रात का सन्नाटा - 1 Sandhya Devi द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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रात का सन्नाटा - 1

अंधेरे में चमकती हुई उन दो आँखों को देखकर चारों के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
"क... कौन है वहाँ?" रोहित ने काँपती आवाज़ में पूछा।
कोई जवाब नहीं आया।
बस वही आँखें अंधेरे में स्थिर खड़ी रहीं।
अमन ने हिम्मत करके मोबाइल की टॉर्च उनकी तरफ़ घुमाई।
रोशनी पड़ते ही सबके होश उड़ गए।
वहाँ कोई इंसान नहीं था।
एक दुबला-पतला काला कुत्ता खड़ा था।
चारों ने राहत की साँस ली।
"साला, मैं तो डर ही गया था," विकास हँस पड़ा।
लेकिन तभी सोनू का चेहरा पीला पड़ गया।
"यार... उसके पैर देखो।"
सबकी नज़र कुत्ते के पैरों पर गई।
और अगले ही पल उनकी साँसें अटक गईं।
कुत्ता उनकी तरफ़ मुँह करके खड़ा था...
लेकिन उसके पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए थे।
अचानक वह कुत्ता इंसानों की तरह मुस्कुराया।
फिर एक झटके में झाड़ियों के अंदर गायब हो गया।
कुछ सेकंड तक चारों वहीं जमे रहे।
तभी अमन की जेब में रखा मोबाइल बज उठा।
रात के उस सुनसान जंगल में अचानक आई रिंगटोन ने सबको चौंका दिया।
स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था।
बस एक शब्द लिखा था—
"चलावा"
मोबाइल की स्क्रीन पर चमकता हुआ शब्द देखकर अमन के हाथ काँपने लगे।
"ये किसने सेव किया है?" रोहित घबराकर बोला।
"मैंने नहीं किया!" अमन ने जवाब दिया।
फोन लगातार बज रहा था।
आखिर अमन ने काँपते हाथों से कॉल रिसीव कर ली।
"हेलो?"
दूसरी तरफ़ कुछ पल सन्नाटा रहा।
फिर एक भारी और अजीब आवाज़ सुनाई दी—
"जो मेरा है... उसे वापस कर दो..."
चारों के रोंगटे खड़े हो गए।
"कौन हो तुम?" विकास चिल्लाया।
लेकिन उधर से सिर्फ़ धीमी हँसी सुनाई दी।
"ही... ही... ही..."
और कॉल कट गई।
उसी समय जंगल में तेज़ हवा चलने लगी।
पेड़ों की शाखाएँ ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगीं।
अमन के हाथ से पॉलिथीन छूटकर ज़मीन पर गिर गई।
पॉलिथीन खुल गई।
गुलाब जामुन बाहर लुढ़क गए।
लेकिन उन्हें देखकर चारों की चीख निकल गई।
वे गुलाब जामुन नहीं लग रहे थे।
उन पर किसी ने गीली मिट्टी से छोटे-छोटे इंसानी चेहरे बना दिए थे।
और उन चेहरों की आँखें खुली हुई थीं।
तभी पीछे से किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।
इस बार वह चीज़ उनकी तरफ़ आ रही थी...
पीछे से दौड़ने की आवाज़ तेजी से उनकी तरफ़ बढ़ रही थी।
धप... धप... धप...
"भागो!" रोहित पूरी ताकत से चिल्लाया।
चारों दोस्त जान बचाकर दौड़ पड़े।
जंगल का अंधेरा और घना होता जा रहा था।
पेड़ों की टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उनके साथ दौड़ती हुई महसूस हो रही थीं।
अमन अब भी गुलाब जामुन वाली पॉलिथीन पकड़े हुए था।
अचानक उसके हाथ में झटका लगा।
पॉलिथीन अपने आप हिलने लगी।
"अमन, उसे फेंक दे!" सोनू चिल्लाया।
लेकिन अमन कुछ समझ पाता, उससे पहले ही पॉलिथीन फट गई।
गुलाब जामुन ज़मीन पर बिखर गए।
चारों रुक गए।
उनमें से एक गुलाब जामुन धीरे-धीरे ज़मीन पर लुढ़कने लगा।
कोई उसे छू नहीं रहा था।
फिर दूसरा...
फिर तीसरा...
सभी गुलाब जामुन एक ही दिशा में लुढ़कने लगे।
जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें बुला रही हो।
तभी जंगल में वही डरावनी हँसी गूँजी—
"ही... ही... ही..."
