माई डियर प्रोफेसर - भाग 24 Vartika reena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

माई डियर प्रोफेसर - भाग 24










--------------



चारू सांसे रोके खडी थी। उसे समझ नही आ रहा था कि नव्या ने उसे सच बताने से मना क्यो किया। वो लगातार नव्या को देखे जा रही थी।


नव्या ने चारू के घबराए चेहरे को देखा तो उसका दिल पसीज गया । उसने चारू के कंधे पर हाथ रखा । 

" पुलिस नही समझेगी। दे वांट आ स्केप गोट । रही बात तुमने जो देखा...उसके बारे मे मै राजा साहब से बात करूंगी। " 


नव्या की आवाज नर्म थी और चारू के लिए बस इतना सहारा भी काफी था। उसने गहरी सांस भरी। और हां मे सर हिला दिया। 


" पुलिस से क्या बोलू ? " , चारू ने सवाल किया।


" तुम रोज ही जंगल जाती ही हो । यही बोल देना । " 


चारू ने हां मे सर हिला दिया। इसके बाद वो पुलिस के पास चली गई अपना स्टेटमेंट देने।


चारू के जाते ही नव्या का चेहरा सख्त हो गया।


" इन सब मे मत पडो चारू । तुम संभाल नही पाओगी । ", नव्या ने खुद से कहा। 





कुछ दिन बाद 



कुछ दिनो मे चीजे नोर्मल हो गई  थी। चारू ने नव्या से जानने की कोशिश करी की आखिर क्या हुआ तो नव्या ने उसे हर बार टाल दिया ये कहकर की उसे भी नही पता । 


चारू जानती थी की नव्या सब जानती है पर बताएगी नही।.ठीक भी था । ये सब उसकी जिम्मेदारी नही थी। नव्या एक राजकुमारी है। वो सभांल लेगी। उसे ( चारू ) क्या पडी है इन सब मे उलझने की ।


सोचते हुए चारू क्लास मे एंटर कर गई।  वो जाकर अपनी सीट पर बैठ गई।  नैना पहले ही वहां थी। 


चारू नु बैग रखा और फिर नैना से चिपट गई।  नैना हँस दी।


" वापस डोर्म मे आजा। मैरा तेरे बिना मन नही लगता । ", चारू अपने होंठ गोल कर बोली।

नैना मुस्कुरा दी। 

" अमोघ नही मानेगा। " 


" आ...!!!!! " 

चारू मुंह.बना , हाथ बांध बैठ गई।  उसकी बच्चो जैसी हरकत देख नैना खुद को रोक नही पाई।  उसने हँसते हुए चारू के गाल खींच लिए।  चारू ने चीढ कर उसका हाथ हल्के से झटक दिया।


" पागल लडकी ! ", गर्दन दांए - बांए हिलाते हुए नैना बोली। 


चारू कुछ बोलती की उसकी नजर कॉरिडोर से गुजरते अमर पर पडी । आज उसने ब्लैक शर्ट , ब्लैक पेंट और उसपर ब्लैक कोट पहना था। दाए हाथ की कलाई मे मोटे डाइल वाली घडी और बाए हाथ मे चांदी का कडा और रूद्राक्ष । 


चारू बस उसे देखते ही रह गई।  




क्या कोई इतना दिल मे घर कर सकता है..कि हर रंग मानो उसी का लगता हो। मै कैसे सभांलू खुद को! मेरे प्रिय तो श्याम वर्ण मे स्वंय श्याम लगते है। क्या कभी मे उनके प्रेम से उभर पाउंगी? शायद नही ! क्योकि मै टो इस प्रेम की अंनत गहराई मे.गोते लगाते ही रहना चाहती हूं। 



सोचते सोचते चारू मुस्कुरा दी। फिर पढाई मे लग गई।  उसे ऐसे खोए अपने मे मुस्कुराते नैना देख रही थी। वो.समझ गई थी की उसकी दोस्त ऐसी शर्मिली सी मुस्कान क्यो मुस्कुरा रही। 



नैना होले से मुस्कुरा कर रह गई।  



------------


कॉलेज खत्म हो गया था। चारू एक्स्ट्रा क्लास के लिए जल्दी जल्दी तैयार हो.रही थी। उसने एक कुर्ति निकाली और उसे अपने पर लगा कर शीशे मे देखने लगी । 


" ये पहनू या वेस्टर्न ! उफ्फ! .", चारू मुंह लटका कर बिस्तर पर बैठ गई।  उसके कमरे मे कपडे यु ही बिखरे थे मानो वहा तुफान आया हो । 


चारू ने कमरे मे नजर दौड़ाई फिर बिस्तर पर लोट पोट हो गई।  


" एक मिनट ! "


वो अचानक उठकर बैठ गई।  

चारू हाथ कमर के पीछे बांध कमरे मे चक्कर काटते हुए बोली , " मै ज्यादा तैयार होकर गई तो सर को शक हो जाएगा। मुझे नोर्मल ही रेडी होना चाहिए।  "


उसने जल्दी से एक काली टी शर्ट और ब्लू जिंस पहन ली। बाल चोटी मे बांध बैग लेकर स्कूटी पर निकल गई।  




लगभग पंद्रह मिनट बाद वो अमर के घर के सामने थी। उसका घर लकडी का था और काफी बडा और सुंदर था। घर की दाई तरफ एक पग डंडे थी जो जंगल मे जाकर लुप्त होती थी। 


चारू ने स्कूटी एक ओर पार्क करी और फिर घर की तरफ बड गई ।


उसका दिल जोरो से धडक रहा था। हाथ हल्के से कांप रहे थे। उसने अपने कंधो पर एक जैकिट डाल ली थी। 


" हे..भगवान.! यु दिल इतना क्यो धडक रहा है। कौन सा जंग के मैदान मे आई हूं । पढाई करनी है । " 

उसने अपने सीने पर हाथ रख लिया। 

" बस चाचे..इतनी जोर सु मत धडक मानो तेरे पीछे कुत्ते पड गया हो। अटैक ना आ जाए मुझे..हाए दईया! "


चारू नर्वस होकर खुद से बोलने मे.व्यस्त थी जब उसे गार्डन से किसी के हँसने की आवाज आई।  चारू नु आवाज की दिशा मे देखा तो एक स्त्री खडी थी ।


चारू का जबडा लटक गया। और वो जोर से चिल्लाई " अन्वी दीदी !!!!!! " 





क्रमशः