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नैना कैफेटेरिया मे बैठी थी। उसका सर हल्का घूम रहा था। तबियत कुछ ठीक नही थी। उसने बैग से बॉटल निकाली और पानी पीने लगी।
तभी उसकी नजर चारू पर पडी। जो आज कुछ ज्यादा ही शांत थी।
नैना ने अपना हाथ उठाकर चारू की तरफ वेव किया। चारू ने देखा और हल्के से मुस्कुरा दी। वो सीधा नैना की टेबल पर आकर बैठ गई।
" कैसी है ? " , चारू ने आते ही सवाल किया।
नैना मुस्कुरा दी।
" ठीक हूं ! तू बता । आज मुंह क्यो लटका है मैडम का ? "
चारू ने एक नजर नैना को देखा फिर हल्की आवाज मे बोलना शुरू किया , " मै...अब अमर सर की क्लास नही लुंगी । तुम नोट्स दे दोगी क्या मुझे ?"
नैना हैरान रहो गई।
" क्लास क्यो नही लेना है ? क्या हुआ? "
" यार..हर बार सर के आगे बेइजत्ती कर वा लेती हूं। सब हँसते है यार..! बार बार उनसे टकरा जाती हूं। आज भी आते समय सर से टकरा गई। "
चारू की आवाज रुंध गई।
" उन्होने डांटा बहुत सारा। और सब मुझे देख बाते बना रहे थे और हँस रहे थे । वो इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट वाली करूणा बोल रही थी कि ये हिस्ट्री वालो को चलना तक नही आता। अजीब लगा मुझे । इतना इमबेरेस्ड कभी फील नही हुआ। "
नैना की आंखे नर्म पड गई। उसने चारू के हाथ को अपने हाथ मे ले लिया।
" करूणा ने ताना इस लिए मारा क्योकि वो बस इतना छोटा ही सोच सकती है। उसकी सोच ही मुंग के दाने जितनी है। तू मन छोटा मत कर..! "
" और जो सर ने डांटा...! ", चारू अपना निचला होंठ बाहर निकाल बोली। इस समय वो नन्हे बच्चे जैसे लग रही थी।
उसे देख नैना हँस दी। उसने हाथ बडा कर चारू के गाल खींच दिए।
" मेरी..पंपकीन! कितनी प्यारी लग रही है। ", नैना उसे पुचकारते हुए बोली।
नैना के प्यार भरे शब्दो से चारू खुश हो गई। नैना हँस पडी ।
" चलो क्लास मे । आज पहली क्लास अमर.सर की है। ", कहते कहते वो खडी हो गई।
चारू ने मुंह बना लिया। " आई डोंट इंजॉय स्टडिंग पॉलिटिकल साइंस। वेरी बोरिंग ।"
नैना ना मे गर्दन हिला दी।
" चलो तुम..आओ ! ", उसने टेबल पर दो बार टेप किया। और जाने लगी।
उसने अभी दो कदम आगे बडाए ही थे कि नैना को की आंखे गोल घूम गई। और वो लडखडा गई।
" नैना !! ", चारू ने तेजी से लपकी। उसने नैना को चेयर पर बिठा दिया। नैना ने अपना सिर हाथो मे थाम रखा था।
" क्या हुआ तुझे ? " , चारू चिंता से बोली।
" सर बहुत दुख रहा है यार ! " , नैना बोली।
चारू कु माथे पर बल पड गए। सर दर्द...ये ठीक नही। उसने नैना का सर दबाना शुरू कर दिया।
" तु दवा ले रही है ना नैना ? ! "
नैना चुप।
" नैना !!!", इस बार चारू ने सख्ती से पूछा।
" मै भूल गई। ", नैना दबी आवाज.मे बोली।
चारू ने गहरी सांस भरी मानो अपना गुस्सा शांत कर रही हो।
उसने नैना का बैग लिया और उसमे दवा खंगालने लगी।
" यू डिड नोट ब्रिंग मेड्स टू ! इतनी लापरवाही नैना। "
इस बार चारू उसे डांटने लगी । नैना ने होंठ दबा लिए।
" तू रूक! अभी अमोघ को बताती हूं। बहुत लापरवाही कर रही हो। वो.लडका इस समय रॉयल रिस्पांसीबिल्टी सभांल.रहा है तो तुम को ज्यादा समय नही दे पा रहा। इसका फायदा उठा रही हो तुम। "
कहते हुए चारू ने फोन निकाल लिया।
नैना की आंखे बडी हो गई। वो चारू पर झपटी मगर खडे होते ही एक बार फिर लडखडा गई । वो गिरती की एक हाथ उसकी बांह पर कस गया। नैना ने की सांसे अटक गई ।
अमोघ !
