हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 5 Shaziya Khan द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 5

एपिसोड 5: एक सच्चा मददगार और वफ़ादारी का साया


"दुश्मन जब चारों तरफ मौत का जाल बिछा दे, तब खुदा किसी सच्चे दोस्त के रूप में अपनी रहमत भेज देता है..."
— समीर ख़ान


थाने से छूटने के बाद रहमान और हीर जब वापस अपार्टमेंट पहुँचे, तो दोनों के दिलों में एक अजीब सी हलचल थी। वे जानते थे कि कैदो इतनी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं था। उसकी पहली चाल भले ही नाकाम हो गई थी, लेकिन उसकी बौखलाहट अब किसी बड़े तूफ़ान का संकेत दे रही थी। रहमान ने गहरी सांस लेते हुए कहा, "हीर, तुम मेरे लिए उस हद तक चली गईं जहाँ कोई और लड़की सोच भी नहीं सकती। लेकिन कैदो बहुत ताकतवर है, वह हमें चैन से जीने नहीं देगा।"


हीर ने खिड़की की तरफ देखा, जहाँ से शिकागो की दोपहर की धूप अब धीरे-धीरे ढल रही थी। उसकी आँखों में अभी भी वही बेबाकी थी। उसने कहा, "रहमान, कैदो की ताकत उसका घमंड है, और वही उसकी बर्बादी का कारण बनेगा। हमें बस थोड़ा संभलकर कदम बढ़ाना होगा।"


ठीक उसी पल, अपार्टमेंट का दरवाज़ा खुला और एक लंबा, स्मार्ट नौजवान अंदर दाखिल हुआ। उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं। उसे देखते ही रहमान के चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान आ गई,


"काशिफ! तुम कब आए?"


काशिफ रहमान का बचपन का सबसे पक्का और वफ़ादार दोस्त था, जो न्यू यॉर्क में रहता था और अब बिज़नेस के सिलसिले में शिकागो आया हुआ था। काशिफ ने आगे बढ़कर रहमान को गले लगाया और फिर हीर की तरफ देखते हुए कहा, "रहमान, मुझे थाने वाली पूरी बात पता चली। मैं न्यू यॉर्क से सीधे यहीं आ रहा हूँ। तुम इस लड़की के लिए जिस खतरे से खेल रहे हो, क्या तुम्हें उसका अंदाज़ा है? कैदो... जिसके काले कारनामों की खबरें बिज़नेस जगत में सब जानते हैं,   तुम उससे सीधे मौत का खेल खेल रहे हो?"


रहमान ने हीर का हाथ थामते हुए कहा, "काशिफ, यह हीर है। और इसके बिना अब मेरी ज़िंदगी की कोई धुन मुकम्मल नहीं है।" और जहां तक मौत का सवाल है,तो वो एक दिन आना है,लेकिन हीर के बिना नहीं जीना।


रहमान के लहज़े की मज़बूती ने एक पल में काशिफ को सब कुछ समझा दिया।काशिफ ने हीर की आँखों में देखा, जहाँ डर का नामोनिशान नहीं था, सिर्फ रहमान के लिए एक सच्चा जज़्बात था। काशिफ, जो रहमान के सीधे-साधे मिजाज को अच्छे से जानता था, समझ गया कि यह मोहब्बत कोई मामूली खेल नहीं है।


काशिफ का चेहरा गंभीर हो गया। उसने अपनी जेब से एक डिजिटल डिवाइस निकाली और टेबल पर रखते हुए कहा,

"अगर बात कैदो जैसे शातिर इंसान की है, तो तुम दोनों यहाँ सुरक्षित नहीं हो। वह अगली बार कानून के रास्ते नहीं, बल्कि सीधे जान लेने के रास्ते पर आएगा। मेरे कुछ दोस्त न्यू यॉर्क और विदेश में हैं। मैंने तुम दोनों के लिए एक बैकअप प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। अगर यहाँ पानी सिर से ऊपर गुज़रा, तो मैं तुम्हें इस मुल्क से दूर एक ऐसी जगह भेज दूँगा जहाँ कैदो का साया भी तुम तक नहीं पहुँच पाएगा।"


हीर ने काशिफ की तरफ देखा और कहा, "शुक्रिया काशिफ, लेकिन मैं कैदो को उसके किए की सज़ा दिए बिना भागना नहीं चाहती।"

काशिफ ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं तुम्हें भागने को नहीं कह रहा हीर, मैं तो बस तुम्हारी ढाल बन रहा हूँ ताकि जब तुम वार करो, तो पीछे से कोई तुम पर हमला न कर सके। मेरी गाड़ी और मेरे लोग हमेशा तैयार रहेंगे।"


तीन सच्चे दिल उस बंद कमरे में एक साथ खड़े थे, इस बात से बिल्कुल अनजान कि दूर अपने आलीशान और अंधेरे केबिन में बैठा कैदो अब अपनी ज़िंदगी का सबसे आखिरी और सबसे खौफनाक जाल बुन चुका था। उसने हीर के पिता के जाली दस्तखत वाले बिज़नेस पेपर्स पर हाथ फेरते हुए फोन पर अपने गुर्गे से कहा, "निकाह और बिज़नेस मर्जर की तैयारियाँ करो। इस बार हीर और उसका रांझा खुद चलकर मेरे पिंजरे में आएँगे।"(जारी है )
लेखक _समीर खान