दी किंग ऑफ अंडरवर्ल्ड - 4 devil द्वारा क्राइम कहानी में हिंदी पीडीएफ

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दी किंग ऑफ अंडरवर्ल्ड - 4


विक्का की मौत ने शिवपुर को हिला दिया।
अब ये सिर्फ गैंगवार नहीं रही थी।
ये संदेश था।
और संदेश साफ था—
“जो भी सामने आएगा… मरेगा।”
सुबह।
शिवपुर के हर न्यूज चैनल पर एक ही खबर चल रही थी।
“राजू भाई के बाद विक्रम यादव की भी हत्या।”
“क्या शहर में नया गैंग उभर रहा है?”
“पुलिस अब तक खाली हाथ।”
लेकिन असली डर टीवी पर नहीं था।
असल डर गलियों में था।
जहाँ लोग धीरे आवाज़ में एक नया नाम बोलने लगे थे—
अर्नब।
पुलिस मुख्यालय।
एसीपी कबीर राठौड़ टेबल पर फैली तस्वीरों को देख रहा था।
राजू भाई।
विक्का।
दोनों की लाशें।
दोनों brutal तरीके से मारे गए।
कमरे में मौजूद इंस्पेक्टर बोला—
“सर… ये आदमी psycho है।”
कबीर ने सिगरेट का लंबा कश लिया।
“नहीं।”
“सर?”
“Psycho बिना वजह मारते हैं।”
उसने विक्का की फोटो उठाई।
“ये आदमी message दे रहा है।”
“मतलब?”
कबीर की नजरें ठंडी हो गईं।
“वो चाहता है लोग डरें…
लेकिन सिर्फ उससे।”
कमरे में खामोशी फैल गई।
तभी एक constable दौड़ता हुआ अंदर आया।
“सर!”
“क्या हुआ?”
“बंदरगाह वाले CCTV में उसका चेहरा मिला है।”
कबीर तुरंत उठा।
स्क्रीन ऑन हुई।
बारिश से धुंधली फुटेज।
काली हुडी पहने अर्नब कुछ सेकंड के लिए कैमरे की तरफ देखता है।
और फिर—
हल्का सा मुस्कुराता है।
वीडियो रुक गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
क्योंकि वो मुस्कान…
किसी भागते अपराधी की नहीं थी।
वो ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे—
उसे पता हो पुलिस उसे देख रही है।
कबीर धीरे से बोला—
“तू चाहता है मैं तुझे ढूँढूँ…”
उसने स्क्रीन को ध्यान से देखा।
“…ठीक है।”
उसी रात।
शिवपुर का बाहरी इलाका।
पुरानी फैक्ट्री।
अंदर कई हथियारबंद आदमी खड़े थे।
बीच में कुर्सी पर बैठा था—
सुल्तान मिर्ज़ा।
उसके सामने टेबल पर विक्का की फोटो रखी थी।
एक आदमी बोला—
“भाई, लड़का पागल है।”
दूसरा बोला—
“इसे जल्दी खत्म करना पड़ेगा।”
सुल्तान चुप रहा।
फिर धीरे से पूछा—
“उसने विक्का को कैसे मारा?”
“घेरकर।”
“मतलब?”
“पहले ऊपर shooters बिठाए…
फिर खुद सामने आया।”
सुल्तान की आँखों में हल्की चमक आई।
“मतलब लड़का सिर्फ खतरनाक नहीं…”
उसने सिगरेट बुझाई।
“…अक्लमंद भी है।”
कमरे में बैठे लोग चुप हो गए।
सुल्तान धीरे से खड़ा हुआ।
“जिस आदमी को मौत का डर नहीं होता…”
उसने खिड़की से बाहर अंधेरे की तरफ देखा।
“…वो या तो बहुत टूटा हुआ होता है।”
उसकी आवाज़ और धीमी हो गई।
“या बहुत खतरनाक।”
उसी समय।
शहर के दूसरी तरफ।
एक सुनसान सड़क।
बारिश के बाद सड़क भीगी हुई थी।
एक काली SUV धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी।
अंदर बैठे थे तीन आदमी।
उनमें से एक फोन पर बोला—
“हाँ… खबर पक्की है। लड़का पुराने मिल एरिया में छुपा है।”
उन्हें नहीं पता था—
कुछ दूरी पर एक बाइक लगातार उनका पीछा कर रही थी।
बाइक पर अर्नब था।
चेहरे पर वही शांत भाव।
उसने धीरे से जैकेट के अंदर हाथ डाला।
पिस्टल निकाली।
SUV एक मोड़ पर मुड़ी।
तभी—
धाँय!!
पीछे का टायर फट गया।
गाड़ी बेकाबू होकर घूमी और डिवाइडर से टकरा गई।
तीनों आदमी घबराकर बाहर निकले।
“कौन है बे?!”
अंधेरे से अर्नब धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ा।
एक आदमी ने गोली चला दी।
धाँय!!
गोली अर्नब के कान के पास से निकल गई।
लेकिन वह रुका नहीं।
दूसरी गोली चलने से पहले ही—
धाँय!!
अर्नब ने उसके सिर में गोली मार दी।
बाकी दो पीछे हट गए।
“रुक! पैसे चाहिए?!”
अर्नब उनके सामने आकर रुका।
“तुम लोग सुल्तान के आदमी हो?”
दोनों चुप।
अर्नब ने एक के पैर में गोली मार दी।
“आआआह्ह!”
दूसरा डर गया।
“हाँ! हाँ! हम सुल्तान भाई के आदमी हैं!”
अर्नब कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
फिर मुस्कुराया।
“अच्छा।”
उसने पिस्टल नीचे कर ली।
दोनों को लगा वो छोड़ देगा।
लेकिन अगले ही पल—
उसने घायल आदमी के सिर में गोली मार दी।
धाँय!!
दूसरा काँपने लगा।
“प… प्लीज…”
अर्नब उसके बिल्कुल पास आया।
“जाकर सुल्तान से कहना…”
उसने उसके हाथ में खून लगी गोली रख दी।
“…शिकार शुरू हो चुका है।”
फिर उसे जिंदा छोड़कर अंधेरे में गायब हो गया।
वो आदमी काँपता हुआ वहीं बैठा रहा।
क्योंकि पहली बार उसे समझ आया—
अर्नब लोगों को सिर्फ मार नहीं रहा था।
वो डर बना रहा था।
और डर…
धीरे-धीरे पूरे शिवपुर पर फैल रहा था।