अंधेरे में मोहब्बत Rajesh Maltii द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

अंधेरे में मोहब्बत

अंधेरे में मोहब्बत

रात के 2 बजे थे। शहर की सारी आवाज़ें जैसे सो चुकी थीं, लेकिन काव्या की आँखों में नींद नहीं थी। खिड़की के बाहर घना अंधेरा था, और भीतर उसके दिल में उससे भी गहरा सन्नाटा।

काव्या को अंधेरा पसंद नहीं था… लेकिन अब अंधेरा ही उसकी आदत बन चुका था।

उसकी ज़िंदगी में सब कुछ तब बदला, जब आरव उसकी दुनिया में आया।

आरव… एक ऐसा नाम, जिसे सुनते ही उसके दिल की धड़कन बदल जाती थी। पहली बार वह उसे एक पुराने, सुनसान लाइब्रेरी में मिली थी। बारिश की रात थी, और काव्या एक कोने में बैठकर किताब पढ़ रही थी।

तभी पीछे से एक धीमी आवाज़ आई—“अंधेरे में पढ़ना आसान होता है क्या?”

काव्या ने मुड़कर देखा। एक लड़का, काले कपड़ों में, गहरी आँखें… और चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान।

“तुम्हें क्या लगता है?” काव्या ने ठंडे स्वर में जवाब दिया।

आरव धीरे-धीरे उसके पास आया और बोला,“मुझे लगता है… कुछ लोग अंधेरे में ही खुद को ढूंढते हैं।”

उस दिन के बाद, आरव हर रात उस लाइब्रेरी में मिलने लगा। दोनों के बीच अजीब सा रिश्ता बन गया—न कोई वादा, न कोई नाम… बस एक खामोश जुड़ाव।

आरव कभी अपनी जिंदगी के बारे में ज्यादा नहीं बताता था। बस इतना कहता,“मैं वो हूँ, जिससे तुम्हें दूर रहना चाहिए।”

लेकिन काव्या को उससे दूर जाना कभी नहीं आया।

धीरे-धीरे, काव्या को महसूस होने लगा कि आरव में कुछ अलग है… कुछ डरावना। उसकी बातें, उसका अचानक गायब हो जाना, और फिर अचानक सामने आ जाना—सब कुछ सामान्य नहीं था।

एक रात काव्या ने हिम्मत करके पूछ ही लिया,“तुम सच में हो कौन?”

आरव कुछ पल चुप रहा। फिर धीरे से बोला,“अगर मैं सच बता दूँ… तो शायद तुम मुझसे नफरत करने लगोगी।”

काव्या ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,“मोहब्बत नफरत से ज्यादा मजबूत होती है।”

आरव हल्का सा मुस्कुराया… लेकिन उस मुस्कान में दर्द था।

अगले दिन, शहर में एक खबर फैली—“पिछले कुछ महीनों में कई रहस्यमयी हत्याएं… और हर बार एक ही पैटर्न।”

काव्या का दिल बैठ गया।

उस रात जब वो लाइब्रेरी पहुँची, आरव पहले से वहाँ था… लेकिन इस बार उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे।

“ये सब… तुमने किया है?” काव्या की आवाज़ कांप रही थी।

आरव ने उसकी तरफ देखा—“मैंने कहा था ना… मुझसे दूर रहो।”

“लेकिन क्यों?” काव्या चिल्लाई, “तुम ऐसे क्यों हो?”

आरव ने धीरे से कहा,“क्योंकि मैं इंसान नहीं रहा, काव्या… मैं उस अंधेरे का हिस्सा बन चुका हूँ, जिससे तुम डरती हो।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

काव्या की आँखों में आँसू थे, लेकिन उसके कदम पीछे नहीं हटे।“फिर भी… मैं तुमसे प्यार करती हूँ।”

आरव ने पहली बार उसकी तरफ बढ़कर उसका चेहरा छुआ।“यही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती है…”

अचानक बाहर पुलिस सायरन की आवाज़ गूंजने लगी।आरव ने खिड़की की तरफ देखा और फिर काव्या की तरफ।

“अब मुझे जाना होगा… हमेशा के लिए।”

“नहीं!” काव्या ने उसका हाथ पकड़ लिया, “मैं तुम्हें खो नहीं सकती।”

आरव ने उसकी पकड़ धीरे से छुड़ाई और कहा,“तुमने मुझे कभी पाया ही नहीं, काव्या… मैं सिर्फ एक अंधेरा था, जो तुम्हारी रोशनी के पास आ गया।”

उसने काव्या के माथे को चूमा… और अगले ही पल खिड़की से कूदकर अंधेरे में गायब हो गया।

पुलिस अंदर आई, सवाल पूछे, लेकिन काव्या के पास कोई जवाब नहीं था।

समय बीत गया…

आज भी, हर रात 2 बजे, काव्या उसी लाइब्रेरी में जाती है।वो जानती है कि आरव वापस नहीं आएगा…

लेकिन कभी-कभी, जब हवा ठंडी चलती है और लाइट्स हल्की-हल्की झिलमिलाती हैं—उसे ऐसा लगता है… जैसे कोई उसके पास खड़ा है।

और एक धीमी आवाज़ फुसफुसाती है—“अंधेरे में ही सच्ची मोहब्बत मिलती है…”

काव्या हल्का सा मुस्कुरा देती है।

क्योंकि कुछ प्यार… कभी खत्म नहीं होते।वो बस अंधेरे में छुप जाते हैं।

समाप्त 🖤