Hero - 9 Ram Make द्वारा रोमांचक कहानियाँ में हिंदी पीडीएफ

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Hero - 9



अंकित अपनी 100% शक्ति का इस्तेमाल करके जतिन को कहीं मौत के घाट न उतार दे। फ़िर अंकित अपने स्पिरिट मोड में बदल जाता है। जिससे उसका पूरा शरीर नीली आग से जलने लग जाता है। फिर अंकित अपने शरीर में शक्ति का बहुत बड़ा विस्फोट करता है।

जिससे उसकी शक्ति आप चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। फिर अंकित का शरीर एक आत्मा की तरह हवा में उड़ने लग जाता है। और उस शक्तिशाली मुक्के को जतिन की तरफ बढ़ा देता है। अपनी तरफ से इस तरह के हमले को बढ़ते हुए देखकर जतिन अपने हाथों से उस हमले से बचने के लिए एक्स बनाता है। जिससे अंकित का वह मुक्का जतिन के दोनों हाथों के बीचोबीच में लगता है। वह हमला इतना खतरनाक था। कि उस हमले से उस जगह की जमीन हिल गई थी। और चारों तरफ धूल उड़ गई थी। और वह मुक्का जैसे ही जतिन के हाथों पर लगता है। वहां पर एक बहुत बड़ा विस्फोट हो जाता है। जतिन उस विस्फ़ोट में से उड़ते हुए जाकर जमीन पर गिरता है। अंकित के इस तरह के हमले से जतिन तकरीबन 200 मीटर दूर जाकर गिर जाता है। जिससे जतिन के fire armor के दोनों हाथ टूट जाते हैं


। जतिन का दाया हाथ आगे होने की वजह से जतिन के दाएं हाथ की हड्डी टूट गई और मांस फट जाता है। इस तरह के हमले से जतिन जोर जोर से करा रहा था। उस हमले से जतिन का पूरा शरीर सुन पड़ जाता है। जतिन जब-जब चिल्लाता तो उसके मुंह से खून बहता। फिर अंकित अपने स्पिरिट मोड में उड़ते हुए जतिन के पास आता है। और जतिन से कहता है। "मेरे इतने खतरनाक हमले से तुम कैसे बच गए। मैंने सोचा कि अब तक तो तुम मर गए होगे।" अपने मुंह से खून थूकते हुए जतिन कहता है। "अंकित तुम मुझसे किस जन्म का बदला ले रहे हो।" जिस पर अंकित कहता है। "मैं तो तुम्हारे साथ प्रैक्टिस कर रहा हूं।" फिर जतिन कहता है। "अगर यह प्रैक्टिस होती तो तुम मुझ पर इस तरह का हमला नहीं करते।" जिस पर अंकित कहता है। "सच में बहुत तेज दिमाग है तेरा। प्रैक्टिस तो एक बहाना था। तुझे मौत के घाट उतारना ही मेरा काम था।" जिस पर जतिन पूछता है। "तुम हमें क्यों मारना चाहते हो।" जिस पर अंकित कहता हैं

। "देखो सिंपल सी बात है। अगर मैं तुम्हें मार सकता हूं। तो मैं उस मैजिकल बिष्ट को आसानी से मार सकता हूं। वैसे आज तक मैं जितना से लड़ा हूं। उनमें से तुम सबसे अलग हो। मुझे यह नहीं पता कि तुम इतने ज्यादा ताकतवर कैसे हो। और तुमने अभी तक स्टेज 1 को पार तक नहीं किया। फिर भी तुम मेरे इतने खतरनाक हमले से बच गए। लेकिन तुम्हारी हालत बिलकुल मरने जैसी हो चुकी है। क्यों ना तुम्हारे इस हालत को मैं सच कर दूं।" जिस पर जतिन अपने मुंह से खून थूकते हुए कहता है। "तुम्हारा यह सपना तुम्हारा सपना ही रहेगा।" फिर जतिन पानी के गुब्बारे की तरह फूट जाता है। जतिन को ऐसे फुटता देखकर अंकित कहता है। "सही कहा मेरा सपना मेरा सपना ही रह गया तुम ने खुदकुशी कर ली।" अंकित को इतना कहने के बाद भी पानी की बूंदे दोबारा से एक आकृति का निर्माण करती है।


जो कि एक इंसान की तरह होती है। और जब वह आकृति पूरी हो जाती है। तो वह आकृति किसी और की नहीं ख़ुद जतिन की होती है। जतिन अब पहले से ज्यादा ठीक होता है। उसकी टूटी हुई हड्डी दोबारा से जुड़ चुकी होती है। और उसका fire armor भी बिल्कुल पूरी तरह से ठीक हो चुका था। जतिन को देखते हुए अंकित हैरान होती हुए कहता है। "तुम्हारे पास water एबिलिटी भी है।" जिसपे जतिन कहता है। "यह तो बस शुरुआत है।" इतना कहने के बाद जतिन अपने fire armor को हटाता है। और बैंगनी कलर की flame मे जलने लग जाता है। जिस पर अंकित पूछता है। "यह किस तरह की flame है।" अंकित का सवाल सुनकर जतिन कहता है। 


"यह वह फ्लैम है। जिसे सब लोग पाना तो चाहते हैं। पर किसी के पास होती नहीं।" जिस पर अंकित पूछता है। "मतलब।" फिर जतिन कहता है। "मतलब गया भाड़ में। मैंने तुम्हें अपने एक दोस्त की तरह माना। और तुम मेरी ही जान के पीछे पड़े हो। क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।" फिर अंकित जतिन की बात सुनकर हँसता और कहता है। "छोड़ना तो दूर की बात है। पहले पकड़ तो लो।" जिस पर जतिन कहता है। "चलो तुम्हारा यह अहंकार भी तोड़ता हूं।" फिर जतिन अपनी बैंगनी आग को बढ़ाकर अंकित के ऊपर हमला कर देता है। जिस पर अंकित अपने बचाव में कुछ नहीं करता। वह बस ऐसे ही हवा में  तेरता रहता है। फिर जतिन का मुक्का अंकित के शरीर से आरपार चला जाता है। अपने ऊपर किसी भी तरह के कोई भी नुकसान को ना देख कर अंकित हँसता है।


