही रिश्तों को मजबूत भी बनाती है।उनके जीवन में बहुत तूफान आए थे।बहुत आँसू बहे थे।लेकिन आखिरकार उन्होंने सीख लिया था कि प्यार का सबसे मजबूत आधार विश्वास और सच्चाई होती है।और जब दो लोग अपने सारे छुपे हुए राज एक-दूसरे के सामने रख देते हैं, तब उनके बीच कोई दीवार नहीं बचती।सिर्फ प्यार बचता है।और वही प्यार जीवन की सबसे बड़ी जीत बन जाता है।समाप्तलेखक: विजय शर्मा ऐरी