माई डियर प्रोफेसर - भाग 25 Vartika reena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 25









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चारू जोर से चिखी, " अन्वी दीदी ! "


अन्वी जो अभी तक किसी बात पर हँस रही थी उसकी नजर चारू पर जैसे ही गई ...वो खुशी सृ उच्छल पडी। चकरू भाग कर अन्वी के पास चली गई और उसके हाथ से बंदर के बच्चे की तरह लिपट गई। 


अन्वी चारू को गले से लगाती हुई पुछी।, " तू यहां..मेघराज मे चारू ! कैसे ? "


" मै यही की युनिवरासिटि मे पढती हूं दीदी । " चारू अन्वी का चेहरा तकती हुई बोली।


" क्या ! कब..से ? कैसे ? मुझे पता क्यो नही है! " अन्वी की आंखे हैरानी मे बडी हो गई।  उसे समझ नही आ रहा था की उसकी बहन मेघराज मे..उसी के शहर मे है । और उसे पता ही नही है। 



चारू कुछ बोलती की उसकी नजर अन्वी के पीछे खडे अमर पर पडी। चारू नु एक नजर अमर को देखा फिर खुद को । वो अन्वी के हाथ से चिपटी खडी थी। 

उसने एक बार फिर शर्मिंदगी से आंखे बंद करी और सीधी खडी हो गई। 


उसने अपना गला खंखारा और अमर को देखने लगी। 


" गुड मोर्निंग सर ! "


सत्यनाश हो तेरा चारू श्रीवास्तव! ये गुड मोर्निंग नही इवनिंग है। 

चारू मन ही मन खुद को गालिया निकालने लगी।

अमर ने अपनी भवं टेडी कर चारू को देखा फिर तंज कसते हुए बोला , " आप शाम के पांच बजे मोर्निंग विश करती है मिस चारू । इंट्रेस्टिंग! "


चारू ने मुंह बना लिया। 


अन्वी असमंजस की स्थिति मे दोनो के देख रही थी। 


" एक मिनट ! तुम दोनो एक दूसरे को जानते हो? " 


चकरू पुरी गंभीरता से बोली , " हां दी..ये मेरे पॉलिटिकल साइंस वाले सर हैं । " 


अमर ने सर पीट लिया। 


" तुम उट् पटांग जवाब ही क्यो देती हो ? हां ! " अमर दो उंगली माथे के बीच मे रगड़ते हुए बोला। 


" और..दूर हटो मेरी भाभी से । ", अमर ने चीढ कर कहा। 


चारू ने हैरत से एक जोर की सांस खींची ।

" क्यो? और ये मेरी बहन है। आपकी भाभी कब बनी ? " चारू ने मुंह बना लिया।


" ये तुम्हारी बहन कब बनी ! "  ,अब अमर पुरी तरह से झगड़ने के मुड मे आ चुका था। 


" पैदाइशी बहन है मेली । ", चरू तुनक कर बोली। 


अमर गर्दन टेडी कर उसे अजीब नजरे से देखने लगा।

" अब ये पैदाइशी बहन क्या है ! "

उसने हाथ हवा मे उच्छालते हुए सवाल किया। 


"अरे..बस...!!! " 


अन्वी बीच मे आती हुई बोली। वो दोनो के बचकानी झगडे से तंग आ गई थी।

" ये क्या दोनो बच्चो की तरह लड रहे हो । " 


चारू ने जल्दी से अमर की तरफ इशारा कर दिया।

" ये लड रहे । " 

अमर चारू की उंगली को घूरने लगा तो चारू ने जल्दी से अपना हाथ पीठ पीछे छुपा..दांत दिखा दिए।  


" अब अगर तुम दोनो फिर लडे तो एक एक कान के नीचे लगाऊंगी और किचन मे जाकर बर्तन पर गिरोगे । " , अन्वी दोनो के डांटने लगी। 


अमर और चारू शांती से खडे हो गए।  मानो अभी ये दोनो एक दूसरे से बच्चो जैसे लड ही नही रहे थे। 


अन्वी ने दोनो की एक नजर देखा फिर सवाल किया , " अब इंसानो की तरह बताओ कैसे जानते हो एक दूसरे को । "


" ये अमर सर पॉलिटिकल साइंस पढाते है हमको । ", चारू ने इस बार तरिके से जवाब दिया।


" स्टुडेंट है मेरी । " , अमर ने गाल खुजाते हुए बोरियत से कहा। 


ये देख चारू ने मुंह बना लिया। 


" अकड़ तो देखो..अकडू की ! " , उसने मन हा मन सोचा । 



तभी अमर आगे आकर बोला , " भाभी ये मिस चारू आपकी बहन कैसे है ? " 


" जैसे सब होते है । ", चारू बडबडाई। 

अन्वी ने उसे आंखु देखाई तो वो शांत हो गई। 

अन्वी अमर की तरफ मुड कर बोली ," ये मेरे चाचा की बेटी है। हम लोग एक साथ ही रहते थे तो ऐसा कजिन और रियल सिस्टर जैसा कभी हमारे बीच आया ही नही। " 


" पर आपकी शादी मे तो मैने इन्हे नही.देखा । " अमर नु आंख बडी कर ली।


" क्योकि महारानी बिमार होकर पडी थी । कॉलेज मे ही थी ये तब । " ,

अन्वी चारू को घूरने लगी तो चारू ने चेहरा फेर लिया। 

अन्वी आगे बडी और चारू के कान खींच लिए। 

" राघव के पैदा होने पर भी नही आई थी तू । फोन पर ही बधाई देकर एक तरफ हो गई। "


" आ..दी..छोडो। " चारू नौटंकी करते हुए मचलने लगी। 

अन्वी ने ना मे गर्दन हिला चारू के सर पर चपत लगा दी। 


" चल बता। आई क्यो नही ? " 


" स्टेट मैच था बास्केटबॉल का । " , चारू ने कान सहलाते हुए जवाब दिया। 


" तू और तेरे मैच ! " 


उसने एक नजर अमर को देखा और चारू को । 

" चलो..अंदर चलो दोनों। यहां ठंड हो रही है। " 



इतना बोलकर अन्वी घर के अंदर चली गई।  अमर ने चकरू को तिरछी निगाह से देखा तो चारू ने अपना बैग दिखा दिया।


" ट्युशन ! " 


" याद है मुझे । " 



इतना कहकर अमर चला गया। एक बार अमर चला गया तो चारू अपने सीने पर हाथ रख ली।


" ठीक से देखे भी नही । हाए..मेरी किस्मत! " 

दुख मनाते हुए चारू बुदबुदाई।  




क्रमशः