और कहता है। "क्यों emperor क्या हुआ?" फ़िर पर अंकित को भी पता चल जाता है। कि जतिन के शरीर में स्काय फ्लेम हैं। जिससे अंकित उससे sky flame को अपनी स्पिरिट फ्लेम से मिलाना चाहता है। लेकिन इतना सोचने के बाद अंकित के मुंह से उसकी हंसी तुरंत गायब हो जाती है। इसके दूसरी तरफ जतिन के मुंह पर एक कातिलाना मुस्कान होती है। तभी अंकित कहता है। "यह मेरे शरीर के साथ क्या हो रहा है।" अंकित गुस्से में जतिन से पूछता है। तुमने मेरे शरीर के साथ क्या किया। फिर जतिन अंकित से पूछता है। "तुम्हें stage-1 से stage-2 के लेवल 3 पर पहुंचने में कितना समय लगा।" जिस पर अंकित कहता है। "मुझे यहां तक पहुंचने में ढाई साल लगे।" फिर जतिन मुस्कुराते हुए अंकित से कहता है। "तुम्हारी ढाई साल की मेहनत मात्र 2 मिनट के अंदर खत्म हो गई।


" जिस पर अंकित पूछता है। "मतलब।" तभी जतिन अपने शरीर से बैंगनी आग को हटाकर अपने शरीर के ऊपर स्काय फ्लैम को बुला लेता है। जतिन के स्काई फ्लैम के बुलाने के तुरंत बाद अंकित की स्पिरिट फ्लेम जतिन के शरीर में समाने लगती है। इस स्थिति को देखकर अंकित बार-बार अपनी शक्तियों में विस्फोट कर रहा था। लेकिन वह जितनी ज्यादा अपनी शक्तियों को बढ़ाता उसकी शक्तियाँ उतनी ही तेजी से जतिन के शरीर में समा रही थी। जिसके कारण अंकित के शरीर में ऊर्जा की कमी हो रही थी। उसे थकान महसूस होने लग रही थी। धीरे-धीरे करके वह अपने आप अपने स्पिरिट मोड से बाहर आ रहा था। जिसे देखकर अंकित बिल्कुल डर गया था। लेकिन फिर भी अंकित गुस्से में जतिन से पूछता है। 


"तुमने मेरे शरीर के साथ क्या किया?" जिस पर जतिन कहता है। "मैंने कुछ नहीं किया मेरा शरीर अपने आप तुम्हारी शक्तियों को खींच रहा है।" फ़िर इतना कहकर जतिन हँसने लग गया। फिर अंकित का लेवल धीरे-धीरे कम होने लग गया। जिससे वह एक stage-2 के लेवल 3 के इंसान से stage 1 के लेवल 3 का इंसान बन गया था। अब वह आपने स्पिरिट मोड से बिल्कुल बाहर आ गया था। अंकित अपने स्पिरिट मोड से बाहर आने के बाद तुरंत अपने घुटनों के बल जमीन पर गिर जाता है। अंकित के शरीर में उर्जा का एक कण तक भी नहीं बचा था। तभी जतिन के दिमाग में एक अनाउंसमेंट प्ले होती है।

"sky spirit flame प्राप्त हुई।"

जिसे सुनकर जतिन बहुत खुश होता है। फिर जतिन जैसे ही अपनी स्काई फ्लैम से बाहर आता है। तो उसे भी अपने शरीर के अंदर एक भारी मात्रा में थकान महसूस हो रही थी। फिर जतिन अंकित के बगल में बैठता है। और कहता है। "तो अब बताओ अंकित स्पिरिट शेल्टर का असली मालिक कौन है।" जिस पर अंकित कहता है। 


"तुम बहुत घटिया इंसान हो।" जिसके जवाब में जतिन कहता है। "वह तो मुझे मालूम है। कुछ नया बताओ।" जतिन के बाद सुनकर अंकित कहता है। "कमीने।" फिर जतिन हँसते हुए कहता हैं। "हां यह कुछ नया है।" इतना कहने के बाद जतिन अंकित को उसकी गर्दन के पीछे से पकड़ता है। और अपने साथ उठाता है। फिर जतिन अंकित को विनय और अरुण के पास लेकर जाता है। विनय और अरुण इस बात से चिंतित थे। कि कहीं जतिन के साथ कुछ बुरा ना हो जाए। लेकिन तभी उनकी नजर जतिन की तरफ जाती है। जो कि उनकी तरफ आ रहा था। वह भी अकेला नहीं अंकित को साथ लेकर। और जतिन अंकित को उसकी गर्दन से पकड़ कर ला रहा था। जब जतिन अरुण और विनय के पास आ जाता है। तो वह अंकित को उन दोनों के बगल में फेंक देता है। जिस पर विनय जतिन से पूछता है।


"emperor क्या हुआ?" जिस पर जतिन उन दोनों को सारी बात बताता है। जिस पर विनय भी अंकित की तरफ देखते हुए कहता है। "धोखेबाज।" लेकिन तभी अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन तुमने इसे अब तक जिंदा क्यों रख रखा है।" जिस पर जतिन कहता है। "इसको इसी के शेल्टर में मारूंगा।" लेकिन तभी जतिन अंकित के बाल पकड़कर उसकी गर्दन को ऊपर करता है। और उससे पूछता है। "क्या तुम्हें यह पता है कि काल मंदिर का पांचवा काल रक्षक कौन है?" जिसके जवाब में अंकित कहता है। "मैं पिछले 3 महीने से काल मंदिर में नहीं गया हूं।" अंकित की बात सुनकर जतिन कहता है। "काल मंदिर का पांचवा रक्षक में हूं।"


