The Dream Man Shree Kriti द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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The Dream Man

यह घटना लगभग बारह साल पहले 2012 की है, तब सब ओर नवरात्रि की धूमधाम थी। महज़ पन्द्रह साल की श्रेयसी की नज़र तब इतफ़ाक से एक मैगज़ीन में बेहद हैंडसम दिखाई दे रहे नौजवान की तस्वीर पर पड़ ग‌ई। वह तस्वीर देखकर वो एकदम से मंत्रमुग्ध हो गई जैसे तस्वीर ने उसे वश में कर लिया हो ...  सच ! यह बाली उमर भी बड़ी रहस्यमय होती है, कब क्या करामात कर जाये कुछ खबर नहीं लगती । एकटक उस तस्वीर को देखती श्री के जबान से अनायास ही निकला, 

" ओह वाओ ! व्हाट ए ड्रॉप-डेड गॉर्जियस मैन। आखिर कौन है ये? कोई नया फिल्म स्टार है क्या ? हॉलीवुड का या फिर बॉलीवुड का ?? या फिर हो सकता है कोई सुपर मॉडल हो, अर्जुन रामपाल की तरह ... न..ना...... अर्जुन रामपाल तो इस के पैरों का धूल है .... लेकिन आखिर ये है कौन ??? "

श्री मैगज़ीन उठाकर बड़ी ही दिलचस्पी से पढ़ने लगी, उसमें जो नाम था उसे पढ़ के तो वो भौचक्की रह गई।  हाय !! समय इंसान का कैसा काया पलट कर देता है !!!  जानते हैं वो तस्वीर किसकी थी? वे थे सर रतन टाटा जी और वह तस्वीर तब की थी जब वो नौजवान थे । सर रतन टाटा जी के बारे में कुछ कहना तो सुरज को दीया दिखाने जैसा है ..... उनकी गिनती सदी के महान बिजनेसमैन के रूप में ही नहीं बल्कि महान हस्ती ... एक महान इंसान के रूप में भी होती है .... लोगों के मन में उनके प्रति अथाह सम्मान है। श्री इतने दिग्गज बिजनेसमैन को भला कैसे न जानती मगर उसकी पहचान थी  उनके वर्तमान रूप से ... उस मैगज़ीन में रतन टाटा की जीवनी छपी थी .... कुछ इंटरव्यू के अंश भी थे और थी रतन टाटा की वो तस्वीर ।  श्री ने वो सारे पन्ने फाड़ लिए, इसके लिए अपने पापा से तगड़ी डाॅंट भी खाई पर वो लगातार एक ही झूठ की रट लगाये रही कि पन्ने गलती से फट गये और इस झूठ को पक्का करने के लिए उसने कान पकड़कर पापा से माफी भी मॉंग ली। अपनी लाडली को इस तरह माफी मॉंगता देख  पापा का गुस्सा पल में काफूर हो गया और उन्होंने मामले को तुरंत रफा दफा कर दिया। वो बेचारे कहाँ जानते थे कि उनकी बेटी पर एक अनोखा जुनून सवार हुआ है, एक ऐसा जुनून जिससे उसकी जिन्दगी निखर जाने वाली है। उसी दिन वो अपने पॉकेट मनी का काफ़ी बड़ा हिस्सा खर्च कर के एक खुबसूरत मगर मोटी सी गुलाबी डायरी ले आई जिसके पहले ही पन्ने पर उसने बड़े ही सलीके से काट कर वो तस्वीर चिपकाया, ऐसे जैसे कलेजे से निकाल कर अपना दिल लगाया  ... फिर शुरू हुआ एक सिलसिला, रोज उस तस्वीर को निहारा करती।  साथ ही साथ वो अखबार, मैगज़ीन या फिर इंटरनेट, हर जगह सर रतन टाटा जी के बारे में जानकारी तलाशती रहती थी और चुन-चुन के इस गहरे समंदर से मोती बटोरती रहती थी। आखिर उसका ये जुनून कब तक छिपता,धीरे- धीरे घर वालों के साथ ही सहेलियों को भी इसकी खबर लग ग‌ई । माँ- बाप ने इसे उसका बचपना माना तो बाकियों ने उसे पागल करार दिया, खूब मजाक उड़ाया मगर श्री को कोई परवाह नहीं थी। इसी जुनून के संग सालों साल बीतते गए, इस दौरान श्री में भी करिश्माई बदलाव आये। इस जुनून ... इस पागलपन का उस पर कुछ ऐसा प्रभाव पड़ा कि वो पापा की परी नहीं बल्कि एक हाई वैल्यू वुमन के रूप में सँवर ग‌ई क्योंकि जाहिर सी बात है उसके लाइफ़ आइडल अज़ीम शख्सियत के मालिक सर रतन टाटा जी थे। लेकिन जैसा आमतौर पर होता है कि लड़की का यौवन परवान चढ़ा नहीं की जान- पहचान, नाते- रिश्तेदार हायतौबा मचाने लगते हैं,  ' अरे ! शादी कब करोगी। तुम्हारी उमर की लड़कियों के गोद में तो बच्चे खेल रहें हैं '। ये नहीं दिखाई देता था उन्हें कि श्री अपने जिन्दगी के हर स्तर पर कितनी सफल है। इंडिपेंडेंट है, अपने माँ-बाप का सहारा है। न जाने हमारा समाज कब समझेगा कि स्त्रियों का काम मात्र शादी कर के बच्चे पैदा करना नहीं है । श्री तो ऐसी बातों को हंसी में उड़ा देती थी पर ऐसी बातों से उस के माँ- बाप बेहद परेशान हो जाते थे, खासकर उसकी माँ ....  दरअसल श्री ने बरसों पहले मैगज़ीन में जो तस्वीर देखी थी उसे इंटरनेट पर ढूँढ निकाला था और उस तस्वीर का बड़ा और भव्य फ़ोटो फ़्रेम करवा के अपने बेडरूम बड़े शान से सज़ा रखा था ... उसकी माँ जब-जब श्री के बेडरूम में सजी उस तस्वीर को देखतीं तो एकदम व्याकुल हो उठतीं । श्री उनकी व्याकुलता समझती थी इसलिए उसने उनसे बात करने का फैसला किया। शारदीय नवरात्रि के दिन थे, उसकी माँ शाम को माता रानी की आरती के बाद श्री को प्रसाद देने उसके कमरे में आ‌ईं तो उसने ने उन्हें हाथ पकड़ कर बेड पर बिठा लिया और खुद उनके करीब बैठ ग‌ई लेकिन वो कुछ बोलती उससे पहले ही उस की माँ तीखे नयनों से उस तस्वीर को घूरते हुए व्याकुल स्वर में उससे पूछा, 

