मॉडर्न साधु aman द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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मॉडर्न साधु

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की खुशी को छोटा कर दिया था। फिर ऑपरेशन रूम में शांति हुई और डॉक्टर ने बाहर आ कर मोहन जी को बधाई दी। ओर कहा मुबारक हो...
आपको लड़का हुआ है।

मोहन जल्दी से अपनी पत्नी विद्या के पास गया और उसकी आंखे अपने बच्चे को ढूंढ रही थी।....मोहन ने बच्चे को देखा और उसे स्नेह के साथ अपनी गोद में ले लिया। मन की उथल-पुथल एकदम से शांत हो गई....
अस्पताल का सारा काम खत्म होने के बाद मोहन अपने बीवी बच्चे के साथ घर आ गया।

फिर बच्चे के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई घर को सजाया गया लोगो ओर रिश्तेदारों को बुलाया गया सारे लोग जन्मोत्सव में खुशी-खुशी शामिल हुए। सभी मेहमानों ने मोहन ओर विद्या को बधाई दी....

इसी तरह बच्चे के नामकरण का कार्यक्रम भी शुरू हुआ
मोहन ओर विद्या बहुत खुश थे। विद्या ने अपने पति से पूछा बच्चे का नाम क्या होगा......आपने कोई नाम सोचा है? मोहन ने जवाब दिया..हां मैने एक नाम सोचा है।
मेरे बच्चे ने आते ही मेरे मन की परेशानी ओर चिंता को चैन ओर शांति में बदल दिया उसी पल मैने ये नाम सोचा..
मोहन ने कहा...आज से मेरे बच्चे का होगा ' अमन '....

धीरे - धीरे समय आगे बढ़ा ओर अमन 10 साल का हो गया वह हर सुबह अपनी मां के साथ मंदिर जाता....दोस्तो के साथ खेलता पापा से अच्छी बाते सीखता ।
एक दिन अमन कमरे में खेल रहा था उसकी मां वही साफ-सफाई कर रही थी तभी उसका पति कमरे में आता हैं और अपनी पत्नी से कहता है....देखो मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ विद्या ने उपहार खोला और देखा उसमें सुंदर सा हार था उसे वह हार पसंद आया उसकी मुस्कान देख मोहन खुश हुआ ओर अपने काम पे चला गया।

अपने पापा को देख अमन ने सोचा कि वह भी अपनी मां को उनके जन्मदिन पर उपहार देगा उसने उसी दिन से अपनी गुल्लक में जेबखर्च के पैसे जमा करना शुरू कर दिया कुछ दिन बाद उसने गुल्लक तोड़ी ओर उपहार लेने चला गया रास्ते में उसकी ही उम्र के एक लड़के ने उसके हाथ में पैसे देखे उसने उसका पीछा किया और मौका पाते ही अमन के पैसे छीन कर भागने लगा

अमन भी उसके पीछे भागा थोड़ी दूर बढ़ने के बाद पहला बच्चा लड़खड़ा कर गिर गया। अमन ने उसे पकड़ा और उसे मारने लगा उसने अपने पैसे मांगे बच्चे ने उसे पैसे दे दिए और भाग गया अमन भी उपहार लेने के लिए आगे बढ़ा। 

दुकान के बाहर उसने उसी बच्चे को देखा उसने उसे पकड़ा और कहा......तुम फिर से चोरी करने की सोच रहे हो सुधर जाओ मैने तो तुम्हे छोड़ दिया पर जरूरी नहीं कि हर इंसान तुम्हे छोड़ दे क्यों करते हो ये काम? बच्चे ने उससे कहा...मेरे दो भाई बहन हैं हमारी मां नहीं है और बड़ा होने के नाते मेरी जिम्मेदारी हे कि मैं उनकी देखभाल करूं।
जब भीख मांगने पर भी लोग कुछ नहीं देते तो मजबूरन मुझे चोरी करना पड़ता है।

इस बात ने अमन को अंदर से दुखी कर दिया उसे ऐसा लगा उसने उसे मार कर बहुत गलत कर दिया उसने अपने पैसे उस बच्चे को दे दिए उससे माफी मांगी और घर चला गया घर पर उसकी मां के जन्मदिन की पार्टी शुरू हो गई थी वह सोच रहा था कि वह अपनी मां को क्या दे।

सभी ने विद्या को तोहफे दिए उस बीच अमन भी उन्हें कुछ देने आया उसने अपनी मां को एक चिट्ठी दी जिसमें लिखा था...मां आप जो मेरी चिंता करती हैं, खुद से पहले मेरा ख्याल रखती हैं मेरे अच्छे जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं ताकि में खुश रहूं आप हमेशा मेरे दिन को खुशी से भर देती हैं सच कहुं तो आपने ही मेरे जीवन की सुंदर को रूप दिया हैं मेरी प्यारी मां जन्मदिन मुबारक हो।

यह पढ़ कर विद्या की आंखे नम हो गई उसने अपने बेटे को गले से लगा लिया और कहा...यह आज तक का मेरा सबसे बड़ा उपहार है मेरे बच्चे ।