जिसे सुनकर अंकित के होश उड़ जाते हैं। और जतिन से कहता है। "तुम मजाक कर रहे हो है ना।" जिस पर जतिन कहता है। "तुम ना ही कोई लड़की हो। और ना ही मेरे कोई दोस्त। तो मैं तुम्हारे साथ मजाक क्यों करूंगा। और हां एक और बात और मैं काल सेना का सेनापति भी हूं।" जिसे सुनकर अंकित के पैरों तले की जमीन खिसक जाती है। तभी विनय और अरुण भी कहते हैं। "हां यह बिल्कुल सही कह रहा है।" इसे सुनकर अंकित अब अपने मन ही मन अपने आप को कोस रहा था। "कि आज ही मैं इन काले कोवो का शिकार करने क्यों आया। अगर आया भी तो मैंने इसके साथ पंगा क्यों लिया।" तभी अरुण कहता है। "जतिन चलो स्पिरिट शेल्टर चलते हैं।" फिर जतिन अरुण और विनय से कहता है। 


"अभी नहीं।" "पहले हम जो काम करने आए हैं। वो कर लेते हैं।" जिस पर विनय और अरुण दोनों हां मैं अपनी गर्दन हिलाते हैं। जतिन काले कौवे की तरफ चलना शुरू कर देता है। उनके पास जाकर जतिन अपनी फायर फ्लेम का इस्तेमाल करके। एक-एक करके काले कौवा को मारना शुरू कर देता है। जतिन को इस तरह से काले कोवो को मारता देखकर विनय कहता है। "emperor के लिए अब इन काले कोवो को मारना अब बच्चों के खेल की तरह हो गया है।" विनय के इतना कहने के तुरंत बाद एक काला कौवा जतिन के कंधे पर अपनी चोच मार देता है। जिससे जतिन को उस कंधे में बहुत दर्द होता है। जतिन के उस कंधे से उसका मांस अलग दिख रहा था। अंकित भी इस दृश्य को देख रहा था। 


जिसे देखकर अब अंकित हँसने लग गया था। तभी विनय अंकित से पूछता है। "तुम क्यों हंस रहे हो?" विनय की बात सुनकर अंकित कहता है। "अब तो तुम्हारे emperor की मौत तो तय है।" जिस पर विनय पूछता है। "तुम इतने यकीन से कैसे कह सकते हो।" जिस पर अंकित कहता है। "तुम्हारे emperor को एक लेवल 3 के काले कौवे ने चोच मार दी। उस कौवे की चोच में जहर होता है। और वो जहर एक सुपर स्पिरिट को आसानी से मार सकता है। तो तुम्हारा emperor किस खेत की मूली है।"


"उस कौवे की चोच में जहर होता है। और वो जहर एक सुपर स्पिरिट को आसानी से मार सकता है। तो तुम्हारा emperor किस खेत की मूली है।" विनय को इतना कहने के तुरंत बाद जतिन का वह घाव नीला पड़ना शुरू हो जाता है। जतिन को उस समय तक अपने शरीर के अंदर कुछ भी अजीबोगरीब महसूस नहीं हो रहा था। कुछ समय बाद जतिन का पूरा शरीर नीला पड़ना शुरू हो गया। फ़िर जतिन को चक्कर आने शुरू हो जाते है। जिस कारण जतिन के हमले भी सही जगह पर नहीं लग रहे थे। जतिन को इस हालत में देखकर अरुण अपनी विंड फ्लैम को बुलाता है। और फिर जल्दी से जतिन को उन काले कोवो के बीच में से बाहर लेकर आता है। और पास के एक पेड़ के नीचे लेटा देता है। फिर विनय अंकित से पूछता है। "जहर को शरीर से कैसे निकाला जाए।"


जिसके जवाब में अंकित कहता है। "मुझे नहीं पता।" फिर विनय अपनी विंड फ्लैम को अपने हाथ पे बुलाके अंकित की गर्दन को पकड़ लेता है। और फिर अंकित से दोबारा से बेरहम आवाज में पूछता है। "इस जहर को शरीर से कैसे निकाला जाता है।" अंकित विनय के इस रूप को देखकर थोड़ा डर गया था। लेकिन फिर अंकित अपनी हिम्मत जुटा कर कहता हैं। "मैं तुम्हें इस जहर के तोड़ के बारे में तब बताऊंगा। जब तुम मुझे यहां से जाने दोगे।" जिस पर विनय कहता है। "जल्दी बताओ वरना जान से जाओगे।" फिर अंकित कहता है। "मुझसे वादा करो कि तुम मुझे यहां से जाने दोगे।" तभी अरुण अंकित के पास जाता हैं। और गुस्से से कहता है। "ठीक है।" "मैं तुमसे वादा करता हूं। कि मैं तुम्हे यहां से जाने दूंगा। लेकिन अगर जतिन ठीक नहीं हुआ। तो मैं तुम्हारे प्राण तुम्हारे शरीर से निकालने में एक पल भी नहीं सोचुगा।" अरुण की इस तरह की बात सुनकर अंकित को अपनी रीड की हड्डी में ठंडक महसूस हो रही थी। तभी अंकित कहता है। "जितना मुझे पता है। उस हिसाब से हमें जतिन के घाव को सबसे पहले साफ पानी से धोना होगा।