नैना ने आंखे बंद कर ली। उसने गहरी सांस खिंची तौ उसे गीली मिट्टी की खुश्बू अपने अंदर समाती हुई महसूस हुई।
अमोघ आगे आया और उसने नैना को कुर्सी पर बिठा दिया। उसने अपने बैग से नैना की मेड्स निकाली और नैना की तरफ बडा दी।
दवा देख नैना का मुह.बन गया। अमोघ ने पलके उठाकर उसे देखा फिर पलट कर चारू को ।
" ये जरा भी बात नही सुनती दी । ", अमोघ चारू से शिकायती लहजे मे बोला।
चारू कि आंखे सिकुड गई।
" तुमने ही.बिगाडा है इसे। और सर.पर चडाओ। तुम्हारे लाड प्यार ने बिगाड दिया है इस नैना को । "
" मै कोई बिगड़ नही रही हूं। " , नैना तपाक से बोली। फिर अमोघ की तरफ उंगली से इशारा कर बोली, " और ये मुझे बिल्कुल भी प्यार नही करता । "
अमोघ ने एक भवं उठा दी।
ये देख नैना उसे घूरने लगी। , " क्या ! तुम बिल्कुल भी समय नही देते मुझे । ऊपर से अब गुस्सा भी करने लगे हो। और अब यहा मेरे सामने चारू से मेरी ही शिकायत कर रहे हो। "
आमोघ के होंठो पर प्यारी सी मुस्कान आ गई। ये देख नैना हैरान रह गई।
" ये एहमक की तरह क्या मुस्कुरा रहे हो ! क्या हुआ? "
" पहले तो आप मेरा आपके पास होना भी बर्दास्त नही करती थी । और अब आपको समय ना देने पर गुस्सा कर रही । जबकि मै आपके पास ना रह कर भी आपके पास ही.रहता हूं..मैसेज और कॉल्स के थ्रू! "
अमोघ नैना को प्यार से देखने लगा। नैना हडबडा गई। उसके गालो पर हल्की लाली छाने लगी। वो इधर उधर देखने लगी।
चारू जा चुकी थी।
तभी अमोघ ने नैना के गाल पर अपनी दो उंगलिया रखी और उसका चेहरा अपनी तरफ घुमा दिया।
" मैड्स! "
" नो ! "
" जरूरी है। "
" पसंद नही । "
" आपको ठीक होना है नैना । ले लिजिए। "
नैना गहरी सास् छोडी और अमोघ के हाथ से दवा ले कर खाली।
" खुश ! ", वो जबर्दस्ती मुस्कुराते हुए बोली।
" वेरी ! ", अमोघ हँस दिया। वो आगे बडा और उसने नैना का सर सहला दिया।
फिर उसने अपना चेहरा नैना के चेहरे के करीब किया और उसका माथा चूम लिया। नैना ने आंखे बंद कर ली।
" यू आर माई होम । एंड आई एम डिवोटिड टू दिस होम । "
अमोघ ने कहा तो नैना की आंखे नम पड गई।
" क्यो करते ह इतना प्यार ? ", नैना ने सवाल क्या।
" मै प्यार नही करता । "
नैना ने हैरत से अमोघ को देखा। आमोघ गंभीर था।
" तो ? "
" मै प्रेम करता हूं । और प्रेम भक्ति का फल होता है। तो यू आर माई डिवौशन । "
अमोघ ने एक बार फिर नैनी का माथा चूम लिया।
क्रमशः