नींबू के चिकित्सीय प्रयोग
नींबू का शारीरिक क्रिया प्रणाली पर प्रभाव
नींबू सर्वसुलभ बहुउपयोगी और अनूठा फल है। मूल रूप से भारतीय फल नींबू की महत्ता आज विश्व भर में जानी जाती है। पाश्चात्य देशों में प्रचलित पेय 'लेमनेड' नींबू से तैयार किया जाता है। यही नहीं नींबू का उपयोग विभिन्न औषधियां बनाने में खूब किया जाता है। आयुर्वेद ने इसे एक महत्वपूर्ण फल माना है। अम्लीय गुणों से युक्त यह अनूठा फल मानव के लिए एक अनुपम देन है। नींबू को हमारे यहां सर्वश्रेष्ठ रोग नाशक और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने वाले फल के रूप में प्राचीन काल से ही मान्यता प्राप्त है। आयुर्वेद में नीबू की काफी प्रशंसा की गयी है और एक खाद्य पदार्थ के रूप में इसके उपयोग के अलावा औषधि के रूप में भी इसके विभिन्न उपयोग बताए गये हैं।
आधुनिक वैज्ञानिक प्रामाणिक खोजों से यह सिद्ध हो चुका है की नींबू में जीवन पोषक खटाई के (vitalising acid ) क्षाराभ तत्व दूसरे फलों की अपेक्षाकी गुणा अधिक होते हैं| प्राय: फल कच्ची दशा में खट्टे या कसेले होते जो पकने पर मीठे हो जाते है और बहुत अधिक पकने पर उनमें अनेक प्रकार के एसिड जैसे लेकटिक एसिड ओकसेलिक एसिड पैदा हो जाते है जो शरीर की क्रियाओं में नुकसान पहुंचाते है| नींबू पकने के बाद भी अपनी खटाई नहीं छोड़ता है|संसार की प्रयोगशाला में प्रकृति ने इसकी रचना विषेश तत्वों के मेल से की हा
नींबू का परिचय 12वीं सदी में पाश्चात्य देशों में हुआ। अरब व्यापारी इसे पहले स्पेन ले गये बाद में सन 1494 से नींबू स्पेन के बाजारों से यूरोपीय देशों में पहुंच गया। वे पहले नींबू को एक साधारण रसदार खट्टा फल ही मानते थे। धीरे ;धीरे जब इसके अनेक गुणों को अनुभव करके लोगों ने इसे स्वास्थ्यवर्द्धक और स्वास्थ्यरक्षक फल पाया तो इसका महत्व अत्यधिक बढ़ गया। इसके गुणों को लेकर अनेक प्रयोग किए गए और परिणाम सुखद आश्चर्यजनक निकले।
स्काटलैंड के जाने माने चिकित्सक जेम्स लिंड ने अपनी एक पुस्तक में रहस्योद्घाटन किया कि यदि कोई व्यक्ति 4-5 दिन तक कच्चे फल और सब्जियां खाए तो उसमें रक्त दोष उत्पन्न हो जाएंगे। यह रक्त दोष स्कर्वी विटामिन सी की कमी से उत्पन्न होता है। स्कर्वी पर नियंत्रण के लिए नींबू ही एक अचूक औषधीय फल है। एक अन्य चिकित्सक डॉक्टर ब्लेन ने भी नींबू को स्कर्वी से निपटने में सक्षम पाया। नींबू का नियमित उपयोग स्कर्वी की रोकथाम में उपयोगी सिद्ध होता है।
जुकाम में नींबू का रस लाभदायक होता है। गठिया, बुखार, पित्ताशय की पथरी घोलकर निकालने, पांडु रोग, नया और पुराना कब्ज आदि में नींबू का औषधि के रूप में प्रयोग हमारे यहां प्राचीनकाल से ही हो रहा है।
नींबू की हमारे यहां अच्छी पैदावार होती है। इसकी कई किस्में होती हैं जैसे कागजी विजोरा, जभौरी आदि। कागजी नींबू छोटा होता है और आंवले के समान होता है और उसका छिलका पतला होता है| कागजी नींबू का उपयोग अचार आदि बनाने में किया जाता है। पतले छिलके वाला कागजी नींबू पर्याप्त रसयुक्त होता है। इस फल का उपयोग अमृत के सेवन के समान होता है इसलिए नींबू को हमारे प्राचीन ग्रंथों में अमृतफल माना गया है।
नींबू का उसके औषधीय गुणों के कारण घरेलू उपचार और दवा के रूप में तो उपयोग होता ही है बरतनों, सामान्य आभूषणों व सजावटी धातु निर्मित वस्तुओं को चमकाने और साफ करने में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है।