और फिर हमें तकरीबन 10 से 12 अरंडी के बीजों को पीसकर जतिन के घाव पर लगाना होगा।" अंकित की बात सुनकर विनय कहता है। "अरंडी के बीजों में तो खुद ही जहर होता है।" जिस पर अंकित कहता है। "मुझे पता है। लेकिन इन काले कोवो के जहर से बचने का यही एकमात्र उपाय है।" जिस पर विनय अरुण से कहता है। "अरुण तुम कहीं से जल्दी से साफ पानी का इंतजाम करो। तब तक मैं 10-12 अरंडी के बीज लेकर आता हूं।" जिसके जवाब में अरुण कहता है। "ठीक है।" फिर अरुण अंकित की तरफ देखते हुए कहता है। 


"यही रहना भागने की कोशिश भी मत करना वरना जान से जाओगे।" जिस पर अंकित कहता है। "क्या तुम्हें मेरी हालत ऐसी लग रही है। कि मैं चल भी सकता हूं। भागने की तो बात ही छोड़ दो।" जिस पर विनय कहता है। "यही तुम्हारे लिए बेहतर रहेगा।" फ़िर दोनों जल्दी से चले जाते हैं। दोनों को जाते हुए देख कर अंकित फिर जतिन की तरफ देखता हैं। और कहता है। "मैं मर जाऊं मुझे इस चीज का गम नहीं है। लेकिन अगर मेरा दुश्मन बच जाए मुझे इस चीज का बहुत गम होगा।" फिर अंकित अपनी पेंट की जेब से एक बोतल निकालता है। अंकित उस बोतल का ढक्कन खोल ते हुए।


जतिन की तरफ देखते हुए कहता है। "ये काले बिच्छू का जहर तुम्हारे शरीर को गलाने में तुम्हारी बहुत सहायता करेंगे। अगर फिर भी तुम बच गए तो वे अरंडी के बीज तुम्हें मौत के घाट उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।" फिर अंकित उस काले बिच्छू के जहर को जतिन के घाव पर गिरा देता है। उस काले बिच्छू के जहर को जतिन के घाव पर गिराने के बाद अंकित अपनी शक्ति को जुटाकर वहां से भाग जाता है। फिर जतिन का गांव गलना शुरू हो जाता है। जिससे जतिन के उस घाव से आस-पास के इलाके में मरे हुए सूअर की जैसी बदबू फैल जाती है।


तभी वहां पर कुछ ही दूरी पर से एक लड़की जा रही होती है। जो देखने में बहुत सुंदर थी। इस लड़की का नाम नेहा था। तभी उसे एक अजीबोगरीब बदबू आना शुरू हो जाती है। फिर वह कहती है। "यह कैसी बदबू है।" जैसे ही वह लड़की उस दिशा में देखती है। जहां से बदबू आ रही है। तो वहां से उसे दिखता है। कि उस से 200 मीटर दूर एक इंसान जमीन पर गिरा हुआ होता है। वह जल्दी से उस इंसान के पास जाती है। लेकिन उस इंसान के शरीर से इतनी गंदी बदबू आ रही थी। उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। फिर वह अपने नाक को अपने दुपट्टे से ढक लेती हैं। फिर वह झुक कर उस इंसान के चेहरे को देखती है


। वह इंसान और कोई नहीं खुद जतिन था। फिर वे जतिन के घाव को देखती है। तो उसकी रीड की हड्डी में ठंडक पहुंच जाती है। फ़िर वह अपने आप से कहती है। "यह काम किसने किया होगा। काले कोवो के जहर के ऊपर काले बिच्छू का जहर किसने डाला।" वह कुछ सोचती उससे पहले अरुण और विनय वहां पर आ जाते हैं। तभी विनय उस लड़की से पूछता है। "कौन हो तुम और यहां क्या कर रही हो।" जिस पर वह लड़की उन दोनों को देखकर डर जाती है। फिर वह लड़की उन दोनों से सवाल करती है। "क्या तुमने ही इस इंसान के साथ इतना बुरा किया है।"


उस लड़की की बात को सुनकर अरुण कहता हैं। "नहीं यह हमारा दोस्त है। और यहां पर एक इंसान था। वह कहां गया।" अरुण की बात सुनकर वह लड़की अरुण से पूछती है। "अगर यह तुम्हारा दोस्त है। तो तुम इसे ऐसे छोड़कर कहां गए थे।" तभी अरुण कहता है। "हम इसके लिए औषधि लाने गए थे।" फिर वह लड़की कहती है। "अच्छा तो लाओ दो क्या क्या औषधि लेकर आए हो तुम।" तभी विनय उस लड़की से पूछता है। "यहां पर एक इंसान था। वह कहां गया।" जिसके जवाब में वह लड़की कहती है। "मैं जब यहां आई तो यहां पर कोई भी नहीं था। यह इंसान यहीं पर अकेला पड़ा हुआ था।" फिर वह लड़की दोनों को कहती है। "


तुम मुझे जल्दी से औषधि दो ताकि मैं इसे जल्दी से ठीक कर सकूं।" फिर अरुण और विनय उस लड़की को साफ पानी और अरंडी के बीज देते हैं। वह लड़की अरंडी के बीज को देखकर कहती है। "यह क्या है।" जिस पर विनय कहता है। "यह अरंडी के बीज है।" जिस पर वह लड़की कहती है। "तुम पागल हो क्या?" "इसको सिर्फ काले कोवो ने नहीं काटा इसके घाव पर किसी ने काले बिच्छू का जहर भी गेर दिया है। जिससे अगर हम अब इन अरंडी के बीजों को इसके घाव के ऊपर पीसकर लगाते हैं। तो यह इसकी जान भी ले सकता हैं।" तभी विनय पूछता है।

