माई डियर प्रोफेसर - भाग 22 Vartika reena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 22

















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चारू क्लास मे बैठी नोट्स पढ रही थी। जब अमर क्लास मे एंटर हुआ।  सभी स्टूडेंट्स खडे होकर उसे मोर्निंग विश कर बैठ गए। 


चारू आज विंडो के पास पीछे बैठी थी। तो अमर को दिखी नही। 


ना जाने अमर को क्या हुआ..उसकी नजरे चारू को ही खोज रही थी। उसकी नजर विंडो से बाहर देखती चारू पर पडी। वो कही खोई हुई थी। उंगलियो मे पेन घूम रहा था। 


" मिस चारू ! ", अमर तेज आवाज मे बोला।


चारू झटके से होश मे आई । वो एक दम से खडी हो गई। 


" जी..यस सर ! ", हडबडाहट मे चारू लडखडा कर दोबारा सीट पर धम्म से बैठ गई। 

पुरी क्लास हँसने लगी। चारू का चेहरा लाल पड गया। 


" दिस टॉपर इज आ फुल टाईम जोकर । ", किसी नु कहा।


" हमेशा गिरती पडती रहती। सच आ केओज! "



और भी कई बाते चारू के कान मे पडी। उसने दांतो तले होंठ दबा लिए।  उसकी नजर धुंधलाने लगी थी। बडी मुश्किल से वो अपनी रुलाई रोक रही थी। 


अमर ने जैसी ही ये सब देखा उसका चेहरा कठोर पड गया। 


" साइलेंस ! ", वो तेज आवाज मे बोला।


सारी क्लास शांत पड गई।  सभी हैरत मे अमर को देखने लगे। यहां तक की चारू भी। 


अमर उसी कठोरता से बोला , " ये क्या बिहेवियर है! दिस इज आर फ्यूचर हु बुली आ पर्सन। नोट एसेपटेबल! अपने आप को सुधारो तुम सब । हैव सम ह्यूमिलिटि।  " 


अमर की फटकार सुनकर सब शांत होकर बैठ गए।  अमर.ने एक सरसरी निगाह चारू पर डाली जो अब अपनी किताब मे सर घुसाए बैठी थी। उसने ना मे सर हिलाया और पढाना शुरू कर दिया। 


उसने मार्कर से बोर्ड पर टॉपिक नेम लिखा ' पॉलिटिकल आइडियालोजी '। और क्लास की तरफ पलट गया।


" हम.लोग आज पॉलिटिकल आइडियालोजी के बारे मे डिस्कस करेंगे । कि वो क्या है , कौन कौन सी है। और.कौन इन आइडियालोजी के थिंकर्स है। हम लिबर्लिसम से शुरूआत करेंगे। कोई बताना चाहेगा की लिबर्ललिसम होता क्या है ? "


सब शांत होकर अमर.को सुन रहे.थे। उसके जवाब पर कुछ बच्चो से हाथ उठाए। अमर उन्हे देख ही रहा था कि उसकी नजर चारू पर पडी जो खिडकी के बाहर देखते हुए अपनी ही दुनिया मे गुम थी। अमर ने मार्कर की कैप निकाली और चारू पर फेंक कर मारी । 

चारू सकपका गई।  उसने.चौंक कर.सामने देखा । अमर.उसे.ही.घूर.रहा था। 


" मिस चारू क्या.आप क्लास.को.बता सकती है कि हम क्या पढ रहे थे ? ", 


चारू खडी हो गई।  उसने एक नजर अमर को देखा फिर बोर्ड को । 


" पॉलिटिकल आइडियालोजी! ", चारू अपनी चालाकी पर मुस्कुरा दी। 


अमर.ने एक भंव उचका कर चारू को टफ लुक दिया तो चारू शांत खडी हो गई।  


" एक्सप्लेन एनि वन आइडियालोजी! "


चारू पलके झतकाने लगी । फिर थोडी देर रूक कर.बोलने लगी। 


" सर लिबर्लिसम का मेन फोकस किसी भी व्यक्ति की स्वाधीनता या स्वतंत्रता पर होता है। ये आईडीयोलोजी कहती है कि स्टेट को जनता की स्वतंत्रता पर अपना अधिकार रखने का कोई अधिकार नही । अगर कोई व्यक्ति अपना काम , खुदका व्यपार कर.रहक है तो स्टेट का इसमे कोई भी या कम से कम इंटरफेर्सं होना चाहिए।  लोगो को उनकी बात कहने की , अपनी इच्छा से.काम करने की और स्टेट से सवाल.पुछने की लिबर्टी होनी चाहिए।  " 


बोलकर चारू चुप हो गई।  बीच बीच मे वो चुप होकर सोचती की वो सही जवाब दे रही है या नही। क्योंकि आआइडियालोजी एक्सप्लेन करना आसान नही। सबका अपना अपना विचार और भावनाए होती है। 


उसका जवाब सुनकर अमर हां मु सर हिला दिया। फिर अपना चश्मा निकाल कर टेबल से टिक कर हाथ बांध कर.खडा हो गया। उसकी बांह और हाथो पर नसे उभरने लगी थी। शर्ट के दो बटन खुले थे । बाल सलीके से सेट किए थे। मरून शर्ट और.ब्लैक पेंट मे वो काफी हैंडसम लग.रहा था। स्टूडेंट्स तो स्टूडेंट्स कई फिमेल टीचर्स भी खुद को अमर के निहारने से नही रोक पाती थी। 


