नम आँखे - 2 Nandini Agarwal द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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नम आँखे - 2

नम आँखे 
                                       पार्ट- २
अभिनव की माँ हसते हुए। लड़की कोई पसन्द हो। तो मुझे बता मै तेरी शादी तेरी पसन्द से करा दूंगी। 
अभिनव नही माँ ऐसा कुछ भी नहीं है। सुशीला ये लो कैसा बेटा है मां से शर्माता है। अभिनव माँ कुछ हो तो बताऊ न जब ऐसा है ही नही तो। अच्छा नाराज मत हो बस बाते करते - करते कब आँख लग जाती है। सुबह का अलार्म बजते ही दोनो की दिनचर्या की भागदौड़ शुरू हो जाती है। देखते -देखते सुशीला के जीवन में वो दिन आया बेटा दुल्हा बना और प्यारी सी दुल्हन को विवाह कर लाये आरते के थाल लिय सुशीला स्वागत करती है। माँ की फिर नम आँखे देख अभिनव ये क्या माँ फिर नम आँखे मां मुस्कुराते हुए। ये नम आँखे खुशी के है। मेरे घर लक्ष्मी - नरायण आये है।
सुबह के दस बज गये अभिनव माँ आपने जगाया क्यों नही ऑफिस जाना था। अरे -बुद्धू दो चार दिन की छुट्टी ले ले नैनशी के साथ समय बिताने के लिय नैनशी से भी कह दे वो अभी ऑफिस जोइन न करे । कुछ दिनो के लिय बाहर घूम आओ। नैनशी अभिनव सुहागरात की पहली सुबह माँ का चरण स्पर्श करते हैं। अखण्ड सुहाग रहे। आशिर्वाद देती है।
समय चलते नैनशी घर के माहौल मे ढल गयी ऐसा त्याग करने को था ही नही । नैनशी को सुशीला माँ जैसी सास जो मिली थी। प्यार तो समुद्र से गहरा था।
नैनशी माँ आप हटो मै सब का टीफिन तैयार करती हूं । तीनो को ही अपने - अपने काम पर जाना है। माँ . बेटा मैं थोडा बहुत हाथ बटा दूं तो हर्ज क्या है।
नैनशी अभिनव से मुझे लगता ही नही है। मै दुसरे घर से विदा हो कर ससुराल आयी हूं। सब कुछ अपनापन सा लगता है। माँ जी बहुत ही नर्म दिल ' समझदार है।
कौन सा पुनः करके आयी हूं। जो मुझे आप दोनो का साथ मिला पति जो दोस्त की तरह व्यवहार करता है। पति होने का साथ निभाता है। माँ जी तो ईश्वर का दूसरा रूप लगती है। 
अभिनव - जो व्यक्ति अपने जीवन मे दुःख देखता है। वो दूसरो को कष्ट नही देता है। मैं स्कूल जाने लायक हुआ था। चार से पांच साल का था। शहर में आतंकि हमला हुआ था। उस दुर्घटना में पिता जी के भी तीथरे उड़ गये सारे शहर में अफरा -तफरी मच गयी। मॉ ने बताया बम विस्फोट के इलाके मे पिता जी गये हुए थे।
काफी ढूढने के बाद पता ही नही चला आखिरी चेहरा भी देखने को नही मिला सरकार ने मुआवजा दिया था। कुछ लाखो का सभी पीड़ित परिवार वालो को पैसो की कीमत ही क्या होती है। इंसान के आगे माँ बिलखती रह गयी। सारा काम चौपट हो गया था। किसी ने हमारा साथ नही दिया। परिवार वाले भी अलग हो गये बटबारा कराके सिर्फ नाना का घर ही बचा था। साथ देने को मॉ ने दूसरी शादी करने से इंकार कर दिया था। जीने का लक्ष्य उन्होंने सिर्फ मुझे बना लिया। मां कि शिक्षा काम आयी। स्कूल ट्यूशन कर आज यहाँ तक ले आयी।
अभिनव -नैनशी से मां से अतीत के बारे मे कभी बात मत करना। मै उनकी नम आंखे नही सकता।
नैनशी के दिल मे मां के प्रति और उदारता उमड आयी।
नैनशी का अचानक जी घबड़ाया सारी रात हधर से उधर घूम - घूम कर चक्कर लगाती रही मां जी बेटा नैनशी इतनी बैचेन क्यू है। कुछ नही मांजी जी भारी हो रहा है। आ जा मेरे पास सो जा तेरा सिर दवा देती हूं। हाजमा का चूरन खाले । सुबह डॉक्टर के भेज दूंगी। सुबह होते ही मां ने अभिनव बेटा नैनशी पूरी रात परेशान रही है। डाक्टर के ले जा। मां ले जाऊंगा डॉक्टर के बैठने का टाइम तो हो जाने दो । अभिनव नैनशी डॉक्टर के यहा से वापस आये। सुशीला घबराते हुए क्या हुआ बेटा। अभिनय नैनशी मीठी मुस्कान के साथ माँ आप दादी बनने वाली हो। सुशीला का खुशी का ठिकाना न रहा। नैनशी को सर आंखो पर बैठा कर रखती । बेटा ऐसा मत कर बेटा जूस पी ले। बार-बार ये खा ले वो खा ले। नैनशी मां बन रही हूं। मरीज नही मुझे किस बात की फिक्र आप दोनो के होते हुए।
दिन महीने कटते गये। नवा महीना लगते ही अभिनव सुशीला नैनशी को ले कर एक एक कदम फूंक-फूंक कर रखते नैनशी - मांजी अभिनव आप परेशान मत होइए । हॉस्पीटल जाने का समय आयेगा। बता दूंगी।
अभिनव - मां मुझे ऑफिस के काम से बाहर जाना है। मां - तू मना कर दे। नैनशी की ऐसी हालत में दूर नही भेजूंगी अभिनव - ऑफिस के काम को मेरे सिवा कोई करके नही ला सकता यू आया यू गया पलक झपकते हुए। नैनशी के मायके से बुला लेला कुछ परेशानी लगे तो।
अगली ही सुबह नैनशी को दर्द उठा और हॉस्पीटल में दो जुडबा बच्चो को जन्म दिया एक बेटा एक बेटी। सुशीला ने दोनो बच्चो को गोद में लिया। प्यार से कहा मेरे बेटे का परिवार पूरा हो गया। अभिनव उल्टे पाव वापस हॉस्पीटल पहुंचा मां की गोद में दो बच्चो को देखा ।
मां -मां कर बोला सुशीला की नम आँखे सदा के लिय बंद हो गयी ।
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(To be continued)
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