तेरे मेरे दरमियान - 112 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियान - 112

रागिनी :- तुम सही कह रही हो , पर जानवी वो सब भूल चुकी थी , वो भूल चुकी थी के वो आदित्य से प्यार करने लगी है । जब जानवी आदित्य से प्यार करने लगी तो ये बात उसने सबसे पहले अपने पापा को बताई और फिर वो भागती हूई आदित्य के पास गई ताकी वो आदित्य को दिल की बात बता सके । पर उसका भाग्य तो दैखो , उसी दिन उसका एक्सीडेंट हो जाता है और वो प्यार वाली बात भूल जाती है ।

ये सुनकर सभी कुछ पल के लिए खामोश हो जाती है ।

रागिनी :- अब तुम सब बताओ वो क्या करती ?

तभी आदित्य झट से कहता है --

आदित्य :- रागिनी ... ये ... ये सब तुम्हें कैसे पता ? बताओ रागिनी ।

रागिनी: - आदित्य… तुम्हें सच जानना जरूरी है। सच क्या है तुम्हें पता नही है ।

आदित्य थोड़ा हैरान होकर उसे देखता है।

आदित्य: - क्या हुआ रागिनी…? कौन सा सच ?

रागिनी गहरी साँस लेकर कहती है —

रागिनी: - जानवी… आज यहाँ सिर्फ पार्टी के लिए नहीं आई है…”

आदित्य की आँखें थोड़ी बड़ी हो जाती हैं।

रागिनी: - वो तुमसे प्यार करती है आदित्य .. उसकी याददाश्त भी वापस आ चुकी है… वो दो साल से तुम्हारा इंतजार कर रही है ।

ये सुनते ही आदित्य जैसे जम सा जाता है।

रागिनी (धीरे): - वो यहाँ तुमसे अपना प्यार माँगने आई है…
वो तुम्हें वापस चाहती है…उसे अब ऐसे जाने मत दो आदित्य ...

बस…
इतना सुनना था कि आदित्य की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
उसके चेहरे पर खुशी और दर्द दोनों एक साथ आ जाते हैं।

रागिनी आदित्य को सब बोलकर सुनाती है के जानवी अब भी उससे प्यार करती है उसकी याददाश्त वापस आ चुकी है और वो यहां पर उससे अपना प्यार मांगने के लिए आई है ।



रागिनी से ये सुनकर आदित्य खुश हो जाता है और उसके आंखो से आंशु बहने लगते है । कृतिका , रमेश और रश्मी अपने किए पर पछताने लगता है । 

आदित्य (धीरे, टूटते हुए): - सच…? क्या ... क्या जानवी यहां पर मेरे लिए आई है ?

रागिनी हल्का सा सिर हिलाती है।

पीछे खड़े कृतिका, रमेश और रश्मी ये सब सुन लेते हैं। तीनों के चेहरे पर पछतावा साफ दिखने लगता है।

उधर आदित्य अब और नहीं रुक पाता।

आदित्य (घबराहट में): - वो कहाँ है…? जानवी कहाँ है…?”

वो बिना किसी का जवाब सुने…भागते हुए हॉल के अंदर चला जाता है।

आदित्य वहां से भागते हूए जानवी की और जाने लगता है और उसको पिछे - पिछे बाकी सब । आदित्य जानवी को हर जगह ढुडने लगता है पर जानवी कही नही होती । 
आदित्य हर जगह उसे ढूँढ रहा था —डांस फ्लोर , गार्डन , एंट्री गेट
पार्किंग 

आदित्य (बेचैनी में): - जानवी…! जानवी…!!

उसकी आवाज़ में डर साफ था। पीछे-पीछे रागिनी, कृतिका, रमेश, रश्मी और बाकी दोस्त भी आ जाते हैं।

रागिनी: - कहीं यहाँ तो नहीं…?”

सब लोग अलग-अलग जगह पर उसे ढूँढने लगते हैं…
पर…जानवी कहीं नहीं मिलती।

आदित्य अब पूरी तरह परेशान हो जाता है।

आदित्य (घबराकर): - नहीं… वो यहीं थी… अभी यहीं थी…वो कही नही जा सकती । म.... मेरी जानवी यही कही होगी ।

तभी कृतिका धीरे-धीरे आगे आती है। उसकी आँखों में आँसू थे।

कृतिका (कंपती आवाज़ में) :- आदित्य… वो… चली गई…”

आदित्य चौंक जाता है।

आदित्य: - क्या मतलब ली गई…? क्यों…?”

