तेरे मेरे दरमियान - 111 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियान - 111

रश्मी :- पर इन दो सालो मे क्या हमारी एक बार भी याद नही आई ..?

आदित्य :- आई ... बहुत याद आई । 

आदित्य जानवी की और दैखकर कहता है --

आदित्य :- मैं कैसे बताउ के एक - एक दिन मैने कैसे गुजारे ।

जानवी समझ जाती है के ये बात उसी के लिए है । तभी वहां पर रागिनी आती है और आदित्य को गले लगाकर उसे अंदर लेकर चली जाती है ।

जानवी (धीरे): - शायद… कुछ लोगों को फर्क पड़ता है…
पर उन्हें समझने में देर हो जाती है…”

आदित्य हल्का सा हंसता है…और वहां से चला जाता है पर उसकी आँखों में दर्द साफ था।

शाम का समय था , सभी एक जगह पर बैठे थे , पार्टी चल रही थी और जानवी और आदित्य एक दुसरे से दुर एक दुसरे को दैख रहे थे । दोनो के दिल मे एक दुसरे के लिए प्यार अब भी बेशुमार है पर दोनो ही एक दुसरे से बाते नही कर पा रहे थे ।

ये दो साल की दुरी जैसे दोनो को एक दुसरे से बहुत दुर कर दिया हो , ना ही जानवी आदित्य के पास जा पा रही थी और ना ही आदित्य । 
आदित्य जानवी को दैखकर मायुस हो जाता है और उसो पुराने दिन याद आने लगते है । आदित्य परेशान होकर वहां से दुसरी और चली जाता है । आदित्य को परेशान दैखकर कृतिका और बाकी सभी जानवी पर गुस्सा होने लगती है ।

तभी कृतिका जानवी को दैखकर कहती है --

कृतिका :- वो दैखो मेडम यहां पर पहूँच गई , उसे पता था के रागिनी के शादी मे आदित्य जरुर आएगा फिर भी वो यहां पर आ गई सिर्फ आदित्य को निचा दिखाने के लिए । 

रमेश :- पर वो अकेली आई है , क्या उसने अभी तक शादी नही की ?

कृतिका: - किया होगा किसीसे , हमे उससे क्या !

ये सुनकर आदित्य के मन मे एक सवाल पैदा होता है --

आदित्य ( मन मे ) :- क्या सच मे जानवी ने अभी तक शादी नही की , पर क्यों ? शायद विकास के लिए ... क्योंकि विकास ने उसे धोका दिया था ।

रागिनी जानवी के पास आती है और कहती है --

रागिनी :- जानवी ... वो दैखो तुम्हारा प्यार , तुमसे बस कुछ कदम दुर है , जाओ और उससे बात करो । कह दो अपनी दिल की बात जानवी । जाओ जानवी जाओ ।

रागिनी की बात पर जानवी आदित्य की और दैखती है और फिर हिम्मत जुटाकर जानवी अपना कदम आदित्य की और बड़ाने लगती है । आदित्य भी जानवी को ही दैख रहा था । जैसे - जैसे जानवी ते कदम आदित्य की और बड़ता है दोनो ती दिल धड़कने लगता है ।

आदित्य को लगता है के जानवी फिर से उससे कुछ कहेगा , या झगड़ा करेगा , इसिलिए जैसे ही जानवी आदित्य के पास आकर चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए और अपने हाथ के उंगलियों से अपने कपड़े पर घुमाती हूई जानवी आदित्य के सीमने खड़ी होती है दोनो की दिल की धड़कन तोज होने लगता है ।

जानवी आदित्य से बहुत कुछ कहना चाहती थी पर कहां से सुरु करे ये समझ मे नही आ रहा था । 

जानवी ( मन मे ) :- आदित्य. .. आज मैं तुम्हें अपने दिल की सारी बात बता दुगीं । इन दो सालो मे मैं भी बहुत तड़पी हूँ तुम्हारे लिए ।

आदित्य ( मन मे ) :- दो साल ... दो साल हो गए जानवी , पर मैं आज भी तुम्हें भुला नही पाया हूँ । आज जब तुम मेरे सामने हो तो ऐसा लग रहा है के ये दो तो बस ऐसे ही निकल गए । मैं तुमसे आज भी उतना ही प्यार करता हूँ जानवी , पर मैं जानता हूँ के तुम मुझसे कभी प्यार किया ही नही । तुम मुझसे शायद यही कहने आई होगी के मैं यहां पर क्यों हूँ । क्योंकी मेरा यहां पर आना तुम्हें पंसद नही आया होगा । यही कहना चाहती हो ना तुम , यही कहने के लिए मेरे पास आई हो ना ? ठिक है मैं आज भी तु्हें निराश नही करुगां । मैं ही तला जाता हूँ यहां से ।

जानवी आदित्य से कुछ कहती उससे पहले आदित्य वहां से मायुस होकर चला जाता है । जानवी ये दैखकर मायुस हो जाती है और आंखो से आंशु बहने लगते है मन ही मन कहती है ---

जानवी ( मन मे ) :- लगता है आदित्य मुझसे नाराज है , मैने शायद उसे हमेशा के लिए खो दिया है ।

आदित्य के आंखो मे आंशु था और वो एक तरफ जाकर अकेले मे खड़ा हो जाता है । आदित्य को रोते हूए दैखकर कृतिका , रमेश और रश्मी को जानवी पर गुस्सा आने लगता है तब कृतिका और बाकी सभी जानवी के पास जाती है तो जानवी उन सबको दैखकर हल्की मुस्कान दैकर शांत भाव से कहती है --

जानवी :- हाय कृतिका , रमेश , रश्मी कैसे हो तुम सब ?