" श्री ! पहले मुझे ये बता दे कि तू शादी क्यों नहीं करना चाहती ? "

" मैंने कब कहा माँ कि मैं शादी नहीं करना चाहती ? "

" कहा नहीं पर तेरे लक्षण से ऐसा ही लगता है। "

श्री हंसी फिर बोली, 
" शादी कोई गलत चीज नहीं है मेरी नज़र में मगर माँ मैं सिर्फ इसलिए शादी नहीं कर सकती क्योंकि सब करतें हैं । शादी कोई खेल नहीं है, दबाव में आकर लिया गया एक गलत डिसीजन मेरी जिन्दगी खराब कर सकता है इसलिए शादी तो मैं तभी करूँगी जब सही मायने में मुझे मेरा लाइफ़ पार्टनर मिलेगा वरना नहीं। मैं सिंगल भी जिंदगी से बहुत खुश और सैटिस्फाइड हूँ । सुस्वादु पकवान बनाने में, घर सजाने में, कपड़े धोने में या शादी कर के बच्चे पैदा करने में ही एक औरत के जीवन की सार्थकता नहीं है माँ ... जीवन का अर्थ इन सब से कहीं ऊॅंचा है । "

" मगर बिन ब्याही लड़की, लोग क्या बोलेंगे बेटा ? "

" जिसकी जैसी बुद्धि है, उसे वैसा बोलने दो ... तुम क्यों परवाह करती हो, उनका तो काम ही है बोलना। "

श्री की माँ कुछ देर अपनी बेटी को एकटक देखतीं रहीं फिर उसे गले से लगा के भावुक स्वर में बोलीं, 
" तू सच में बड़ी अनूठी है मेरी बच्चीे ! जिस उमर में हम दूसरों के हाथों का खिलौना बने हुए थे, उस उमर में तूने जिन्दगी को कितनी गहराई से समझा है। "