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प्रकृति की अनुपम दें नींबू मेँ शरीर मेँ जमा विजातीय तत्वो को निकालने की अद्भूत क्षमता है|सीएचआरएम छिद्रो और मूत्र के रास्ते से ये अनेक दूषित पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल देता है|यकृत की शुद्ध के लिए आज तक इससे उत्तम औषधि कोई नहीं हैं|अजीर्ण, छाती मेँ जलन, अतिसार हैजा, खट्टी डकार, केएफ़, जुकाम,ज्वर,श्वास रोगों मेँ यह लाभदायक है|
किन्तु इसे हमेशा अकेला ही (जल,और फलों के रस के अतिरिक्त) अन्य खाद्य पदार्थों के साथ नहीं लेना चाहिए तथा खाली पेट लेना उचित हैं| जब खाली पेट मेँ इसका रस जाता है तो सब्स पहले ये उन कृमियों को नष्ट करता है जो किण्वन (fermentation) करते हैं|फिर यह यकृत और lymphatic सिस्टम तक पहुँच कर वहाँ जमे दुष्ट पार्थिव पदार्थ (earthy type of waste materials) जो संधिवात और गठिया जैसे रोगों को उत्पन्न करता छिन्न भिन्न कर देता है| इस प्रकार इसका रस पाचन संस्थान की दूषित क्रिया को रोककर और अवांछित दुष्ट पदार्थों को नास्ट कर रक्त को शुद्ध करता है| इसके साथी साथ यह पाचन क्रिया को शुद्ध कर रक्त में पाये जाने वाले अमल प्रतियोगी लवणों के साथ मिल अम्लता रहित कार्बोनेत्स्बनाता है| जब रक्त परिसंचरण की क्रिया में जब फेफड़ों में जाता है तो ये कार्बोनेट्स प्रश्वास के साथ बाहर फेंक दिये जाता है और शरीर में केवल अम्ल प्रतियोगी तत्व शेष रह जाते है| ये तत्व शरीरान्तर्गत यूरिक एसिड,लेक्टिक एसिड अनेक नुकसानदायक एसिडों को (जो दूषित पाचन क्रिया द्वारा उत्पन्न होकर अनेक विकार पैदा करते है) बेकार कर देते है|
उक्त विवेचन से स्पष्ट होता है की शरीर को स्वस्थ रखने में नींबू का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है, बशर्ते इसका उपयोग सही तरह से किया जाये|
नींबू को छिलके सहित निचोड़ कर रस निकालना उचित है|
मशीन से निकालने में रस गाढ़ा होता है और उसमे नींबू के छिलके का रस भी आ जाने से वह कृमिनाशक औए अधिक गुणी हो जाता है|
पतले छिलके वाला कागजी नींबू पर्याप्त रसयुक्त होता है। इस फल का उपयोग अमृत के सेवन के समान होता है इसलिए नींबू को हमारे प्राचीन ग्रंथों में अमृतफल माना गया है।
नींबू का उसके औषधीय गुणों के कारण घरेलू उपचार और दवा के रूप में तो उपयोग होता ही है बरतनों, सामान्य आभूषणों व सजावटी धातु निर्मित वस्तुओं को चमकाने और साफ करने में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है।
रसायनिक संघटन
इसके रस में
10% साइट्रिक एसिड, फास्फोरिक एसिड, मेलिक एसिड व कार्बोज,
10.9% प्रोटीन1.5% वसा, 1.0 उष्णता ,तथा उत्पादक शक्ति ,17 कैलोरी प्रटी औंस तथा विटेमीन ए 26,बी 01 और, सी 63 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम के अनुपान से पाया जाता है| इसके अलावा केल्शियम, पोटेशियम,तथा आँय प्रतियोगी खनिज तत्व साइट्रेट्सआदि भी पाये जाते है|, मेलेट्स
नींबू के कुछ घरेलू उपचार
हिचकी
· नींबू की हरी पटियाँ चूसे|
· तेज गरम पानी मे एक नींबू का रस मिला कर घूंट घूंट कर पिये|
· नींबू, सोंठ, कालीमिर्च, अदरक सब को मिला कर चाटने बना कर चूसे|
· निंबू आधा काट कर बीज निकाल कर उसमें नमक बुर्का कर चार बार चूसे हिचकी बंद हो जाएगी|