"काले बिच्छू का जहर किसने गेरा होगा।" तभी अरुण गुस्से में चिलाता है। "अंकित मैं तुझे छोड़ूंगा नहीं।" फिर विनय अरुण से कहता है। "अरुण उस अंकित को तो हम बाद में देखेंगे। सबसे पहले हमें जतिन को ठीक करना होगा।" फिर विनय उस लड़की से पूछता है। "अब हम जतिन को किस तरह से बचाएंगे।" फिर वह लड़की कहती है। "इसके शरीर में काले बिच्छू का जहर अभी तक नहीं फैला है। अगर हम इसके घाव के साथ इसके हाथ को काट दे तो शायद हम इसको बचा सकते हैं।" लेकिन तभी अरुण कहता है। "क्या और कोई उपाय नहीं है।"

जिस पर वह लड़की कहती है। "नहीं मुझे इसके अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा।" जिस पर अरुण और विनय दोनों कहते हैं। "नहीं हम इसका हाथ नहीं काट सकते।" तभी वह लड़की अपने बैग से खंजर निकालती है। और जतिन के हाथ को काट देती है। जिससे जतिन का खून बहुत अधिक मात्रा में बह रहा होता है। फिर वह लड़की जल्दी से उन अरंडी के बीजों को पीसकर जतिन के कटे हुए हाथ के ऊपर गेर देती है। फिर वह लड़की जल्दी से उठकर आस पास से 3-4 पौधों को तोड़ती है। और उन्हे पीसकर जितेन के कटे हुए कंधे पर लगा देती है।


जिससे जतिन को खून बहने से रुक जाता हैं। फिर थोड़ी देर बाद जतिन के शरीर से जहर कम होना शुरू होता है। अब जतिन को शरीर वापस अपने असली रंग में आ जाता है। जिसे देखकर विनय और अरुण दोनों खुश हो जाते हैं। फिर वे दोनों उस लड़की को शुक्रिया कहते हैं। फिर वह लड़की कहती है। "इसकी कोई जरूरत नहीं है।" फिर अरुण उस लड़की से पूछता है। "तुम्हारा क्या नाम है।" इसके जवाब में वह लड़की कहती है। "मेरा नाम नेहा है।" तभी विनय उस लड़की से कहता है। "नेहा जी आपने हमारे दोस्त की जान बचाकर हमारे ऊपर एक बहुत बड़ा एहसान किया है। इस एहसान को हम किस तरह चुका पाएंगे यह मुझे नहीं पता। आप इसके बदले में हमसे जो कुछ भी लेना चाहती है। वो ले सकती हैं।


" फिर वह लड़की कहती है। "नहीं नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए।" जिस पर अरुण कहता है। "ठीक है। लेकिन आपको कभी भी हमारी किसी भी प्रकार की जरूरत हो तो हमें बेझिझक कह सकती हैं।" इसके जवाब में वह लड़की कहती है। "ठीक है।" अब जतिन अपनी आंखें खोलता है। तो वह अपने पास एक बहुत सुंदर लड़की को बैठा हुआ देखता है। जिससे वह उस लड़की के चेहरे को देखते रहता हैं। तभी अरुण की नजर जतिन के ऊपर जाती है। अरुण ने कभी भी जतिन को इस तरह नहीं देखा था। 


फिर वह मुस्कुराते हुए विनय को कोहनी मार कर जतिन को देखने का इशारा करता हैं। विनय अरुण के इशारे को समझ जाता है। और जतिन की तरफ देखता है। जतिन देखने के बाद विनय के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती हैं। फिर वह लड़की अरुण और विनय को इस तरह मुस्कुराते हुए देखकर जतिन की तरफ देखती है। जैसे ही वह लड़की जतिन की तरफ देखती है। तो वह देखती है कि जतिन अपनी आंखें खोले हुए उसी को देख रहा है। फिर वह लड़की शरमा जाती है। और शरमाते हुए जतिन से कहती है। "मुझे ऐसे देखना बंद करो। वरना तुम्हारा दूसरा हाथ भी काट दूँगी।"


उस लड़की की बात सुनकर जतिन जैसे ही अपने हाथ की तरफ देखता है। तो वह देखता है कि उसका हाथ ही नहीं है। फिर जतिन पूछता है। "तुमने मेरा हाथ क्यों काट दिया।" जिस पर वह लड़की कहती है। "तुम्हें बचाने का हमारे पास दूसरा कोई तरीका नहीं था।" फिर जतिन उस लड़की की बात सुनकर कहता है। "तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।" फिर वह लड़की जतिन से पूछती है। "क्या तुम्हें अपने हाथ की बिल्कुल भी चिंता नहीं है। तुम्हारा हाथ न होने के कारण तुम इस हाथ से कुछ भी कार्य नहीं कर सकते।" फिर जतिन कहता है। 


"मुझे मेरा हाथ तो वापस मिल जाएगा।" फिर वह लड़की पूछती है। "कैसे?" जिस पर जतिन सिर्फ हँसता है। और उस लड़की की तरफ देखते हुए। पानी का गुब्बारा बनकर फुट जाता है। जतिन को इस तरह पानी का गुब्बारा बनकर फूटते देखकर वह लड़की परेशान हो जाती है। वह कुछ बोलती उससे पहले वह पानी का गुब्बारा दोबारा से इकट्ठा हो जाता है। और फिर वह गुब्बारा जतिन बन जाता है। 



 फिर वह लड़की जतिन के उस हाथ की तरफ देखती है। जिसको उसने काट दिया था। फिर वह कहती है। "यह यह हाथ ठीक कैसे हुआ। क्या तुम कोई भूत तो नहीं।" इसके जवाब में जतिन कहता है। "नहीं मैं कोई भूत नहीं हूं। मैं भी एक आम इंसान हूं। लेकिन मेरे पास कुछ ऐसी शक्तियां है। जो दूसरे इंसानों से अलग है।"


