वो कौन थी? - 8 sapna द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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वो कौन थी? - 8

Chapter 8 — रूहों का बसेरा

जीप का पिछला पहिया खाई की कगार पर हवा में लटका हुआ था। आर्यन की आँखों के सामने मौत का नग्न नाच हो रहा था। बगल में बैठी अनन्या का वह जला हुआ चेहरा अब किसी साये में नहीं बदल रहा था, बल्कि वह पूरी तरह ठोस और असली लग रहा था। उसके ठंडे हाथों की पकड़ आर्यन की कलाई के मांस को चीर रही थी। आर्यन ने आखिरी बार अपनी पूरी ताकत लगाकर खिड़की का शीशा तोड़ने की कोशिश की, लेकिन पत्थर जैसा मजबूत वह शीशा हिला तक नहीं।

अचानक, एक ज़ोरदार झटके के साथ जीप पीछे की ओर खाई में गिर पड़ी।

समय का भंवर

आर्यन को लगा कि उसका शरीर हज़ारों टुकड़ों में टूट जाएगा, लेकिन वह गिरता ही गया। गिरने का अहसास खत्म ही नहीं हो रहा था। अचानक, एक तेज़ सफ़ेद रोशनी हुई और आवाज़ों का शोर सुनाई देने लगा। जब उसने आँखें खोलीं, तो वह खाई के नीचे नहीं, बल्कि उसी होटल 'द मिस्टी पाइन' के कॉरिडोर में खड़ा था।
लेकिन यह खंडहर नहीं था। होटल की दीवारों पर नया पेंट था, कालीन बिछे थे और झूमर की रोशनी से गलियारा जगमगा रहा था। उसने अपने हाथ देखे—वह कांप रहे थे, लेकिन उन पर अब कोई झुर्री या चोट नहीं थी। उसने पास के एक शीशे में देखा... वह दस साल छोटा लग रहा था।

"आज 14 जून 2016 है..." वह बड़बड़ाया। "मैं वापस उसी रात में आ गया हूँ!"

कमरा नंबर 404 का खौफ

तभी उसे धुएँ की गंध आई। कॉरिडोर के अंत में स्थित कमरा नंबर 404 के दरवाज़े के नीचे से काला धुआँ निकल रहा था। आर्यन का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। यही वह पल था जिसे वह दस सालों से भूलने की कोशिश कर रहा था।

वह दौड़कर कमरे की तरफ गया। अंदर से अनन्या के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी, "आर्यन! दरवाज़ा खोलो! आर्यन, बचाओ मुझे!"

आर्यन ने दरवाज़े को धक्का दिया, लेकिन वह अंदर से बंद था। तभी उसने देखा कि गलियारे के दूसरे छोर से 'वह खुद' (2016 वाला आर्यन) घबराया हुआ बाहर निकल रहा था। उस पुराने आर्यन के चेहरे पर मौत का खौफ था और वह अनन्या को अंदर छोड़कर सीढ़ियों की तरफ भाग रहा था।

आर्यन ने चिल्लाकर खुद को रोकना चाहा— "रुको! मत जाओ! उसे बचाओ!" पर उसकी आवाज़ किसी को सुनाई नहीं दे रही थी। वह उस समय में एक रूह बनकर खड़ा था जो सिर्फ अपने अतीत को दोहराते हुए देख सकता था।

रूहानी कैद का सच

अचानक, गलियारे की रोशनी टिमटिमाई और सब कुछ फिर से बदलने लगा। होटल की नई दीवारें गलने लगीं और वापस काली पड़ गईं। आलीशान कालीन राख में बदल गए। अनन्या, जो कमरे के अंदर चिल्ला रही थी, अब दरवाज़ा तोड़कर बाहर आई। लेकिन वह कोई लड़की नहीं, बल्कि एक प्रतिशोध की अग्नि थी।

उसने आर्यन का गला पकड़ लिया और उसे ज़मीन से ऊपर उठा दिया। "तुमने देखा आर्यन? तुमने खुद को भागते हुए देखा? तुमने मुझे नहीं बचाया था, तुम सिर्फ अपनी जान बचाकर भागे थे। और उस रात जो कार खाई में गिरी थी, उसमें मैं नहीं... तुम थे!"

आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। "क्या? नहीं... यह झूठ है!"
अनन्या हँसी, और उस हँसी में हज़ारों रूहों की चीखें शामिल थीं। "तुम उस रात कार एक्सीडेंट में मर चुके थे, आर्यन। लेकिन तुम्हारी रूह ने अपनी गलती के बोझ तले दबे होने के कारण यह मान लिया कि तुम ज़िंदा हो। तुम दस साल तक एक साया बनकर भटकते रहे, अपनी यादों को झुठलाते रहे। आज जो पुलिस को कार मिली है, उसमें मिला कंकाल तुम्हारा ही है।"

हिसाब का अंत

आर्यन को अचानक अपनी पसलियों में वही दर्द महसूस हुआ जो कार के टकराने पर हुआ होगा। उसे याद आया—खाई, अँधेरा, और वह आखरी ठंडी साँस। वह कभी दिल्ली गया ही नहीं था। वह पिछले दस सालों से इसी होटल के खंडहरों में अपनी खुद की मौत का इंतज़ार कर रहा था।

अनन्या का चेहरा अब शांत हो गया। उसने अपना हाथ आर्यन के सिर पर रखा। "अब तुम्हें सच पता है। अब तुम यहाँ के नहीं रहे।"
जैसे ही उसने यह कहा, आर्यन का शरीर धुंध में बदलने लगा। वह महसूस कर पा रहा था कि वह अब मिट रहा है। होटल, शिमला, धुंध... सब कुछ ओझल हो रहा था। आखिरी चीज़ जो उसे सुनाई दी, वह थी एम्बुलेंस का सायरन जो दस साल पहले उस रात बजा था।

शिमला की उन पहाड़ियों में आज भी एक धुंध उठती है। लोग कहते हैं कि कभी-कभी रात के सन्नाटे में एक पुरानी जीप दिखाई देती है, जिसमें एक लड़का और एक लड़की साथ बैठे होते हैं—हमेशा के लिए, रूहों के बसेरे में।

समाप्ती