अम्लता /खट्टी डकारें
· सहज उपाय गरम पानी में नींबू निचोड़ कर पीए|
· खाना खाने के बाद एक कप निवाया पानी में आधा नींबू निचोड़ें औए एक चुटकी मीठा सोडा डाल कर धीरे धीरे पिये|
· गैस एक चम्मच पीसी अजवायन +एक नींबू का रस एक गिलास गरम पानी में सुबह शाम लगातार कुछ दिन पीए|
· एक गिलास नींबू पानी में चौथाई चम्मच मीठा सोडा मिला कर रोज पीये|
· एक चम्मच सोंठ पाउडर और साबूत अजवायन 50 ग्राम निंबो के रस मे मिला कर स्वादानुसार काला नमक मिला कर छाया में सूखा दे|
· खाने के बाद आधा चम्मच मूनह मे रख ले और धीरे धीरे उसका रस चूसते रहने से गैस नहीं होती है
· नींबू आधा काट कर बीज निकालले| उसमें थोड़ी पीसी कालीमिर्च और सेंधा नमक बुरका कर गरम तवे पर रख कर चूसने से सभी पेट की तकलीफ़ों में आराम मिलता है|
पेट दर्द
· पचास ग्राम पोदीने के रस में आधा निंबू का रस, दो चम्मच शहद और चार चम्मच पानी मिला कर दे,पेट दर्द तुरंत गायब हो जाएगा|
· आधा कप पानी ,पिसी कालीमिर्च आधा चम्मच, एक चम्मच अदरक का और आध नींबू का रस मिला कर पीने को दे|
· मूली पर नींबू का रस और काला नमक डालकर खाने से अपच का दर्द ठीक होता है|
· एक कप गरम पानी में आधा आधा चम्मच भुना जीरा,पिसी अजवायन, नींबू का रस और थोड़ी चीनी आऊर सेंधा या काला नमक दाल कर पीने से अधिक भोजन या गरिष्ठ काणे के बाद होने वाले दर्द में आराम मिलता है|
कब्ज
· प्रातः उठकर खाली पेट एक गिलास हल्के गरम पानी में एक नींबू डालकर पिएं। पुरानी कब्ज हो तो ऐसा सुबह शाम करना चाहिए। कब्ज से छुटकारा मिल जाएगा। इसके अलावा सुपाच्य, हलका और उचित खानपान का ध्यान भी रखना चाहिए। अधिक तले, खटाई वाले, गरिष्ठ, तेज मसाले वाले और अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन से पाचन क्रिया खराब होती है|
· एक गिलास गरम पानी में दो चम्मच अरंडी का तेल और नींबू करस दाल कर रात को सोते समय पिये|
· रात को सोते समय एक चम्मच मोटी सौंफ और पाँच कालीमिर्च चबाये फिर ऊपर से एक गिलास गरम पानी में एक नींबू निचोड़ कर पी ले|
· प्रात: भूखे पेट एक अमरूद नमक , कालीमिर्च,और नींबू डाल कर खाए|
दस्त
· एक गिलास पानी में एक नींबू का रस और थोड़ा नमक और चीनी/मिश्री मिला कर घूंट घूंट पीने से dehydration भी नहीं होता है और दस्त में फायदा भी होता है|
· दस्त थोड़ा और बार बार हो रहे हो तो एक चम्मच प्याज के रस में आधा नींबू का रस एक कप पानी में मिला कर दे, हर तीन घंटा के अंतराल पर दे|
· आमातिसार में नित्य दो से तीन बार सादा नींबू पानी पीने से आंते साफ होकर आँव आना बंद हो जाता है|
वमन/उल्टी
· यात्रा में उल्टी हो तो हमेशा नींबू साथ रखे| नींबू में थोड़ा काला नमक दाल कर चूसते रहें|
· दो छोटी इलायची पीस कर नींबू की फांक में भर कर चूसने से उल्टी बंद हो जाती है|
· हरा धनिया की सेंधा नमक नींबू और जीरा डाल कर चटनी बना ले और थोड़ी देर में चाटते रहे|
· छोटे बच्चे दूध पीने के बाद उल्टी करते है ओ दूध पिलाने के कुछ देर बाद तीन बूंद नींबू का रसएक चम्मच पानी में मिला कर दे|
· आधा कप पानी में आधा नींबू का रस भुना पीसा जीरा,पिसीहुई एक इलायची मिला कर हर आधा घंटे में पिये|
छाले (stometitis)
· एक गिलास पानी में आधा नीम्बू निचोड़ कर कुल्ला करें|
· रात को सोते समय एक गिलास दूध में एक चम्मच घी दल कर पिये|ऐसा लगातार पंद्रह दिन तक करें, छाले जड़ से गायब हो जाएँगे|