माँ ने बड़े प्यार से उसका ललाट चूमा और कमरे से बाहर चलीं गईं। श्री भी दिनभर की थकी हारी थी। थकान मिटाने के लिए वह बेड पर लेट ग‌ई और टेलीविजन चालू कर दिया। टेलीविजन पर न्यूज़ चैनल आ रहा था। श्री थकी हुई तो थी ही, टेलीविजन देखते- देखते वह सो ग‌ई। इधर न्यूज़ चैनल पर एक दुखद खबर आने लगी कि भारत के सबसे बड़े और महान उद्योगपति सर रतन टाटा जी का निधन 86 साल की उम्र में हो गया। रतन टाटा जी काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था ... वहीं उन्होंने अंतिम सॉंस ली। श्री नींद में थी पर शायद उसका अन्कान्शस माइन्ड सब सुन रहा था इसलिए उसकी नयनों में एक सपना तैरने लगा। सपने में वो वर्सोवा बीच पर टहल रही थी तभी उसे किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी। श्री ने इधर-उधर देखा पर कोई नज़र न आया, उसने ज़ोर से पूछा, 

" कौन है ? "

श्री के एक-दो बार पूछने पर एक नौजवान मुस्कुराते हुए उसके सामने आया और बोला, 
" अरे वाह ! इतनी जल्दी भूल ग‌ई मुझे !! "

ये वही नौजवान था ... तस्वीर वाला ... हूबहू वही ! 
श्री के मुखड़े पे खुशी और मुहब्बत के रंग छा गए पर वो जैसे खुद बेजुबां हो गई ... उसने तो कभी सोचा भी न था कि दिल में जिस की तस्वीर बसी है, वो यूँ तस्वीर से निकल के सामने आ जायेगा। उसे कुछ न बोलता पा के वो तस्वीर वाला नौजवान बेहद मधुर स्वर में फिर बोला, 

" श्री ! क्या हुआ नाराज हो मुझसे? "

श्री से अब भी कुछ बोला न गया मगर उसने बड़ी बेकरारी से  सिर हिलाकर इंकार किया। इस पर तस्वीर वाला युवक मुस्कुरा कर बोला, 

" मैं कभी भी तुमसे‌ रूबरू नहीं मिला क्योंकि तुम तो जानती हो मैं अतीत में रहता हूँ। आज जब सारे बंधन टूट गए तो रह नहीं पाया, तुमसे मिलने चला आया। आज मैं तुम्हें अलविदा कहने आया हूँ। "

श्री ने अकचका के पूछा, 
" क्यों ??? "

" तुमने सुना नहीं, रतन टाटा नहीं रहे तो अब मुझे भी जाना होगा न। "

" ओह ! सर रतन टाटा जी नहीं रहे !!! "

" हाँ, इसलिए तो तुमसे अलविदा माँग रहा हूँ। "

" मगर तुम क्यों सर रतन टाटा जी के साथ जाना चाहते हो भला ? "

" जाना तो पड़ेगा ही !!! "

" नहीं, तुम मेरे रूह में बसते हो और यहाँ से जाना मुमकिन नहीं ... मेरे रूह में तुम अनश्वर हो। "

इस बार तस्वीर वाला युवक कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुराया। 
श्री ने अपनी धुन मे कहा, 
" और देखना, सर रतन टाटा जी भी जा नहीं सकेंगे ... पता है करोड़ों दिलों में बसते हैं वो, सर रतन टाटा तो उन दिलों में अमर - अनंत रहेंगे ... देखना । "

समुद्र के नीले पानी में डूबता सूरज अपनी लालिमा बिखेर रहा था, मद्धम-मद्धम बयार बह रही थी ... तस्वीर वाला युवक श्री करीब आया और उसके हाथों को बड़े प्यार से अपने हाथों में लेते हुए, वहीं  वर्सोवा बीच पर बैठ गया ... एक दूसरे में खोये से वो एक दूजे से बातें करने लगे ... करते रहे ... चंदा की चांदनी बिखर आई थी मगर बातों का संगीत बहता रहा ... तरन्नुम में वे खोये रहे  .........................

टीवी से आ रही न्यूज़ चैनल की तेज़ आवाज़ से श्री की नींद खुल गई। काफ़ी रात हो गई थी, वह गहरी साॅंस लेकर उठ कर बैठ ग‌ई ... उस ख्वाब का नशा नयनों में बेपनाह था।

न्यूज़ चैनल पर अब भी लागातार सर रतन टाटा जी के निधन की खबरें आ रहीं थीं, कुछ क्षण तक श्री टीवी स्क्रीन को बिना पलकें झपकाए देखती रही ... आॅंखों के कोने में आंसुओं की बूंदें छलक आईं, मन कुछ उदास सा हो गया। 


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                               समाप्त
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