रमेश सिर झुका लेता है।

रमेश: - हमने… उसे बहुत कुछ कह दिया…”

रश्मी (रोते हुए): - हमने उसे गलत समझा…और उसे यहाँ से जाने को कह दिया…”

ये सुनते ही आदित्य का चेहरा बदल जाता है। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं…बस गहरा दर्द था।

आदित्य (टूटते हुए): - ये क्या कर दिया तुम लोगो ने ... तुम लोगों ने… उसे जाने दिया…?

वो एक पल के लिए आँखें बंद करता है…जैसे खुद को संभालने की कोशिश कर रहा हो।

आदित्य: - वो… मुझे ढूँढने आई थी…और मैं… उसे फिर खो बैठा…”

उसकी आवाज़ भर जाती है।

रागिनी: - आदित्य… अभी भी देर नहीं हुई है…”

बस इतना सुनना था…आदित्य तुरंत मुड़ता है…

आदित्य: - नहीं… इस बार नहीं…इस बार मैं उसे खोने नहीं दूँगा…”

और वो भागते हुए बाहर निकल जाता है। तभी बारिश की हल्की बूंदें शुरू हो जाती हैं…आदित्य इधर-उधर दौड़ रहा था…

आदित्य (चिल्लाते हुए): - “जानवी…!!!”

उसकी आवाज़ में डर था… प्यार था… और खोने का दर्द भी।
बाकी सब भी पीछे-पीछे भागते हैं…इस बार… कहानी उस मोड़ पर थी…जहाँ एक गलती… सब कुछ फिर से छीन सकती थी…

आदित्य परेशान हो जाता है बाकी सभी भी आदित्य के पास आता है जाता है ।

रात गहरी हो चुकी थी…हल्की-हल्की बारिश अब तेज़ होने लगी थी…
सड़क की लाइट्स के नीचे…
पानी की बूंदें चमक रही थीं…आदित्य पागलों की तरह इधर-उधर दौड़ रहा था…

आदित्य (चिल्लाते हुए): - जानवी…!!! जानवी… प्लीज़ सामने आ जाओ…”

उसकी आवाज़ टूट रही थी…सांसें तेज़… आँखों में डर…
वो हर रास्ते पर देखता है…हर मोड़ पर रुकता है…
पर जानवी कहीं नहीं दिखती…

आदित्य (धीरे, खुद से): - नहीं… इस बार नहीं…मैं तुम्हें फिर नहीं खो सकता जानवी…”

तभी…थोड़ी दूर…एक स्ट्रीट लाइट के नीचे…एक लड़की खड़ी दिखाई देती है…बारिश में भीगी हुई…चुप… अकेली…

आदित्य की नज़र उस पर पड़ती है…उसका दिल एक पल के लिए रुक जाता है…

“जानवी…”

वो तुरंत उसकी तरफ दौड़ता है…
जानवी वहीं खड़ी थी…उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे…
जो बारिश में छुप गए थे…जैसे ही आदित्य उसके पास पहुँचता है…
वो हाँफते हुए रुकता है…

आदित्य (टूटती आवाज़ में): - जानवी ...तुम… यहाँ हो…
मैं… मैं तुम्हें हर जगह ढूँढ रहा था…”
जानवी उसकी तरफ देखती है…उसकी आँखों में दर्द था…

जानवी: - क्यों…? फिर से खोने के लिए…? या अब भी कुछ और कहना बाकी है , तो लो मैं यही पर हूँ , तुम भी निकाल लो अपनी भड़ास ....

