परायें हुए अपने - 1 Ravnika द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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परायें हुए अपने - 1

" ससुराल का बुलावा "

                    दोपहर का समय था ,

घर की गैलरी में दो चारपाई बिछी हुई थी जिन पर दो बच्चे सो रहे थे जिसमे से एक की उम्र लगभग 4 महीने और दूसरे की लगभग 3 वर्ष होगी ।दोनों बच्चो के पास दो औरते बैठी बात कर रही थी एक ( ओमकली ) की उम्र 50 के आसपास होगी और दूसरी (कुसुम) की 30 से कम रही होगी 

( दिखने से लग रहा था कि दोनों माँ - बेटी होगी )

तभी घर के सामने एक गाड़ी आकर रुकती हैं उसमे से एक हट्टा-कट्टा आदमी उतरता हैं , ( उम्र -35) । जिसे देखकर कम उम्र की महिला जल्दी से अंदर भाग जाती हैं ।

दूसरी महिला भी आश्चर्य से खड़ी हों जाती हैं । और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ पूछती हैं - बेटा तू अचानक कैसे ?

 मौसी जी "कुसुम" को जल्दी से तैयार कर दो इसे घर लेकर जाना हैं  , मेरी माँ बीमार होरी -- आदमी ( कुसुम का जेठ )ने भरे गले के साथ जवाब दिया 

कैसे , क्या हो गया ? अधेड़ महिला ( ओमकली ) ने पूछा !

बुखार आ रहा था , अभी तबियत ज़्यादा ख़राब होरी इसीलिए जल्दी कर दो तैयार कुसुम को -- आदमी ने कहा 

ठीक हैं बेटा तू बैठ आराम से , कुसुम को कहूँ मैं ,वो तैयार होवे तब तक तू ख़ाना खा ले ओमकली बोली !

नहीं जी मुझे तो भूख ना , खाने कु रहन दो आप बस चलने की तैयारी करो हमारी ---- आदमी ने कहा 

ठीक हैं बेटा , कहकर ओमकली अंदर चली गई ।

               अंदर का नजारा 

दरवाज़े के पीछे खड़ी हुई कुसुम अपने जेठ और माँ की बातें सुन रही थी माँ के अंदर आते ही कुसुम माँ के गले लगकर रोने लगी और बोली -- माँ मुझे लगता हैं कि मेरी सास को कुछ हो गया हैं तभी तो भाईसाब एकदम चलने की बात कर  रहे हैं ।

बेटी शांत हो जा ऐसा कुछ नहीं हैं बस बीमार हैं तेरी सास हो जाएगी ठीक और इसे कुछ काम हैं रास्ते में इसीलिए जल्दी जाने की बात कही " माँ ने समझाते हुए कहा "

अभी ओमकली कुसुम को समझा ही रही थी कि बाहर से बच्चो के रोने की आवाज आयी तो ओमकली बाहर की ओर जाने लगी तभी देखा कि सोया हुआ लड़का अंदर ही आ चुका था जो अपनी मम्मी को रोता देखकर डर गया था बच्चे को देखकर कुसुम ने ख़ुद को सम्भाला और बच्चे के सिर पर प्यार से हाथ फिराते हुए बोली -- उठ गया मेरा बेटा ; हाँ मम्मी "बच्चे ने कहा "

"अब तक ओमकली भी छोटे बच्चे को गोद में लेकर अंदर आ चुकी थी जो कि भूख के कारण रोये जा रहा था "

ले बेटी तू पहले इसे दूध पीला तब तक मैं तेरा सामान रख देती हूँ : ओमकली ने बच्चे को कुसुम की ओर करते हुए कहा 

ठीक हैं माँ " कुसुम बोली और बच्चे को लेकर दूध पिलाने लगी ।

फिर जल्दी से ओमकली उसके कपड़े बैग में रखने लगी और साथ ही साथ बोलने लगी बेटी अभी तो जल्दी में कुछ न कुछ छूट ही जाएगा इसीलिए ज़रूरी चीजे ही रख देती हूँ बाद में तेरा कोई - सा भाई पहुँचा देगा सारा सामान और साथ ही तेरी सास का हालचाल भी पूछने आ जाएगा

"ठीक हैं कहकर कुसुम ने गर्दन हाँ में हिलायी "

                बाहर का नजारा 

अब तक बाहर भी कई आदमी इकट्ठे हो चुके थे जिसमे कुसुम का भाई और चाचा भी शामिल थे ( कुसुम के पिता बीमार रहते थे और अपनी बीमारी के चलते उसकी शादी से पहले ही चल बसे थे ) 

कुसुम का भाई ( जिसकी उम्र 21वर्ष होगी एक बहुत ही सुंदर नोजवान था ) एक हाथ में जग लिए हुआ था और दूसरे में गिलास वहाँ मौजूद सबको पानी पिला रहा था 

तभी अंदर से पर्दा करके ओमकली आयी ओर अपने बेटे से बोली "संजीव कुसुम का बैग गाड़ी में रख दे "

               संजीव माँ की बात सुनकर अंदर गया और बैग लेकर बाहर आया बैग देखकर कुसुम का जेठ भी उठ गया और दोनों गाड़ी की ओर जाने लगे 

एक बेटे को गोद में उठाये और एक बेटे की उँगली पकड़े हुए कुसुम भी अब तक बाहर आ चुकी थीं "

 ओमकली कुसुम की गोद से बच्चे को ले उसके साथ गाड़ी की तरफ़ बढ़ने लगती हैं 

            कुसुम गाड़ी में बैठ जाती हैं तो ओमकली  बच्चे को उसे दे देती हैं बड़ा बेटा भी पास आकर गाड़ी में बैठ जाता हैं तो ड्राइवर गाड़ी को स्टार्ट कर देता हैं और गाड़ी में बैठी कुसुम अपनी माँ से विदाई का इशारा करते हुए गर्दन हिलती हैं माँ भीं गर्दन हिलाती हैं और गाड़ी चली जाती हैं 

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