नम आँखे - 5 Nandini Agarwal Apne Kalam Sein द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

नम आँखे - 5

आयुष - मम्मा कल के शो की टिकट बुक करा देते है। धुरन्धर पिक्चर देखना है। अच्छा ठीक है। नैन्शी उसी हिसाब से घर का टाइम टेबल सेट करना है।मम्मा आप कितना टाइम को सेट करके चलती हो। हमारे पीछे कैसे होता था। नैन्शी - मेरा जब भी टाइम सेट था । नौकरी पर जो जाना था। उन माँओ से पूछो जो घर की गृहणी होती है। (हाउसवाइफ ) बच्चो का मुंद्र देख कर उठन है। बच्चो का मुंह देख कर सोती है। पूरा जीवन का लक्ष्य ही परिवार को सीचना हैं । बना लेती है। उन के दिल से पूछो हॉस्टल गये बच्चो के बिना कैसे एक  -एक पल भारी करता है मेरा तो फिर भी बर्किंग लेडी हूं ' बहार आना जाना लगा रहता है। अगले दिन आयुष - जल्दी आओ मम्मा-पापा आयुषी गाड़ी स्टाट कर ली है। अभी आये बस घर लॉक कर दो।

घर लौटने समय मम्मा हमे घुरन्धर -२ भी देखना है। देख लेना दो चार दिन मे टोकैज की क्या जरूरत है।

डाटा से स्मार्ट टीवी पर चला लेना। आयुष नही टॉकेज पर देखना है। फिर और नयी जगह घूमने चलेंगे ठीक है मम्मा अभिनव - जल्दी करो नैन्शी मुझे देर हो रहा है। तुमने छुट्टी ली है। मैने थोड़ी हां बस अभी आई जनाब ये लो अभिनव कितनी बार कहाँ है। कुक बर्किंग लगा लो ।

सारा दिन रसोई मे निकल जाता है। नैन्सी - पर मुझे पसन्द नहीं है। खाना तो अपने हाथो का प्यार से बनाया हुआ होना चाहिए। पति महोदय ठीक है ' जो तुम्हारी इच्छा । आयुष -आयुषी चलो बिस्तर छोड़ो नही मम्मा थोड़ी देर और कोई जिंद नही योगा करो अभी से हेविट रहेगी तो अच्छा होगा। शरीर को चलाने के लिय जैसे भोजन जरूरी है। वैसे ही शरीर स्वस्थ रखने के लिए व्यायम चलो तीनो मिलकर करते हैं। आयुषी - मेरी ज्ञानी मम्मा समझ गये ओ माँ मेरी प्यारी माँ मम्मा हंस कर यू ही समय निकल जायेगा ।

पूरा परिवार मिलकर गुजरात घूमने का प्लान (योजना )

बनाते है। नैन्शी दो दिन बाद नवरात्र शुरु है। गरवा का आनन्द लेगे । बच्चे  हे हे मजा आयेगा कॉलेज मे चले गये पर शरारत नही गये । अभिनव - बच्चे माँ - बाप के सामने खुश नही रहेगे तो और कहाँ खुलके जियेंगे ।

अहमदाबाद आगरा छावनी सुपरफास्ट ट्रेन का सफर शुरु

अभिनव - नैन्शी ट्रेन से उतर कर पहले बच्चो को अहमदाबाद घुमाते है। यहाँ की बिल्डिंग नयी व पुरानी देखने का नजारा देखने है। गुजराती खाने की मिठास का लुफ्त उठते है। हर चीज अधिकतर बेसन से बनती है। और साथ मे थोड़ा खाने मे मीठा खट्टा तीखा मिक्स जीभ चटकारे ले कर खाती है। मम्मा गरवा हॉल मे ड्रेस पहन कर जायेगे तो ज्यादा मजा आयेगा । नही मुझ से नही होगा प्लीज मम्मा लहंगा चुंदरी डालो न अच्छा बाबा ठीक है। घेरा बना - बना कर सब गरवा का आनन्द लेते है। अभिनव अब कहाँ जाना है। पापा ऱ्यहाँ काफी जगह देखने लायक है। पर बेटा समय के हिसाब से घूमना है। चार दिन का टूर है। दो दिन आने - जाने मे सप्ताह भर बस हाँ पापा कर लेंगे यहाँ काम थोड़ी न है। बस नजारा ही तो देखना है। नैन्शी - जो मजा घर की सुख सुविधाओं मे है। वो मजा दर - दर ठोकर खाने मे नही ' । आयुष घर तो वापस जाना ही है। दुनिया भी तो देखनी है।

आयुषी सही बात है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार बल्लभ भाई के सम्मान मे बनवाया है। सबसे ऊँची प्रतीमा लाखो लोगो को आर्किषित किया है। बस अब नही थोड़ा आराम करते है। होटल पहुँचकर थोड़ी देर आराम के बाद सन ऑफ कच्छ दुनिया का सबसे बड़ा नमक से बना रेगिस्तान है। थार पूर्णिमा की रात को यहां का सुन्दरता जबरदस्त एहसास है। फिर वही दिन रात का चक्र शुरु होता है। जीवन मे रात को आराम दिन निकलते ही शैयर करना ।