फिर जतिन उस लड़की से पूछता है। "तुम्हारा नाम क्या है?" और "तुम यहां पर क्या करने आए हो?" जिसके जवाब में वह लड़की कहती है। "मेरा नाम नेहा है। और मैं यहां से स्पिरिट शेल्टर की तरफ जा रही थी।" फ़िर जतिन पूछता है। "तुम स्पिरिट शेल्टर क्यों जा रही थी।" जिसके जवाब में वह लड़की कहती है। "मुझे स्पिरिट शेल्टर से कुछ पुराना हिसाब पूरा करना है।" फ़िर जतिन कहता हैं। "हिसाब तो मुझे भी पूरा करना है। उस शेल्टर से।" फिर जतिन उस लड़की से कहता है। 

"देखो तुम्हें भी स्पिरिट शेल्टर जाना है। मुझे भी स्पिरिट शेल्टर जाना है। तो क्यों ना साथ में चलते हैं।" जिसपे वह लड़की कहती है। "मुझे तो कोई दिक्कत नहीं है। तुम्हारे साथियों को दिक्कत हो तो मुझे पता नहीं।" फिर जतिन विनय और अरुण की तरफ देखता है। जतिन को उनकी तरफ देखते हुए दोनों तुरंत कहते हैं। "नहीं नहीं हमें भी कोई दिक्कत नहीं है।" 


फिर जतिन कहता है। "तो चले।" तभी अरुण कहता हैं। "भाभी ये स्पिरिट शेल्टर किस तरफ होगा।" जिससे जतिन और नेहा अरुण की तरफ देखने लग जाते हैं। उन दोनों को अपनी तरफ ऐसा देखते हुए अरुण कहता है। "मेरा मतलब था। कि हमें किस तरफ जाना है।" फिर नेहा अपनी उंगली से इशारा करते हुए कहती हैं। उस तरफ। और फिर मन ही मन शर्माने लग जाती है।



तभी अरुण कहता है। "जल्दी चलो जल्दी।" अरुण उनकी बात सुनकर विनय भी कहता है। "अरुण बिल्कुल सही कह रहा है।" जिस पर जतिन कहता है। "क्या?" तभी विनय कहता हैं। "मेरा मतलब स्पिरिट शेल्टर चलने का है।" फिर जतिन कहता हैं। "अच्छा।" फिर चारों स्पिरिट शेल्टर के लिए चल पड़ते हैं। फिर विनय अरुण की तरफ देखकर मुस्कुराता है। जिस पर अरुण भी मुस्कुरा देता है। दोनों के मुस्कुराने के बाद दोनों आपस में ताली देते हैं। चारों बिल्कुल शांत स्पिरिट शेल्टर की तरफ बढ़ रहे थे। जतिन नेहा से बात करना चाहता था। लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था। कि वह कैसे बात करे। लेकिन तभी अरुण कहता है। "नेहा जी आप यहां पर किसी को साथ लेकर क्यों नहीं आई।" तभी जतिन कहता है। "हां हां मैं भी यही पूछना चाहता था। आप किसी को साथ लेकर क्यों नहीं आई।" जिस पर नेहा कहती है। "मैं यहां पर अपने परिवार वालों को बिना बताए आई हूं। क्योंकि इस स्पिरिट शेल्टर की स्पिरिट ने मेरे दादाजी का इस्तेमाल किया। और अपने काम खत्म होने के बाद उन्हें मार दिया।"


नेहा की आवाज में उसके दादाजी के मरने का दुख साफ दिख रहा था। लेकिन तभी नेहा अरुण की तरफ देखते हुए पूछती हैं। तुम यहां पर क्यों आए हो। तभी अरुण कहता है। "हम यहां पर काले कौवा का शिकार करने के लिए आए थे।" फिर अरुण जतिन की तरफ हाथ करते हुए कहता हैं। "लेकिन तभी इन भाई साहब को chull उठी। यह चाहते थे कि ब्लैक माउंटेन पर अपना एक शेल्टर बनाए। लेकिन ब्लैक माउंटेन पर पहले से ही स्पिरिट शेल्टर था। और यह भाई साहब उस spirit से बिड गए। और इनके L लग गए। और अगर तुम ना होती तो यह शायद तुम्हारे सामने ना होते।" अरुण की बात सुनकर नेहा को हंसी आ जाती है। लेकिन वह हँसती नहीं है। फिर वह विनय की तरफ देखते हुए कहती है। "तुम्हें देखकर ऐसा लग रहा है। कि तुम इन दोनों के लीडर हो।" जिस पर विनय कुछ कहता उससे पहले जतिन बोल पड़ता है। और कहता है। "हा हा तुमने बिलकुल सही पहचाना यही तो हमारे बॉस है। क्यों है ना बॉस।" इतना कहकर जतिन विनय की तरफ देखता है। और उसे एक हल्की सी मुस्कान देता है। जिस पर विनय भी मुस्कुराते हुए कहता है। "हां तुम बिल्कुल सही कह रहे हो।" फिर नेहा कहती है। "तो तुम उस स्पिरिट से क्यों नहीं लड़े।" तभी अरुण कहता हैं। "ये तो उससे पिट गया।" जिस पर नेहा कहती है। "क्या?"