वही चारू...वो कही.खो गई  थी। उसकी निगाहे अमर.की आंखो पर टिकी थी। वो.गहरी.भूरी आंखे..जिनमे चारू स्वंय को शीशे की तरह उतरती हुई महसूस कर.रही थी। चारू के गाल.लाल पडने लगे। 


अमर ने महसूस किया की चारू चुप होकर बस खडी है। 


" ये लडकी फिर खडे खडे सो गई।  ना जाने क्या होगा इसका । " मन ही मन अमर ने सोचा । 


फिर सामने बोला , " परफेक्ट मिस चारू..पर आप जवाब आत्मविश्वास के साथ दिया किजिए।  आपको अपने ज्ञान पर विश्वास होना चाहिए तभी कोई आप पर भरोसा करेगा। "


अमर की बातो पर चारू बस सर हिलाकर रह गई।  उसका ध्यान तो अपनी बडी हुई धडकन को संयत करने पर था।


" ये क्या हो रहा है मुझे । एक दिन अमर आप मेरी मौत का कारण बनेंगे। इतना प्रभाव मत डालिए मुझ पर! " 


चारू मन ही मन सोचने लगी।


लेक्चर एंड होते ही वो अगली क्लास के लिए निकल गई। 




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शाम.का.समय 



चारू जैसी ही क्लास से बाहर निकली वो अमर.को खोजने लगी।.उसने एक गार्ड को रोककर अमर.सर के बारे मे.सवाल.किया तो पता चला की वो पार्किग मे है। चकरू थैंक यू बोल पार्किग की तरफ भागी।



इधर पार्किग लोट मे अमर अपनी भाभी अन्वी से बात कर रहा था ।


" भाभी मै ले आउंगा। आप चिंता ना करो । ", कहते हुए अमर पलट गया। 


असली नजर चारू पर पडी जो भागते हुए उसी की तरफ आ रही थी। 


" मै बाद मे बात करता हूं भाभी एक कगांरू आ गया है यहा । ", कहकर अमर ने फोन रख दिया।


" कंगारू..! अमर..अम्मु..", अन्वी बोलती रह गई मगर अमर तो जा चुका था। 


" आने दो घर फोन फुक दुंगी इसका मै ! " 



इधर पार्किग मे अमर तन कर खडा होगया जब चारू उस से कुछ कदम की दूरी पर आकर रूक गई।  वो आगे की तरफ झुके हुए,  घुटनो पर हाथ रख..सर नीचा किए हांफने लगी। 


" सर..मु..मुझे आपसे बात करनी है । बहुत..आवश्यक है। ", वो हांफते हुए बोली।


" मिस चारू..पहले सांस ले लिजिए।  "


चारू ने हां मे सर हिलाया और दो तीन बार गहरी सांस भरी । भागने के कारण उसकी धड़कन अब भी तेज थी। 


स्वंय को शांत कर चारू ने अमर को देखा। वो गौर से उसे ही देख रहा था। 


" क्..क्या हुआ? ", चारू अमर के इतने ध्यान से देखने के कारण हडबढा गई। 


अमर भी होश मे आया । उसने अपना गला खंखारा और हल्की सख्ती से बोला ," जी..कहिए। क्या बात करनी है तुम्हे ? "


चारू ने फटाफट बोलना शुरू किया , " सर पेपर आ रहे है। और पॉलिटिकल साइंस मे मै बहुत कमजोर हूं। सर अगर आप एक्स्ट्रा क्लास..मतलब प्राइवेट ट्युशन मुझे दे सकते तो सर मै इक्जाम मे पास हो जाऊअगी। सर प्लीज..आपने हेल्प नही करी तो मे फेल हो जाउंगी । फिर मेरी डिग्री रह जाएगी। मुझे जॉब नही मिलेगी । मै सडक पर आ जाउंगी । सर प्लीज.."


" बस..बस कितना बोलती हो तुम ! ",अमर उसे टोकते हुए बोला।

चारू चुप हो गई । मगर थोडी देर बाद फिर बोली , " प्लीज सर..मेरा.भविष्य आपकी एक हां पर डीपेंड करता है। "


" हैं! ? " ,अमर चौंक गया। 


चारू ने तेजी से सर हिलाया , " हां सर ! आप पढाओगे नही तो मै पेपर मे फेल । मै फेल मतो मेरी मम्मी लतिया कर घर से बाहर कर देगी। मुझे जॉब नही मिलेगा। फिर मै सडक पर भींक ही मांगुंगी। "


चारू अब लगभग गिड़गिड़ाने वाले लहजे मे बोली। अमर को हँसी आ गई।  


" ठीक है। कल से आ जाना पांच बजे । दो घंटे पढाउंगा। ", अमर ने आराम से कहा।


" दो घंटे !!!!!" 

चारू सांस खींच कर बोली।

अमर ने उसे घूरा तो वो पाउट कर चली गई।


" पागल है पुरी ! बावली छोरी । "





क्रमशः