गिर राष्ट्रीय उद्यान सबसे अच्छी जगह है। तालाला घेर के पास जगह है। 1965 स्थापित किया गया था।

हर हर महादेव हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठता है। सोमनाथ भगवान शिवि के बारह ज्योन लिंग में से एक माना जाता है। सोमनाथ बाबा के दर्शन कर मन प्रसन्न हो गया अभिनव पूरे माथे पर चन्दन लगा माला पहन जय भोले की मन  गद  गद हो गया बाबा के दर्शन कर आयुष -आयुषी पापा बाबा के पुजारी बन जाओ हां हां कर फिर तुम्हारी मम्मा का क्या होगा मम्मा  पुजारिन सभी हसकर जॉक । नैन्सी तुम्हारा कैरियर बना कर घर बसाना है। बस सोमनाथ बाबा की कृपा बनी रहे।

मम्मा जोरो की भूख लगी है। कुछ अच्छा खाना है। चलो वहाँ कुछ खाने का नजर आ रहा है। वही नाश्ता करते हैं । पहले प्रसाद खा लो फिर नाश्ते के बाद बाजार - घूमते है।

अब पहुंचते है। पोरबंदर अरब सागर मे बसा महात्मा गांधी का जन्मस्थल है। सुदामा मन्दिर बीच भी है। आयुष आयुषी मम्मा - पापा यहाँ (मजाक में ) ह्स ह्स कर गांधी जी के तीन बन्दर कहाँ है। नैन्शी - वो बन्दर अब इंसानो के हाथ में है। जब  मोबाइल हाथ मे आ जाता है। न कुछ दिखाई देता है। न कुछ सुनाई देता है। बोलता भी नही है। चैटिंग चलती रहती है। अभिनव - तुम भी न कहाँ से बात निकाल कर लाती हो।

साबुतारा - खूबसूरत हिलिशस्टेश हैं। यहॉ आप हरे - भरे बन शीतल झरने ठन्डा वातावरण देख सकते है। समुद्र तथ से 875 मीटर ऊँचे स्थल पर स्थित है।

द्वारका हिन्दू धार्मिक स्थान द्वारका चारो धाम यात्रा मे से एक है। यहाँ देश विदेश से काफी श्रद्धालु आते है। श्री कृष्ण भगवान के दर्शन द्वारकाधीश भगवान के रूप मे होते है। अभिनव बच्चो चलो अब पेकिंग कर लो होटल चल कर ट्रेन पकड़नी है। आयुष आयुषी मम्मा पापा अभी नही अरे रिजर्वरेशन है। पक्का निकलना ही है।

मुझे ऑफिस जॉइन करना है । तुम्हारी मम्मा ने तो ऑफिस से छुट्टी ले रखा है। बस क्या था रात की ट्रेन सुबह अपने स्टेशन उतरना था। ट्रेन मे अभिनव देखो न बच्चे कैसे भेहराभूत हो कर सो रहे हैं। बच्चे हैं । माँ-बाप के लिए लेकिन ह्मे चौकंधा हो कर सोना है। चिड़िया जैसी नींद लेनी है। घर मे आराम से पूरी नींद लेकर फ्रेस हो कर काम पर लगना है । चलो बच्चो स्टेशन आ गया । घर पहुंचने मे बस घण्टो लगेगे । सुबह जो थी नैन्शी बिना काम के कैसे रह सकती थी। घर में झांडू लगा काम वाली को कल से बुलाउंगी ' घर के मन्दिर में पूजा कर सभी का पेट भर भोजन फिर निश्चित हो कर सोना उठो तो सारी थकान दूर फिर क्या था बस रोज मर्या जिन्दगी शुरु हो जाती है। नैन्शी अभिनव से बडोडरा गुजरात मे काफी अच्छी जगह है। शानदार वास्तुकला के केई नमुने देख सकते है। इस शहर मे नवरात्र का उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। अभिनव - हमारे भारत मे बहुत सी बेहतरीन कला है। भारतीयो को उनकी कदर नहीं है। बस एक व्यक्ति फ्रेम्स हो जाये फिर उसी के पागल हो जाते है। आसंमा पर पहुंचा देता है। फिर दूसरा मिल गया पहले वाले को गिरा देते है। अभिनव गांधी नगर गुजरात की राजधानी है। परेटा स्थल भी है। कितना सुन्दर मन्दिर शान्त वातारण सुकून महसूस हो रहा था। बस इसी लिय तो थोड़ा माहौल बदलने के लिय घर से कुछ समय के लिए बाहर जाना जरूरी है। अभिनव -थोड़ा मन तुम मेरा बदल दो सीने से लग जाओ प्यारासा सा चुम्मा ( किश ) तुम्हे जितनी बार भी पास आता हूं वही बेताबी जाग जाती है। शादी वाली नैन्सी - पति महोदय शादी वाली शरारत छोडिये अब हमारे बच्चे शादी लायक हो गये हैं।