लेकिन तभी जतिन बीच में बोलता है। "इसके कहने का मतलब है। इन्हीं ने उस स्पिरिट को पीट दिया।" जिस पर नेहा कहती है। "तुम्हें कैसे पता। तुम तो बेहोश थे।" फिर जतिन कहता है। "यार अरुण ये मुझसे नहीं हो रहा।" जिस पर अरुण कहता है। "नहीं और बंनले गुंडा।" जिस पर नेहा कहती है। "तुम दोनों आपस में क्या बात कर रहे हो।" जिस पर विनय कहता हैं। "छोड़ो इन की बातें किसी को समझ में नहीं आती। वैसे spirit shelter यहां से और कितनी दूर है।" जिस पर नेहा कहती है। "तकरीबन आधा किलोमीटर और दूर।" नेहा की बात सुनकर अरुण कहता है। "क्या? हे भगवान मुझे आधा किलोमीटर चलने की शक्ति दे।" जिस पर नेहा कहती है।" तुम अभी से थक गए।" तभी विनय कहता है। "थक तो मैं भी गया हूं।" तभी जतिन कहता हैं। "वहां पर पहुंच जाने दो तुम्हारी थकान का भी बदला लूंगा। और मेरे साथ धोखा करने का भी बदला लूंगा।" जिस पर अरुण कहता है। "भाई जतिन उसको मौत से रूबरू कराना ही होगा।" जिस पर विनय कहता है। "यह सही कह रहा है। emperor" तभी नेहा कहती है। "emperor यहां कौन emperor है।" लेकिन तभी जतिन बात को पलटते हुए कहता है। "उस स्पिरिट को तुम मरना चाहोगी। या फिर मुझे मारने का मौका दोगी।" जिस पर नेहा कहती है। "मेरे दादाजी तो मर गए। लेकिन तुम मौत से वापस आए हो। तो उस हिसाब से देखें तो तुम्हें उसे मारना चाहिए।"


जिस पर जतिन कहता है। "मैं उसे जख्मी कर दूंगा। मैं उसे बिल्कुल मौत के करीब ले जाऊंगा। फिर उस पर आखरी हमला कर के तुम अपने दादाजी की मौत का बदला ले लेना।" जिस पर नेहा कहती है। "ठीक है।" नेहा की वह आवाज बिल्कुल ठंडी थी। जब वे स्पिरिट शेल्टर से लगभग 100 मीटर दूर थे। तभी नेहा कहती है। "हम स्पिरिट शेल्टर तो पहुंच गए। लेकिन उसके अंदर कैसे जाएंगे।" जिस पर विनय पूछता है। "क्यों ऐसा क्या है।" जिसके जवाब में नेहा स्पिरिट शेल्टर की तरफ उंगली करते हुए कहती है। "वो देखो।" जिसे देखकर विनय कहता हैं। "अरे नहीं यार।" जतिन और अरुण भी उसी तरफ देखते हैं। अरुण कहता है। "एक और नई मुसीबत।" जिस पर जतिन कहता हैं। "यह मुसीबत नहीं है। यह तो स्वागत की तैयारी है।" जिस पर विनय पूछता है। "मतलब।" जिसके जवाब में जतिन कहता है। "तुम शायद भूल गए अंकित अब स्पिरिट नहीं है।" जतिन की बात सुनकर दोनों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। लेकिन तभी नेहा पूछती है। "वह स्पिरिट नहीं है मतलब। स्पिरिट शेल्टर कि स्पिरिट कोई और है।" जिस पर जतिन कहता हैं। "बहुत लंबी कहानी है। तुम्हे मैं बाद में बताऊंगा। लेकिन अभी के लिए स्पिरिट शेल्टर पर धावा बोल दें।" इसके जवाब में विनय और अरुण कहते हैं। "हां।" लेकिन तभी नेहा कहती है। "क्या हम उन जंगली जानवरों से लड़ने जा रहे हैं।" जिसके जवाब में जतिन कहता है। "हां।" फ़िर नेहा कहती है। 


"क्या तुम्हें उन जानवरों के बारे में कुछ पता है।" जिसपे जतिन कहता है। "नहीं।" फिर नेहा कहती है। "वह सफेद हाथी दिख रहा है। वह stage 2 के level 1 का है। और वे 3 धातु राक्षस भी stage-2 के लेवल 1 के है। और उनके पीछे काले कौवा और जंगली सियारों का झुंड है। जो कि एक स्टेज 1 के level-2 के हैं। लेकिन उनकी तादाद के हिसाब से वे एक stage 2 के लेवल 3 के इंसान को भी आसानी से मार सकते हैं। क्या तुम अब भी उनसे लड़ने के बारे में सोचोगे।" उन जानवरों के बारे में सुनकर विनय और अरुण कहते हैं। "वाकई में यार यह तो बहुत खतरनाक है।" जिस पर जतिन कहता हैं। "खतरनाक तो है। लेकिन मुझसे ज्यादा नहीं।" फ़िर जतिन अपने fire armor को बुलाता है। उस fire armor के साथ जतिन एक fire sword भी बुलाता हैं। यह तलवार दूसरी तलवारों से बिल्कुल अलग थी। और इस तलवार के चारों तरफ आग लगी हुई होती है। इस तलवार की आग और आकृति को देखकर ऐसा लग रहा था। कि यह तलवार खुद सूर्य है। 


फिर जतिन उन जानवरों की तरफ भागना शुरू कर देता है। जतिन को जानवरों की तरफ भागता देख कर। विनय और अरुण भी अपनी wind flame में जलने लग जाते हैं। और उसके पीछे पीछे भागने लग जाते हैं। इन तीनों को ऐसे भागते हुए देखकर नेहा कहती है। "लगता है इनमें से किसी को भी अपनी जान प्यारी नहीं है। लेकिन अब मैं भी इनके साथ हूं। अगर मैं भी इस लड़ाई में शामिल नहीं हुई। तो मैं कभी भी अपने आप से आंखें नहीं मिला पाऊंगी। तरह के जीने से अच्छा तो मर जाना है।" फ़िर नेहा भी अपनी फायर फ्लेम मैं जलने लग जाती है। और अपनी fire sword को बुलाते हुए उनके पीछे भागने लग जाती है। अरुण और विनय भागते हुए अपने अपने jackal dual blade fire axe को बुला लेते हैं। फिर तभी जतिन कहता है। "मै इन आगे वालो को संभालता हूं। तुम इन पीछे वालों को देखो।" जिस पर अरुण और विनय कहते हैं। "ठीक है।" तभी जतिन उन धातु जानवरों के बीच में कूद जाता है। और जोर से चिल्लाता है।
"फायर फ्लेम अटैक"