· खून की कमी (Anaemia)- शरीर में खून की कमी होने पर नींबू और टमाटर का रस सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
· नींबू के रस को एक गिलास पानी में मिलाकर स्वादानुसार नमक मिलाकर पीना चाहिए। इससे शरीर में रक्ताल्पता सम्बन्धी दोष दूर हो जाते हैं।
· खून बढ़ाने वाला निम्बू का टॉनिक – एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर इसमें 25 ग्राम किशमिश डाल दें। इसे रात को खुले स्थान पर रख दें। सुबह भीगी हुई किशमिश खाते जायें और यह पानी पी जायें। इस प्रकार नींबू पानी में भिगी हुई किशमिश खाने से रक्त बढ़ता है जिससे रक्त की कमी के रोगों में लाभ होता है।
· मूली काटकर अदरक के टुकड़े और नींबू के रस को डालकर खायें। इससे रक्त की कमी दूर हो जाती है।
ज्वर /मलेरिया
· जाड़ा लग कर बुखार आनने पर खाने का चूना 10 ग्राम और 25 ग्राम जल को किसी काँच की बोतल या बरने में डालकर ऊपर से एक नींबू का रस मिला दे| चूना नीचे बैठ जाने पर ऊपर का जल धीरे से निथार कर ज्वार आने से एक घंटा पहले दे|
· ज्वर के ताप में नींबू की चीनी मिश्रित शिकंजी देने से घबराहट, बाइचाइनी और वएमएन और तृष्णा में इसे आरर्म से दिया जा सकता है|
· एक बड़ा कागजी नींबू लेकर चार-पाँच टुकड़े करे,बीज निकाल देऔर मिट्टी के पत्र में तीन गिलास पानी डाल कर मंद आंच पर उबाले,जब एक गिलास शेष रह जाये तो उतार कर छान कर ज्वर आने से पहिले पिलाये| यह प्रयोग कुनैन से भी अधिक प्रभावशाली है|
· काली काफी में नींबू डाल कर पिलाने से भी बुखार में आराम मिलता है|
· मौसमी बुखार के लिए लेमोनेड -5-6 नींबू का छिलका उतार कर आड़ी गोलगोल फाँके काट ले|इनको किसी चीनी के पात्र मे डाल कर ऊपर से 400 मि लि खौलता पानी छौड़ दे| ठंडा होने पर मिश्री मिला कर रोगी को पीने को दे| इससे वमन, तृष्णा, व्याकुलता, तथा ज्वर भी दूर होता है|
· पोदीने के 30 पत्ते, आठ कालीमिर्च पिसी हुई, एक गिलास पानी स्वादानुसार नमक मिलाकर उबालें। उबलते हुए आधा पानी रहने पर छानकर आधा नींबू निचोड़कर सुबह-शाम पियें। खाँसी तथा बुखार (फीवर) में लाभ होगा।
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संधिवात/गठिया
वैज्ञानिको ने अन्वेषण में सिद्ध किया है की इसका रस नियमपूर्वक लेने से संधिवात व आमवात में फायदा होता है| बीमारी शरीर मे एक प्रकार के किटाणुओं के पैदा होने से होती ,जो कई प्रकार के toxins बनाते है जिससे विभिन्न रोगों का प्रकोप होने लगता है नींबू में इन (toxins) विजातीय तत्वों को नष्ट करने की शक्ति होती है| यह आमाशय की बीमारी में भी लाभदायक है|
· एक नींबू के रस में थोड़ा लहसुन का रस मिला कर पीने से फायदा होता है|
यकृत के विकार (Liver)
नींबू का रस 250 ग्राम में अजवायन और सेंधा नमक 50-50 ग्राममिला दे|अजवायन के फूल जाने पर उसे छाया में सूखा दे| सूखने पर उसमे 50ग्राम भुना जीरा भी मिला दे|एक चम्मच पानी के साथ लेने से यकृत के विकारों से मुक्ति मिलती है|
केश की देखभाल
रूसी सिर में नींबू की फांक को अच्छे से रगड़ कर कुछ देर सूखने दे फिर सादे पानी से अच्छी तरह धो ले| साबुन शैंपू का प्रयोग न करे|
नींबू के रस में संभाग तेल (नारियल,सरसों या तिल्ली का तेल) मिला कर मालिश करने से बाल मुलायम तो होते ही है साथ ही तरावट के साथ खुश्की और फोड़े फुंसी में भी आराम मिलता है|
