वो खोफनाक रात - 8 Khushwant Singh द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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वो खोफनाक रात - 8

पिछली कहानी में हमने पढा कि अनीशा लावण्या और लक्षिता को लेने आती हैं और उनको अपने साथ लेकर जाती हैं।
अब आगे........
अब वे तीनों अपने कॉलेज पहुंच चुकी थी जहां पर बाकी सब स्टूडेंट्स भी लगभग पहुंच गए थे। वे लोग कॉलेज में जाकर अपनी एंट्री कराके वापिस आती हैं तब तक सारे स्टूडेंट्स और टीचर्स भी आ गए थे । अब सब लोग अपने सामान को लेकर के बस में जाकर बैठ जाते हैं। अनीशा लावण्या और लक्षिता तीनों को एक ही बस में सीट मिली थी। कुल मिलाकर उनके कॉलेज की 5 बसे हुई थी जिनमें हर एक बस में 2 टीचर्स की ड्यूटी थी। अनीशा लावण्या और लक्षिता जिस बस में थी उस बस में Mr. Shah और Mrs. Kashyap कि ड्यूटी थी। लगभग 12:15 के आस पास उनकी बस कॉलेज से रिहासपुर के लिये रवाना हो गई थी।
अनीशा - चलो अच्छा हैं आज पहली बार मैं तुम लोगों के साथ कही घूमने जा रही हूं। आई एम सो एक्साइटेड।।।
लावण्या और लक्षिता का डर धीरे धीरे और बढता जा रहा था। 
अनीशा - क्या हुआ तुम दोनों कुछ बोल नहीं रही हो??? तुम लोगों मुझे अपने साथ ले जाकर खुश नहीं हो क्या??
लावण्या - अरे नहीं पागल, ऐसा कुछ नहीं हैं। वो तो क्या हेना कि बस में थोड़ी सी घुटन हो रही हैं।
लक्षिता - हाहाहा वो तो घुटन की वजह से हम नहीं बोल पा रहे हैं।
ये कहकर लावण्या और लक्षिता अपनी अनीशा की बात को टाल देते हैं पर जैसे-जैसे बस बढ़ रही थी उनका डर भी वैसे-वैसे बढ़ता जा रहा था।
तकरीबन 3 घंटे के बाद वे रिहासपुर गांव के बाहर बने बड़े से प्रवेश द्वार के वहां रुके।धीरे धीरे सभी टीचर्स और स्टूडेंट्स बस से निकल कर बाहर आकर खड़े हो गए।
इस गांव में नियम था कि दूसरे गांव या शहर की बसें गांव में प्रवेश नहीं कर सकती थी इसलिए उन सबको बाहर ही उतरना पड़ा।तभी गांव के मुखिया (शिवलाल चौधरी) भी वहां पर आ गए थे और उनका स्वागत करके उन्हें गांव में ले गए।
गांव में वे लोग एक बड़े पुराने रिसॉर्ट के सामने आकर रुके।
शिवलाल जी - साहब, आपके और आपके इन सभी बच्चों के लिए आपने जैसा कहा था वैसा ही इंतजाम किया हैं इस रिसॉर्ट में। आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। फिर भी मैं आपकी तसल्ली के लिए गांव के एक आदमी को यहां तैनात कर दूंगा जो आपकी मदद कर देगा।
प्रिंसिपल - अरे मुखिया जी, इसकी कोई जरूरत नहीं हैं। हम सब हैं यहाँ और आप ज्यादा चिंता मत कीजिए।
शिवलाल जी - जी,वो तो हैं पर आप हमारे गांव में आए हैं और आपकी सुरक्षा अब हमारी जिम्मेदारी हैं। और हा साहब आप या कोई भी बच्चा रात को 9 बजे के बाद अकेले बाहर ना निकले वो क्या हैं कि आज कल गाँव में चीते का कहर थोड़ा ज्यादा हो गया हैं तो।प्रिंसिपल - जी, हम इस बात का ध्यान रखेंगे।
प्रिंसिपल से बात करके मुखिया जी वहां से चले गए।प्रिंसिपल - स्टूडेंट्स, जैसा कि मुखिया जी ने बताया हैं कोई भी बच्चा अकेले बाहर नहीं निकलेगा। सभी ग्रुप में रहेंगे और हा यहां पर थोड़ा नेटवर्क इश्यू हैं तो कॉल नहीं लग पाएंगे तो सभी इस बात का ध्यान रखें। और 1 कमरे में लगभग 3 -4 बच्चे रहेंगे और टीचर्स के लिए अलग से रूम्स अलॉट कर दिए हैं।
ये सुनकर सभी टीचर्स और स्टूडेंट्स हामी में सिर हिलाते हैं और रिसॉर्ट के अन्दर चले जाते हैं।
लक्षिता और लावण्या उस रिसॉर्ट को देखकर अभी  बहुत ज्यादा डर गई थी क्योंकि पिछली बार भी वे लोग इसी रिसॉर्ट में रुके थें।
वे दोनों कुछ कुछ सोच ही रही थी कि तभी उनके कंधे पर किसी ने हाथ रखा जिससे वे दोनों डर गई।
उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो वो कोई और नहीं बल्कि अनीशा ही थी तब जाकर उनको सांस आईं।
अनीशा - ओह हेलो मैडम, क्या तुम दोनों यहां स्टेच्यू की तरह खड़ी हो सब चले गए हैं बस हम तीनों ही बची हैं। 
लावण्या - पर अपने रूम की चाबी?? 
अनीशा - ये रही ( अपने हाथ में  एक चाबी दिखाते हुए बोली)।
तब वे तीनों अपना सामान उठाकर अपने कमरे की तरफ जानें लगी।उनका कमरा 2nd फ्लोर पर था रूम नंबर 3।
ये नंबर देखकर लावण्या और लक्षिता के पसीने छूट गए क्योंकि ये वही कमरा था जहां वो पिछली बार रुकी थीं। अनीशा आगे बढ़ी और रूम का गेट खोल दिया। 
जैसे ही अनिशा ने गेट खोला तभी उन्होने देखा कि......