ये सुनकर आदित्य चुप हो जाता है।

जानवी (आँखों में आँसू): - जब मैं तुम्हारे पास आई थी…
तब तुम्हारे अपने लोगों ने मुझे ही दूर कर दिया… मुझे कुछ कहने का मौका तक नही दिया ।

कुछ पल की खामोशी…सिर्फ बारिश की आवाज़…

जानवी (धीरे): - मैं दो साल बाद हिम्मत करके आई थी आदित्य…
तुमसे अपना प्यार माँगने…
आदित्य की आँखों में आँसू आ जाते हैं।

जानवी: - पर शायद… मैं फिर लेट हो गई… मुझे लगा था शायद इस बार मैं अपने आदित्य को पा लूगीं । पर शायद इस बार मैं गलत थी ।
इतना बोलतर वो मुड़ने लगती है…

तभी…आदित्य उसका हाथ पकड़ लेता है।


क्लाइमेक्स मोमेंट

आदित्य (रोते हुए): - “बस… बहुत हो गया जानवी… कहां जा रही हो मुझे छोड़कर ? अपने आदित्य से अब भी गुस्सा हो क्या ?

आदित्य से इतना सुमकर जानवी रुक जाती है…

आदित्य: - हर बार हम चुप रहे…हर बार हम दूर हो गए…

वो उसकी तरफ मुड़ता है…

आदित्य: - पर इस बार नहीं…

उसकी आवाज़ में मजबूती थी… दोनो वही पर बैठ जाता है और कुछ दैर ऐसे ही खामोश रहता है । 

थोड़ी सी खामोशी के बाद…आदित्य हल्की मुस्कान के साथ बात शुरू करता है —

आदित्य: - तो… कैसी हो?”

जानवी उसकी तरफ देखती है…उसकी आँखों में इस बार दर्द नहीं… एक सुकून था।

जानवी (हल्के नाराजगी में): - दिख नहीं रहा…? दो साल में थोड़ी सी ठीक हो गई हूँ…”

आदित्य हंस देता है।

आदित्य: - हाँ… दिख रहा है…पहले से ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो गई हो।”

जानवी धीरे से कहती है —


जानवी :- मजबूरी थी…”

दोनों कुछ पल के लिए चुप हो जाते हैं। फिर आदित्य थोड़ा झिझकते हुए पूछता है —

आदित्य: - और… तुम्हारी शादी…?

यह सुनकर जानवी हल्का सा मुस्कुरा देती है।

जानवी (शरारती अंदाज़ में): - क्यों…? तुम्हें क्या लगता है… हो गई होगी?

आदित्य थोड़ा नजरें चुराते हुए कहता है —

आदित्य: - मुझे लगा…इतनी खूबसूरत और सफल लड़की… शायद किसी ने… अपने नाम कर ली होगी…”

जानवी उसकी आँखों में देखती है।

जानवी (धीरे): - नहीं…किसी ने हिम्मत ही नहीं की…”

आदित्य हल्का सा मुस्कुराता है —

आदित्य :- अच्छा…?

जानवी थोड़ा करीब आकर कहती है —

जानवी: - क्योंकि… मेरा दिल तो पहले ही…किसी के पास था…”

आदित्य की साँस थोड़ी थम जाती है। अब जानवी पूछती है —

जानवी: - और तुम…? तुमने शादी की…?”

आदित्य हल्का सा सिर हिलाता है —

आदित्य: - नहीं…”

जानवी: - “क्यों…?”

आदित्य उसकी आँखों में देखते हुए कहता है —

आदित्य: - क्योंकि… जिससे करनी थी… वो साथ नहीं थी…”

ये सुनकर जानवी की आँखें भर जाती हैं। दोनों कुछ पल तक एक-दूसरे को देखते रहते हैं।
अब कोई झिझक नहीं थी…कोई गलतफहमी नहीं थी ।

जानवी रोती हूई आदित्य के पास आती है और कहती है --

जानवी :- एक बात पूछनी थी , क्या सच सच बताओगे ।

आदित्य :- हम्म ।

जानवी :- मेरे साथ आज तक जो कुछ भी हूआ है , वो किडनेपिंग और वो एसिड अटेक , इसमे तुम्हारा कोई हाथ था क्या ?

आदित्य : - नही ।

आदित्य के मुह से नही सुनकर जानवी को अपने आप पर बहोत 

गुस्सा आने लगता है , जानवी फूट फूट कर रोने लगी थी । जानवी समझ जाती है के उसने आदित्य के साथ कितना गलत किया है और उसे कितना परेशान किया है । 

जानवी आदित्य की और एक टक नजरो से दैखती रहती है आदित्य जानवी से पूछता है --

आदित्य :- क्या दैख रही हो जानवी ?

To be continue....1070