कृतिका ( गुस्सा होकर ) :- हम सब तो बहुत अच्छे है पर शायद तुम हमे अच्छा रहने नही देना चाहती हो ।

जानवी ( हैरानी से ) :- क्या ..? पर मैने क्या किया ?

रमेश :- तुम्हें पता था के आदित्य भी यहां पर आएगा तो तुम्हें यहां पर आने की क्या जरुरत थी ।

जानवी :- पर मैं आदित्य से ....

कृतिका जानवी की बात को बीच मे ही काटकर कहती है --

कृतिका :- तुम्हें तो बड़ा मजा आता है आदित्य को दुख देने मे , पहले ही तुमने उसको साथ बहुत गलत किया है उसकी Life से चैन, सुकुन सब कुछ तो छिन लिया तुमने , अब क्या छीनने आई हो ?

जानवी का चेहरा उतर जाता है ।

जानवी :- मैं ऐसा कुछ भी नही चाहती , मेरा विश्वास करो ।

रमेश ( हंसते हूए ) :- विश्वास. .. और तुम्हारा ?

कृतिका :- जानवी हम सब तुमसे हाथ जोड़ते है , आदित्य के Life से चली जाओ , उसे और परेशान मत करो , प्लिज हम सब तुम्हारे आगे हाथ जोड़ते है । उसे जीने दो , उसकी जिंदगी को बर्बाद मत करो जानवी ।

कृतिका से इतना सुनकर जानवी के आंखो से आंशु निकल आते है वो आदित्य की और एक आशा भरी निगाहो से दैखती है पर आदित्य अपना मुह फेर लेता है , जानवी समझ जाती है के अब आदित्य के दिल मे शायद उसके लिए कोई जगह बची ही नही है ।

कृतिका :- जानवी ... तुम यहां से चली जाओ और फिर कभी भी तुम आदित्य के करीब मत आना , तुमसे हाथ तौड़कर विनती है हमारी ।

जानवी आदित्य की और देखती है और हां मे सर हिलाकर वहां से चली जाती है ।

रागिनी ये सब दैख रही थी तभी वहां पर रागिनी आ जाती है और कहती है --

रागिनी :- अरे आदित्य क्या बात है तुम कुछ परेशान लग रहे हो ?

कृतिका :- रागिनी ... तुमने उस जानवी को यहां पर क्यों बुलाया ?

रागिनी :- क्यों ? कुछ परेशानी है क्या और तुम लोगो ने जानवी से ऐसा क्या कहा के वो अंदर चली गई ?

कृतिका :- तुम सब जानती हो फिर भी तुमने उसे बुलाया ।

रागिनी :- मैं जानती हूँ ।

रमेश :- जानती हो फिर भी तुमने उसे बुलाया ? आदित्य को उसके वजह से कितना कुछ सहना पड़ा है , पर फिर भी तुम ... हमे उसे दैखकर ही गुस्सा आ रहा है ।

आदित्य :- its okay guys. ... रागिनी का दोस्त है वो । 

रागिनी :- तुम्हें क्या लगता है उसने जो कुछ भी किया वो उसने जानबूझ कर किया था । ये मत भूलो के उसकी याददाश्त चली गई थी और एक याददाश्त जाने वाली लड़की क्या करती । उसे तो सिर्फ कुछ ही चिजे याद था , तो वो क्या करती । 

आदित्य हैरान होकर रागिनी की बातो को सुन रहा था तभी कृतिता कहती है --

कृतिका: - तुम कहना क्या चाहती हो ? क्या उसने आदित्य को दुख नही पहूँचाया ?

रागिनी :- मैं नही कह रही हूँ के उसने आदित्य को दुख नही पहूँया है , पर उसने जो किया एक बार उसके जगह पर रहकर सौचो । अगर कृतिका तु्म उसकी जगह पर होती तो तुम क्या करती । क्या तुम ऐसे किसी भी इंसान पर भरोसा कर लेती जिसे तुम ठिक से जानती नही हो ?


रश्मी :- पर जानवी तो आदित्य को काफी समय से जानती थी ?

रागिनी :- तुम सही कह रही हो , पर जानवी वो सब भूल चुकी थी , वो भूल चुकी थी के वो आदित्य से प्यार करने लगी है । जब जानवी आदित्य से प्यार करने लगी तो ये बात उसने सबसे पहले अपने पापा को बताई और फिर वो भागती हूई आदित्य के पास गई ताकी वो आदित्य को दिल की बात बता सके । पर उसका भाग्य तो दैखो , उसी दिन उसका एक्सीडेंट हो जाता है और वो प्यार वाली बात भूल जाती है ।

To be continue....1056