इस बार आवाज़ इतनी पास थी कि लगा कोई उनके ठीक पीछे खड़ा है।
चारों ने पलटकर देखा।
और उनके होश उड़ गए।
पेड़ों के बीच एक लंबा काला साया खड़ा था।
उसकी आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।
कुछ सेकंड तक वह बिल्कुल स्थिर खड़ा रहा।
फिर अचानक उसने अपना हाथ उनकी तरफ़ बढ़ाया।
उसी क्षण चारों के मोबाइल एक साथ बज उठे।
स्क्रीन पर सिर्फ एक शब्द लिखा था—
"चलावा"
और तभी दूर कहीं अंधेरे में एक लालटेन की रोशनी दिखाई दी...
दूर अंधेरे में दिखाई दे रही लालटेन की रोशनी धीरे-धीरे उनकी तरफ़ बढ़ रही थी।
चारों दोस्त अपनी जगह पर जमे खड़े थे। उनके मोबाइल की स्क्रीन पर अब भी "चलावा" लिखा हुआ था।
कुछ सेकंड बाद फोन अपने आप बंद हो गए।
रोशनी करीब आती गई।
अब उन्हें साफ दिखाई देने लगा कि लालटेन एक बूढ़ा आदमी पकड़े हुए था।
उसकी लंबी सफेद दाढ़ी थी। माथे पर चंदन का तिलक लगा था और कंधे पर एक पुराना थैला टंगा हुआ था।
वह उनके पास आकर रुका।
उसकी नज़र सबसे पहले ज़मीन पर बिखरे गुलाब जामुनों पर गई।
फिर उसने अमन की तरफ़ देखा।
"ये मिठाई तुम लोग कहाँ से लाए हो?"
उसकी आवाज़ में घबराहट साफ झलक रही थी।
अमन ने पूरी बात बता दी।
शादी, मिठाई का स्टॉल और पॉलिथीन में गुलाब जामुन भरकर लाने की बात सुनते ही बूढ़े का चेहरा उतर गया।
"बड़ी भूल कर दी तुम लोगों ने।"
"क्या मतलब?" रोहित ने पूछा।
बूढ़े ने जवाब नहीं दिया।
वह धीरे-धीरे एक गुलाब जामुन के पास गया और उसे ध्यान से देखने लगा।
अचानक उसने जेब से थोड़ा-सा भस्म निकाला और उस पर छिड़क दिया।
जैसे ही भस्म गुलाब जामुन पर गिरी, उसमें से धुएँ की पतली लकीर उठने लगी।
चारों दोस्त डर से पीछे हट गए।
"ये कैसे हो सकता है?" विकास बुदबुदाया।
बूढ़े ने गंभीर स्वर में कहा,
"क्योंकि यह साधारण मिठाई नहीं है।"
उसी समय जंगल में फिर वही हँसी गूँज उठी।
"ही... ही... ही..."
इस बार आवाज़ इतनी पास थी कि लगा जैसे कोई उनके कानों में हँस रहा हो।
बूढ़े ने तुरंत लालटेन ऊपर उठाई और जंगल की तरफ़ देखने लगा।
उसकी आँखों में पहली बार डर दिखाई दिया।
"वो आ चुका है..."
"कौन?" सोनू ने काँपते हुए पूछा।
बूढ़े ने धीमी आवाज़ में कहा—
"चलावा..."
चारों दोस्तों के चेहरे पीले पड़ गए।
"आप उसे जानते हैं?" अमन ने पूछा।
बूढ़े ने सिर हिलाया।
"इस जंगल में कई सालों से उसका साया है। वह लोगों को रास्ता भटकाता है। लेकिन इस बार मामला अलग है।"
"अलग कैसे?" रोहित बोला।
बूढ़ा कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसकी लालटेन की लौ काँपने लगी।
हवा एकदम ठंडी हो गई।
पेड़ों के पीछे से एक लंबी काली आकृति धीरे-धीरे बाहर निकली।
इस बार वह पहले से कहीं ज़्यादा साफ दिखाई दे रही थी।
उसका चेहरा अंधेरे में छिपा हुआ था।
लेकिन उसकी चमकती आँखें सीधे अमन को घूर रही थीं।
फिर उसने अपना हाथ उठाया...
और अमन की तरफ़ इशारा किया।
बूढ़े के चेहरे का रंग उड़ गया।
वह बुदबुदाया—
"नहीं... इसने अमन को चुन लिया है..."
चारों दोस्त कुछ समझ पाते, उससे पहले वह आकृति उनकी तरफ़ बढ़ने लगी... Part 3 soon