अभिनव -समय पर सब काम होंगे तुम मेरी जान हो ' जितनी बार लवयू कहू कम है।

नैन्शी - जब हम ट्रेन मे अपने शहर लौट रहे थे। आप की आँखे लग गयी थी। मेरे पास एक माँजी (बूडी अम्मा ) मुझ से बाते करती रही थी। अपने जमाने की और मैं उनकी बातों को आराम से सुन रही थी। जिस से उन्हें अपनापन लगे। मां जी कह रही थी। मेरा पोता तीस साल के पास हो गया पर शादी को कोई लड़की अभी तक फिट नही बैठी है। मैंन पूछा क्यो वायोडो टा में डिमान्ड आती है। पोता मेरा इंजीनियर है। ह्मे साधारण संस्कारी सरल स्वभाव वाली लड़की चाहिय जो घर मे रम जाये। बाद मे कही कोट - कचहरी के चक्कर न लगवा दे। नैन्शी - डिमान्ड क्या होती है। मां जी - नौकरी करनी है। नैन्सी सही है। आत्मनिर्भर बनना मांजी हम नौकरी कराने को तैयार है। कुछ लड़कियो की डिमांड जो हमे पसंद नही आयी। तुम्हारे मा. -बाप के साथ नही रहूंगी ये तो मुमकिन नहीं है। मै रसोई मे खाना नही बनाऊंगी चलो मिशरानी लगा लेंगे । मांजी अब लड़का -लड़की एक ही बच्चा करते हैं। ये भी मंजूर है। फिर डिमान्ड बच्चे पैदा नही करूंगी ये तो बिल्कुल ही नाश कर दिया तुम ही बनओ बेटा इस से तो मेरा जमाना अच्छा था। नैन्शी - मांजी कोई बात सही है। और कोई नही थी। पुराने ज़माने में बेटी बहू बनी पर अत्याचार होता था। - बेटियों को पढ़ाना शुरू किया ' । फिर परिवार में कोई दुर्घटना हो जाये परेशानी - के वक्त मे वो नौकरी कर सके । नौकरी करने लायक बनाया । आज के जमने मे मशीनो की सुविधा होने के बाद भी घर का काम करने को कोई तैयार नही है। ससुराल में किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े आ आत्मनिर्भर बनाया पढ़ी लिखी बेटी बाहर जा कर सर ऊँचा करे कहीं भी जाओ पढ़ाई तर्जुबा काम आता है। घर का पढ़ा-लिखा माहौल बने घर में ज्ञान आये सभ्यता आये। जैसा करोगे वैसा ही घर का वातावरण बनता जायेगा । खुशहाल जीवन जी सके। मांजी यही तो मैं चहाती हूँ । अजादी मिलेगी पर जो बात मानने की है। वही तो मानी जायेगी । ह्ल निकालना मुश्किल हो रहा था।

अभिनव - क्या कहां जाये जमाने की जो हो रहा है होने दो तो सही है।

नैन्शी - अभिनव जी बच्चो को जगा दो आज मुझे भी ऑफिस निकलना है आयुष -आयुषी उठो मम्मा - पापा ऑफिस निकल रहे है। जो इच्छा हो खा लेना लंच बना कर रख दिया है। दरवाजा लगा लेना । शाम होते ही घर मे एन्ट्री करी ये क्या है। एक एलबम बनाया ' आयुष आयुषी ने मम्मा - पापा की उम्र के हिसाब से दोनो की तस्वीर पास मे लगा दी। मम्मा  - पापा आप  कितने प्यारे दिखते थे। जो मजा तस्वीर देखने में आता है। वो मजा मोबाइल एलबम मे नही आता है। जो खिंच गया वैसा ही बन गया । मम्मा - पापा कैसे लग रहे हो । हां बेटा जब यही फेंशन चलता था। तब ये बहुत खूबसूरत लगता था। पापा .आप . बेटा मैने पैसे की कीमत को जाना है। जो भी होता था तुम्हारी दादी मेरे लिय कोई कमी नही रखती थी। जो भी हूँ ' आज झ्स मुकाम पर उन की हिम्मत से हूँ , अभिनव की आँखे नम हो जाती है। आयुष - आयुषी और  आप जैसे मम्मा  - पापा मिले चलो सारा परिवार एक साथ खाना खायेंगे । एक और सरप्राइज - आज मैने आयुष आयुषी ने शाम का खाना तैयार किया है। अरे वाह हमे तो पत नही था। आयुषी किचिन भी संभाल लेते है। राज कचौड़ी फिर ठन्डी - ठंडी आइसक्रीम मजा आ गया बेटी के हाथ का खाना खा कर ' ।

नैन्शी - आयुष -आयुषी दो दिन बाद तुम्हारा कॉलेज है। पेकिंग कर लेना जो चाहिये मंगा कर रखना मुझे ऑफिस का स्का हुआ काम पूरा करना है।

बस अब तुम्हारे कैरियर बनने मे छः महीने बाकी है। फिर शादी करनी है। इतनी जल्दी नहीं बेटा जल्दी कहां है। जब तक होगी साल दो साल कम्पलीट होने मे निकल जायेगा क्य सही है। क्या गलत ।