तीन नींबू के रस में 400 ग्राम नारियल तेल मिला कर आग पर उबाल ले| ठंडा होने पर काँच की शीशी में भर कर रख दे | इस तेल को नियमित लगाने से बाल घने काले और रूसी और जून रहित हो जाते है|
बाल काले करने के लिए एक नींबू का रस, दो चम्मच पानी,चार चम्मच आंवला प्पिसा मिला कर पेस्ट बना ले और इसे एक घंटा भीगने दे| पेस्ट गाढ़ा हो तो थोड़ा पानी और मिला दे| सिर पर इसका लेप करे और आधा से एक घंटे बाद सिर को अच्छे से धो ले| साबुन शैंपू का प्रयोग न करे|
जूएँ समान मात्रा में निंबू का रस और अदरक का आरएस बालों की जड़ों में लगा केआर एक घंटे के बाद सिर धोने से जूएँ मर जाती है| कुछ दिन बाद इस प्रयोग को दुहरा ले|
§ नाखून न बढ़ना- यदि आपके नाखून न बढ़ते हों तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर उसमें पाँच मिनट तक औगुलियाँ रखें, फिर तुरन्त ही हाथ ठण्डे पानी में रखें। इससे नाखून बढ़ने लगेंगे।
§ नाखूनों पर नींबू के रस को लगाने से वे बहुत मजबूत और सुन्दर रहते हैं। औगुलियों को धोकर उनके अगले भाग पर नींबू रगड़कर सुखा लें।
§ नाखूनों के पास को त्वचा अगर पकती हो तो नींबू के हरे पत्ते और नमक पीसकर लगायें। 15 दिन लगाने पर आप देखेंगे कि नाखूनों की त्वचा पकना बन्द हो गई है।
बवासीर में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक दाल कर चूसने से रक्त्स्त्राव बंद हो जाता है|
§ जुकाम- दो चम्मच दानामेथी एक गिलास पानी में उबालें। उबलते हुए आधा पानी रहने पर पानी छानकर इसमें आधा नींबू निचोड़कर गर्मा-गर्म ही पियें। उबली हुई मेथी भी खायें। बुखार जुकाम, फ्लू, सर्दी, श्वास, (साइनोसाइटिस) में लाभ होगा। यह पेय रोजाना दो बार जब तक ठीक नहीं हो जायें, पीते रहें।
§ एक नींबू मोटे कपड़े में लपेटकर ऊपर से मिट्टी का लेप करके धीमी आग पर सेंकें। सिकने के बाद नींबू निकालकर काटकर गर्म-गर्म को ही चूस लें। जुकाम जल्दी ही ठीक हो जायेगा।
मंजन-रस निकले नींबू पानी के छिलके को इकट्ठा कर धूप में सुखा लें। कूट पीस कर पतले कपड़े से कम से कम 2 बार छान लें। चाहें तो थोड़ा बारीक पिसा छना नमक भी इसमें मिला लें। इस मंजन से दांत साफ करने से दांत साफ होने के साथ मुंह व सांस की बदबू भी खत्म हो जाती है।
§ मुँह से बदबू आने पर एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर दो चम्मच गुलाबजल डालकर भोजन के बाद इस पानी से तीन कुल्ले करके बचा सारा पानी पी जायें। मुँह से दुर्गन्ध नहीं आयेगी।
मुंहासों से रक्षा-डेढ़ चम्मच मलाई में चौथाई नींबू निचोड़ कर रोज मुंह पर मलने से चेहरे का रंग साफ होता है, चेहरा कांतिमय होता है और मुहांसों से मुक्ति मिलती है। यह प्रयोग लगभग एक महीने तक करना चाहिए।
§ सुप्रसव (Easy Delivery)-यदि चौथे माह से प्रसवकाल तक गर्भवती महिला एक नींबू की शिकंजी (पानी में चीनी और नींबू के रस को मिलाकर ) रोजाना पिये तो प्रसव सरलता से बिना कष्ट के होता है।
§ गर्भस्राव (Abortion)-नमकीन शिकंजी (नींबू, नमक व पानी) में विटामिन “ई’ होता है। विटामिन ‘ई’ स्त्री को गर्भधारण में सहायता करता है। गर्भ की रक्षा करता है, गर्भस्राव रोकता है। सुबह-शाम नमकीन शिकंजी पीने से विटामिन ‘ई’ की पूर्ति हो जाती है। जिनको गर्भस्राव होता हो, वे नमकीन शिकंजी पियें तथा रात को सोते समय पाँवों के नीचे तकिया रखें।