फ़िर जतिन के शरीर की आग में एक बहुत भारी मात्रा में विस्फोट हो जाता है। 2 धातु के जानवर जतिन की आग की चपेट में आ जाते हैं। जिस कारण धातु के जानवरों का बना हुआ। धातु का शरीर पिघलना शुरू हो जाता है। फ़िर जतिन अपनी तलवार को लहराते हुए। एक धातु के जानवर की गर्दन के ऊपर वार कर देता है। जिससे वह धातु का जानवर चिल्लाना शुरू कर देता है। लेकिन जैसे ही वह धातु का जानवर चिल्लाता है। अपने मुंह से एक 8 फिट लंबा खंबा निकालकर जतिन के ऊपर भगा देता है। वह खंबा जैसे ही जतिन को लगता है। तो जतिन जमीन पर गिर जाता है। जतिन उस खंबे के नीचे दब जाता है। जतिन जल्दी से उस खंभे को हटाकर उस खंबे को ही उस धातु के जानवर पर मार ही देता है। जिससे दो धातुओं के टकराने की आवाज़ वहां पर गुंज जाती है। फिर वह धातु का खंभा टूट जाता है। फिर जतिन कहता है। "सच में यह तो बहुत खतरनाक है।" फिर जतिन अपनी fire sword से उस धातु जानवर के ऊपर हमला करता हूं। जिससे वह धातु का जानवर अपना मुंह खोलकर जतिन की तलवार को अपने मुंह में बीच लेता हूं। जितेन उस तलवार को उसके मुंह से निकालने की बहुत कोशिश करता है। लेकिन जतिन उस तलवार को निकालने में नाकामयाब रहता है। फ़िर वह धातु जानवर अपनी गर्दन को जोर से हिला देता है। जिस कारण जतिन के हाथ से उसकी तलवार छूट जाती है। तभी वह धातु का जानवर अपना मुंह खोल कर उस तलवार को पूरा निगल जाता है। जिस कारण जतिन उस धातु के जानवर के ऊपर चिल्लाते हुए कहता है। "ओ भाई वह मेरी नई तलवार थी। उससे मैंने अब तक किसी को नहीं मारा। उसको वापस कर दे।" फिर वह धातु का जानवर जतिन की तरफ ऐसे देख रहा था। जैसे वह जतिन को चिड़ा रहा हो। जिस कारण जतिन भड़क जाता है। और कहता है। "तलवार तो मैं वापस लेकर रहूंगा। चाहे उसके लिए मुझे तेरे शरीर के चिथड़े चिथड़े क्यों ना करने पड़े।" फिर जतिन अपने हाथ पर ब्लैक फ्लैम को बुलाते हुए उस धातु जानवर की तरह भागना शुरू कर देता हूं। और उस धातु जानवर के शरीर पर मुक्का मारते हुए चिल्लाता है।
"Body Bust"


जिस कारण वे धातु जानवर काला पड़कर फट जाता है। उस धातु जानवर के फटने के कारण जतिन की तलवार भी उसके पेट मे से निकालकर हवा में होती है। तभी जतिन अपनी तलवार को पकड़ते हुए कहता है। "पूरी गंदी कर दी।" तभी जतिन की नजर नेहा पर पड़ती है। नेहा को देखकर जतिन कहता है। "इसके पास fire flame है।" नेहा एक धातु के जानवर से लड़ रही होती है। लेकिन तभी दूसरा धातु जानवर नेहा के ऊपर हमला करने वाला होता है। तभी जतिन चिल्लाते हुए नेहा से कहता है। "बचो।" 


तभी नेहा जतिन की आवाज सुनकर पीछे की तरफ कुद जाती है। फिर जतिन नेहा के पास जाकर कहता है। "थोड़ा संभल कर।" तभी नेहा गुस्से मे कहती है। "इन जानवरों से लड़ने का आईडिया मेरा नहीं था। तुम्हारा था।" फिर जतिन कहता है। "बिल्कुल अपनी फ्लैम पर गई है।" जिसपे नेहा पूछती है। "मतलब।" जिस पर जतिन कहता हैं। "वह मैं तुम्हें बाद में बताऊंगा।" फिर जतिन अपनी ब्लैक फ्लैम वाले मुक्का एक और धातु जानवर पर मार देता है। जिससे वह धातु का जानवर भी फट जाता है। धातु जानवर को एक मुक्के से ऐसे मरते हुए देखकर नेहा की आंखें बड़ी हो जाती है। और फिर वह जतिन से पूछती है। "यह किस तरह की फ्लैम है।


" जिस पर जतिन कहता है। "लड़ाई के बीच में ही तुम्हें सारे प्रश्न पूछने हैं।" फ़िर जतिन तीसरे धातु जानवर को छोड़कर सफेद हाथी की तरफ भागना शुरू कर देता है। जतिन को अपनी तरफ भागते हुए देख कर वह सफेद हाथी आकाश में का जोर से गर्जना करता है। और अपने एक दांत को जतिन के शरीर के आर पार कर देता है। जिस कारण जतिन का शरीर उस हाथी के दांत में फंसा हुआ। हवा में तैर रहा होता है। इस दृशय को देखते हुए नेहा चिल्लाते हुए अरुण और विनय से कहती है। "अरुण विनय जल्दी से यहां से भागो इस हाथी ने जतिन को मार दिया है।" तभी अरुण और विनय नेहा की बात सुनते हुए उस सफेद हाथी की तरफ देखते हैं। उस सफेद हाथी को देखने के बाद उनकी रीढ़ की हड्डी में ठंडक फैलना शुरू हो जाती हैं। फिर अरुण कहता है। "अब तो लगता है। जतिन सच में मर गया।"